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कनाडा ने भारत से अपने 41 राजनयिको को बुलाया वापस, कॉन्सुलेट सर्विसेज पर भी लगाई रोक

कनाडा ने भारत में मौजूद अपने 41 राजनायिको को वापस बुला लिया है। साथ ही कनाडा ने कर्नाटक, चंडीगढ़ और मुंबई में कॉन्सुलेट सर्विसेज पर भी रोक लगा दी है। 

इसकी जानकारी कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जोली ने गुरुवार को वापस बुलाने की सूचना देते हुए कहा कि कनाडा जुबानी कार्यवाही नहीं करेगा। 

विदेश मंत्री ने कहा कि, “भारत की कार्यवाहियों के चलते ही कनाडा ने अपने राजनयिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है। और भारत की कार्यवाही का कनाडा कोई रिस्पॉन्स नही देगा।”

ट्रूडो सरकार के अनुसार राजनायकों को देश छोड़ने का भारत का आदेश अनुचित है जो राजनियक संबंधों को लेकर बने वियना कन्वेंशन का भी उल्लंघन है।

सपा नेता अखिलेश यादव के बयान पर कमलनाथ का पलटवार कहा- अरे भाई छोड़ो अखिलेश वखीलेश

इन दिनों इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच ज़ुबानी जंग चल रही है समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को सीतापुर में अपने एक बयान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को चिरकुट कह दिया था। तो अजय राय ने पलटवार करते हुए कहा था कि बीजेपी के साथ कौन मिला है ये सबको पता है।

वही दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ विधानसभा चुनाव के लिए कुल 229 उम्मीदवारों की घोषणा करने के बाद छिंदवाड़ा पहुंचे और इस दौरान मीडिया से बातचीत करने के दौरान उन्होंने कहा कि, “माहौल बहुत अच्छा है लोग हमें फोन कर के बता रहे हैं कि लोगों में उत्साह है और हम उम्मीद से भी ज्यादा संख्या से जीतेंगे।” मीडिया द्वारा अखिलेश के बयान पर जवाब मांगने पर कमलनाथ ने कहा कि, “अरे भाई छोड़ो अखिलेश वखीलेश”

आपको बता दें, इस वर्ष अगले महीने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले वर्ष शुरूआत में लोकसभा चुनाव होने है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को हरने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इंडिया गठबंधन बनाया है जिससे की भाजपा को लोकसभा चुनाव में मात दी जा सके। लेकिन चुनावो से पहले हो विपक्षी पार्टियों में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

हमास से पुतिन की तुलना कर जो बाइडेन ने कहा- दोनों लोकतंत्र को खत्म करना चाहते है

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से अपने संबोधन में फिलिस्तीन समूह हमास और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर हमला करते हुए कहा कि, “दोनों पड़ोसी लोकतंत्रों को पूरी तरह से नष्ट करना चाहते हैं।” 

जो बाइडेन ने घोषणा करते हुए कहा कि, “वह यूक्रेन और अफगानिस्तान का समर्थन करने के लिए कांग्रेस से बड़े पैमाने पर फंडिंग का अनुरोध करेंगे और तर्क देते हुए कहा कि यह एक वैश्विक नेता के रूप में अमेरिका के भविष्य के लिए एक निवेश होगा। यह एक स्मार्ट निवेश है जो पीढ़ियों तक अमेरिकी सुरक्षा को लाभांश देगा।”

हमास और पुतिन का आतंक और अत्याचार अलग-अलग खतरों का प्रतिनिधित्व करते हैं, दोनों पड़ोसी लोकतंत्र को पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं। अगर अंतर्राष्ट्रीय अक्रमकता जारी रही तो दुनिया के के अन्य हिस्सों में भी संघर्ष और अराजकता फैल सकती हैं।”

यूक्रेन और इजरायल की मदद पर फंडिंग को लेकर जो बाइडेन ने कहा कि, “यह वैश्विक नेता के रुप में संयुक्त राज्य अमेरिका के भविष्य के लिए एक निवेश है, जो कई पीढ़ियों तक अमेरिकी सुरक्षा को लाभ देगा। अमेरिकी नेतृत्व ही दुनिया को एक साथ रखता है अमेरिकी मूल्य हमें एक ऐसा भागीदार बनाते हैं जिसके साथ अन्य देश काम करना चाहते हैं।”

पीएम मोदी ने देश को की पहली रैपिड रेल की दिखाई हरी झंडी, 17 किलोमीटर की दूरी को करेगी 12 मिनट में पूरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को साहिबाबाद रैपिडेक्स स्टेशन पर दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन का उद्घाटन किया है। आज देश को पहली सेमी हाई स्पीड रैपिड एक्स ट्रेन मिली है।

बता दें पहले चरण में यह ट्रेन साहिबाबाद से दुहाई तक 17 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इस ट्रेन का परिचालन शुरू किया जाएगा। इसके बाद इस दूरी को चंद मिनटों में पूरा किया जाएगा। इन्हें नमो भारत के नाम से जाना जाएगा।

आम लोगों के लिए यह ट्रेन 21 अक्टूबर से चालू हो जाएगी। शनिवार से आम जनता इसमें सफर कर सकेगी। यह क आरआरटीएस नई रेल-आधारित सेमी-हाई स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी वाली कम्यूटर ट्रांजिट सिस्टम हैं।

इस ट्रेन में यात्रियों को ओवरहेड लगेज रैक, वाई-फाई और हर सीट पर एक मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट जैसी यात्री सुविधाओं के अलावा कई सुरक्षा सुविधाएं मिलेगी। इस ट्रेन में शताब्दी ट्रेन या हवाई जहाज की इकोनॉमी क्लास जैसी रिक्लाइनिंग सीटे लगाई गई हैं। हर तरफ डिजिटल स्क्रीन लगाई गईहैं जो स्टेशन से जुड़ी जानकारी के साथ ही ट्रेन की रियल टाइम स्पीड भी बताएंगे। इसमें एंट्री के लिए हाई-टेक ऑटोमेटिक गेट्स लगे हैं, प्लेटफॉर्म और ट्रेन के ट्रैक के बीच ग्लास की दीवार भी लगाई गई है।

मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहता हूँ, लेकिन कुर्सी मुझे नहीं छोड़ रही : अशोक गहलोत

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली, अक्टूबर 19  : अशोक गहलोत ने कहा कि वह पहले व्यक्ति हैं जो कह सकते हैं कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहते हैं, लेकिन कुर्सी उन्हें नहीं छोड़ रही है, और उन्हें अभी भी कुर्सी नहीं छोड़ेगी ऐसा उनका विश्वास है। गहलोत बृहस्पतिवार को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। गहलोत ने वसुंधरा राजे को लेकर साफ शब्दों में कहा कि उनके बहाने किसी पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा उनके और उनकी पार्टी के नेताओं के बीच समन्वय है। किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। गहलोत ने कहा कि पायलट और उन्होंने मिलजुल कर सब फैसले लिए हैं। कहीं कोई विवाद नहीं है। उनकी सरकार ने राजस्थान में जितना काम किया है, उसके चलते लोगों में न तो सरकार का विरोध है और न ही सरकार के किसी मंत्री या विधायक लेकर नाराजगी है। उन्होंने आपसी विवाद पर कहा कि पायलट साहब के सभी टिकट क्लियर हो गए हैं, उनके एक भी टिकट पर कोई आपत्ति नहीं जताई है. गहलोत ने कहा सोनिया गांधी ने अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले उन्हें सीएम बनाया था, इसके बाद वह बारी बारी से केंद्र और राज्य में काम करते रहे हैं। अब चौथी बार मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत ने कहा मुझ पर आलाकमान का इतना विश्वास है कि उसके पीछे कुछ तो कारण होंगे। देश के अंदर जो माहौल है, उसका सामना अकेले राहुल गांधी कर रहे हैं और हमें उनकों मजबूती देने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे में कांग्रेस पार्टी की प्राथमिकता मजबूती के साथ चुनाव जीतने की है। इस मौके पर उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई का विरोध किया। गहलोत ने आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और आईटी केंद्र के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इसमें दखल देने की मांग की गहलोत ने कहा मौजूदा समय में देश किस दिशा में जा रहा है, या जायेगा किसी को नहीं पता। पांच राज्यों के चुनावों की घोषणा हो चुकी है। आदर्श आचार संहिता लगी हुई है। फिर भी धड़ाधड़ छापे, पहले केवल अपराधियों और वित्तीय अनियमितताएं करने वालों पर कार्रवाई होती थी, अब राजनेताओं को भी नहीं बक्शा जा रहा है।यह देश की प्रीमियम एजेंसी, देश को इन पर गर्व है, लेकिन इसका महत्व खत्म हो गया क्रेडिबिलिटी खत्म हो गई तो किसको नुकसान होगा? विश्वसनीयता अगर खत्म हो गई, जो की अब खत्म हो गई है। जहां चुनाव हो रहे हैं वहां ईडी पहुंच रही है, लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है। गहलोत ने कहा यूपीए के शासन काल में 10 साल में केवल 310 जगहों पर छापेमारी हुई। जबकि एनडीए सरकार के 9 साल के कार्यकाल में 3010 छापे डाले गए हैं। 888 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसदों की ईडी के साथ मिलीभगत है। इसलिए राजस्थान में संजीवनी घोटाले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के मामले हैं। केंद्र के वित्त मंत्रालय की आर्थिक अनियमितता शाखा को भी लिखित शिकायत भेजी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते यह भी मांग करते हैं कि केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुख उन्हें तुरंत मिलने का समय भी दें। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की दो बार हुई बैठक के बाद केंद्रीय चुनाव समिति ने लंबी मैराथन बैठक करके प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की है। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा, पार्टी ने वैसे तो ज्यादातर सीटों पर पुराने चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी कर ली है, लेकिन कई नए चेहरे और युवाओं को भी इन चुनावों में मौका दिया जा सकता है। इसके अलावा पार्टी करीब 30 फीसदी टिकटों पर पुनर्विचार कर रही है।

पीएमओ अधिकारी बताकर धमकी देने वाले मामले की सीबीआई कर रही है जांच, मयंक तिवारी के परिसरों पर तलाशी जारी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का एक अधिकारी बताकर विवाद सुलझाने के लिए दबाव बनाने के एक मामले में मयंक तिवारी के अहमदाबाद स्थित परिसरों की तलाशी की और कई अहम दस्तावेजों को कब्जे में लिया है। हालांकि मयंक तिवारी की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि, “आरोपी ने इंदौर के एक अस्पताल पर बकाया 16 करोड़ न देने के लिए प्रमोटर्स पर दबाव बनाया था। और सीबीआई की टीम ने अपनी तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए है।”

अधिकारियों ने बताया कि, इंदौर के अस्पताल ने कथित तौर पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया जिसके बाद ही विवाद हुआ और सामने वाली पार्टी जिसने पैसे दिए थे। वो अपना पैसा वापस चाहते थे। लेकिन मामला उच्च न्यायालय में गया, अदालत ने इस विवाद को निपटाने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया। मध्यस्थ ने इंटरिम इनजक्शन में इंदौर अस्पताल को चार सप्ताह के भीतर 16.43 करोड़ रूपये जमा करने को कहा। और जब इस मामले में पीएमओ का नाम इस्तेमाल किया गया तो इसकी सूचना सीबीआई को की गर्इ।

बता दें, इस मामले की जानकारी पीएमओ ने भी सीबीआई को दी है और कहा गया है कि प्रथम दृष्टया, यह पीएमओ अधिकारी का प्रतिरूपण करने और पीएमओ के नाम के दुरुपयोग का मामला है, क्योंकि न तो यह व्यक्ति और न ही उसके द्वारा बताया गया पद इस कार्यालय में हैं।

हमास के हमले की जड़ में हैं सऊदीअरब और इजरायल की नजदीकियां ! परदे के पीछे अमेरिका निभा रहा बड़ा रोल

ख़ालिद सलीम :-

हमास के 7 अक्टूबर की सुबह इजरायल पर हमले की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। हमास ने तब एक के बाद एक 5-7 हजार मिसाइल दागकर हमला किया था जिससे इजरायल का सुरक्षा कवच भी ध्वस्त हो कर रह गया। क्षेत्र से वाकिफ दुनिया के जाने माने पत्रकार और टॉप खुफिया एजेंसियां इस बात से हैरान है कि हमास ने कैसे इतनी बड़ी तैयारी के साथ यह हमला किया क्योंकि हमास का जो ठिकाना है वह गजा की 45 किलोमीटर लंबी और 14 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है जिसको तीन तरफ से इजराइल ने घेर रखा है, जबकि चौथी दिशा में समंदर है जहां से फिलिस्तीन के लोगों का आना जाना बिल्कुल बंद है। वहां भी इजरायल की कड़ी सुरक्षा रहती है। इन सबके बावजूद हमास ने इतना जबरदस्त हमला कैसे कर दिया और उसके पास हमले के लिए ऐसी आधुनिक तकनालोजी कहां से आई, इससे सबको हैरानी है।

क्या हमास ने इस हमले की तैयारी इसी गाजा पट्टी में की जो काफी घनी आबादी वाली जगह है ? बताया जाता है कि हमास ने गाजा की ज़मीन में सुरंगों का जाल बिछा रखा है जिसमें कई बारूदी सुरंगे भी हैं। हमास यहीं हमले की तैयारी करता है। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसा हमला बिना ईरान की हुकूमत की मदद के नहीं हो सकता था। हालांकि, ईरान ने लगातार इस बात को इंकार किया है कि हमले में उसका कोई हाथ है। अलबत्ता ईरान ने हमास के हमले का समर्थन किया है। सारी दुनिया जानती है कि ईरान कुल रूप से इजराइल और फिलीस्तीन के झगड़े में फिलिस्तीन के साथ खड़ा है। वह हमास और फिलिस्तीन के दूसरे गुटों की मदद करता है जबकि अब खाड़ी के काफी देश खुलकर फिलिस्तीन के साथ खड़े नजर आते हैं, हालांकि यूएई और बहरीन ने हमास के हमले की निंदा की है। यह कहा जा सकता है कि हमास के हमले ने खाड़ी देशों को भी बांट दिया है।

काफी अरब देश एक आजाद फिलिस्तीन राज्य की हिमायत जरूर करते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में उन्हें इजरायल के साथ संबंध सुधारते हुए देखा गया है। दुनिया के जाने माने पत्रकारों का मानना है कि हमास के हमले के पीछे दरअसल सऊदी अरब और इजरायल की बढ़ती नजदीकियां है। इन दोनों मुल्कों के बीच एक खुफिया समझौता होने वाला था। काफी चर्चा थी कि सऊदी अरब और इजरायल फिलिस्तीन मसले के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। अब माना जा रहा है कि हमास को जब इसकी भनक लगी तो उसने इन्हीं नजदीकियों को खत्म करने के लिए यह हमला किया।

सब जानते हैं कि पिछले कुछ सालों से इजरायल और सऊदी अरब के शहजादा मोहम्मद बिन सलमान के मध्य एक ऐसे फॉर्मूले पर बातचीत जारी थी जिससे फिलिस्तीन के मसले में उम्मीद की किरण देखी जा रही थी। हालांकि सऊदी अरब के बादशाहों ने मरहूम शाह फैसल के बाद फिलिस्तीन की अपनी नीति में नीतिगत बदलाव कर दिया था और माना जाता है कि सऊदी अरब किंग इस मसले पर अमेरिकी फार्मूले के तहत काम कर रहे थे। मोहम्मद बिन सलमान ऐसे ही किसी फार्मूले पर काम कर रहे थे जिससे इजरायल को फिलिस्तीन के मुकाबले ज्यादा फायदा होने की संभावना थी, लेकिन इसकी भनक ईरान और हमास को लग गई थी। इसीलिए सऊदी अरब और इजरायल के दरमियान इस खुफिया फार्मूले (समझौते) को बर्बाद करने के लिए यह हमला किया गया।

बात कुछ भी हो, लेकिन हमास के हमले ने दुनिया को एक बार फिर दो गुटों में बांट दिया है और यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि जैसे अमेरिका पर 9/11 के हमले के बाद दुनिया दो गुटों में बंट गई थी और उसके सियासी हालात बदल गए थे उसी तरह 7 अक्टूबर के हमास के इजरायल पर हमले के बाद भी दुनिया के सियासी हालात बहुत ज्यादा बदल जाएंगे। दुनिया फिर दो गुटों में बंट गई है। अमेरिका यूरोपीय यूनियन और एशिया के कई मुल्क इजरायल के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हमास के हमले की न सिर्फ कड़ी निंदा की बल्कि देश की पुरानी नीति के विपरीत जाकर खुले रूप से खुद को इजरायल के साथ खड़ा बताया। यदि वे गाज़ा पर इजरायली बमबारी, जिसमें सैकड़ो मासूम बच्चे और बेगुनाह औरतें- मर्द जान गँवा चुके हैं, की भी निंदा करते तो यह बेहतर तरीका होता।

भारत के पीएम मोदी ने एक बार भी फिलिस्तीन की स्वतंत्रता के पक्ष में बयान नहीं दिया है। जबकि, वैश्विक स्तर पर वे ऐसी स्थिति में थे कि इजरायल-फिलीस्तीन मसले के हल में बड़ा रोल अदा कर सकते थे। मोदी हाल के वर्षों में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हुए हैं और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से उनकी गहरी दोस्ती भी है। इस प्रभाव का इस्तेमाल वह मसले को हल करने में कर सकते थे। लेकिन उन्होंने फिलिस्तीन को लेकर एक भी शब्द नहीं बोला, जबकि वह जानते हैं कि 70 साल में हिंदुस्तान फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा है।

मोदी की पार्टी भाजपा से ताल्लुक रखने वाले दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी फिलीस्तीन की हिमायत में जबरदस्त तकरीर करते हुए इजरायल के फिलीस्तीनी ज़मीन पर कब्जे को छोड़ने की हिमयता की थी। उनका कहना था कि इजरायल उस ज़मीन को छोड़ दे और फिलीस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने का रास्ता साफ़ करे। लेकिन पीएम मोदी ने इसके विपरीत खुलकर इजरायल की हिमायत का ऐलान कर दिया जो देश की पिछली तमाम हुकूमतों की नीति के विपरीत है। उन्होंने हमास के हमलों की निंदा तो की लेकिन गजा के उन मजलूम फिलिस्तीनियों पर बरस रहे बमों पर एक भी शब्द नहीं कहा। करीब 70 साल से इजरायल ने फिलिस्तीनियों पर जुल्म किया है। यहां तक कि उनके मासूम बच्चों और औरतों को भी नहीं बख्शा गया है।

ज़मीन की जंग : यह अफसोस की बात है यहूदियों और मुसलमान के दरमियान झगड़े की असल वजह पवित्र स्थान है जिनको मुसलमान अपनी आस्था के हिसाब से पवित्र मानते हैं और वह मस्जिद अल-अक्सा है। मुसलामानों के पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आसमान में जब अल्लाह से मुलाकात करने के लिए गए थे तो इसी मस्जिद अक्सा से गए थे। इसी कारण यह मस्जिद और इसके आसपास के इलाके मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1948 में इजरायल बनने के बाद लाखों फिलिस्तीनियों ने अपनी जान कुर्बान कर दी  है।

दुनिया भर के मुसलमानों का जज्बाती ताल्लुक भी इस सरजमीं से इसी वजह से है कि उनके आखिरी पैगंबर मस्जिद-ए-अक्सा से आसमान पर तशरीफ ले गए थे। इसी बुनियाद पर यहूदियों और मुसलमान के दरमियान यह जगह झगड़े की वजह बनी रही है। यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों के लिए भी यह जगह पवित्र मानी जाती है। यहूदी इसलिए इस जगह को अपने पैगंबर सुलेमान और मूसा अली सलाम की वजह से पवित्र मानते हैं। उनका ख्याल है कि यह जमीन हमारी है और इस पर सिर्फ हमारा हक है। अपने दावे को सच साबित करने के लिए इजरायल ने तल अबीब की जगह यरूशलेम को राजधानी बना लिया है। हमेशा की तरह अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इजरायल की राजधानी यरूशलेम को मान्यता दे दी।

अमेरिका की नीति : अमेरिका और पश्चिमी देशों की इन्हीं नीतियों की वजह से फिलिस्तीन और दुनिया भर के मुसलमान यह समझते हैं कि उनको मारा भी जा रहा है उनकी जमीनों पर कब्जा भी किया जा रहा है उनको दबाया भी जा रहा है। साथ ही नाजायज तौर पर इजरायल की हिमायत की जा रही है। पूरी दुनिया में आज इजरायल के खिलाफ मुसलमान का आक्रोश इसी वजह से नजर आता है कि अमेरिका और पश्चिमी देश पूरी तरह से इजरायल के पीछे खड़े हुए हैं। दरअसल दुनिया की सियासत पर नजर रखने वाले यह समझते हैं कि हर मुल्क अपने फायदे, अपने व्यापार और अपने लोगों के हिट देखकर विरोध या समर्थन करता है, न कि न्याय की दृष्टि से। इससे हक और इंसाफ की पहचान खत्म हो रही है। अब दुनिया में मजलूमों के हिमायती नजर नहीं आते। जब नेल्सन मंडेला की हिमायत भारत में होती थी तो पूरी दुनिया के सच्चे और अच्छे शासक मजलूमों की मदद किया करते थे। उनकी आवाज से आवाज मिलाते थे। पूरी दुनिया पर उनकी आवाज का असर होता था।

अब हिंदुस्तान में महात्मा गांधी की आवाज नहीं रही, जो मजलूमों की आवाज बनकर और डटकर खड़े हो जाया करते थे। अफसोस की बात यह है कि दुनिया ताकत, पैसे और टेक्नोलॉजी के सहारे कमजोरों को दबा रही है। चाहे वह मुसलमान हो या किसी भी धर्म से हो। यदि कोई देश आर्थिक रूप से कमजोर है और उसके पास टेक्नोलॉजी नहीं है, तो उसको हर जगह दबाया जा रहा है। फिलिस्तीन के मसले को हल करना इस वक्त सबसे बड़ी ज़रुरत है। यदि यह नहीं किया गया तो इसके परिणाम बहुत खराब होंगे। यह जंग ऐसे ही चलती रही और इजरायल के हमले गाजा पर इसी तरह जारी रहे और वहां के बेक़सूर बच्चों और महिलाओं को ऐसे ही मारा जाता रहा तो यह जंग बड़े दायरे में फ़ैल सकती है।

हालात को समझने बड़े पत्रकार भी आशंका जाहिर कर चुके हैं कि इजरायल-फिलिस्तीन की जंग की आग पूरी दुनिया में फैल सकती है। ऐसा हुआ तो दुनिया पर टेस्टर विश्व युद्ध के काले बादल मंडराने लगेंगे। वर्तमान जंग का किन मुल्कों को फायदा है, यह जगजाहिर है। हथियार बनाने वाले देश ऐसे ही मौकों की तलाश में रहते हैं। वक्त का तकाज़ा है कि इस जंग को खत्म करने के लिए इजरायल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के अलावा मुस्लिम देश, खास तौर पर सऊदी अरब और ईरान सामने आएं। साथ ही मजलूम फिलिस्तीनियों को उनका हक दिलकाया जाए। उन्हें एक स्वतंत्र राष्ट्र में रहने का हक दिया जाए। अरब मुल्कों को चाहिए कि वह स्वतंत्र फिलिस्तीन बनने के बाद इजरायल को तस्लीम कर लें ताकि यह झगड़ा हमेशा के लिए खत्म हो सके। ‘जियो और जीने दो’ की नीति पर चलकर ही दुनिया में शांति स्थापित की जा सकती है।

बॉक्स भारत के मुसलमान : वर्तमान हालात से संकेत मिलता है कि इजरायल-हमास जंग के मसले पर हिंदुस्तान की अंदरूनी सियासत भी हिंदू और मुसलमान के बीच बांट दी गयी है। भारत में कुछ लोग  हैं जो मुसलमान विरोध में इतना आगे बढ़ जाते हैं कि उन्हें सच्चाई और अच्छाई बिल्कुल नजर नहीं आती। इसीलिए जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो इन तत्वों ने हिंदुस्तान में खुलकर मुसलामानों की मुखालफत शुरू कर दी। इस बात को जाने बगैर की इजरायल 1948 से अब तक फिलिस्तीन की जमीन पर कब्जा करता आ रहा है और जब भी फिलिस्तीन और इजरायल के बीच जंग होती है तो इजरायल फिलिस्तीनियों की जमीन पर कब्जा कर लेता है। इजरायल को 1948 में फिलिस्तीन की जो जमीन दी गई थी, आज उसने उससे कहीं आगे जाकर बड़ी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है। फिलिस्तीन सिकुड़ते-सिकुड़ते एक छोटी सी पट्टी में सिमट रहा है। उसे  चारों तरफ से इसराइल ने घेर रखा है।

दुनिया के इंसाफ पसंद लोग फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र देखने के इच्छुक हैं लेकिन इजरायल ऐसा नहीं होने देना चाहता। हालांकि खुद इजरायल के भीतर बहुत से लोग चाहते हैं कि दोनों के बीच 70 साल से चली आ रही दुश्मनी खत्म हो जाए और एक आजाद फिलिस्तीन स्थापित हो जाए। लेकिन इजरायल के कट्टरपंथी जिओनवादी (जियोनिस्ट) यहूदी फिलिस्तीनियों को कोई अधिकार देने के हक में नहीं। इजरायल पर शासन करने वाले भी फिलिस्तीनियों को उनका हक देने के लिए तैयार नहीं हैं। अफसोस की बात है कि हिंदुस्तान जैसा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र, जो पूरी दुनिया में मजलूमों की आवाज रहा है और जिसने दक्षिण अफ्रीका से लेकर ऐसे ही दूसरे मुल्कों में तानाशाही और नस्लपरस्ती का विरोध किया, वह हिंदुस्तान अब दबे कुचले लोगों के साथ खड़ा नहीं दिखता।

भारत की 70 साल से नीति भी यही रही कि देश फलस्तीनियों के साथ खड़ा नजर आता था। लेकिन आज पीएम मोदी, उनकी पार्टी भाजपा और हिन्दूवादी संगठन आरएसएस खुलकर इजरायल का साथ दे रहे हैं जबकि फिलिस्तीनियों के अधिकार और उन पर जुल्म को नजरअंदाज कर दिया गया है। हिंदुस्तान के मुसलमान हमेशा से फिलिस्तीन के मजलूम लोगों की हिमायत में खड़े रहे हैं क्योंकि 1948 में जब इजरायल बनाया गया था तो वह फिलिस्तीन की धरती पर बनाया गया था। सच यह है कि उसके बाद भी इजरायल ने फिलिस्तीन की ज़मीन पर कब्जा जारी रखा और उसे धकेलते हुए छोटे से इलाके में समेट दिया। पूरी दुनिया जानती है कि इजरायल फिलिस्तीन की ज़मीन पर काबिज है और उसपर जुल्म भी करता है।

लिहाज़ा, न सिर्फ मुसलमान, बल्कि दुनिया भर के इंसाफ पसंद लोग फिलिस्तीन की हिमायत करते हैं। लेकिन हिंदुस्तान के कट्टरपंथी और यहाँ तक कि देश का राष्ट्रीय मीडिया भी पूरी तरह इजरायल और हमास युद्ध में ऐसी भूमिका निभा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है मानों वे हिंदुस्तान के मुसलमान को चिढ़ा रहे हैं। देश का मुसलमान यही महसूस करता है। हक और इंसाफ के साथ खड़े होने की भारत की नीति और छवि रही है। हालांकि, बदकिस्मती से इस मसले पर भी हिंदू और मुसलमान को भिड़ाने की कुटिल चाल चली गयी है।

महुआ मोइत्रा के रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले पर राजीव चंद्रशेखर ने कहा – ‘अगर यह सच है तो ये बहुत शर्मनाक और चौंकाने वाला’

झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोक सभा स्पीकर ओम बिरला और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी चिट्ठी लिखी है चिट्ठी में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया है कि, महुआ मोइत्रा को सदन में सवाल पूछने के लिए बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट और कैश मिला है।”

आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स कर कहा कि, “मुझे समाचार रिपोर्टों से पता चला है कि यह संसदीय प्रश्न संभवतः एक डेटा सेंटर कंपनी के आदेश पर एक सांसद द्वारा पूछा गया था। अगर यह सच है तो यह वाकई चौंकाने वाला और शर्मनाक है। यह सच है कि यह कंपनी डेटा स्थानीयकरण के लिए सक्रिय और आक्रामक तरीके से पैरवी कर रही थी। पीक्यू में उपयोग की गई भाषा बहुत समान है (डेटा स्थानीयकरण की आवश्यकता को डेटा उल्लंघनों से जोड़ना) उस भाषा के समान है जब इस कंपनी के प्रमुख ने मुझसे मुलाकात की थी। मुझे इसके पूरे तथ्य या पृष्ठभूमि की जानकारी नहीं है – लेकिन अगर यह सच है तो यह एक भयानक उपहास और पीक्यू का दुरुपयोग है।”

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाए और महुआ मोइत्रा को सदन से निलंबित किया जाए। 

जिंदगी को खत्म करने की इजाज़त नही- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विवाहित महिला की 26 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। भ्रूण को तरजीह देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, “हम दिल की धड़कन रोक नही सकते। बच्चे के धरती पर जन्म लेने का रास्ता साफ है। एम्स रिपोर्ट के अनुसार बच्चे में कोई असामान्यता नहीं हैं। तय समय पर एम्स डिलीवरी कराएगा।”

सीजेआई ने कहा कि, “गर्भावस्था 26 सप्ताह और 5 दिन की है। इस प्रकार गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देना एमटीपी अधिनियम की धारा 3 और 5 का उलंघन होगा क्योंकि इस मामले में मां को तत्काल कोई खतरा नहीं हैं। यह भ्रूण की अस्मान्यता का मामला नहीं हैं। हम दिल की धड़कन को नहीं रोक सकते है।”

एम्स की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई थी कि महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा सामान्य है। डिप्रेशन की मरीज महिला जिन दवाओं का सेवन कर रही है, उससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट के बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। 

आपको बता दें, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस मामले में एम्स मेडिकल बोर्ड को आदेश दिया था कि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर वह अपनी रिपोर्ट दाखिल करे। 

महिला ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वह लेक्टेशनल एमेनोरिया नामक बीमारी से जूझ रही है और उसकी वित्तीय हालत भी ठीक नहीं है। वह अपने तीसरे बच्चे को पालने के काबिल नहीं है और इसलिए उसे अबॉर्शन की इजाजत दी जाए।

इजरायल और हमास के युद्ध के बीच भारत का ऑपरेशन अजय जारी, पांचवी स्पेशल फ्लाइट भारत के लिए हुई रवाना

ऑपरेशन अजय के तहत पांचवीं स्पेशल फ्लाइट, युद्धग्रस्त इजरायल से भारतीय नागरिकों को लेकर सोमवार की सुबह तेल अवीव से भारत के लिए रवाना हुई है।

अब तक लगभग 800 भारतीय को चार्टर्ड फ्लाइट के द्वारा इजरायल-हमास युद्ध के बीच से निकाला जा चुका है। वहीं गाजा में इजरायल की बमबारी रात भर जारी रही।

गाजा में अधिकारियों ने कहा कि, इजरायल के जवाबी हमलों में अब तक कम से कम 2,670 लोग मारे गे हैं, जिनमें से एक चौथाई बच्चे हैं और लगभग 10,000 घायल हुए व एक हजार लोग लापता है।

इजरायल की वायु सेना का लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला जारी हैं। इजरायल की ओर से गोलीबारी का जवाब दिया जा रहा है। इजरायल ने हमास पर बड़े हमले की तैयारी शुरू कर दी है। लोगों को सुरक्षित जगह पर जाने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।