नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा IAS और IPS अधिकारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारियों का ट्रांसफर करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है और इसमें अदालत दखल नहीं दे सकती। कोर्ट के इस फैसले के बाद आयोग द्वारा किए गए सभी प्रशासनिक बदलाव अब जारी रहेंगे।
दरअसल, चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में कई बड़े अधिकारियों को हटाकर नए अफसरों की तैनाती की थी। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी जैसे अहम पद भी शामिल थे। आयोग का कहना था कि यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
ममता सरकार ने इस फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सरकार का तर्क था कि इतने बड़े स्तर पर तबादले करना राज्य के प्रशासनिक ढांचे में दखल है और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को व्यापक अधिकार दिए गए हैं, जिनके तहत वह चुनाव के दौरान जरूरी प्रशासनिक फैसले ले सकता है। इसमें अधिकारियों का ट्रांसफर भी शामिल है।
इस फैसले के बाद विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और संविधान की जीत बताया है, जबकि ममता सरकार के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने की गुंजाइश काफी कम हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के दौरान आयोग की भूमिका सबसे अहम होती है और उसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लिए गए फैसलों में हस्तक्षेप करना आसान नहीं है। अब देखना होगा कि इस फैसले का चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ता है।




