भारत के विमानन उद्योग कठोर फिटनेस मानदंडों पर चलता है। केबिन क्रू मेंबर्स के लिए यह हमेशा खतरे की घंटी की तरह होता है। बीएमआई की जांच से लेकर वजन बढ़ने तक को लेकर उनके वेतन में कटौती और केबिन क्रू की नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। तहलका एसआईटी ने अपनी इस पड़ताल में पाया कि कैसे केबिन क्रू की शारीरिक बनावट, कार्य क्षमता, डील–डौल और वजन का घटना–बढ़ना उनकी नौकरी को प्रभावित करता है। इससे केबिन क्रू मेंबर्स के लिए तय इन मानदंडों की न्यायसंगतता को लेकर असहज सवाल उठते हैं। केबिन क्रू की समस्याओं और करियर के खतरे को लेकर तहलका की यह रिपोर्ट :-
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014 में पहली बार देश के विमानन नियामक ने यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए कि किसी भी अधिक वजन वाले या मोटे व्यक्ति को फ्लाइट स्टीवर्ड या एयर होस्टेस के रूप में नियुक्त नहीं किया जाए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, यह आवश्यक है, क्योंकि विमान नियम-1937 के नियम 38बी में कहा गया है कि उड़ान संचालन के दौरान कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए केबिन क्रू चिकित्सकीय रूप से फिट रहना चाहिए।
द इकोनॉमिक टाइम्स ने डीजीसीए के हवाले से कहा- “उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और केबिन सुरक्षा कर्तव्यों को कुशलतापूर्वक निभाने के लिए आवश्यक चपलता को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा परीक्षाओं की आवृत्ति निर्धारित की गई है।” मीडिया में आई खबरों के अनुसार, नए नियमों के तहत 40 वर्ष तक की आयु के केबिन क्रू सदस्यों को हर चार साल में चिकित्सा जांच करानी होगी। 40 से 50 वर्ष की आयु के लोगों को हर दो साल में यह परीक्षा देनी होगी, जबकि 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को यह परीक्षा सालाना देनी होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि डीजीसीए की आवश्यकता के अनुसार, बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) की गणना किलोग्राम में वजन को क्रू मेंबर्स की ऊंचाई के वर्ग से विभाजित करके की जाएगी। पुरुष केबिन क्रू के लिए 18-25 का बीएमआई सामान्य माना जाता है, जबकि महिला क्रू के लिए 18-22 का बीएमआई सामान्य माना जाता है। पुरुष क्रू सदस्यों के लिए 25-29.9 का बीएमआई अधिक वजन की श्रेणी में आता है और 30 या उससे अधिक का बीएमआई मोटापे की श्रेणी में आता है। महिला क्रू सदस्यों के लिए 22-27 का बीएमआई अधिक वजन माना जाता है और 27 या उससे अधिक का बीएमआई मोटापे की श्रेणी में आता है।
चिकित्सा रिपोर्टों के आधार पर चालक दल के सदस्यों को अयोग्य, अस्थायी रूप से योग्य या स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यदि बीएमआई अधिक वजन की श्रेणी में पाया जाता है, तो उन्हें ‘अस्थायी रूप से अयोग्य’ माना जाएगा और वजन कम करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो ‘अस्थायी रूप से अयोग्य’ की स्थिति अगले तीन महीनों तक जारी रहेगी। यह प्रक्रिया 18 महीने तक चल सकती है, जिसके बाद यदि व्यक्ति का वजन कम नहीं होता है, तो उसे ‘स्थायी रूप से अयोग्य’ घोषित कर दिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नागरिक उड्डयन नियामक द्वारा जारी किए गए इन 2014 के दिशा-निर्देशों के बाद एयर इंडिया के केबिन क्रू ने तुरंत नए नियमों की आलोचना करते हुए उन्हें पागलपन और भेदभावपूर्ण करार दिया। तब एयर इंडिया के केबिन क्रू यूनियन ने (ऑल इंडिया केबिन क्रू एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने) 2014 में मीडिया से कहा कि ‘इन नियमों से 2014 में कम से कम 600 सदस्यों के प्रभावित होने की संभावना है। ये दिशा-निर्देश मनमाने और भेदभावपूर्ण हैं। वे यूं ही एक दिन सुबह उठकर तुच्छ कारणों का हवाला देते हुए ऐसे नियम लागू नहीं कर सकते।’
2018 में एयरलाइन कर्मचारी संघों के कड़े विरोध के बाद डीजीसीए ने महिला केबिन क्रू के लिए वजन और ऊंचाई अनुपात संबंधी आवश्यकताओं में ढील देने की योजना बनाई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने एक ओर एयर होस्टेस के लिए अलग-अलग वजन-ऊंचाई की आवश्यकताओं को समाप्त करने की योजना बनाई है, वहीं दूसरी ओर पुरुष और महिला पायलटों और पुरुष केबिन क्रू के लिए अलग-अलग वजन-ऊंचाई की आवश्यकताओं को समाप्त करने की योजना है। डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए 2018 में कहा कि ‘नियमों का मसौदा जारी कर दिया गया है। हम अलग-अलग आवश्यकताओं को समाप्त करने और पुरुष और महिला केबिन और कॉकपिट क्रू दोनों के लिए एक ही नियम लागू करने की योजना बना रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि इसका मतलब यह नहीं होगा कि मोटे केबिन क्रू सदस्यों को अनुमति दी जाएगी, क्योंकि आपात स्थितियों से निपटने के लिए फिटनेस आवश्यक है।
2026 तक एयरलाइनों के चालक दल के सदस्यों के विरोध के बावजूद ये डीजीसीए दिशा-निर्देश अभी भी लागू हैं और अधिक वजन वाले या मोटे व्यक्तियों को केबिन क्रू के रूप में काम करने की अनुमति नहीं है। तहलका ने विमानन क्षेत्र में एक पड़ताल की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है या वे केवल कागजों पर ही मौजूद हैं। इस पड़ताल में यह भी समझने की कोशिश की गई कि इस क्षेत्र से जुड़े लोग इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या ये नियम और दिशा-निर्देश भेदभावपूर्ण या मनमाने हैं?

पड़ताल के दौरान तहलका ने विमानन क्षेत्र से जुड़े कई व्यक्तियों से बात की। कुछ लोगों ने इंडिगो का नाम लिया, जो अपने केबिन क्रू में केवल महिलाओं को ही नियुक्त करती है। उनके अनुसार, महिला क्रू मेंबर्स (परिचारिकाएँ) आमतौर पर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में हल्की होती हैं, जिससे प्रति उड़ान विमान का वजन 30-40 किलोग्राम कम हो जाता है और ईंधन की काफी बचत होती है।
‘महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स आमतौर पर पुरुषों की तुलना में कम होता है। इसलिए इंडिगो ने केबिन क्रू से पुरुष सदस्यों को हटा दिया है और केवल महिलाओं को ही नियुक्त किया है। इस तरह उन्होंने उड़ान का वजन कम कर दिया है और काफी मात्रा में ईंधन की बचत कर रहे हैं।’ -इंडिगो की पूर्व एयर होस्टेस माही (बदला हुआ नाम) ने तहलका के गुप्त रिपोर्टर को बताया।
‘मैंने इंडिगो में एयर होस्टेस के रूप में 7-8 साल काम किया। शादी के बाद मेरा वजन बढ़ गया। एयरलाइन ने मुझे उड़ान भरने से रोक दिया और वजन कम करने के बाद ही वापस आने को कहा। मुझे 4-5 किलो वजन कम करने में 1-2 महीने लगे। तब तक मुझे घर में ही रहने की सजा मिली हुई थी और मुझे केवल मेरा मूल वेतन ही मिल रहा था। -उन्होंने आगे कहा।
‘बीएमआई एक डीजीसीए का नियम है, इंडिगो का नहीं और इसका पालन सभी एयरलाइंस करती हैं। एक बार चालक दल के सदस्यों का वजन बढ़ जाता है, तो उन्हें तुरंत उड़ान भरने से रोक दिया जाता है और वजन कम करने के बाद ही वे वापस लौट सकते हैं।’ -माही ने कहा।
‘इंडिगो हर तीन महीने में हमारे वजन की जांच करती थी और सालाना हमारी पूरी मेडिकल जांच होती थी। यह डीजीसीए की एक अच्छी नीति है, क्योंकि इससे कर्मचारी फिट रहते हैं। इसे पुलिस विभाग में भी लागू किया जाना चाहिए, जहां अक्सर कर्मी अधिक वजन वाले होते हैं।’ – उन्होंने आगे कहा।
‘यदि किसी क्रू मेंबर को अधिक वजन होने के कारण काम से हटा दिया जाता है, तो एयरलाइन उसे वेतन नहीं देती है। अगर हम कोई गलती करते हैं, तो हमें वेतन नहीं मिलता। लेकिन अगर एयरलाइन से कोई गलती हो जाती है, तो भी वे हमें भुगतान करते हैं।’ -एयर इंडिया एक्सप्रेस की मौजूदा एयर होस्टेस काजल (नाम बदला हुआ) ने तहलका के रिपोर्टर से कहा।
‘केबिन क्रू के रूप में काम करते हुए समग्र स्वास्थ्य बनाए रखना बहुत कठिन है। आपका आहार, दृष्टि, वजन, सब कुछ मायने रखता है।’ -काजल ने कहा।
‘एयर इंडिया एक्सप्रेस में जाने से पहले जब मैंने विस्तारा ज्वाइन किया था, तब मेरा बीएमआई 17 किलोग्राम था और मुझे अंडरवेट घोषित किया गया था। मुझे अपना वजन बढ़ाने के लिए कहा गया था। जब मैंने एयर इंडिया एक्सप्रेस ज्वाइन की थी, तब मेरा बीएमआई 18 किलोग्राम था, जो एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए स्वीकार्य सीमा 18-25 के भीतर था।’ -काजल ने बताया।
‘इंडिगो कंपनी केबिन क्रू के लिए केवल महिलाओं को ही नियुक्त करती है, क्योंकि उनका मानना है कि यात्रियों से व्यवहार करते समय महिलाएं अधिक विनम्र होती हैं।’ -आगरा स्थित फ्रैंकफिन एयर होस्टेस इंस्टीट्यूट में सेंटर सेल्स मैनेजर रोहिता ने तहलका के गुप्त रिपोर्टर से बातचीत में एयरलाइन द्वारा केवल महिलाओं को ही रोजगार देने के फैसले के पीछे एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हुए यह बात कही।
‘इंडिगो के नियम बहुत सख्त हैं। उन्हें ऐसी साफ त्वचा की आवश्यकता होती है, जिस पर कोई दिखाई देने वाले निशान या टैटू न हों। अन्यथा इससे दिखावट प्रभावित होती है। सड़क दुर्घटनाओं के कारण शरीर पर दिखाई देने वाले निशान होने की स्थिति में भी, चालक दल के सदस्यों को काम से हटाया जा सकता है। इसीलिए हम प्रशिक्षुओं को सलाह देते हैं कि वे हमेशा इस तथ्य को ध्यान में रखें और गाड़ी चलाते समय सावधान रहें।’ -उन्होंने कहा।
‘जिन लोगों की दृष्टि कमजोर है, उन्हें चश्मा पहनने की अनुमति नहीं है। उन्हें हवाई यात्रा के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस पहनना अनिवार्य है। ड्यूटी के बाद चश्मा पहना जा सकता है।’ -रोहिता ने कहा।
‘फ्रैंकफिन में केबिन क्रू बनने की तैयारी कर रही लड़कियों को बालों की देखभाल, त्वचा की देखभाल और मेकअप करना सिखाया जाता है।’ -उन्होंने बताया।
‘मैंने देखा है कि केबिन क्रू के सदस्य स्वास्थ्य के प्रति बेहद जागरूक हो गए हैं। कई लोग घर का बना खाना पसंद करते हैं, भले ही एयरलाइंस भोजन प्रदान करती हों, क्योंकि उन्हें बाहर के खाने से वजन बढ़ने और अयोग्य घोषित होने का डर रहता है।’ -रोहिता ने कहा।
पड़ताल के दौरान तहलका ने सबसे पहले इंडिगो की पूर्व एयर होस्टेस माही से संपर्क किया। उन्होंने कुछ निजी कारणों से रिपोर्टर से मिलने से इनकार कर दिया, लेकिन फोन पर बात करने के लिए सहमत हो गईं। जब उनसे पूछा गया कि इंडिगो केबिन क्रू की भूमिकाओं के लिए केवल महिलाओं को ही क्यों नियुक्त करती है, तो उन्होंने कहा कि महिलाओं का वजन आम तौर पर पुरुषों की तुलना में कम होता है, जिससे प्रति उड़ान विमान का वजन 30-40 किलोग्राम कम करने में मदद मिलती है और ईंधन की बचत होती है। नीचे दी गई इस बातचीत में, ध्यान इस बात पर केंद्रित होता है कि एक एयरलाइन केवल महिला केबिन क्रू को ही क्यों प्राथमिकता देती है।
रिपोर्टर : ये मेल (पुरुष) के साथ क्यों नहीं है (वजन बनाए रखने की आवश्यकता), व्हाय ओनली फीमेल (सिर्फ महिलाओं के लिए ही क्यों?
माही : सर! इंडिगो में तो फीमेल्स ही थीं, एज पर माई नॉलेज। बाकी एयरलाइंस में मेल्स के साथ भी यही है।
रिपोर्टर : व्हाय डज इंडिगो हैव ओनली फीमेल्स? (इंडिगो में सिर्फ महिलाएं ही क्यों हैं?)
माही : सर! फीमेल्स का बीएमआई मेल के कंपैरिजन में कम होता है, इसलिए उन्होंने ये प्रोवीजन (प्रावधान) निकाला। उन्हें लगा कि अगर मेल्स को एलिमिनेट कर दें, तो एयरलाइन का ओवरऑल वेट कम हो जाएगा। फ्यूल कम लगेगा और लो-कॉस्ट मॉडल मेंटेन करना इजी होगा।
रिपोर्टर : बाकी एयरलाइंस में तो मेल्स हैं?
माही : हां जी, हैं।
रिपोर्टर : तो फ्यूल की चिंता और एयरलाइंस को भी होनी चाहिए, व्हाय ओनली इंडिगो? (सिर्फ इंडिगो को क्यों?)
माही : इसलिए तो इंडिगो ने ग्रोथ की है। बहुत छोटी-छोटी चीजें फालो करते हैं, ताकि फ्यूल सेव कर सके।
माही ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि उन्होंने इंडिगो में 7-8 साल तक एयर होस्टेस के रूप में काम किया। शादी के बाद उनका वजन बढ़ गया, जिसके बाद एयरलाइन ने उन्हें उड़ान भरने से रोक दिया और वजन कम करने के बाद ही वापस आने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि 4-5 किलो वजन कम करने में उन्हें 1-2 महीने लगे। तब तक वह घर पर ही रहीं और उन्हें केवल मूल वेतन ही मिलता रहा।
रिपोर्टर : आपने 7–8 साल काम किया, कभी आपको वेट कम करने के लिए बोला गया?
माही : हां, ये मेरे साथ एक बार हुआ था। वेडिंग के बाद मेरा बीएमआई बढ़ गया था, वेट ऊपर चला गया था। एज पर बीएमआई, मुझे 4-5 केजी लॉस करना था, जो मैंने 1-2 महीने में कर लिया। तब तक मैं घर पर ही थी, एज अ ग्राउंडेड वर्कर।
रिपोर्टर : सैलरी मिलती है उस वक्त आपको?
माही : बेसिक सैलरी मिलती है, पर वो देखते रहते हैं कि आप प्रॉपर प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे हो। ऐसा नहीं कि आप बस कहते रहो और 3-4 महीने घर बैठे रहो। डॉक्टर्स होते हैं, उनके साथ रेगुलर फॉलोअप होता है।
रिपोर्टर : डॉक्टर इंडिगो के होते हैं?
माही : हां जी, इंडिगो की मेडिकल टीम कॉन्टेक्ट में रहती है हमारे साथ। वो डिस्कस करते रहते हैं कि वेट के लिए आप क्या कर रहे हो।
रिपोर्टर : तो आप कितने महीने घर रहीं?
माही : लगभग 1.5 मंथ्स।
रिपोर्टर : ये कब की बात है?
माही : 2019 के एंड की बात है।
माही ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि इंडिगो हर तीन महीने में उनका वजन चेक करती है और सालाना पूरी मेडिकल जांच करवाती है। उन्होंने इसे डीजीसीए की एक अच्छी नीति बताया और कहा कि इससे कर्मचारी फिट रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस विभाग में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जहां कर्मचारी अक्सर अधिक वजन वाले होते हैं।
रिपोर्टर : आपको या किसी और फीमेल को कभी फ्रस्टेशन नहीं होती कि वेट बढ़ जाता है, कुछ खा नहीं सकते, वेडिंग या पार्टी में भी ध्यान रखना पड़ता है?
माही : मुझे कभी फ्रस्टेशन नहीं लगा, क्यूंकि ये सिर्फ वेट के लिए नहीं, हेल्थ के लिए होता है। बॉडी कितनी हेल्दी है, वो मैटर करता है।
रिपोर्टर : मतलब आप इसे डीजीसीए की हेल्दी पॉलिसी मानती हैं?
माही : हां, ये हेल्दी पॉलिसी है। मुझे लगता है ये हमारे पुलिस डिपार्टमेंट में भी होनी चाहिए। वो इतने मोटे होते हैं, कहां किसी के पीछे भाग पाएंगे।
माही (आगे) : हमारा हर 3 महीने में चेक होता था, और एनुअली मेडिकल चेकअप, ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सब होता था।
अब माही ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि बीएमआई एक डीजीसीए का नियम है, इंडिगो का नहीं; और इसका पालन सभी एयरलाइंस करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि चालक दल के सदस्यों का वजन बढ़ने पर उन्हें तुरंत काम से रोक दिया जाता है और वजन कम करने के बाद ही उन्हें वापस लौटने की अनुमति दी जाती है। इस बातचीत में इस धारणा पर भी चर्चा हुई कि ऐसे नियम महिलाओं पर अधिक लागू होते हैं, जिसका उन्होंने यह कहकर खंडन किया कि ये नियम सभी कर्मचारियों के लिए मौजूद हैं। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि ये मानदंड पूरे उद्योग में मानक हैं।
रिपोर्टर : इंडिगो का एक रूल है कि क्रू मेंबर का वेट बढ़ जाता है, तो घर बिठा देते हैं?
माही : वो इंडिगो की पॉलिसी नहीं है, वो डीजीसीए का रूल है। वो बीएमआई को फॉलो करते हैं।
रिपोर्टर : वो तो फिर सारी एयरलाइंस का होना चाहिए?
माही : सारी एयरलाइंस का है।
रिपोर्टर : अच्छा।
माही : वो है, एज पर योर हाइट देयर इज अ सर्टेन लिमिट ऑफ वेट। (आपकी ऊंचाई के अनुसार वजन की एक निश्चित सीमा होती है।) 24 से ज्यादा बीएमआई नहीं जा सकता आपका। 24 से ऊपर आप ओवैस कैटेगरी (मोटापे की श्रेणी) में आ जाते हो।
रिपोर्टर : ये मेल के साथ क्यूं नहीं है। व्हाय ओनली फीमेल?
माही : सर! इंडिगो में फीमेल ही थी, एज पर माई नॉलेज। बाकी एयरलाइंस में मेल्स के साथ भी यही है।
इंडिगो की पूर्व एयर होस्टेस माही से बात करने के बाद तहलका रिपोर्टर ने एयर इंडिया एक्सप्रेस की एयर होस्टेस काजल कौर (नाम बदला हुआ) से संपर्क किया। जब उनसे संपर्क किया गया, तो वह बेंगलुरु में थीं और शुरू में बात करने से हिचकिचा रही थीं। लेकिन बाद में फोन पर साक्षात्कार के लिए सहमत हो गईं।
जब उनसे बीएमआई नीति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनकी एयरलाइन इंडिगो की तरह ही डीजीसीए के दिशा-निर्देशों का पालन करती है और अधिक वजन वाले क्रू सदस्यों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं देती है। उन्होंने बताया कि अगर किसी क्रू मेंबर का वजन बढ़ जाता है, तो उसे काम से हटा दिया जाता है और उस अवधि के दौरान उसे वेतन नहीं मिलता है। उसने कहा-“अगर हम कोई गलती करते हैं, तो एयरलाइन हमारी सैलरी काट लेती है। अगर एयरलाइन की गलती होती है, तो हमें भुगतान किया जाता है।” नीचे दिया गया संवाद इस बात पर प्रकाश डालता है कि ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों पर जवाबदेही कैसे डाली जाती है।
रिपोर्टर : अगर वेट इंक्रीज की वजह से ग्राउंड करते हैं, तो सेलरी देते हैं?
काजल : अगर हमारी गलती की वजह से ग्राउंड करते हैं, तो सैलरी कट होती है। अगर उनकी वजह से होता है, तो पूरी मिलती है। पर अगर हमारी गलती हो, तो काट लेते हैं।
रिपोर्टर : ग्राउंड से मतलब आपको घर बिठा देते हैं?
काजल : हां, घर बिठा देते हैं।
अब काजल केबिन क्रू सदस्य के रूप में फिट रहने की चुनौती के बारे में बात करती हैं। उन्होंने कहा कि केबिन क्रू के रूप में काम करते हुए समग्र स्वास्थ्य बनाए रखना बहुत मुश्किल है। आहार और आंखों की रोशनी से लेकर वजन तक हर चीज पर लगातार ध्यान देने की जरूरत होती है। उन्होंने खुलासा किया कि मेडिकल टेस्ट के दौरान उसका वजन कम पाया गया और उसे वजन को आवश्यक स्तर तक बढ़ाने के बाद ही शामिल होने के लिए कहा गया।
रिपोर्टर : अपने को फिट रखना कितना बड़ा चैलेंज है, बीइंग एन एयर होस्टेस?
काजल : वो तो बहुत जरूरी है। हर चीज परफेक्ट रखनी पड़ती है। आपकी आंखें, आपका वेट, आपका खाना-पीना, मेरा भी मेडिकल हुआ था, मेरा ब्लड बहुत कम आया था, तो मुझे बोला गया पहले वेट बढ़ाओ, फिर आना।
अब काजल समझाती हैं कि विभिन्न एयरलाइनों में बीएमआई सीमाएं कैसे काम करती हैं। उनका कहना है कि स्वीकार्य आयु सीमा आमतौर पर 18 से 25 के बीच होती है और एक छोटा सा बदलाव भी पात्रता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस में जाने से पहले जब उन्होंने विस्तारा ज्वाइन किया था, तब 17 साल की उम्र में उनका वजन कम था (बीएमआई के संदर्भ में)। उन्हें अपना वजन बढ़ाने के लिए कहा गया था। जब उन्होंने एयर इंडिया एक्सप्रेस में काम करना शुरू किया, तब उनका बीएमआई 18 था, जो कि 18-25 की आवश्यक सीमा के भीतर था। उन्होंने आगे कहा कि जिन क्रू सदस्यों का बीएमआई 25 से अधिक होता है, उन्हें अधिक वजन वाला माना जाता है, उन्हें उड़ान भरने से रोक दिया जाता है और उन्हें उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती है।
रिपोर्टर : कितना वेट होना चाहिए?
काजल : बीएमआई होता है इनका, हर कंपनी का अलग होता है।
रिपोर्टर : एयर इंडिया का कितना है?
काजल : इसका था 18-25 के बीच में।
रिपोर्टर : आपका कितना था?
काजल : बिलकुल लाइन पर था- 18…।
काजल (आगे) : विस्तारा के टाइम मेरा 17 था, तो मुझे वेट इन्क्रीज करने के लिए बोला गया। जब एक्सप्रेस में मेरा 18 था, तो वो लिमिट के अंदर था, इसलिए उन्होंने कुछ नहीं बोला। 18–25 का रेंज होता है। अगर ऊपर होगा, तो बोलेंगे कम करो और कम होगा, तो बोलेंगे बढ़ाओ।
रिपोर्टर : अगर किसी का 25 से ऊपर हो गया, तो उसको घऱ बिठा देते हैं?
काजल : हां, ग्राउंड कर देते हैं। जब तक ठीक नहीं होता, ठीक करो, फिर आओ।
रिपोर्टर : तो क्या ये चेक भी होता है?
काजल : हां, यर्ली चेकअप भी हो जाते हैं।
इंडिगो की एक पूर्व एयर होस्टेस और एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक मौजूदा क्रू मेंबर से बात करने के बाद तहलका रिपोर्टर ने फ्रैंकफिन की ओर रुख किया, जो भारत में लगभग 70 शाखाओं और दुबई में एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र वाला एक प्रमुख एयर होस्टेस प्रशिक्षण संस्थान है। पूरी बात को स्पष्ट करने के लिए रिपोर्टर ने अपनी बेटी को प्रशिक्षण के लिए दाखिला दिलाने के बहाने आगरा (उत्तर प्रदेश) स्थित शाखा से संपर्क किया।
इस बार तहलका रिपोर्टर की मुलाकात रोहिता से हुई, जो अपने पहले नाम से जानी जाती हैं और केंद्रीय बिक्री प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इंडिगो केबिन क्रू की भूमिकाओं के लिए केवल महिलाओं को ही नियुक्त करती है, क्योंकि यात्रियों से व्यवहार करते समय उन्हें अधिक विनम्र माना जाता है।
नीचे दिए गए संवाद में रोहिता इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देती हैं कि एक एयरलाइन केबिन क्रू के रूप में मुख्य रूप से महिलाओं को क्यों नियुक्त करती है। उनका कहना है कि पुरुष भी इस उद्योग का हिस्सा हैं, लेकिन कुछ एयरलाइनें महिलाओं को प्राथमिकता देती हैं। रोहिता के अनुसार, कुछ एयरलाइन कंपनियों की चालक दल में केवल लड़कियों की भर्ती करने की नीति का संबंध इस बात से है कि उड़ानों के दौरान यात्रियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। उनका सुझाव है कि महिलाओं को अधिक विनम्र और परिस्थितियों को शांति से संभालने में बेहतर माना जाता है।
रिपोर्टर : एयर होस्टेस सिर्फ गर्ल्स क्यूं होती हैं?
रोहिता : ब्वॉयज भी होते हैं।
रिपोर्टर : इंडिगो में तो गर्ल्स हैं?
रोहिता : इंडिगो एक मात्र ऐसी एयरलाइंस है, जिसमें सिर्फ गर्ल्स होती हैं, उनका है वो ज्यादातर गर्ल्स को लेते हैं….।
रिपोर्टर : ऐसा क्यूं?
रोहिता : ऐसा इसलिए कि अगर कोई इंस्ट्रक्शन दे रहे हैं, थोड़े से ब्वॉय्स क्या होता है राइजिड (कठोर) भी हो जाते हैं, ईगो पर ले जाते हैं, जैसे किसी कस्टमर ने कुछ बोल दिया, तब। गर्ल्स पोलाइटली (शिष्टतापूर्वक) हैंडल कर सकती हैं, बस यही डिफ्रेंस है।
अब रोहिता ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि केबिन क्रू के लिए इंडिगो के नियम बहुत सख्त हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइन को साफ-सुथरा, बेदाग रूप चाहिए, जिसमें शरीर के खुले हिस्सों पर कोई दिखाई देने वाले निशान या टैटू न हों, क्योंकि इन्हें समग्र रूप को प्रभावित करने वाला माना जाता है। उन्होंने आगे कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में भी, जिनमें स्पष्ट निशान दिखाई देते हैं, चालक दल के सदस्यों को काम से हटाया जा सकता है। यही कारण है कि वह प्रशिक्षुओं को गाड़ी चलाते समय सावधान रहने की सलाह देते हैं।
रिपोर्टर : अगर किसी ने टैटू बनवा रखा है, और उसको इंडस्ट्री में आना है, तो पहले रिमूव करना होगा?
रोहिता : हां, उसे रिमूव करना होगा।
रिपोर्टर : मैम, टैटू का ऐसा क्या है?
रोहिता : कोई रूल होगा उनका। गवर्नमेंट का भी है, वैसे अभी कुछ एयरलाइंस ने अलाउ कर दिया है। इंडिगो ने नहीं किया, उसके बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स हैं।
रिपोर्टर : क्या रूल हैं, मैम?
रोहिता : यही कि बॉडी पर कोई स्टार, निशान नहीं होना चाहिए। बाकी इसका फेस क्लीयर हो।
रिपोर्टर : बॉडी पर नहीं होना चाहिए या फेस पर?
रोहिता : बॉडी पर, हाथ-पैर, जहां दिखता है। इंडिगो की यूनिफॉर्म इतनी है ना, जो पोर्सन दिख रहा है, विजिबल जो भी है, उस पर निशान नहीं होना चाहिए, लुक खराब हो जाता है।
रिपोर्टर : और अगर कभी चोट गल जाए, स्कार (निशान) आ जाए, फिर?
रोहिता : फिर आपको एयरपोर्ट पर आना पड़ेगा, मैं तो सब बच्चों को बोलती हूं, जो एडमिशन लेते हैं, ब्वॉय्स को भी, कि ड्राइव, क्यूंकि एक ही लाइफ है!
रिपोर्टर : मतलब अगर एक भी स्कार आ गया, तो आपको क्रू छोड़ना पड़ेगा?
रोहिता : क्रू छोड़ना पड़ेगा…।
अब रोहिता बताती हैं कि केबिन क्रू का वजन बढ़ने पर क्या होता है। वह कहती हैं कि उनसे इसे कम करने के लिए कहा जाता है और जब तक वे निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंच जाते, तब तक उन्हें घर में ही रहने की सजा दी जाती है। इस अवधि के दौरान वे ड्यूटी से बाहर रहते हैं। वह यह भी बताती हैं कि वजन की जांच दैनिक रूप से नहीं, बल्कि समय-समय पर की जाती है।
रिपोर्टर : मैम, जिन एयर होस्टेस का वेट गेन हो जाता है, वो क्या करते हैं?
रोहिता : हां,.. तो वो बताएंगे आपको वेट रिड्यूस करना है…।

रिपोर्टर : तो उस दौरान वो ग्राउंडेड रहेंगे?
रोहिता : हां, वो ग्राउंड पर रहेंगे…।
रिपोर्टर : ये वेट्स चेक डेली होता है?
रोहिता : ये विदिन सिक्स मंथ्स होता है।
अब रोहिता ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि कमजोर दृष्टि वाले क्रू सदस्यों के लिए चश्मा पहनने की अनुमति नहीं है और उन्हें इसके बजाय कॉन्टैक्ट लेंस पहनने की आवश्यकता होती है। विमान में चढ़ने से पहले क्रू सदस्यों को लेंस वाले चश्मे पहनने होंगे और अपने चश्मे वहीं छोड़ देने होंगे। उन्होंने आगे कहा कि लैंडिंग के बाद वे दोबारा चश्मा पहन सकते हैं। यह आदान-प्रदान दर्शाता है कि कैसे सख्त नियम दैनिक आदतों को प्रभावित करते हैं।
रिपोर्टर : स्पेक्स अलाउड हैं मैम! क्रू में?
रोहिता (छात्रा को) : पॉवर है आपको?
छात्रा : हां।
रोहिता : कितना है?
छात्रा : अभी तो वन है।
रोहिता : देखिए, अगर मेजर होता है और आप फ्लाई करेंगी, तो लेंसेस लगाने होंगे।
छात्रा : ग्लासेस अलाउड नहीं होता?
रोहिता : ग्लासेस आप नीचे आकर लगा सकते हैं। जब भी आप फ्लाई करोगे, लेंस लगाओगे, जब ग्राउंड पर रहोगे, तब नहीं। तब अपने स्पेक्स यूज कर सकते हो।
अब रोहिता ने बताया कि फ्रैंकफिन में केबिन क्रू बनने की तैयारी कर रही लड़कियों को ग्रूमिंग कक्षाओं के हिस्से के रूप में हेयर स्टाइलिंग, स्किनकेयर और मेकअप सिखाया जाता है। वह आगे कहती हैं कि विद्यार्थियों को पेशेवर तरीके से खुद को प्रस्तुत करना सिखाया जाता है। यह बातचीत दर्शाती है कि नौकरी में प्रवेश करने से पहले ही बाहरी दिखावट को कितनी सावधानी से आकार दिया जाता है।
रोहिता : हां, वो तो मेकअप से कवर हो जाता है। कन्सीलर वगैरह सब सिखाया जाता है, प्रॉपर टिप्स दी जाती हैं, मेकअप कैसे करना है, हेयर कैसे सेट करना है, सब।
रिपोर्टर : सब ट्रेनिंग फ्रैंकफिन देगा? उसमें क्या-क्या होता है?
रोहिता : जैसे मेकअप, स्किन केयर…।
अब रोहिता विमानन में सख्त वजन जांच के पीछे के तर्क को समझाती हैं। जब उनसे दोबारा पूछा गया कि इंडिगो में केबिन क्रू के तौर पर सिर्फ महिलाओं को ही क्यों नियुक्त किया जाता है, तो उन्होंने पहले दिए गए स्पष्टीकरण से अलग स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि एयरलाइन का लक्ष्य ईंधन बचाने के लिए विमान का कुल वजन कम करना है। उन्होंने कहा कि ‘चूंकि महिलाएं आमतौर पर पुरुषों की तुलना में कम वजन की होती हैं, इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।’ उन्होंने आगे कहा कि चूंकि यात्रियों से वजन कम करने के लिए नहीं कहा जा सकता है, इसलिए एयरलाइन कंपनियां इसे अपने स्तर पर प्रबंधित करने की कोशिश करती हैं।
रोहिता : उनके लिए भी है। वो आपके बैग का वेट चेक करते हैं, तो इंसान का नहीं करेंगे?
रिपोर्टर : उसका रीजन क्या है?
रोहिता : रीजन ये है कि एक फ्लाइट में उतना ही वेट उड़ सकता है, पेसेंजर से तो नहीं कह सकते कि वेट कम करके आओ। आप समझिए, इससे फ्यूल बचता है और उनके फ्लाइंग आवर्स भी बचते हैं। इसलिए वो लगेज पर कंट्रोल रखते हैं।
रोहिता के अनुभव से पता चलता है कि डीजीसीए के बीएमआई दिशा-निर्देशों ने महिला केबिन क्रू सदस्यों को अपने स्वास्थ्य के प्रति कितना सतर्क कर दिया है। उन्होंने खुलासा किया कि विवाहित महिलाओं सहित कई लोग अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए घर का बना खाना काम पर लाते हैं और बाहर का खाना खाने से परहेज करते हैं। यह आदान-प्रदान दर्शाता है कि कैसे सख्त नियम दैनिक आदतों को प्रभावित करते हैं।
रोहिता : मैंने कुछ केबिन क्रू गर्ल्स को देखा है, जिनको मैं फॉलो करती हूं। वो कई बार अपना खाना बनाकर लाती हैं, जबकि उन्हें वहां मील्स मिलते हैं।
रोहिता (आगे) : लेकिन हेल्दी रहने के लिए वो खुद घर का खाना लेकर आती हैं। मतलब थोड़ा घर का खाना खाना पसंद करती हैं। बहुत सी मैरिड गर्ल्स जो फ्लाई कर रही हैं, वो भी अपना खाना बनाकर लाती हैं।
रोहिता के बाद तहलका रिपोर्टर ने इस्लाम से बात की, जो अपने पहले नाम से ही जाने जाते हैं। आगरा के रहने वाले सेवानिवृत्त व्यक्ति इस्लाम के बेटे और बेटी कतर की एक एयरलाइंस में केबिन क्रू के रूप में काम करते हैं। वजन प्रबंधन के बारे में बात करते हुए इस्लाम ने कहा कि उनकी बेटी अपने आहार को लेकर बहुत सतर्क रहती है और अपने बीएमआई को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित रूप से जिम जाती है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि ऐसे नियम चालक दल के सदस्यों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने में मदद करते हैं, लेकिन वे प्रतिबंधात्मक भी महसूस हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें सख्त आहार का पालन करना पड़ता है और अक्सर अपनी पसंद के भोजन से परहेज करना पड़ता है।
2015 से 2019 तक दिल्ली में इंडिगो के साथ ग्राउंड स्टाफ के रूप में काम करने वाले हिमायत खान ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि उनकी कई महिला केबिन क्रू सहकर्मी अपने खान-पान को लेकर बेहद सतर्क रहती थीं। वे वजन बढ़ने के निरंतर भय में जीती थीं और खुलकर खाने से परहेज करती थीं। सिर्फ इस वजह से कि बीएमआई में वृद्धि के परिणामस्वरूप उन्हें घर में रहने को कहा जा सकता है। उन्होंने विमानन क्षेत्र में इन फिटनेस दिशा-निर्देशों को भेदभावपूर्ण और मनमाना बताया।
एक अन्य व्यक्ति, जिसने नाम न बताने की शर्त पर बात की; ने कहा कि उसकी पत्नी ने वजन प्रबंधन दिशा-निर्देशों के दबाव के कारण केबिन क्रू की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने आगे कहा कि वह कई ऐसे पुरुष क्रू सदस्यों को जानते हैं, जिन्होंने आवश्यक बीएमआई बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाने के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी।
डीजीसीए की सख्त केबिन क्रू फिटनेस नीति को विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों से समर्थन और आलोचना दोनों मिली है। एयरलाइंस का कहना है कि वे विमान के वजन को नियंत्रण में रखने और ईंधन की खपत को कम करने के लिए इन मानदंडों का पालन करते हैं, भले ही यह कमी मामूली ही क्यों न हो। भारत में केबिन क्रू के रूप में करियर बनाने की इच्छा रखने वालों के लिए संदेश स्पष्ट है: डीजीसीए की सीमा के भीतर वजन बनाए रखना वैकल्पिक नहीं है। किसी भी प्रकार का विचलन, चाहे वह अधिक वजन हो या कम वजन का, नौकरी से बेदखल करने, वेतन में कटौती और उड़ान के अवसरों के नुकसान का कारण बन सकता है। साथ ही यह बात सामने आती है कि ये नियम सुरक्षा से परे दिखावट और लागत दक्षता के क्षेत्रों तक विस्तारित होते हैं, जिससे यह चिंता पैदा होती है कि क्या परिचालन प्राथमिकताएं निष्पक्षता पर हावी हो जाती हैं?




