नई दिल्ली: नासिक में सामने आए टीसीएस से जुड़े कथित विवाद में अब एक पुरुष कर्मचारी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। कर्मचारी का दावा है कि उसके टीम लीडर और एक सहकर्मी ने उसके निजी जीवन को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
कर्मचारी के मुताबिक, उसे बच्चा न होने को लेकर ताना मारा गया और यहां तक कहा गया कि वह अपनी पत्नी को उनके पास भेजे। यह आरोप बेहद गंभीर हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है।
कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने इन बातों का विरोध किया, तो उसके खिलाफ ऑफिस में शिकायतें भेजी जाने लगीं और उस पर काम का दबाव बढ़ाया गया। उसका कहना है कि उसे लगातार मानसिक दबाव में रखा गया और डराने-धमकाने की कोशिश भी हुई।
इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर दबाव बनाए जाने के आरोप हैं। हालांकि, इस तरह के दावों की जांच जारी है और अभी तक पुलिस या कंपनी की तरफ से इन सभी आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
इस केस में पहले भी महिला कर्मचारियों ने उत्पीड़न और गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे। अब एक पुरुष कर्मचारी के सामने आने से जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है और कई शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही हैं, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कुछ की तलाश जारी है।
कंपनी की ओर से इस पूरे मामले को गंभीर बताया गया है और आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी तरह के उत्पीड़न या जबरदस्ती के लिए कंपनी में कोई जगह नहीं है।
फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और कई आरोप अभी साबित होना बाकी हैं। लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वर्कप्लेस में सुरक्षा, पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।




