डीप फेक के मुद्दे पर केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म और हितधारकों के साथ बैठक की है। लोकतंत्र के लिए नया खतरा करार देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार इससे निपटने के लिए जल्द ही नए नियम लाएगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “कंपनियां डीप फेक का पता लगाने, इससे निपटने, इसकी सूचना देने के तंत्र को मजबूत करने और उपयोगकर्ताओं में जागरूकता बढ़ाने जैसी स्पष्ट कार्यवाइया करने पर सहमत हुई।
पत्रकारों से बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “हम आज ही रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार करना शुरू कर देंगे और कुछ ही समय में हमारे पास डीप फेक से निपटने के लिए नए नियम होगें। यह मौजूदा ढांचे में संशोधन या नए नियम या नया कानून लाने के रूप में हो सकता है।”
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, “डीप फेक लोकतंत्र के लिए एक नया खतरा बनकर उभरा है। हमारी अगली बैठक दिसंबर के पहले सप्ताह में होगी। आज किए गए फैसलों पर उसमें आगे की चर्चा होगी। ड्राफ्ट रेगुलेशन में क्या शामिल किया जाना चाहिए, इस पर भी चर्चा की जाएगी।”
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “आज सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म को बैठक के लिए बुलाया था। सभी के साथ चर्चा हुई और इसके खतरे वा गंभीरता को स्वीकार किया कि यह बहुत बड़ा खतरा उभर कर आया है। हम चार चीजों से मिलकर काम करना पड़ेगा- इसकी जांच कैसे हो, इसे वायरल होने से कैसे रोक, कोई उसी इसे कैसे रिपोर्ट करे और इस पर तुरंत कार्यवाही कैसे हो। इस पर जागरूकता बढ़ाने के लिए सब मिलकर कैसे काम करें।”
भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने “स्थानीय से वैश्विक भारत तक – विनिर्माण से आत्मनिर्भरता तक” विषय पर नई दिल्ली में बुधवार को द्वारका स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में एक विचार विमर्श सह मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया। साथ ही इस अवसर पर केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने भारी उद्योग मंत्रालय की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया।
आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि, “भारी उद्योग मंत्रालय के माध्यम से न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के दृष्टिकोण को पूरा करने की वचनबद्धता के साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा में भाग ले रहे हैं, बल्कि हमने एक लंबा सफर तय किया है और हम भी काफी आगे बढ़ चुके हैं। भारी उद्योग से जुड़े तथा इससे संबंधित सभी घटक सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।”
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने उल्लेख करते हुए आगे बताया कि, “ऑटोमोटिव क्षेत्र ने ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरणों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के कार्यान्वयन के साथ ही प्रौद्योगिकी के उन्नयन की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। उन्नत प्रौद्योगिकियों और ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग को पूरा करने का रास्ता आत्मनिर्भर भारत से होकर ही गुजरता है, जिसमें हमारी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना मददगार है। स्थानीयकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रालय द्वारा शुरू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना हो या फिर फेम योजना जैसी योजनाएं हों, इन सभी के माध्यम से भारत एक सशक्त अर्थव्यवस्था बनने की ओर त्वरित गति से आगे बढ़ रहा है।”
निर्यात प्रोत्साहन पर बोलते हुए डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि, “निर्यात प्रोत्साहन पूंजीगत उत्पाद योजना और व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही अन्य योजनाएं भी एक ही लक्ष्य के साथ चलाई जा रही हैं कि हम देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बनाएं और भारत के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करें। प्रधानमंत्री ने पहले लोकल को वोकल और फिर लोकल को ग्लोबल बनाने का मंत्र दिया है, ऐसे में हमें इस दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए पहले लोकल के लिए वोकल बनना होगा और फिर लोकल से ग्लोबल (स्थानीय से वैश्विक) बनना होगा। यह मंत्र ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेगा।”
मंथन आयोजित कार्यक्रम पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, “आज के मंथन से जो भी समाधान निकलेंगे, भारी उद्योग मंत्रालय उनका इस्तेमाल प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने में करेगा।”
बता दें, देश में आयात पर अंकुश लगाने और स्थानीयकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों के परिणामस्वरूप ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरणों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (25,938 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ) सहित विभिन्न प्रमुख कार्यक्रम शुरू किये गए हैं। कैपिटल गुड्स सेक्टर, देश भर में समर्थ उद्योग प्रौद्योगिकी फोरम स्थापित करने के लिए सेंटर फॉर इंडस्ट्री 4.0 (सी4आई4) के सहयोग से हरसंभव प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों का लक्ष्य देश में जागरूकता बढ़ाना और स्मार्ट तरीके से विनिर्माण तथा उद्योग 4.0 की प्रगति को विस्तार देना है।
भारत में देवउठान के दिन से ही शादियों की शुरुआत होने का चलन है। और इसी को देखते हुए कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह अनुमान लगाया है कि इस वर्ष 38 लाख शादियां भारत में होंगी। साथ ही इन शादियों में लगभग 4.74 लाख करोड़ रुपये का बड़ा व्यापार होने का भी अनुमान है। जोकी पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 32 लाख शादियाँ हुई और 3.75 लाख करोड़ रुपये के व्यापार होने का अनुमान भी लगाया गया था।
दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि, “अकेले दिल्ली में इस सीजन में 4 लाख से अधिक शादियां होने की उम्मीद है, जिससे लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने की संभावना है। इस सीजन के दौरान लगभग 7 लाख शादियां 15 लाख रुपये के खर्च, 5 लाख रुपये के खर्च के, 8 लाख शादियाँ 6 लाख रुपये के खर्च, 10 लाख शादियां 10 लाख रुपये के खर्च, 7 लाख शादियां 15 लाख रुपये के खर्च, 5 लाख शादियां 25 लाख रुपये के खर्च, 50 हजार शादियां 50 लाख के खर्च एवं 50 हजार शादियां 1 करोड़ रूपये या उससे अधिक के खर्च के साथ होने की उम्मीद है।”
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतियां ने कहा कि, “एक विवाह में आम तौर पर 50 प्रतिशत व्यय समान की खरीद पर और 50 प्रतिशत सेवाओं की खरीद पर किया जाता है। एक नजर में माल क्षेत्र में व्यापार का अनुमानित प्रतिशत कपड़ा, साड़ी, लहंगा और गारमेंट्स में 10 प्रतिशत, आभूषण में 15 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं में 5 प्रतिशत में ड्राई फ्रूट, फलों मिठाई और नमकीन में 5 प्रतिशत, खाद्यान्न, किराना और सब्जियों में 5 प्रतिशत, उपहार वस्तुओं में 4 प्रतिशत, और बाकी 6 प्रतिशत अन्य विविध वस्तुओं में व्यापार की संभावना है।”
भरतियां ने आगे कहा कि, “जहां तक सेवा क्षेत्र का सवाल है, अनुमान के अनुसार मेबैंक्वेट हॉल, होटल और अन्य विवाह लस्थलों पर 5 प्रतिशत, इवेंट मैनेजमेंट पर 5 प्रतिशत, टेंट सजावट पर 12 प्रतिशत, खानपान सेवाओं पर 10 प्रतिशत, फूलों की सजावट पर 4 प्रतिशत, 3 प्रतिशत ट्रैवल एवं कैब सेवाओं पर, फोटो और वीडियो शूट पर 2 प्रतिशत, ऑर्केस्ट्रा, बैंड इत्यादि पर 3 प्रतिशत और साउंड पर 3 प्रतिशत के खर्च के जरिए व्यापार का आंकड़ा माना गया है।”
उन्होने आगे कहा कि, “शादी के सीजन के बाद, क्रिसमस और नए साल की बिक्री होगी और इसके बाद 14 जनवरी संक्रांति के दिन से शादी के सीजन का एक और चरण शुरू होगा।”
बता दें, दिवाली त्योहारी सीजन में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री होने के बाद देश का व्यापारिक समुदाय देश में 23 नवंबर से शुरू होने वाले आगामी शादी के सीजन में उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। कैट द्वारा विभिन्न राज्यों के 30 विभिन्न शहरों, जिन्हें प्रमुख वितरण केंद्र के रूप में जाना जाता है के प्रमुख व्यापारी संगठनों तथा वस्तुओं और सेवाओं दोनों में विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से बात करने के बाद यह अनुमान लगाया गया है कि देश भर में शादियों के इस सीजन में लगभग 38 लाख शादियां होने की संभावना है तथा लोगों द्वारा शादी की खरीदारी और शादी हेतु विभिन्न सेवाएं प्राप्त करने के माध्यम से लगभग 4.74 लाख करोड़ रुपये का बड़ा व्यापार होने का अनुमान लगाया है।
दिल्ली-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम परियोजना से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक हफ्ते के भीतर 415 करोड़ रुपये दे सरकार और अगर नहीं दिया तो दिल्ली सरकार के विज्ञापन बजट पर रोक लगाकर फंडिंग दे देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर नहीं दिया तो विज्ञापन बजट से पैसा दिया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
दिल्ली सरकार को घेरते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ये राशि नहीं दी तो हम दिल्ली सरकार के विज्ञापनों बजट पर रोक लगाकर अटैच कर लेंगे। प्रदूषण को रोकने के लिए परियोजना भी जरूरी है। पिछले तीन साल का दिल्ली सरकार का विज्ञापन बजट 1100 करोड़ था जबकि इस साल का बजट 550 करोड़ है।
बता दें, 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर दिल्ली सरकार तीन सालों में विज्ञापन के लिए 1100 करोड़ आवंटित कर सकती है तो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए फंड भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि या तो भुगतान करें नहीं तो फिर अदालत उसके फंड तो अटैच करने के आदेश जारी करेगी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की फटकार और चेतावनी के बाद दिल्ली सरकार दो महीने के भीतर 415 करोड़ का बकाया देने को राजी हो गर्इ थी लेकिन इस आदेश का पालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार को फटकार लगायी और कहा कि कोर्ट में किसानों का पक्ष भी नहीं रखा जा रहा है और उन्हें विलेन बनाने का प्रयास हो रहा है।
पंजाब सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों का सुप्रीम कोर्ट ने जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि तमाम प्रयास के दौरान किसान ही पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे है। कोर्ट ने पंजाब सरकार के वकील से पूछा कि पराली जलाने के मामले में क्या किया गया है। इसपर वकील ने बताया कि सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की तरफ से पेश हुए वकील से पूछा कि अगर किसानों पर जुर्माना लगाया गया है तो वसूला क्यों नहीं गया है। अगर दूसरे राज्यों के किसान एमएसपी के लिए पंजाब में अपना अनाज बेच देते हैं तो वे दूसरे के जरिए भी अपना अनाज बेच ही लेंगे।
कोर्ट ने आगे कहा कि, पंजाब सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के साथ 8481 बैठकें की गई और थानाध्यक्षों ने उन्हें समझाया कि वे पराली ना जलाएं। वहीं सुप्रीम कोर्ट का पता लगा है कि पहले के मुकाबले पराली जलाने की घटनाएं बढ़ गई है।
पराली जलाने के मामले में किसानों के खिलाफ 984 एफआईआर दर्ज की गयी है साथ ही 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है जिसमें से 18 लाख रुपये रिकवर हुए हैं।
विधानसभा से पारित विधेयकों को लटकाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के गवर्नर को तीखे शब्दों में कहा कि ये बिल 2020 से पेंडिंग हैं। आखिर आप इन्हें लेकर तीन साल से क्या कर रहे थे?
सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि, “असेंबली ने बिलों को फिर से पारित कर दिया है और गवर्नर के पास भेजा है अब देखते हैं कि गवर्नर क्या करते हैं।” इस मामले में अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट में केरल और पंजाब के मसले पर भी सुनवाई हुई और कोर्ट ने कहा कि क्या गवर्नर विधानसभा को बिल वापस भेजे बिना उसे रोक कर रख सकता है। यह टिप्पणी अदालत की गवर्नर आरएन रवि की ओर से 10 विधेयकों को वापस सरकार के पास भेजने के बाद आई है।
गवर्नर आरएन रवि ने जिन 10 विधेयकों को वापस लौटाया है उनमें से 2 को पूर्व की एआईएडीएमके सरकार के दौर में मंजूर किया गया था। गवर्नर की ओर से लौटने के बाद विधानसभा ने शनिवार को स्पेशल सेशन बुलाया था। इस सत्र में सभी 10 विधेयकों को फिर से पारित किया गाय और गवर्नर को वापस मंजूरी के लिए भेजा गया है।
ठीक इसी प्रकार पंजाब के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित को भी बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी थी और कहा था कि सरकार के साथ मिलकर काम करें।
आपको बता दें, अदालत में डीएमके सरकार ने कहा कि, गवर्नर का काम जनता के आदेश को टालने वाला है। चुनी हुई सरकार के द्वारा पारित विधेयकों को लटकाना ठीक नहीं था। इसके लिए निश्चित समय सीमा होनी चाहिए जिसमें गवर्नर बिल पास कर लें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को चुनावी राज्य राजस्थान के पाली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार के लिए भ्रष्टाचार से ऊपर और कुछ नहीं है, यहां की कांग्रेस सरकार के लिए परिवारवाद ही सबकुछ है। दुर्भाग्य से यहां पिछले पांच साल जो कांग्रेस सरकार रही है उसने लोगों को विकास में और पीछे धकेल दिया है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि, “पाली कभी पाला बदलता नहीं है हिंदुस्तान में कही भी जाकर देखिए खासकर गुजरात में तो कोई जिला ऐसा नहीं मिलेगा, जहां पाली वाला भाजपा का झंडा लेकर न खड़ा हो। आज बड़े विश्वास से मैं दो बात बोल रहा हूं- पहली, पाली का भाजपा कार्यकर्ता और सोजत की मेहंदी का रंग, ये कभी भी उतरते नहीं हैं। दूसरी, पिछले कुछ दिनों से मैं राजस्थान में जहां-जहां गया हूं वहां एक स्वर में एक ही आवाज सुनाई दे रही है जन जन की है यही पुकार, आ रही है भाजपा सरकार।”
राज्य की अशोक गहलोत सरकार पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, “राजस्थान में ऐसी सरकार जरूरी है जो प्रदेश के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। दुर्भाग्य से यहां पिछले 5 साल जो कांग्रेस सरकार रही है उसने लोगों को विकास में और पीछे धकेल दिया है। यहां की कांग्रेस सरकार के लिए भ्रष्टाचार से बड़ा कुछ भी नहीं हैं। यहां की कांग्रेस सरकार के लिए परिवारवाद ही सबकुछ है यहां कि कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण के अलावा कुछ नहीं सोचती। तुष्टिकरण की राजनीति का असर क्या होता है ये राजस्थान ने बीते पांच वर्षों में झेला है।”
पीएम मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि, “कांग्रेस ने राजस्थान को दंगों में झोंक दिया। दंगों और आतंकी मानसिकता वालों के हौसले बुलंद हो गए। सौहार्द की इस धरा पर ऐसी-ऐसी घटनाएं। कांग्रेस और उसके घमंडिया गठबंधन की यह पहली हरकत नहीं है सनातन को लेकर इन्होंने क्या-क्या कहा है ये पूरे देश ने देखा है। कांग्रेस और उसके साथी सनातन को खत्म करने का ऐलान कर रहे हैं। सनातन को खत्म करने का मतलब है राजस्थान की संस्कृति को खत्म करना, क्या आप ये करने देंगे?”
कांग्रेस को महिला विरोधी पार्टी बताते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा कि, “जब से महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ है तब से इन्होंने महिलाओं के विरुद्ध अभियान छेड़ दिया है। घमंडिया गठबंधन के नेताओं ने बहुत ही आपत्तिजनक टिप्पणियां हमारी माताओं-बहनों के लिए की हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने तो विधानसभा में महिलाओं के प्रति घोर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है लेकिन कांग्रेस के किसी भी नेता ने इस पर कुछ नहीं बोला। यहीं कांग्रेस का असली चेहरा है।”
पाकिस्तान स्थित सिखों के पवित्र स्थल करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में डांस पार्टी करने और शराब के साथ मांसाहारी भोज का आयोजन करने पर श्रद्धालुओं में काफी आक्रोश है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (डीएसजीएमसी) के पूर्व अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया एक्स पर एक नाच-गाने और पार्टी करने का वीडियो जारी किया है और लिखा कि पाकिस्तान सरकार से आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई के लिए कहा है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स कर कहा कि, “पाकिस्तान सरकार के फिर एक बार सिख विरोधी फैसले को देखकर स्तब्ध हूं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाक सरकार ने एक गैर-सिख मोहम्मद लतीफ को पीएमयू करतारपुर कॉरिडोर का सीईओ नियुक्त किया। सिख मर्यादा के बारे में कोई जानकारी नहीं रखने वाले गैर-सिख को यह बड़ी जिम्मेदारी देने से सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है।”
वहीं दूसरी तरफ एसजीपीसी के प्रवक्ता गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि, “पूरा सिख समुदाय इस शर्मनाक घटना की निंदा करता है। पाकिस्तान सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। मैं अनुरोध करता हूं कि अकाल तख्त करतारपुर साहिब के जत्थेदार इस पर अपना रुख स्पष्ट करें।”
बता दें, बताया जा रहा है कि 18 नवंबर को गुरूद्वारा श्री दरबार साहिब परिसर में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के सीईओ सैयद अबू बकर कुरेशी द्वारा पार्टी आयोजित की गर्इ थी। इस पार्टी में नारोवाल के जिला पुलिस अधिकारी मोहम्मद शारूख समेत अन्य 80 लोग शामिल हुए थे।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 12 नवंबर से सुरंग हादसे के बाद बचाव अभियान लगातार जारी है। और अब मदद के लिए पहुंचे अंतरराष्ट्रीय टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स को बचाने अभियान के लिए बुलाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स ने कहा है कि हम उन लोगों को बाहर निकालने जा रहे हैं। उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग में हादसे में फंसे मजदूरों को बचाने के अभियान में हिस्सा लेने के लिए इंटरनेशनल टनलिंग अंडरग्राउंड स्पेस के अध्यक्ष प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स उत्तराखंड पहुंचे है।
बता दें, सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए डीआरडीओ की रोबोटिक्स टीम भी पहुंची है। टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि, “हमने यहां सुरंग के ऊपर जो देखा है और जो हम जानते हैं कि सुरंग के अंदर क्या हो रहा है इसके बारे में हम जानते हैं हम उन 41 लोगों को बचा रहे हैं और ऐसा करते समय हम किसी को भी चोट नहीं पहुंचने देंगे।”
टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स ने आगे कहा कि, “यहां टीम बचाव पर इतना ध्यान केंद्रित कर रही है कि किसी और को चोट न पहुंचे। फिलहाल यह सकारात्मक दिख रहा है। हम सभी एक टीम हैं और पूरी दुनिया हमारे साथ है। यह अच्छा दिख रहा है लेकिन हमें यह तय करना होगा कि क्या यह वास्तव में अच्छा है या यह एक जाल है। यह बहुत सकारात्मक लग रहा है क्योंकि मेरे साथ हिमालय भूविज्ञान के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ हैं। हमें तुलना करने की आवश्यकता है। यह किसी भी जटिल काम की तरह है जहां हमें चारों ओर देखना होता है ऊपर से नीचे तक। हम सभी एक टीम है और पूरी दुनिया हमारे साथ है।”
पिछले अंक में ‘तहलका’ एसआईटी ने दलालों द्वारा क्रिकेट विश्व कप के कॉम्प्लिमेंट्री (मुफ़्त) पास बेचे जाने का पर्दाफ़ाश किया था। इस बार उसी के आगे इस घपले में कई और चौंकाने वाले ख़ुलासे करते हुए ‘तहलका’ ने पाया है कि क्रिकेट विश्व कप के मुफ़्त पास और टिकट्स की कालाबाज़ारी के धंधे की जड़ें बड़ी गहरी हैं। यह भ्रष्टाचार लम्बे समय से बदस्तूर जारी है, जिसकी इस दूसरी कड़ी में हम बता रहे हैं कि कैसे जाँच और धरपकड़ की इक्का-दुक्का घटनाओं को छोडक़र यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। तहलका एसआईटी का ख़ुलासा :-
भारत में चल रहे आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (पुरुष) के कॉम्प्लिमेंट्री (मुफ़्त) पास खुलेआम बिकने का ख़ुलासा ‘तहलका’ एसआईटी द्वारा करने के दो दिन बाद कोलकाता पुलिस ने क्रिकेट विश्व कप टिकटों की कालाबाज़ारी के सम्बन्ध में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (सीएबी) के अध्यक्ष स्नेहाशीष गांगुली को पूछताछ के लिए बुलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्नेहाशीष गांगुली, जो पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली के भाई हैं; ने यह रिपोर्ट तैयार होने तक उन्हें भेजे गये नोटिस का जवाब नहीं दिया था। मीडिया रिपोट्र्स से पता चलता है कि कोलकाता पुलिस ने अब तक क्रिकेट विश्व कप के 94 टिकट ज़ब्त किये हैं और टिकट्स की इस कालाबाज़ारी में शामिल होने के आरोप में 16 लोगों को गिरफ़्तार किया है। इसमें अब तक कुल सात अलग-अलग मामले दर्ज किये गये हैं।
अपनी जाँच के पहले भाग में ‘तहलका’ एसआईटी ने ख़ुलासा किया था कि कैसे दलाल आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप के लिए आईसीसी के कॉम्प्लिमेंट्री पास बेच रहे हैं। यह भी बताया था कि इन पास की क़ीमत मैच की माँग के अनुसार तय की जाती है। इसी पड़ताल में आगे भी ‘तहलका’ रिपोर्टर की मुलाक़ात पंकज वर्मा से हुई, जो लगभग सभी क्रिकेट मैचों के लिए कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने वाला दलाल है। बस उसे अपना पसंदीदा मैच बताएँ, जो आप देखना चाहते हैं; वह पैसे के बदले पास का इंतज़ाम कर देगा।
पंकज वर्मा ‘तहलका’ के रिपोर्टर से 15 अक्टूबर को पहली बार मिला, जिससे उसके द्वारा आईसीसी विश्व कप के कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने के अवैध धंधे का ख़ुलासा हुआ। पंकज ने धर्मशाला में भारत-न्यूजीलैंड मैच के लिए 15,000 रुपये में एक पास बेचने की पेशकश की। कुछ मोलभाव के बाद वह इसे 13,000 रुपये में बेचने को तैयार हो गया। ‘तहलका’ रिपोर्टर का मक़सद कॉम्प्लिमेंट्री पास ख़रीदकर मैच देखना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को उजागर करना था। जाने से पहले पंकज ने रिपोर्टर से कहा था कि वह उनके लिए अन्य मैच के भी 12,000 रुपये प्रति पास की दर से कॉम्प्लिमेंट्री पास का इंतज़ाम कर सकता है। यह जाँचने के लिए कि पंकज वर्मा पेशेवर दलाल है या नहीं, ‘तहलका’ रिपोर्टर ने उससे आईसीसी क्रिकेट विश्व कप का एक और कॉम्प्लिमेंट्री पास ख़रीदने का फ़ैसला किया। और इस बार उसने रिपोर्टर को 29 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाले भारत-इंग्लैंड मैच के दो कॉम्प्लिमेंट्री पास 7,000 रुपये प्रति पास की दर से दिये। पंकज दिल्ली के पाँच सितारा होटल में हमें ये पास देने आया। दो पास की कुल क़ीमत 14,000 रुपये थी।
मुलाक़ात के दौरान पंकज ने ‘तहलका’ रिपोर्टर को बताया कि वह उनके लिए सिर्फ़ कॉम्प्लिमेंट्री पास का ही इंतज़ाम नहीं कर रहा, बल्कि आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (पुरुष) के लिए बॉक्स पास का भी इंतज़ाम कर सकता है, जिसमें खिलाडिय़ों के डगआउट के ठीक बग़ल में बैठने का अधिकार तो होगा ही, वहाँ नाश्ता और कोल्ड ड्रिंक भी मुफ़्त में उपलब्ध होंगे। उसने यह भी वादा किया कि वह रिपोर्टर को 4 नवंबर को अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड मैच के दो मुफ़्त बॉक्स पास देगा, जो उसका दोस्त उसे व्यक्तिगत तौर पर देगा। हालाँकि उसने झिझकते हुए कहा कि वह हमें (रिपोर्टर को) जो भी बॉक्स पास उपलब्ध कराएगा, उसका भुगतान करना होगा और उनकी क़ीमत इस पर निर्भर करेगी कि मैच किन टीमों के बीच हो रहा है।
रिपोर्टर : ये बताओ क्रिकेट में जो बंदा है, जिससे आप पास ले रहे हो; वो सिर्फ़ पास तक ही लिमिटेड है या आगे…?
पंकज : आगे वो बॉक्स एटसेट्रा भी दिलवाता है, …आप बता देना बॉक्स भी दिलवा दूँगा।
रिपोर्टर : सर! पहले क्यूँ नहीं बताया?
पंकज : बॉक्स इस वाले की नहीं है, …बॉम्बे वाले (मैच) के लिए हो जाएगा।
रिपोर्टर : बॉम्बे का कौन-सा मैच है?
पंकज : बॉम्बे में भी एक मैच है।
रिपोर्टर : इंडिया का श्रीलंका के साथ?
पंकज : आई थिंक…श्रीलंका के साथ। अहमदाबाद के पास चाहिए, तो बता देना, बॉक्स का; …वो तो मेरा एक फ्रेंड है, …फ्री ऑफ कॉस्ट दिलवा देगा।
रिपोर्टर : अहमदाबाद में किसका है?
पंकज : इंडिया का नहीं है, …पर किसी का है 4 नवंबर को। अहमदाबाद अगर देखना है, तो बॉक्स है?
रिपोर्टर : बॉक्स एकदम फ्री है।
पंकज : हाँ; एक-दो टिकट करवा दूँगा; … दो ले लो आप।
रिपोर्टर : फ्री करवा दो, …या किसी और का हो बॉक्स?
पंकज : देखो और जगह तो आई थिंक पेड है वो, …यहाँ का ना मेरा काफ़ी अच्छा है; …वो क्या कहते हैं…बंदा एविएशन वग़ैरह के अंदर का है, …तो किसी ने बस दे दिये।
रिपोर्टर : आईसीसी का कोई बंदा होगा?
पंकज : जो फ्री है, …फ्री है।
रिपोर्टर : मुझे ये लग रहा है आपका जो भी बंदा है ना, …वो आईसीसी का कोई बंदा होगा, उससे ले रहे हैं?
पंकज : नहीं-नहीं; …दैट इज स्पॉन्सरशिप; जो ब्रॉन्ड्स वग़ैरह स्पॉन्सर कर रहे हैं, क्रिकेट एटसेट्रा के अंदर, जैसे कि ङ्गङ्गङ्गङ्ग हैं, ङ्गङ्गङ्गङ्ग टायर्स हैं; इन्होंने जो स्पॉन्सरशिप करते हैं ना, इनको कुछ पास मिलते हैं। स्टाफ के लिए, उनके नॉन वग़ैरह के लिए, …तो ये वो वाला सीन है।
रिपोर्टर : अच्छा सर! ये बताओ सेमीफाइनल फाइनल का क्या सीन है? …मिलेंगे पास?
पंकज : मिल जाएँगे। …आप मुझे बता देना कौन-सा चाहिए? …अहमदाबाद वाला अगर बॉक्स चाहिए फ्री ऑफ कॉस्ट तो मुझे बता देना, …दो करवा देता हूँ, मेरे को बोला था उस बंदे ने- अगर आप जाओगे, तो मैं दूँगा।
रिपोर्टर : बॉक्स में क्या-क्या होगा?
पंकज : बॉक्स आपका पवेलियन के साथ में होगा, …वहाँ पर स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक सब फ्री होती है।
रिपोर्टर : अच्छा; अहमदाबाद का फ्री मिल जाएगा,…उसके बाद?
पंकज : उसके बाद सारा पेड है।
रिपोर्टर : वो कितने का मिलेगा, दूसरी जगह? …पेड?
पंकज : मैं एक बार चेक करके बताऊँगा; …कोई आइडिया नहीं है। …जो आगे से कोड होता है, बता दूँगा।
पंकज से जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, उसने बताया कि कालाबाज़ारी करने वालों ने कैसे छल करके आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (पुरुष) के सभी ऑनलाइन टिकट ख़रीद लिये और दर्शक टिकट्स के लिए भटक रहे हैं। उसने ख़ुलासा किया कि अब मैचों की माँग देखकर वह उन्हें ब्लैक में बेच रहा है। उसके मुताबिक, भारत के सभी मैचों के टिकट ब्लैक में कहीं ज़्यादा दाम पर बिकते हैं। पंकज ने उदाहरण के लिए बताया कि भारत-इंग्लैंड मैच के टिकट, जिनकी मूल क़ीमत 3,500 रुपये है; 18-20 हज़ार रुपये प्रति टिकट ब्लैक में बेचे जाते हैं।
रिपोर्टर : ये भी, जैसे आप कह रहे थे कि डिमांड सप्लाई पर होगा, जैसा आप बता रहे थे?
पंकज : एग्जैक्टली, लोग ज़्यादातर इंडिया का मैच प्रेफर करते हैं। …इंडिया के टाइम पर ज़्यादा रेट रहता है।
रिपोर्टर : टिकट तो इन्होंने एडवांस में बीसीसीआई ने ऑनलाइन रखे थे?
पंकज : हाँ, ऑनलाइन रखे थे; ख़त्म हो गया। आज की डेट में कुछ नहीं है; और मिल भी गया, तो 18-20 के (हज़ार) से कम नहीं है।
रिपोर्टर : इंडिया के मैच की या ये वाली, …29 अक्टूबर को है?
पंकज : ये वाली, …18-20 की इंडिया-इंग्लैंड।
रिपोर्टर : ब्लैक में?
पंकज : हाँ जी! …ये वाली जो टिकट है ना, ये आपको मिलेगी ही नहीं। …आपकी कॉम्प्लिमेंट्री टिकट में ना…आप ये मत सोचो, इसमें पैसे नहीं हैं, …कॉम्प्लिमेंट्री में आपको इतनी अच्छी बे (बैठने की जगह) मिलेगी, नॉर्मल टिकट नहीं आएगी। कॉम्प्लिमेंट्री कॉम्प्लिमेंट्री है। …सिर्फ़ खाने को छोड़, वरना कॉम्प्लिमेंट्री बहुत अच्छी है।
रिपोर्टर : ये 18 के (हज़ार) वाला टिकट कितने का है, ओरिजिनली?
पंकज : 18 के वाली आई थिंक आएगी 3,500 रुपीज में।
रिपोर्टर : रुपीज 3500 का 18,000 में! ब्लैक में बाप रे…! लेकिन सारे मैचिज का ब्लैक नहीं है सर?
पंकज : सारे का नहीं है, वट देखने वाले मैचेज का एंड मोमेंट पर ब्लैक है; …जिसने देखना, उसे देखना है।
रिपोर्टर : मुझे लगता है…जितने भी ब्लैक मार्केटियर्स हैं, उन्होंने पहले ऑनलाइन बुकिंग करवा ली है?
पंकज : करवा ली है और देख भी आये हैं; …आप मानोगे नहीं, …इंडिया-पाकिस्तान का तो 24 हज़ार रुपये में बिके हैं। …मेरे फ्रेंड ने ऑफिस के बंदे ने, …कई जगह देकर आये हैं।
पंकज ने रिपोर्टर को बताया कि उसे उनसे पहली बार मिलने में डर लग रहा था। उसे पता नहीं था कि वास्तव में हम (रिपोर्टर) कौन हैं। और वह मुफ़्त वाले पास बेच रहा था, जो बिक्री के लिए नहीं हैं।
इस खुली बातचीत में पंकज ने ‘तहलका’ रिपोर्टर को बताया कि वह जो पास उन्हें बेच रहा है, वो वास्तव में पूरी तरह मुफ़्त नहीं हैं। किसी ने उनके लिए पैसे चुकाये हैं। और कॉम्प्लिमेंट्री पास हासिल करना कोई आसान काम नहीं है। केवल भीतरी लोग ही इन्हें हासिल कर सकते हैं।
रिपोर्टर : और बताओ सर! …उस दिन तो आप इतने डरे हुए थे?
पंकज : ऐसे काम ना मैं करता नहीं हूँ; जैसे ये अभी आये हुए हैं, …तो मैं ये ही चैरिटी कर रहा हूँ।
रिपोर्टर : इस काम में ऐसा क्या ग़लत है?
पंकज : ग़लत मतलब…किसी के कॉम्प्लिमेंट्री आ रहे हैं, क्यूँ सेल करना? …कॉम्प्लिमेंट्री में।
रिपोर्टर : अच्छा; फ्री पास सेल कर रहे हो आप?
पंकज : फ्री पास नहीं है ये, इसको भी…पेड होता है।
रिपोर्टर : ओरिजिनली देखा जाए तो ये फ्री पास हैं?
पंकज : उसके पास कुछ-न-कुछ पोर्शन होता है कि वो पे करेगा, …कॉम्प्लिमेंट्री अगर आप ले रहे हैं…तो सबको नहीं मिलता, राइट? …मतलब जिसके पास बहुत अच्छी सेटिंग होगी, उसके बाद ही वो कॉम्प्लिमेंट्री पास ले पाएगा। …इतना इजी नहीं है कॉम्प्लिमेंट्री लाना।
रिपोर्टर : हम्म…वही?
पंकज : उसके लिए…वो इसकी कॉस्ट नहीं होगी, …वट जो ले रहा है, वो कुछ-न-कुछ कॉस्ट पे कर रहा है। …क्योंकि डिमांड सप्लाई वाला गेम है।
पंकज ने ‘तहलका’ रिपोर्टर को बताया कि उसने हमसे यह झूठ बोला था कि उसका कोई बिजनेस है, क्योंकि वह हमसे (रिपोर्टर से) पहली मुलाक़ात में काफ़ी डर गया था। वास्तव में वह एक प्रतिष्ठित निजी एयरलाइन में उनके ट्रेजरी विभाग में नौकरी कर रहा है।
बातचीत में पंकज ने इस काम की नैतिक जटिलताओं को स्वीकार किया और कहा कि कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने का जो काम वह कर रहा है, वह एक अनैतिक कार्य है; लेकिन जल्दी पैसे कमाने की चाह ने उसे इस तरफ आकर्षित किया।
रिपोर्टर : आप जॉब में हो अपना बिजनेस है?
पंकज : जॉब में हूँ।
रिपोर्टर : उस दिन आप बिजनेस कह रहे थे?
पंकज : वो तो ऐसे ही, …पहली बार मिला था।
रिपोर्टर : हा…हा; …बहुत ज़्यादा डरे हुए थे आप?
पंकज : देखो जी करना नहीं है…ऐसा काम मेरे को ना, बहुत अजीब लगते हैं। …मैं अपना सेटल हूँ, …आपने ङ्गङ्गङ्गङ्ग का नाम सुना होगा?
रिपोर्टर : ङ्गङ्गङ्गङ्ग एयरलाइंस?
पंकज : हाँ; मैं ङ्गङ्गङ्गङ्ग में जॉब करता हूँ।
रिपोर्टर : आप ङ्गङ्गङ्गङ्ग एयरलाइंस में नौकरी करते हैं? …क्या हैं आप वहाँ?
पंकज : वहाँ पर मैं अपना रोल देखता हूँ…ट्रेजरी का।
आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (पुरुष) के दो अलग-अलग मैचों के लिए हमें तीन कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने के बाद पंकज ने भरोसा दिलाया कि वह हमारी माँग पर भविष्य के सभी मैचेज के लिए उचित क़ीमत पर मुफ़्त पास का इंतज़ाम करेगा। दिलचस्प यह है कि उसने दावा किया कि उसने रिपोर्टर को बेचे गये दो अलग-अलग मैचों के तीन मुफ़्त पास पर कुछ नहीं कमाया है।
रिपोर्टर : और बाक़ी मैचेज का क्या सीन है?
पंकज : बाक़ी का आप बता देना, …मैं आपके लिए मँगवाऊँगा। …मेरे को ज़्यादा वो नहीं है, …वट आपके लिए मिल जाएगा। …एक-दो करवा दूँगा।
रिपोर्टर : रेट सही लगवा दो?
पंकज : रेट का आप मान लो मैंने आपको ऐसे ही बताया है, …कुछ भी नहीं कमाया।
रिपोर्टर : अच्छा; जो आगे के मिलेंगे, वो टिकट होंगे या कॉम्प्लिमेंट्री?
पंकज : कॉम्प्लिमेंट्री होंगे, …टिकट वग़ैरह नहीं हैं। …वो वाले ऑस्ट्रेलिया-नीदरलैंड के टिकट्स थे, …वो आई थिंक 1,500 के थे; …2000 में दिया था।
रिपोर्टर : 500 रुपीज ज़्यादा!
अब ‘तहलका’ रिपोर्टर ने 29 अक्टूबर को लखनऊ में भारत-इंग्लैंड मैच के लिए दो कॉम्प्लिमेंट्री पास के लिए पंकज को 10,000 रुपये का भुगतान किया। जैसा कि उससे चर्चा हुई थी। पंकज ने रिपोर्टर से दो कॉम्प्लिमेंट्री पास के लिए पूरे 14,000 रुपये का भुगतान करने को कहा। लेकिन रिपोर्टर ने उसे मौ$के पर ही शेष 4,000 रुपये देने से इनकार कर दिया। रिपोर्टर ने उससे कहा कि वह उसके शेष 4,000 रुपये बाद में पेटीएम के ज़रिये भुगतान करेंगे।
रिपोर्टर : लो गिनो (रुपये देते हुए)।
पंकज : काउंटिंग मनी?
रिपोर्टर : 10 हो गये सर?
पंकज : 14 बोला था; …मैंने पहले ही बोला था।
रिपोर्टर : चलो मैं पेटीएम कर दूँगा।
पंकज : हाँ-हाँ; नो प्रॉब्लम।
रिपोर्टर : क्यूँकि मेरे पास कैश नहीं है।
पंकज : आप मुझे पेटीएम कल या अभी कर दीजिएगा।
रिपोर्टर : मैं कर दूँगा अभी थोड़ा-सा नेटवर्क का इश्यू है। मैं कर दूँगा।
पंकज : ठीक है।
रिपोर्टर : 10 के (हज़ार) हो गये सर? थोड़ा-सा नेटवर्क का इश्यू है।
पंकज : ठीक है।
रिपोर्टर : 10 के (हज़ार) हो गये …29 अक्टूबर के।
पंकज : आप मुझे आगे वाला बता देना राइट, …आप पेटीएम कर देना मुझे आगे दे देना।
रिपोर्टर : आप टेंशन मत लो सर! …14 के (हज़ार) रुपये के दो टिकट्स, …दो कॉम्प्लिमेंट्री इंडिया-इंग्लैंड 29 अक्टूबर।
जब पंकज से 10,000 रुपये में ये दोनों मुफ़्त पास देने को कहा गया, तो उसने इनकार कर दिया। उसने कहा कि उसने पहले ही रिपोर्टर को पहले मुफ़्त पास पर 2,000 रुपये की छूट दे दी है। अब वह इन दो नि:शुल्क पास पर कोई छूट नहीं दे सकेगा। उसने कहा कि वह इन मुफ़्त पास पर अपने पेट्रोल ख़र्चे के सिर्फ़ 500 रुपये कमा रहा है। वह तो बस हमारी (रिपोर्टर की) मदद कर रहा है।
रिपोर्टर : अब आगे का देख लेना थोड़ा डिस्काउंट दिलवा दो?
पंकज : सर! मैं आपको क्या बताऊँ, …मैंने पहले ही रुपीज 15 के (हज़ार) पर 2,000 डिस्काउंट तब दिया।
रिपोर्टर : ये 10 के (हज़ार) का कर लो?
पंकज : अगर होता, तो मैं ज़रूर देता…सीरियसली। …आपको मैंने पहले ही बोल दिया, …यू आर रियली अ काइंड पर्सन।
रिपोर्टर : थैंक्स अ लॉट।
पंकज : मेरे कोई भी नेगोशिएबल नहीं है। …मैं भी कुछ नहीं कर रहा सर! सिर्फ़ 500 रुपये बचते हैं, …पेट्रोल पड़ जाता है। …मैं तो सिर्फ़ आपकी हेल्प कर रहा हूँ।
रिपोर्टर : थैंक यू सर! …थैंक्स फॉर कमिंग।
क्रिकेट विश्व कप के कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने की ‘तहलका’ एसआईटी की पड़ताल का यह दूसरा भाग है। ‘तहलका’ रिपोर्टर ने पंकज वर्मा द्वारा आईसीसी विश्व कप के दो बार कॉम्प्लिमेंट्री पास बेचने का ख़ुलासा किया। विभिन्न क्रिकेट मैच केंद्रों से पहले से ही ख़बरें आ रही हैं कि दलाल क्रिकेट विश्व कप के टिकट ब्लैक में बेचते हुए पकड़े गये हैं और उन पर मामले दर्ज हुए हैं। पंकज वर्मा दो बार ‘तहलका’ एसआईटी के कैमरे में कैद हुआ है। जिस तरह क्रिकेट विश्व कप के कॉम्प्लिमेंट्री (मुफ़्त) पास खुले रूप से बेचे जा रहे हैं और टिकट्स ब्लैक में उपलब्ध हो रहे हैं, उससे किसी बड़े घोटाले का संकेत मिलता है। अब आईसीसी और बीसीसीआई को हमारी इस पड़ताल से उठे सवालों पर से परदा उठाना है।