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Bengal Chunav: नामांकन, रोड शो और हिंसा से गरमाया माहौल

भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपना नामांकन दाखिल किया।
भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपना नामांकन दाखिल किया।

नई दिल्ली: भवानीपुर सीट से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। नामांकन से पहले अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक जुटे। हालांकि इस दौरान बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हो गई, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।

वहीं मालदा से बेहद गंभीर खबर सामने आई है। यहां सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। गुस्साई भीड़ ने न्यायाधीशों के काफिले पर हमला कर दिया और करीब 100 गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इतना ही नहीं, सात न्यायिक अधिकारियों को घेरने की भी कोशिश की गई। पुलिस ने किसी तरह देर रात हालात काबू में किए और सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन इलाके में अब भी तनाव बना हुआ है।

इस घटना को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। बीजेपी ने टीएमसी सरकार पर कानून-व्यवस्था फेल होने का आरोप लगाया, वहीं टीएमसी ने इसके लिए चुनावी प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी सांसदों ने इसे साजिश बताया, जबकि टीएमसी नेताओं ने कहा कि हालात चुनाव आयोग की नीतियों के कारण बिगड़े हैं।

इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु और पश्चिम बंगाल में आई-पैक (IPAC) से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।

वोटर लिस्ट विवाद भी लगातार गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि लाखों नाम सूची से हटाए गए हैं, जिस पर लोगों में भारी नाराजगी है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों पर 7 अप्रैल तक फैसला हो सकता है।

बंगाल में चुनावी लड़ाई अब सिर्फ वोट तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सियासी ताकत, रणनीति और जमीन पर संघर्ष की बड़ी परीक्षा बन गई है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला और भी तेज होने के संकेत हैं।

Oracle की छंटनी के बाद भी शेयर में उछाल, IT सेक्टर में क्या चल रहा है गेम?

Oracle की छंटनी में भारत के करीब 12,000 लोग भी शामिल।
Oracle की छंटनी में भारत के करीब 12,000 लोग भी शामिल।

नई दिल्ली: Oracle ने वैश्विक स्तर पर 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की है, जिसमें भारत के करीब 12,000 लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों को अचानक ईमेल भेजकर नौकरी खत्म होने की जानकारी दी गई और तुरंत सिस्टम एक्सेस भी बंद कर दिया गया। इस फैसले का असर खास तौर पर कंपनी के कई अहम विभागों पर पड़ा है।

लेकिन हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी छंटनी के बावजूद Oracle के शेयर गिरने के बजाय ऊपर चले गए। यही नहीं, कई दूसरी IT कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।

इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। Oracle अब पारंपरिक कामकाज से हटकर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी इस सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही है, ताकि भविष्य में ज्यादा कमाई की जा सके।

निवेशकों का मानना है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने से कंपनी का खर्च कम होगा और मुनाफा बढ़ेगा। यानी अभी की छंटनी को भविष्य की ग्रोथ की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि बाजार में इसका पॉजिटिव असर दिख रहा है।

यह ट्रेंड सिर्फ Oracle तक सीमित नहीं है। Amazon, Atlassian और Block जैसी कंपनियां भी इसी रणनीति पर काम कर रही हैं। वहीं Microsoft और Meta जैसी बड़ी कंपनियां भी AI पर भारी निवेश कर रही हैं।

कुल मिलाकर, टेक इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनियां अब इंसानों की जगह टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं। इसका फायदा कंपनियों और निवेशकों को तो मिल रहा है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI का यह दौर नौकरियों के लिए कितना बड़ा खतरा बनता है और कितना नया मौका लेकर आता है।

राघव चड्ढा पर AAP का बड़ा एक्शन, राज्यसभा में पद भी गया और बोलने पर भी रोक

Aam Aadmi Party ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया। (Image- Social Media)
Aam Aadmi Party ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया। (Image- Social Media)

नई दिल्ली: Aam Aadmi Party ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाते हुए उनकी जगह Ashok Mittal को नया उपनेता बना दिया है। इस फैसले की जानकारी पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक तौर पर दे दी गई है।

सिर्फ पद से हटाना ही नहीं, बल्कि सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने यह भी कहा है कि राघव चड्ढा को राज्यसभा में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। यानी अब संसद में उनकी भूमिका पहले के मुकाबले काफी सीमित हो सकती है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब राघव चड्ढा लगातार राज्यसभा में सक्रिय नजर आ रहे थे। वे कई जनहित से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे एयरपोर्ट पर महंगी चाय का मामला हो या डिलीवरी बॉयज की समस्याएं, उन्होंने कई बार सरकार को घेरने की कोशिश की थी।

हालांकि, पार्टी ने इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह साफ नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों या रणनीति में बदलाव के चलते यह कदम उठाया गया है।

इस घटनाक्रम के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा की अगली भूमिका क्या होती है और आम आदमी पार्टी की रणनीति में क्या बदलाव आता है। फिलहाल, इस फैसले ने राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

बिहार में बदलाव की आहट, नीतीश दिल्ली जाएंगे तो कौन संभालेगा कमान?

नीतीश दिल्ली जाएंगे तो कौन संभालेगा कमान?(Photo: PTI)
नीतीश दिल्ली जाएंगे तो कौन संभालेगा कमान?(Photo: PTI)

नई दिल्ली: बिहार में नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद उनके पटना लौटने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की अटकलें तेज हो गई हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, 10 अप्रैल के बाद नई सरकार बनाने की कवायद तेज हो सकती है। माना जा रहा है कि अप्रैल के तीसरे हफ्ते तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

इस बीच, जेडीयू के नेता Dileshwar Kamait के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि भले ही मुख्यमंत्री का चेहरा बदल जाए, लेकिन सरकार “नीतीश मॉडल” पर ही चलेगी। यानी विकास और सुशासन की वही नीति आगे भी जारी रहेगी।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने से पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है। उनके अनुभव का फायदा एनडीए को बड़े स्तर पर मिल सकता है।

वहीं, Bihar में लोगों की नजरें अब अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हैं। क्या कोई नया चेहरा सामने आएगा या फिर पार्टी किसी पुराने और अनुभवी नेता पर भरोसा जताएगी, यह अभी साफ नहीं है।

बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ती दिख रही है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे, जब यह तय होगा कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी और राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

तहलका की पड़ताल: हाईवे तेल माफिया

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते गैस की भारी कमी और उसकी कालाबाजारी की चर्चा जोरों पर है। लेकिन सभी प्रकार के ईंधन, खासकर पेट्रोल-डीजल की चोरी और उसकी कालाबाजारी के बारे में आम लोगों को कुछ पता नहीं है। तहलका एसआईटी ने अपनी इस पड़ताल में हरियाणा के मेवात में राजमार्गों (हाईवेज) के किनारे एक संगठित पेट्रोल-डीजल रैकेट का खुलासा हुआ है, जहां टैंकरों से ईंधन की चोरी करके उसका भंडारण किया जाता है और उसे ज्यादा मुनाफे के लिए बेचा जाता है। ऑपरेटर इस चोरी में पुलिस और माफिया की मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं और मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच इनके द्वारा अप्रत्याशित लाभ कमाने की बात कह रहे हैं। तहलका एसआईटी की रिपोर्ट :-

12 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 10 बजे हम (तहलका रिपोर्टर) एक खोजी खबर के सिलसिले में सड़क मार्ग से दिल्ली से जैसलमेर, राजस्थान के लिए रवाना हुए। इस यात्रा में आमतौर पर 13 से 15 घंटे लगते हैं। दूरी अधिक होने के कारण हमने अगली सुबह जैसलमेर जाने से पहले जोधपुर में रात भर रुकने का फैसला किया।

जैसलमेर दिल्ली से लगभग 770-800 किलोमीटर दूर स्थित है और अधिकांश यात्री इतनी दूरी तय करने के लिए ट्रेन या हवाई जहाज को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि हमने इस उम्मीद में जानबूझकर सड़क मार्ग को चुना कि रास्ते में हमें कई जानकारियां मिलेंगी, जो हवाई या रेल यात्रा से संभव नहीं है। हमने कालिंदी कुंज से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्थिर गति बनाए रखते हुए यह सफर किया।

एक घंटे के भीतर हम हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूह जिले में पहुंच गए। जैसे ही अरावली पहाड़ियां नजर आने लगीं, रिपोर्टर की नजर एक असामान्य चीज पर पड़ी- सड़क के दोनों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक फैली हुई 20 लीटर पानी की बोतलों की कतारें जोड़े में लटकी हुई थीं।

जिज्ञासावश मैंने अपने ड्राइवर से उनके बारे में पूछा। उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया कि इन बोतलों का इस्तेमाल राजमार्ग पर चलने वाले ट्रकों से डीजल निकालने के लिए किया जाता है। सड़क मार्ग से यात्रा करने का हमारा निर्णय पहले ही सफल साबित हो गया। हमें संयोगवश अपनी पहली स्टोरी मिल गई। ड्राइवर ने आगे बताया कि यह प्रथा लंबे समय से चली आ रही है, जिसमें चोरी का डीजल खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेचा जाता है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने एक गंभीर वैश्विक तेल संकट की आशंका पैदा कर दी है। लेकिन जिन राजमार्ग संचालकों से हमने बात की। उनके लिए यह एक अप्रत्याशित लाभ का अवसर है, जिसके चलते वे ईंधन की हेराफेरी और जमाखोरी कर रहे हैं। इस ईंधन को वे अभी से अधिक कीमतों पर बेचकर फायदा तो उठा ही रहे हैं, साथ ही भविष्य में ईंधन की कमी होने पर कई गुना लाभ कमाने की योजना भी बना रहे हैं।

‘हम डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन ले जाने वाले टैंकरों से तेल की चोरी कर रहे हैं। लेकिन वे हमें एक बार में केवल 200-300 लीटर ही देते हैं। हमें एक बार में 1,500 लीटर ईंधन चाहिए। टैंकर चालक स्वयं तेल निकालने के लिए अपने वाहन हमारे पास लाते हैं। मुझे नहीं पता कि वे अपने टैंकों में तेल की कमी को कैसे पूरा करते हैं।’ -हाईवे पर ईंधन बेचने वाले रैकेट के सदस्य आरिफ ने तहलका के गुप्त रिपोर्टर से कहा।

‘हाईवे के किनारे लटकी हुई जो 20 लीटर की पानी की बोतलें आपको दिखाई देती हैं, उनका इस्तेमाल पाइपों के जरिए ट्रकों और टैंकरों से डीजल निकालने के लिए किया जाता है। इसके बाद ईंधन को बड़े-बड़े कंटेनरों में भरकर खुले बाजार में बेच दिया जाता है।’ आरिफ ने आगे कहा।

‘ट्रक चालक खुद आकर अपने ट्रकों से हमें डीजल बेच रहे हैं। उनके आने का कोई निश्चित समय नहीं है, लेकिन वे हमें 75 रुपये प्रति लीटर की दर से डीजल बेचते हैं। हम एक ट्रक से 25-30 लीटर डीजल निकालते हैं।’ -आरिफ ने कहा।

‘आपको पुलिस की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम हाईवे पर पास ही खड़े रहते हैं, जबकि टैंक में पाइप डालकर ट्रक से डीजल निकाला जाता है। हम स्थानीय पुलिस को पैसे दे रहे हैं, ताकि वे इस मामले को नजरअंदाज करें।’ -आरिफ ने रिपोर्टर से कहा।

‘यदि आप हमें अपने ट्रक से 1,000 लीटर डीजल उपलब्ध करा सकते हैं, तो हम आपको कमीशन के रूप में 5 रुपए प्रति लीटर देंगे। तो 1,000 लीटर डीजल पर आपका कमीशन 5,000 रुपए होगा।’ -आरिफ के साथी राम ने ट्रांसपोर्टर बनकर आए तहलका के रिपोर्टर से कहा।

‘आज होली है और हमने अब तक लगभग 500 लीटर डीजल एकत्र कर लिया है। कभी-कभी त्योहारों के दौरान ट्रक चालक अधिक डीजल बेचते हैं। हम इसे 80 रुपए प्रति लीटर की दर से लेते हैं।’ -अवैध ईंधन रैकेट में शामिल तौफीक ने तहलका के गुप्त पत्रकार से कहा।

‘यदि आप हमसे डीजल खरीदना चाहते हैं, तो आप खरीद सकते हैं। इसकी कीमत 80 रुपए प्रति लीटर होगी और यह शुद्ध होगा। ट्रकों से जो कुछ भी हम चुराएंगे, वो आपको बेच दिया जाएगा।’ -तौफीक ने कहा।

‘हम अब डीजल का भंडारण कर रहे हैं, न कि इसकी बिक्री कर रहे हैं। क्योंकि इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से तेल संकट उत्पन्न होने की आशंका है। अगर डीजल की कमी हो जाती है, तो हम उसे अधिक कीमतों पर बेचेंगे।’ -तौफीक ने आगे कहा।

‘मैं 3-4 महीने पहले ट्रकों से 82 रुपए प्रति लीटर की दर से चोरी का डीजल लेता था। लेकिन मैंने अब यह काम बंद कर दिया है, क्योंकि पुलिस आई और उसने राजमार्ग के दोनों किनारों पर इस व्यापार में शामिल और खुले बाजार में ईंधन बेचने वाली सभी दुकानों को ध्वस्त कर दिया।’ -ईंधन की चोरी में शामिल एक अन्य ऑपरेटर शाकिर ने कहा।

‘टैंकर चालक अवैध रूप से इन ऑपरेटरों को डीजल बेच रहे हैं, जो फिर इसे स्थानीय उपभोक्ताओं को बेचते हैं। पेट्रोल पंपों पर अधिक कीमत चुकाने वालों को यहां सस्ता पेट्रोल मिल रहा है।’ -इन गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी और राजमार्ग पर चाय की दुकान के मालिक मुबारक ने यह बात कही।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच ये राजमार्ग संचालक बड़े पैमाने पर डीजल का भंडारण कर रहे हैं, ताकि तेल संकट की स्थिति में वे इसे खुले बाजार में अधिक कीमतों पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमा सकें। ये बेईमान ऑपरेटर हरियाणा के मेवात क्षेत्र में नूह जिले के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सक्रिय हैं। अरावली पहाड़ियों के पास नूह को पार करते समय सड़क के दोनों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक लगातार 20 लीटर पानी की बोतलों की कतारें लटकी हुई देखी जा सकती हैं।

इन स्थानों के पास पहुंचने पर पान-मसाला जैसी चीजों से लेकर छोटी चाय की दुकानें दिखाई देती हैं, लेकिन ये दुकानें केवल एक आवरण के रूप में काम करती हैं। उनके पीछे ट्रकों से तेल निकाला जाता है और इच्छुक खरीदारों को बेचा जाता है। पाइप इधर-उधर लटके रहते हैं और चोरी किए गए ईंधन को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े कंटेनर इन दुकानों पर रखे जाते हैं।

ईंधन की हेराफेरी का यह चौंकाने वाला रैकेट हरियाणा में सामने आया है, जहां संगठित गिरोह वर्षों से टैंकरों और ट्रकों से हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल की हेराफेरी हर दिन कर रहे हैं- कथित तौर पर अधिकारियों की नजर में आए बिना या शायद उनकी मौन मिलीभगत से।

मौजूदा युद्ध परिदृश्य में आगे की जांच करने के लिए तहलका रिपोर्टर ने राजमार्गों के किनारे ईंधन के इस अवैध धंधे के संगठित नेटवर्क की पड़ताल की। राजस्थान से लौटते समय हमारे रिपोर्टर ने अपनी पहचान छिपाकर इन तेल माफियाओं से कहा कि हमारे पास कई ट्रक हैं और हम ईंधन परिवहन के व्यवसाय में हैं। रिपोर्टर ने इस रैकेट में शामिल लोगों के सामने डीजल और पेट्रोल बेचने का प्रस्ताव रखा।

तहलका के गुप्त रिपोर्टर ने सबसे पहले मेवात में आरिफ से संपर्क किया। आरिफ अपनी दुकान पर बैठा था। उसके चारों ओर तेल के पाइप लटक रहे थे और पास में बड़े-बड़े कंटेनर रखे हुए थे। रिपोर्टर ने उनसे राजमार्ग के किनारे लटकी हुई 20 लीटर की पानी की बोतलों के बारे में पूछा। आरिफ ने बताया कि वे उसकी हैं, जिन्हें उसने सड़क किनारे लटका रखा है, ताकि यह संकेत मिल सके कि वह उन ट्रकों से डीजल खरीद रहा है, जो डीजल बेचने को तैयार हैं।

उसने रिपोर्टर को यह भी बताया कि ट्रक ड्राइवर खुद आकर उसे डीजल बेचते हैं। उसने ट्रक और टैंकर चालकों की मिलीभगत से ट्रकों से ईंधन प्राप्त करने की बात स्वीकार की।

इस बातचीत में आरिफ ने राजमार्ग के किनारे लटकी बोतलों पर अपना स्वामित्व सहजता से स्वीकार किया है। इस बातचीत से ड्राइवरों और स्थानीय ऑपरेटरों के बीच एक नियमित और लगभग खुले धंधे का पता चलता है। इस गतिविधि का जिस सहजता से वर्णन किया गया है, वह सबसे अलग है, जिससे पता चलता है कि यह न तो छिपी हुई है और न ही असामान्य है।

रिपोर्टर : ये बोतल्स तो तुम्हारे लटक रहे हैं?

आरिफ : हां, पर अब ना है, ट्रक वाले ही देते हैं।

रिपोर्टर : अच्छा ट्रक वाले दे जाते हैं तुम्हें डीजल-पेट्रोल?

आरिफ : हां, ट्रक वाले दे भी देवे।

आरिफ ने रिपोर्टर को बताया कि राजमार्ग के किनारे लटकी हुई पानी की बोतलें उसकी हैं और इनका इस्तेमाल ईंधन ले जाने वाले ट्रकों के टैंक में पाइप डालकर डीजल निकालने के लिए किया जाता है। उसने कहा कि एकत्रित डीजल को बाद में बड़े कंटेनरों में भर दिया जाता है। आरिफ ने आगे कहा कि यह गतिविधि बिना किसी डर के जारी है, यहां तक कि दिन दहाड़े भी ट्रक आकर इस रैकेट में शामिल लोगों को ईंधन की आपूर्ति करते हैं।

रिपोर्टर : ये तो कैन्स छोटे पड़़ते होंगे तुम्हारे, जो सड़क पर लटका रखे हैं?

आरिफ : इनमें तो निकाले…।

रिपोर्टर : तो अपनी टंकी से निकालते होंगे, तो छोटे तो नहीं पड़ते?

आरिफ : वो कैन्स हैगी, कैन्स में डाल दें।

रिपोर्टर : अच्छा इसमें निकाल लेते हो… कभी भी दे जाए… दिन हो या रात हो?

आरिफ : हां।

फिर हमने आरिफ को एक प्रस्ताव दिया, जिसमें हमने कहा कि हम उसे अपने ट्रकों से ईंधन बेचना चाहते हैं। वह सहमत हो गया और उसने हमें बताया कि वह 75-80 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल खरीदता है। आरिफ ने आगे बताया कि वह नियमित रूप से प्रतिदिन एक ही ट्रक से लगभग 25-30 लीटर ईंधन प्राप्त करता है।

रिपोर्टर : अच्छा हमारे पास ट्रक हैं, अगर हम तेल देना चाहें तुम्हें?

आरिफ : ट्रक हैं, कोई दिक्कत न है, आप दे दियो…।

रिपोर्टर : डीजल-पेट्रोल ले लेते हो, क्या रेट लेते हो?

आरिफ : हम तो डीजल तो ऐसे लेते हैं – 76-80…।

रिपोर्टर : तो तुम्हें कब दे जाते हैं?

आरिफ : ट्रक वाले कभी भी दे जाएं।

रिपोर्टर : कितना?

आरिफ : 20, 30, 40 लीटर्स।

रिपोर्टर : रोज?

आरिफ : हां।

रिपोर्टर : 25-30 लीटर डेली आ जाता है तुम्हारे पास?

आरिफ : हां।

रिपोर्टर : एक ट्रक से?

आरिफ : हां।

रिपोर्टर : तो कितने ट्रक्स से ले लेते हो?

आरिफ : ये तो गाड़ी वाले पर है, जिस पर बच जाए, वो दे जाते हैं, कोई फिक्स न है, जिनपे डीजल हो, वो गेर जाते हैं।

रिपोर्टर : रात में, दिन में, कभी भी?

आरिफ : हां।

अब आरिफ ईंधन की बहुत अधिक मात्रा को संभालने की तत्परता प्रदर्शित करता है। आरिफ ने हमसे प्रतिदिन 1,000 लीटर डीजल की आपूर्ति करने को कहते हुए कहा कि इतना डीजल वह आसानी से खरीद सकता है। उसने कहा कि वह इसे 75 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदेगा, जो प्रतिदिन 75,000 रुपए बनता है और इसका भुगतान भी नकद करेगा।

रिपोर्टर : वो कितना ले जाते हैं रोज?

आरिफ : डीजल के ऊपर है, आप तो हमें दे दो, ….1000 लीटर्स।

रिपोर्टर : 1000 लीटर्स ले लोगे रोज?

आरिफ : हां।

रिपोर्टर : 1000 लीटर्स कितने का हो जाएगा?

आरिफ : 1 लीटर 80 का भी हुआ, 75-80 लेबें हम।

रिपोर्टर : 75 हजार रुपया डेली?

आरिफ : आप डीजल दोगे तो मैं पैसे दूंगा।

रिपोर्टर : मैं वही तो कह रहा हूं, 75000 रुपए डेली दोगे तुम हमें?

आरिफ : हां।

रिपोर्टर : ठीक है फिर।

फिर हमने आरिफ से सौदे की सच्चाई जानने के लिए उसे यूं ही बताया कि हमारे ट्रांसपोर्टर से हमारे ट्रक दिल्ली और जयपुर के बीच प्रतिदिन 10-15 चक्कर लगाते हैं और पूछा कि अगर हम उसे नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति करें, तो हमें क्या लाभ होगा? इस पर आरिफ ने कहा कि वह हमारा अच्छे से ख्याल रखेगा। उसने नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति होने पर हमें लाभ का आश्वासन दिया। उसने खुलासा किया कि वह उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों को डीजल की आपूर्ति करता है, उसके यहां किसानों को ईंधन  कम दरों पर मिलता है। उसने आगे कहा कि कुछ ट्रक उससे प्राप्त ईंधन का उपयोग भी करते हैं। आरिफ से यह बातचीत दर्शाती है कि कैसे बड़ी खामोशी से विभिन्न क्षेत्रों में यह नेटवर्क फैला हुआ है।

रिपोर्टर : तेल दिलवा दिया करेंगे, हमारा क्या फायदा होगा उसमें?

आरिफ : वो तुम लेकर आओगे, तुम्हारा फायदा कर देंगे।

रिपोर्टर : कितना ले सकते हो… 100-200 लीटर? 10-15 गाड़ी डेली जाती है, जयपुर अप-डाउन करती हैं…।

आरिफ : कोई दिक्कत न है, हमारा तो देखो शामली में है, खेती-बाड़ी दे देवे हम जो हमारे राजस्थान वाले हैं ना, वहां तेल महंगा है, वो तेल ले जावे, 2-4 रुपए का उनको फायदा हो जाता है…।

रिपोर्टर : तुमसे राजस्थान वाले भी ले जाते हैं, खेती वाले किसान भी?

आरिफ : हां, कुछ गांव में ट्रक में भी डाल दें।

रिपोर्टर : वो ले जाते होंगे किसान तुमसे राजस्थान वाले?

आरिफ : हां।

अब रिपोर्टर ने आरिफ के साथ सौदे को लगभग अंतिम रूप दे दिया था। इस समझौते के तहत रिपोर्टर ने कहा कि हम तुम्हें प्रतिदिन 1,000 लीटर डीजल 75 रुपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराएंगे। आरिफ ने कहा कि आपका ट्रक राजमार्ग के किनारे खड़ा होगा, जहां से हम और हमारे सहयोगी पाइप के सहारे ट्रक से ईंधन निकाल लेंगे। उसने आगे कहा कि यह प्रक्रिया दिन के किसी भी समय की जा सकती है।

रिपोर्टर : डीजल क्या ऊपर से लोगे आप, हाईवे से, या नीचे आना पड़ेगा?

आरिफ हम तो हाईवे से निकालेंगे जहां आपकी गाड़ी खड़ी है ना, पाइप डालो तेल निकालो।

रिपोर्टर : ठीक है। दिन में, रात में, कभी भी निकालो, कोई दिक्कत तो नहीं है?

आरिफ : नहीं।

रिपोर्टर : कोई भसूड़ी तो नहीं है, पता चले कभी दिक्कत हो जाए?

आरिफ : नहीं नहीं, आप बात करा दो, कोई बात नहीं, आपकी कमीशन दे देंगे।

रिपोर्टर : तुम्हारा नंबर ले लिया है, मेरा चला गया होगा तुम्हारे पास।

इसके बाद आरिफ ने हमें आश्वासन दिया कि पुलिस से कोई परेशानी नहीं होगी। उसने कहा कि जब हमारे ट्रक से डीजल निकाला जा रहा होगा, तो वह खुद राजमार्ग पर पास ही मौजूद रहेगा और इस बात पर जोर दिया कि पुलिस इस पर आंखें मूंद लेगी, क्योंकि उन्हें ऐसा करने के लिए पैसे दिए जाते हैं।

रिपोर्टर : कोई टेंशन तो नहीं है, पुलिस वाले आ जाएं?

आरिफ : कोई दिक्कत न है…।

रिपोर्टर : पुलिस वाले आ गए, तो सेटिंग आप करोगे ना?

आरिफ : वो हमारी है ना, तेल निकालते वक्त खड़े हो जाएंगे हम, कुछ न बोलेंगे।

रिपोर्टर : पुलिस वाले भी तो ले ही रहे होंगे तुमसे?

आरिफ : हां।

जब हम आरिफ से बात कर रहे थे, तभी उसकी दुकान की बगल में शराब की दुकान चलाने वाला उनका साथी राम हमारे साथ बातचीत में शामिल हो गया और उसने एक सौदा पेश किया। राम ने 5 रुपए प्रति लीटर का कमीशन प्रस्तावित किया। उसने कहा कि अगर हम उन्हें एक दिन में 1,000 लीटर बेचते हैं, तो हमारा कमीशन 5,000 रुपए प्रति दिन होगा।

इस बातचीत में आरिफ और राम ईंधन की आपूर्ति के लिए कमीशन के बारे में खुलकर बात करते हैं। वे प्रति लीटर एक निश्चित लाभ देने को कहते हैं और यह आश्वासन देते हैं कि भुगतान सुचारू और सीधे किया जाएगा। वे यह भी संकेत देते हैं कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, क्योंकि नेटवर्क में कोई भी व्यक्ति इसे संभाल सकता है। इस वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि अलग-अलग आकार के डिब्बों और बोतलों का उपयोग करके ईंधन कैसे एकत्र किया जाता है।

आरिफ : जैसे आपकी गाड़ी तेल देगी हमें, 40 लीटर तेल देगी हमें, तो उसपे आपको हम 100-200…।

राम (हस्तक्षेप करते हुए) : 5 रुपए आपका कमीशन मिलाओ, जैसे 75-80 है, तो 5 रुपया आपका।

रिपोर्टर : जैसे?

राम : जैसे आपसे बात हो गई हमारी रुपए 75 की, आप 5 रुपए कमीशन रखो।

रिपोर्टर : 1 लीटर्स पर 5 रुपए कमीशन?

राम : आपको 5000 रुपए सीधे पड़ रहे हैं।

आरिफ : आपका 5 रुपए कमीशन है, चाहे 10 दे, 20 लीटर दे।

रिपोर्टर : जैसे आरिफ नहीं मिला तो आप मिलोगे।

राम : कोई भी मिले।

रिपोर्टर : कल हो जाएगा… कल?

राम : आप फोन करके बता देना हमारी गाड़ी है, आप निकाल लो, आपके  5 रुपए से पैसे पहुंच जाएंगे, बात खतम।

रिपोर्टर (पास में रखे डिब्बों की ओर इशारा करते हुए) : इसमें लेते होगे तुम?

आरिफ : इसमें भी ले लेते हैं, बोतल भी हैं, जैसे 25 लीटर्स की।

आरिफ ने हमें यह भी बताया कि वह टैंकर चालकों की मिलीभगत से तेल डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन ले जाने वाले तेल टैंकरों से ईंधन प्राप्त करता है। उनके अनुसार, रास्ते में टैंकर अक्सर ईंधन उतारने के लिए रुकते हैं, जिससे उसे एक ही बार में लगभग 200-300 लीटर ईंधन की आपूर्ति हो जाती है। उसने कहा कि ये ड्राइवर अपने टैंकों में होने वाली इस कमी को कैसे पूरा करते हैं, यह उसे नहीं पता। लेकिन उसे एक टैंकर से कम से कम 1500 लीटर ईंधन की आवश्यकता रहती है। आरिफ ने हमसे अनुरोध किया कि हम उसे ऐसे किसी भी टैंकर ऑपरेटर से संपर्क कराएं, जो ईंधन बेचने को तैयार हो।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले हमने आरिफ से पहली बार बात की थी। शत्रुता बढ़ने के बाद 4 मार्च 2026 को होली के दिन हम खाड़ी देशों से ईंधन की आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन की कमी की आशंकाओं के बीच स्थिति का आकलन करने के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेवात लौट आए। पहले की तरह हमारी कार अरावली पहाड़ियों के पास रुक गई, जहाँ कई ऑपरेटर 20 लीटर की बोतलें दुकानों के पास लटकाए हुए दिखाई दिए। हमने ऐसे ही एक ऑपरेटर तौफीक से मुलाकात की, जिसने हमें बताया कि वह आपूर्ति में व्यवधान और ऊंची कीमतों की आशंका के चलते डीजल बेचने के बजाय उसका भंडारण कर रहा है। तौफीक ने बताया कि उस दिन सुबह से ही उसने लगभग 500 लीटर तेल जुटा लिया है।

हमने तौफीक को एक प्रस्ताव भी दिया, जिसमें हमने कहा कि हम उसे डीजल बेचना चाहते हैं। उसने हमें बताया कि वह 80 रुपए प्रति लीटर की दर से तेल खरीद रहा है। उसने हमसे 1000 लीटर तक तेल खरीदने की तत्परता व्यक्त की।

इस बातचीत के दौरान तौफीक ने दिन भर में प्राप्त ईंधन की मात्रा साझा की और बताया कि त्योहारों के दौरान भी मात्रा में उतार-चढ़ाव हो सकता है। उसने कहा कि आपूर्ति रुक-रुक कर आने वाले ट्रकों पर निर्भर करती है। वह उस दर का भी उल्लेख करता है, जिस पर वह डीजल खरीदने को तैयार है। बातचीत का अंत इस बात से होता है कि वह बिना किसी झिझक के बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के लिए तैयार है।

रिपोर्टर : तुम यहां हाईवे पर कितने दे देते हो, कितने ट्रक से तेल ले लेते हो रोज?

तौफीक : अब आज करीबन आ गया होगा 500 लीटर्स तेल।

रिपोर्टर : आज 500 लीटर आ गया?

तौफीक : ज्यादा आ गया होगा।

रिपोर्टर : तुम तो कह रहे थे त्योहार है, होली है कहां से आएगा?

तौफीक : कोई कोई गाड़ी आ जाती है, कुछ त्योहार के मारे ज्यादा बेचते हैं, अब कल नहीं… परसों आएगा।

रिपोर्टर : कैसे लोगे कैसे हमसे?

तौफीक : 80 रुपए (पर) लीटर लेंगे।

रिपोर्टर : ज्यादा लो यार।

तौफीक : ज्यादा, बोतल से लेंगे तो 80 रुपए लीटर लेंगे।

रिपोर्टर : 1 बोतल 20 लीटर की है तुम्हारी?

रिपोर्टर  (आगे) : 1000 लीटर दे दें तुम्हें रोज?

तौफीक : 1000 क्या, कितना भी दे दो…।

तौफीक ने हमें भी 80 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल बेचने पर भी सहमति जताई। निम्न बातचीत में तौफीक डीजल की खरीद और बिक्री दरों पर चर्चा करता है, जिससे विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ मूल्य निर्धारण में स्पष्टता आती है। तौफीक ने कहा है कि किस प्रकार बर्तनों का उपयोग किया जाता है, जिससे उनका आभासी आयतन बढ़ जाता है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान केवल नकद में ही होगा, क्रेडिट का चक्कर नहीं रहेगा। यह आदान-प्रदान मूल्य निर्धारण रणनीतियों और प्रबंधन विधियों के मिश्रण को दर्शाता है।

रिपोर्टर : और जैसे हमें आपसे खरीदना हो डीजल, क्या रेट दोगे हमें?

तौफीक : आपको लगेगा 80 रुपए (पर) लीटर के हिसाब से।

रिपोर्टर : मतलब लोगे भी 80 का, और दोगे बी 80 का?

तौफीक : हम यहां गांव में फिलहाल 73 रुपए लीटर देते हैं, 85 रुपए लीटर लेते हैं…।

रिपोर्टर : तुम्हारा क्या फायदा हो रहा है इसमें, ज्यादा में ले रहे हो, कम में बेच रहे हो?

तौफीक : ये केन्स है 20 लीटर्स की, इसमें आ रहा है 40 लीटर्स है।

रिपोर्टर : ऐसा क्यों?

तौफीक : ऐसा ही होता है, एक कैन 20 की है, उसमें 25 आ रहा है।

रिपोर्टर : पैसे साथ के साथ, उधार नहीं होगा?

तौफीक : हम्म, उधार नहीं होगा।

रिपोर्टर : हमें दोगे कितना?

तौफीक : 80 रुपए पर लीटर।

रिपोर्टर : डीजल प्योर होगा?

तौफीक : जो गाड़ी से निकलेगा, वो होगा।

निम्नलिखित बातचीत में तौफीक ने बताया कि जब ट्रकों के पास ईंधन होता है, तो वे अपने आप कैसे रुक जाते हैं। उसने कहा कि डीजल निकालने में लगने वाला समय उपलब्ध मात्रा पर निर्भर करता है। तौफीक ने हमें यह भी आश्वासन दिया कि हम उसे बिना किसी डर के अपना तेल बेच सकते हैं।

रिपोर्टर (दुकान की ओर एक ट्रक को आते देख) : ये आ गया तुम्हें देने के लिए?

तौफीक : ना, अपने आपसे रुकता है कोई होता है तो, इसको डीजल देना होता तो रुक जाता।

रिपोर्टर : कितनी देर में निकाल लेते हो पाइप डालकर आप?

तौफीक : डीजल के हिसाब से होता है।

रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं होगी?

तौफीक : न।

इस बातचीत में रिपोर्टर ने गतिविधि के दौरान संभावित पुलिस कार्रवाई के बारे में चिंता व्यक्त की। तौफीक इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहता है कि कोई समस्या नहीं होगी। उसका सुझाव है कि पुलिस को नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए न कि इस तरह के लेनदेन पर। वह जिम्मेदारी भी लेता है और यह सुनिश्चित करता है कि सब कुछ व्यवस्थित रूप से संभाला जाएगा।

रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं होगी?

तौफीक : न।

रिपोर्टर : पुलिस की?

तौफीक : न, वो तो चालान देखते हैं।

रिपोर्टर : पुलिस वाले कहीं हमें पकड़ लें, तुम्हें पकड़ लें? कोई दिक्कत तो नहीं होगी?

तौफीक : न।

रिपोर्टर : तुम्हारी जिम्मेदारी है।

तौफीक : हां, बिलकुल।

मेवात के नूंह में उसी हाईवे पर तहलका रिपोर्टर की मुलाकात एक अन्य ऑपरेटर शाकिर से हुई। हमने उसकी चाय की दुकान पर तेल निकालने वाली पाइप्स और 20 लीटर की पानी की बोतलें लटकी हुई देखीं, लेकिन उसने कहा कि उसने 3-4 महीने पहले ट्रकों से ईंधन लेना बंद कर दिया था। जब हमने उनसे इसका कारण पूछा, तो शाकिर ने बताया कि पुलिस ने राजमार्ग के किनारे ऐसी दुकानों को नष्ट कर दिया था, जो इस गतिविधि में शामिल थीं। इस चर्चा में पहले की दरों और राजमार्ग पर यह प्रथा किस प्रकार प्रचलित है, इस पर भी बात की गई है।

रिपोर्टर : बोतल तो टांग रखी हैं तुमने, पाइप भी टंगे हैं?

शेखर : लेते नहीं हैं जी।

रिपोर्टर : बंद कर दिया? क्यूं?

शेखर : नहीं लेते, बस।

रिपोर्टर : लफड़ा हो गया कोई?

शेखर : लफड़ा कोई नहीं है।

रिपोर्टर : पहले डीजल ले रहे थे आप?

शेखर : हां पहले ले रहे थे, 3-4 महीने पहले।

रिपोर्टर : क्या रेट?

शेखर : 82

रिपोर्टर : पुलिस वालों ने बंद करा दी तुम्हारी…?

शेखर : सब बंद करा दीं, तोड़ दीं।

रिपोर्टर : इस हाईवे की सारी बंद?

शेखर : पहले बोतल टंगी रहती थी, चोरी की वजह से तुड़वाए हैं।

रिपोर्टर : पुलिस वालों ने क्यों बंद करा दी?

शेखर : ट्रक वाले बदतमीजी करें, लफड़ा, चोरी, फोन छीनो। धंधे के नाम पर गुंडागर्दी उठा रखी है….।

उसी राजमार्ग पर रिपोर्टर की मुलाकात मुबारक नाम के एक चाय विक्रेता से हुई, जिसने बताया कि उसने इस तरह की गतिविधियों को देखा है। मेवात में राजमार्ग के किनारे लटकी हुई 20 लीटर की पानी की बोतलों के बारे में पूछे जाने पर उसने बताया कि उनका इस्तेमाल ट्रकों से ईंधन निकालने के लिए किया जाता था। इसके बाद यह ईंधन खुले बाजार में लाभ के लिए बेचा जाता है। मुबारक ने आगे कहा कि ट्रक चालक स्वयं इन ऑपरेटरों को ईंधन की आपूर्ति करते हैं।

रिपोर्टर : ये मैंने हाईवे पर देखे हैं बहुत सारे बोतल्स टंगे रहते हैं?

मुबारक : डीजल लेते होंगे वो।

रिपोर्टर : किससे?

मुबारक : ट्रक वालों से।

रिपोर्टर : उसका क्या करते हैं… डीजल का?

मुबारक : बेच देते हैं, 10 रुपए फालतू महंगा बेच देते हैं। 10-20 रुपए कमा लेते हैं।

रिपोर्टर : दे जाते हैं ट्रक वाले ऐसे?

मुबारक : हां।

रिपोर्टर : मैंने बहुत देखे हैं दोनों साइड टंगे हुए।

मुबारक : हमारे यहां नहीं रखते जी, वो पल्ली साइड में रखते हैं।

रिपोर्टर : मेवात में?

मुबारक : हां।

रिपोर्टर : ट्रक खड़े हुए थे उधर।

मुबारक : वो करवा लेते हैं, जैसे डीजल बचा हुआ है किसी गाड़ी में।

रिपोर्टर : या ट्रक वालों को जरूरत पड़ गई पैसों की?

मुबारक : हां।

जब मुबारक से पूछा गया कि क्या पुलिस ऐसे ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई करती है? तो उसने कहा कि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मुबारक ने बताया कि राजमार्ग के किनारे खुलेआम ईंधन बेचा जाता है। न तो विक्रेताओं को और न ही खरीदारों को पकड़े जाने का डर लगता है। वह इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रक चालक और स्थानीय ऑपरेटर खुलेआम ये लेन-देन करते हैं।

रिपोर्टर : ये पकड़े नहीं जाते? पुलिस वाले पकड़ लें डीजल बेचते हुए?

मुबारक : कोई नहीं पकड़ रहा।

रिपोर्टर : क्यूं? खुलेआम बेच रहे हैं वो?

मुबारक : हां।

रिपोर्टर : ट्रक वाले भी खुलेआम, और वो भी खुलेआम खरीद रहे हैं?

मुबारक : हां।

जब मुबारक से पूछा गया कि लोग पेट्रोल पंपों के बजाय इन ऑपरेटरों से पेट्रोल और डीजल क्यों खरीदते हैं? तो उसने कहा कि उन्हें पंपों की तुलना में यहां से कम कीमत पर ईंधन मिलता है। इस चर्चा में इस स्थानीय मांग के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला गया है।

रिपोर्टर : ये गांव वाले जो इनसे डीजल खरीदते हैं, ये पेट्रोल पंप्स से नहीं ला सकते?

मुबारक : वहां मंदा नहीं मिलता इनको।

रिपोर्टर : महंगा मिलता है?

मुबारक : महंगा मिलता है।

रिपोर्टर : ये सस्ता दे रहे होंगे?

भारत में साधारण दुकानों, गुमटियों या जनरल स्टोर्स से पेट्रोल और डीजल नहीं बेचा जा सकता है। वैध लाइसेंस के बिना ईंधन बेचना, भंडारण करना या आयात-निर्यात करना अवैध है। इसके लिए न्यूनतम 250 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति आवश्यक है। सुरक्षा संबंधी गंभीर जोखिमों के कारण ईंधन को खुले रूप में (बोतलों या डिब्बों में) बेचना भी प्रतिबंधित है। हालांकि तहलका की पड़ताल में मेवात राजमार्ग पर कई ऐसे ऑपरेटरों का पर्दाफाश हुआ, जो ट्रक और टैंकर चालकों की मिलीभगत से डिपो से पेट्रोल पंपों तक जाने वाले ट्रकों और टैंकरों से ईंधन की चोरी करते हैं, उसे जमा करते हैं और बाद में मुनाफा कमाने के लिए उसे कम दरों पर बेचते हैं। एक ऑपरेटर ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से उत्पन्न होने वाले संभावित संकट का फायदा उठाने के लिए डीजल की जमाखोरी करने की बात भी स्वीकार की।

सूत्रों के अनुसार, राजमार्ग स्तर पर यह गतिविधि वर्षों से जारी है, जिस पर अधिकारी कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं करते। खबरों के मुताबिक, संगठित गिरोहों द्वारा हजारों लीटर डीजल और पेट्रोल की हेराफेरी की गई है, जिससे हजारों करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। ये समूह 15-20 मिनट के भीतर ईंधन निकाल लेते हैं, अक्सर दिन-दहाड़े व्यस्त राजमार्गों पर। इन अभियानों की व्यापकता और सरलता से प्रवर्तन संबंधी कमियों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। यदि इस अवैध गतिविधि पर रोक नहीं लगाई गई, तो इनसे एक समानांतर, अनियमित ईंधन बाजार के पनपने का खतरा है।

बंगाल में ओवैसी की एंट्री से सियासी हलचल, ‘वोटिंग मशीन’ बयान पर बढ़ा विवाद

असदुद्दीन ओवैसी | Image Source : PTI (फाइल फोटो)
असदुद्दीन ओवैसी | Image Source : PTI (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: Murshidabad में हुई एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने ऐसा बयान दिया, जिसने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। Humayun Kabir के साथ मंच साझा करते हुए ओवैसी ने कहा कि अब तक मुसलमानों को सिर्फ “वोटिंग मशीन” की तरह इस्तेमाल किया गया है।

ओवैसी ने अपने भाषण में साफ तौर पर Mamata Banerjee, कांग्रेस और लेफ्ट पर निशाना साधा। उनका कहना था कि इन पार्टियों ने सालों तक अल्पसंख्यकों से वोट तो लिए, लेकिन उनके विकास के लिए ठोस काम नहीं किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब आबादी में हिस्सेदारी ज्यादा है, तो नौकरियों में भागीदारी इतनी कम क्यों है।

रैली में ओवैसी ने यह भी कहा कि जिस समाज का अपना नेतृत्व नहीं होता, वह आगे नहीं बढ़ पाता। उन्होंने हुमायूं कबीर को अपना करीबी बताते हुए कहा कि यह गठबंधन सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत नेतृत्व तैयार करने की कोशिश है।

वहीं, West Bengal की राजनीति में इस बयान का असर साफ दिखने लगा है। खासकर मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे इलाकों में, जहां पहले से ही कांग्रेस और टीएमसी का दबदबा रहा है, वहां अब नया समीकरण बनता दिख रहा है।

हुमायूं कबीर ने भी रैली में ममता सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ न्याय नहीं हुआ। इस बीच ओवैसी का यह बयान कि मतदाता “वोटिंग मशीन” नहीं बल्कि “किंगमेकर” बनें, चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव हो सकता है, जो आने वाले चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि यह सियासी बयानबाजी चुनावी नतीजों पर कितना असर डालती है।

Mount Everest पर मौत की साजिश, बीमार बनाकर रेस्क्यू के नाम पर करोड़ों की ठगी

Mount Everest, the world's highest peak. | Photo: AFP/Project Possible
Mount Everest, the world's highest peak. | Photo: AFP/Project Possible

नई दिल्ली: Nepal में स्थित माउंट एवरेस्ट पर एक खतरनाक ‘रेस्क्यू घोटाला’ सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। पुलिस जांच में पता चला है कि कुछ गाइड और शेरपा अपने ही क्लाइंट्स को जानबूझकर बीमार बना रहे हैं, ताकि उनके नाम पर मोटी कमाई की जा सके।

जांच के मुताबिक, पर्वतारोहियों के खाने या चाय में बेकिंग सोडा मिलाया जा रहा है। ज्यादा मात्रा में यह शरीर में जाने पर खून का संतुलन बिगाड़ देता है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये सभी लक्षण ऊंचाई पर होने वाली बीमारी यानी एल्टीट्यूड सिकनेस जैसे लगते हैं, जिससे पर्वतारोही घबरा जाता है।

जैसे ही हालत बिगड़ती दिखती है, तुरंत हेलिकॉप्टर रेस्क्यू की मांग की जाती है। यहीं से असली खेल शुरू होता है। एक रेस्क्यू ऑपरेशन के नाम पर कई तरह के बिल बनाए जाते हैं, जिनमें हेलिकॉप्टर, अस्पताल और इलाज का खर्च शामिल होता है। बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ अस्पताल और बिचौलिए भी शामिल हैं, जो कमीशन के लिए इस धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सैकड़ों फर्जी रेस्क्यू मामलों का पता चला है। इन मामलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय इंश्योरेंस कंपनियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। यह रकम करोड़ों में बताई जा रही है।

इस खुलासे के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या एवरेस्ट की चढ़ाई अब पहले जितनी सुरक्षित रह गई है। जहां एक तरफ लोग अपने सपनों को पूरा करने यहां आते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे गिरोह उनकी जान और पैसे दोनों के साथ खेल रहे हैं।

अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और पर्वतारोहियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

वैश्विक तनाव के बीच भारत-रूस साझेदारी मजबूत, ऊर्जा सहयोग बना बड़ा आधार

India और Russia के बीच रिश्ते एक बार फिर मजबूती की ओर बढ़े। (PTI Photo)
India और Russia के बीच रिश्ते एक बार फिर मजबूती की ओर बढ़े। (PTI Photo)

नई दिल्ली: India और Russia के बीच रिश्ते एक बार फिर मजबूती की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े हालात के चलते ऊर्जा बाजार में अस्थिरता आई है, जिसका असर कई देशों पर पड़ा है।

इसी बीच रूस के राजदूत Denis Alipov ने साफ कहा है कि भारत अपनी विदेश नीति को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी भी बाहरी दबाव में फैसले नहीं लेता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की तरफ से भारत के बाजार में रूस के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिशें सही नहीं हैं और इनका कोई असर नहीं पड़ रहा है।

दरअसल, होर्मुज क्षेत्र में जहाजों के फंसने और सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद भारत ने फिर से रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है। इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है। रूस का कहना है कि भारत ने हमेशा अपने हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए हैं और यही उसकी ताकत है।

अलीपोव ने यह भी बताया कि हाल के समय में भारत और रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में तेजी आई है। दोनों देश ऊर्जा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि वैश्विक दबाव के बावजूद दोनों देशों की दोस्ती लगातार मजबूत हो रही है।

इस बीच Narendra Modi के संभावित रूस दौरे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। रूस ने साफ संकेत दिए हैं कि मॉस्को इस साल प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का भव्य स्वागत करने के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच हर साल शिखर बैठक की परंपरा भी जारी है।

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin पिछले साल भारत आए थे और अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी रूस का दौरा करेंगे।

बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है, जो आने वाले समय में और गहराने के संकेत दे रही है।

बंगाल चुनाव में बवाल पर EC सख्त, TMC को सीधी चेतावनी

Election Commission की TMC को सीधी चेतावनी
Election Commission की TMC को सीधी चेतावनी

नई दिल्ली: West Bengal में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच Election Commission of India ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर हाल में निष्पक्ष चुनाव कराए जाएंगे।

यह बयान Kolkata में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के दफ्तर के बाहर हुई झड़प और धरने के बाद सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात को तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार नारेबाजी और धक्का-मुक्की हुई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया। हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पूरी रात सीईओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि चुनाव आयोग और सीईओ कार्यालय भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं और दूसरे राज्यों के लोगों को मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर All India Trinamool Congress को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने कहा है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह की गतिविधियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीईओ कार्यालय की ओर से यह भी बताया गया कि बेलेघाटा इलाके के एक पार्षद कुछ लोगों के साथ दफ्तर के बाहर घेराव और नारेबाजी कर रहे थे। जबकि वहां पहले से ही धारा-144 लागू है, जिसके तहत बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक होती है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

चुनाव आयोग ने दोहराया है कि इन घटनाओं का चुनाव प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और राज्य में हर हाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएंगे।

West Bengal chunav: मछली, आलू और बाहरी वोटर की सियासत, बंगाल चुनाव में ममता के तीन बड़े दांव

Mamata Banerjee. | Photo Credit: PTI
Mamata Banerjee. | Photo Credit: PTI

नई दिल्ली: West Bengal विधानसभा चुनाव में All India Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के बीच सियासी संग्राम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee अपनी जनसभाओं में तीन अहम मुद्दों—खान-पान की आज़ादी, आलू किसानों की समस्या और बाहरी वोटरों के आरोप—पर खास जोर दे रही हैं।

ममता बनर्जी अपनी रैलियों में लगातार कह रही हैं कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो लोगों के खान-पान पर रोक लग सकती है। उनका आरोप है कि अंडा, मछली और मांस जैसे खाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वह यह भी कहती हैं कि बीजेपी जिन राज्यों में सत्ता में है, वहां खाने-पीने को लेकर इसी तरह के नियम लागू हैं।

इसके साथ ही आलू का मुद्दा भी इस चुनाव में बड़ा बनकर सामने आया है। राज्य में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और किसानों व व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। ममता बनर्जी ने किसानों को हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा देने की बात कही है और दूसरे राज्यों में आलू की बिक्री पर लगी पाबंदियों में ढील देने का भी ऐलान किया है।

उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अगर किसानों को मुआवज़ा चाहिए, तो उन्हें तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करना होगा। राज्य में करीब 130 लाख टन आलू उत्पादन का अनुमान है, जिससे स्टॉक ज्यादा होने के कारण बिक्री में दिक्कतें आई हैं।

तीसरा बड़ा मुद्दा बाहरी वोटरों का है। ममता बनर्जी बीजेपी पर आरोप लगा रही हैं कि दूसरे राज्यों के लोगों को अवैध तरीके से मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और साजिश बताया है।

ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया है कि बड़ी संख्या में फर्जी फॉर्म भरकर ऐसे लोगों को वोटर बनाने की कोशिश की जा रही है जो राज्य के निवासी नहीं हैं। इस मामले को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा है।

इन तीनों मुद्दों के जरिए ममता बनर्जी सीधे आम जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं। बंगाल चुनाव में अब यह देखना अहम होगा कि ये रणनीति वोटरों पर कितना असर डालती है।