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जेब-तराश हत्यारे

धर्मों के ठेकेदार अपने ही धर्म के लोगों की जेब धार्मिक तरीक़े से काट रहे हैं और धार्मिक तरीक़े से ही उनकी गर्दनें कटवाने पर आमादा हैं। उन्होंने अपने ही लोगों के दिमाग़ में इतनी धर्मांधता भर दी है कि उन्हें अच्छा-बुरा, धर्म-अधर्म, सत्य-असत्य, शुभ-अशुभ और भविष्य तक की समझ नहीं रहती; ईश्वर तो दूर की बात है। ईश्वर के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम है। न ही तथाकथित धर्म के ठेकेदारों को कुछ भी मालूम है और न उनका अंधानुकरण करने वालों को ही कुछ मालूम है। जिन्हें मालूम है, उन्होंने घृणा, दुराचार, लूट, चोरी, वैमनस्य, ईष्र्या, छोटा-बड़ा, ऊँच-नीच, अच्छा-बुरा, क्रोध, लालच, काम-वासना, चुगली, झूठ, छल, कपट, लिप्सा, अहंकार सब कुछ छोड़ दिया है। उन्हें न इस संसार से मोह है। न इस संसार में कोई रुचि है; और न ही इस संसार से कोई लालच है। उन्हें ईश्वर तक पहुँचने के लिए किसी धर्म के सहारे की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि उन्हें ईश्वर से विशुद्ध प्रेम हो चुका है। इसलिए वे किसी का बुरा भी नहीं सोचते और भला भी नहीं सोचते। वे जो कुछ हो रहा है, सब कुछ ईश्वर की इच्छा मानकर उसी पर छोड़ देते हैं। उन्हें पता है कि काल के चक्र से कोई नहीं बच पाया है। इसलिए वे काम, मद, मोह, लिप्सा, धत्कर्म और पाप सबसे बचे रहते हैं।

यह एक कटु सत्य है कि अपराध वही करता है, जिसमें अज्ञानता भरी हुई हो। अज्ञानता ही लोभ, क्रोध, मद और मोह का बीज है। लेकिन अज्ञानता ही भय, हीनता, दीनता और अंधविश्वास भी पैदा करती है। अज्ञानता की वजह से ही लोग भ्रमित होते हैं। किसी चालाक या समझदार के लिए उन्हें हाँकना उतना ही आसान होता है, जितना कि भेड़ों को हाँकना। बस उनके आगे-आगे चलते जाना है। सभी अंधविश्वासी अपने आप भेड़ों की तरह पीछे-पीछे चलने लगते हैं। जैसे भेड़ों को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उनके आगे कौन चल रहा है? गधा या कुत्ता? वैसे ही अंधानुकरण करने वालों को भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उन्हें कौन धर्मोपदेश दे रहा है? बस उसके हाथ में धर्म का झण्डा, धर्म की किताबें होनी चाहिए। कोई नहीं पूछता कि उसे धर्म और ईश्वर के बारे में सही में कितना पता है? कोई धर्म के तथाकथित ठेकेदारों से यह भी नहीं पूछता कि आख़िर हमें ले कहाँ जा रहे हो? क्योंकि सच्चाई यह भी है कि कोई नहीं जानता, आख़िर जाना कहाँ है? कोई नहीं जानता, ईश्वर कैसा है? कोई ईश्वर को पहचानता भी नहीं है। किसी को ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता भी नहीं मालूम? सब अन्धे हैं। ऊपर से सब घुप्प अँधेरे में हैं। किसी में रास्ता दिखाने की सामथ्र्य नहीं है। किसी को कोई किरण नहीं दिखती, सब उन्हीं पगडंडियों के चक्कर काट रहे हैं, जो पगडंडियाँ पहले से किसी ने बना रखी हैं। वे आगे भी नहीं बढ़ रहे हैं। सब चींटियों की तरह बनी-बनायी पगडंडियों पर ही रेंग रहे हैं। एक भी उन पगडंडियों से अलग होता है, अथवा अपना रास्ता अलग बनाता है, तो सब उसे भटका हुआ मानकर उसे धर्म-विरोधी और ईश्वर-विरोधी तय कर देते हैं।

इस विरोध का कारण यह नहीं है कि वह भटक गया है; बल्कि यह है कि उनकी पंक्ति से अलग चल रहा व्यक्ति कहीं उनका विरोध न कर दे। उसके अलग होने से वह अपनी जेब कटने से बचा ले जाएगा। वह उस भीड़ में शामिल नहीं होगा, जो एक उकसावे पर धर्म के नाम पर हिंसा के लिए उतारू हो जाते हैं। बस यही बात तथाकथित पाखण्डी धर्माचार्यों को परेशान करती है। इसी कारण तथाकथित किताबी धर्मों के विरोध में खड़े लोगों की हत्याएँ होती हैं। भले ही वे कितने भी मानवीय हों। कितने भी लोगों की भलाई का काम करते हों। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वे सत्य भी बोलते हों। फ़र्क़ इस बात से पड़ता है कि उन्होंने पाखण्ड को स्वीकार क्यों नहीं किया? उस लीक को क्यों छोड़ दिया, जिस पर सब अन्धे होकर चल रहे हैं?

इस संसार में यही समस्या है। जो अलग चला, जिसने अपना रास्ता ख़ुद बनाने की सोची, उसके विरोध में तमाम अन्धे रोड़ा बनने लगते हैं। वे चाहते हैं कि अपना रास्ता बनाने वाला उनकी तरह ही अन्धा होना चाहिए। वे यह भी भूल जाते हैं कि जो अपना रास्ता ख़ुद बना रहा है, उससे उन्हें भी लाभ होगा। इसीलिए तो ईश्वर की खोज करने वाले संसार को छोड़ देते हैं। वे जानते हैं कि मूर्खों से भरे इस संसार में अगर कोई उनका समर्थन न करके अपने तरीक़े से ईश्वर का भजन करेगा, तो उसके धन्धे का विद्रोह हो सकता है। इसलिए, जिसने संसार में रहकर एक सही रास्ता ईश्वर को पाने का बताया है; उसका पुरज़ोर विरोध हुआ है। चाहे कबीर हों, चाहे ओशो, चाहे कोई और। धर्म के नाम पर जेब-तराश हत्यारों को इससे बड़ी तकलीफ़ होती है। उनकी सत्ता को इससे ख़तरा होने लगता है। उन्हें डर लगने लगता है कि उनके सुख-भोग और सम्मान का अन्त न हो जाए। इसलिए वे धर्म की किताबों को दबोचे एक बड़ी भीड़ को गुमराह किये रहते हैं। उनके पास अपना कोई ज्ञान नहीं है।

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच खुफिया एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट

देशभर में 77 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के बीच खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर आतंकी हमला होने की आशंका जताई है। अलर्ट में बताया गया है कि आतंकियों के प्राइम टारगेट पर देश की राजधानी दिल्ली है।

अलर्ट में आग कहा गया है कि, “आतंकियों की मंशा जी-20 से पहले हमला कर देश की छवि खराब करने की है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक फरवरी 2023 में इनपुट मिला कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन से जुड़े लोग दिल्ली में रेकी करने की कोशिश कर रहे है।”

बता दें मई 2023 के एक इनपुट के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा ने जुड़े एक पाकिस्तानी आतंकवादी ने अपने सहयोगियों को दिल्ली प्रमुख सड़कों, रेलवे प्रतिष्ठानों, दिल्ली पुलिस मुख्यालय और एनआईए दफ्तर समेत दिल्ली की कुछ जगहों का टोह लेने का निर्देश दिया था।

साथ ही पीओके स्थित एक आतंकी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि जैश-ए-मोहम्मद दिल्ली सहित कई भारतीय शहरों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है।

शिमला में भूस्खलन से ढहा शिव मंदिर, 50 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका

हिमाचल प्रदेश के सोलन के कंडाघाट उपमंडल के जादोन गांव में बादल फटने से पांच लोगों की मौत हो गई है। प्रदेश में स्कूल कॉलेज सब बंद कर दिए गए है।

शिमला में भूस्खलन की चपेट में एक शिव मंदिर आ गया है और पूजा करने पहुंचे करीब 50 लोगों के मलबे में दबने की सूचना हैं। पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के अधिकारी बचाव अभियान चला रहे है।

हिमाचल के शिमला, मंडी, सिरमौर सहित अन्य कई जिलों में हालात बेहद ही खराब है। कई रास्ते बंद है। आईएमडी ने उत्तराखंड में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और उसके मुताबिक उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना है।

वहीं उत्तराखंड के देहरादून में लगातार भारी बारिश के कारण के कॉलेज की इमारत ढह गई है। चमोली और उत्तरकाशी मोरी क्षेत्र में बादल फट गया है। उत्तराखंड के डीजीपी ने पहाड़ी इलाकों में न जाने की अपील की है।

पीएम मोदी चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे आज, संत शिरोमणि रविदास स्मारक का करेंगे शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के दौरे पर जा रहे हैं और वहां विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत भी करेंगे। पीएम आज संत श्री रविदास स्मृति स्थल का भूमि पूजन करेंगे उसके बाद संत शिरोमणि रविदास स्मारक का शिलान्यास करेंगे।

बता दें, मध्य में स्मारक का शिलान्यास करने के बाद यहां वे एक जनसभा को संबोधित करेंगे। पिछले 11 महीनों में यह पीएम मोदी का सातवाँ दौरा है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर अन्य केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े कर्इ बड़े नेता मध्य प्रदेश के दौरे पर पहुंचे है।

वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल बाद सत्ता में वापसी की थी किंतु 15 महीने बाद ही मार्च 2020 में सत्ता में बड़ा उलटफेर हुआ और बीजेपी की तरफ से शिवराज सिंह को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया।

राहुल गांधी आज कैथांगु परियोजना के तहत बनाए गए घरों की चाबियां आम लोगों को सौंपेंगे, अंबेडकर मेमोरियल कैंसर सेंटर का उद्घाटन करेंगे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सांसदी बहाल होने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वयनाड के दो दिवसीय दौरे पर आज (शनिवार) उनका पहला दौरा है। केरल कांग्रेस में राहुल गांधी के दौरे के लिए काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

मोदी सरनेम मानहानि मामले में सप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के सजा पर रोक लगा दी थी। राहुल का आज 3.30 बजे कलपेट्टा स्थित नए बस स्टैंड परिसर में स्वागत होगा और इस दौरान वे कैथांगु परियोजना के तहत बनाए गए घरों की चाबियां आम लोगों को सौंपेंगे।

अगले दिन यानी रविवार को दोपहर 12 बजे जिले के नल्लूरनाडु में अंबेडकर मेमोरियल कैंसर सेंटर में स्थापित एक हार्इ-टेंशन ट्रांसफोर्मर का उद्घाटन करेंगे। वह शाम 6.30 बजे कोझिकोड जिले के कोडानचेरी में एक सामुदायिक विकलांगता प्रबंधन केंद्र की आधारशिला भी रखेंगे।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष वीटी सिद्की ने मंगलवार को कहा कि, “राहुल गांधी 12 अगस्त को वायनाड आ रहे हैं। हम उनके लिए गर्मजोशी से स्वागत की व्यवस्था करने जा रहे हैं और तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक है। 12 और 13 अगस्त को वह यहां रहेंगे।”

आपको बता दें, वायनाड संसदीय सदस्यता जाने के बाद 10 अप्रैल को आखिरी बार राहुल गांधी वयनाड गए थे। इस दौरान गांधी ने अपने भाषण में कहा था कि, “मेरी संसद सदस्यता छीन ली गर्इ, मेरा घर छीन लिया, मेरे पीछे पुलिस लगा दी, लेकिन मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता हैं। 50 बार मेरा घर ले लो, लेकिन मैं भारत और वयनाड के लोगों के मुद्दों को उठाता रहूंगा। सांसद तो बस एक टैग है। यह एक पद है इसलिए बीजेपी टैग हटा सकती है, वे पद ले सकते हैं, वे घर ले सकते हैं और वे मुझे जेल में भी डाल सकते हैं, लेकिन वे मुझे वयनाड के लोगों का प्रतिनिधि करने से नहीं रोक सकते हैं।”

पहचान छिपाकर युवती से शादी या झांसा देकर यौन संबंध बनाना कानून के तहत होगा अपराध – अमित शाह

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक विधेयक पेश किया है जिसमें पहचान छिपाकर किसी महिला से शादी करने या विवाह, पदोन्नति और रोजगार के झूठे वादे की आड़ में यौन संबंध बनाने पर 10 साल तक की कैद हो सकती है।

गृह मंत्री अमित शाह ने 1860 की भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) को बदलने के लिए लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक पेश किया और कहा इसमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

शाह ने आगे कहा कि, “इस विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराध और उनके सामने आने वाली कई सामाजिक समस्याओं का समाधान किया गया है। शादी, रोजगार, पदोन्नति का वादा और झूठी पहचान की आड़ में महिलाओं के साथ संबंध बनाना पहली बार अपराध की श्रेणी में आएगा।”

विधेयक में कहा गया है कि, “जो कोई भी धोखे से और बिना विवाह के इरादे से किसी महिला से शादी करने का वादा करता है उसके साथ यौन संबंध बनाता है तो यह यौन संबंध बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है लेकिन अब इसके लिए 10 साल तक की कैद की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।”

इसमें आगे कहा गया है कि, “हत्या के अपराध के लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा होगी। यदि किसी महिला की बलात्कार के बाद मृत्यु हो जाती है या इसके कारण महिला मरणासन्न स्थिति में पहुंच जाती है तो दोषी को कठोर कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम नहीं होगी और इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ दुष्कर्म के दोषी को कठोर कारावास की सजा दी जाएगी। जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम होगी और इससे व्यक्ति के शेष जीवन तक कारावास की सजा तक बढ़ाया जा सकता है।”

वहीं फौजदारी मामलों के वरिष्ठ वकील शिल्पी जैन ने कहा कि, “यह प्रावधान लंबे समय से लंबित था और इस तरह के प्रावधान की अनुपस्थिति के कारण, मामलों को अपराध नहीं माना जाता था और दोनों पक्षों की तरफ से कई व्याख्या के विकल्प खुले थे।”

आजादी के 75 साल बाद भी मुसलमानों को न्याय नहीं मिला, प्रधानमंत्री जी मुसलमानों के मन की बात सुनें – शाही इमाम

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे मुसलमानों के मन की बात सुनें। मुसलमान समुदाय के लोगों से बात करें। नफरत और सांप्रदायिक हिंसा से निपटने में सरकार और कानून कमजोर साबित हो रहे हैं।

शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने जुमे की नमाज से पहले एक बयान देकर कहा कि, “यह सरकार मुसलमानों से नफरत करती है। सरकार हमारा उत्पीड़न कर रही है। चुनाव की वजह से एक धर्म को मानने वालों को धमकी दी जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “हाल ही में हरियाणा के नूंह मेवात में मुसलमानों के घरों के ऊपर बुलडोजर चलाए गये। खुले आकाश के नीचे जीने को विवश किया जा रहा है। पूरे देश पर सांप्रदायिक शक्तियां हावी हैं। यह देश और समाज के लिए खतरनाक स्थिति है। नूंह, मेवात समेत हरियाणा के कई इलाकों में पंचायत करके मुसलमानों को धमकाया जा रहा है। हिंदुओं से कहा जा रहा है मुसलमानों का बॉयकॉट करो। कट्टरपंथियों ने देश के माहौल को खराब कर दिया है। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या इसी काम के लिए इस देश को हमारे पूर्वजों ने कुर्बानी देकर आजाद कराया था।”

लोगों का आगाह करते हुए इमाम बुखारी ने कहा कि, “यह सब अगले साल होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर किया जा रहा है। हम सबको पता है कि सब कुछ चुनाव की वजह से कराया जा रहा है। कोई भी पार्टी हमेशा सत्ता में नहीं रहने वाली है। प्रधानमंत्री जी हालात को समझें और उस पर गौर करें। आजादी के 75 साल बाद भी मुसलमानों को न्याय नहीं मिला। आज के समय में मुसलमानों के हालात दलितों से भी ज्यादा खराब है।”

नूंह हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा हेट स्पीट और क्राइम पूरी तरह से अस्वीकार्य है निकालना होगा इसका हल

नूंह हिंसा के बाद महापंचायत में मुस्लिमों के खिलाफ अभियान के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गर्इ थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, “हेट क्राइम और हेट स्पीच पूरी तरह अस्वीकार्य है। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, मैकेनिज्म बनाना जरूरी है। हमें इस समस्या का हल निकालना ही होगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने रैलियों पर फिलहाल रोक लगाने के आदेश से इंकार कर दिया है और केंद्र से ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रस्ताव मांगा है।

याचिकाकर्ता से कोर्ट ने कहा कि, “वे अपने पास उपलब्ध हेट स्पीट के मटेरियल को तहसीन पूनावाला फैसले के मुताबिक नोडल अफसर को दें। नोडल अफसर कमेटी को इस तरह की शिकायतों के निवारण के लिए समय-समय पर मिलना चाहिए।”

जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि, “हम पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से कहेंगे कि वे एक कमेटी का गठन करे जो अलग-अलग इलाकों के एसएचओ से प्राप्त हेट स्पीच की शिकायतों पर गौर करके उनके कंटेंट की जांच करें और संबंधित पुलिस अधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी करें।”

मणिपुर में महिलाओं के रेप हो रहे है और संसद में पीएम अपने भाषण में चुटकुले सुना कर हंस रहे थे – राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का विषय मणिपुर था मैं और कांग्रेस नहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने को पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि, “संसद में अपने भाषण के दौरान मैने कहा था पीएम और गृह मंत्री अमित शाह ने भारत माता की हत्या कर दी है और मणिपुर में भारत की हत्या कर दी है ये खोखले शब्द नहीं है। संसद में पीएम को किसी पार्टी के नेता की तरह बात नही करनी चाहिए थी। अपने भाषण में पीएम मणिपुर पर बिलकुल गंभीर नहीं दिखे। पीएम और भाजपा के सदन में सदस्य हस्ते खिलखिलाते रहे।”

राहुल गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि, “कल पीएम जी ने संसद में 2 घंटे 13 मिनट भाषण दिया। अपने भाषण के अंत में उन्होंने केवल 2 मिनट मणिपुर की बात की, जबकि मणिपुर में महीनो से आग लगी हुई है, लोग मारे जा रहे है, महिलाओं का बलात्कार हो रहा है लेकिन पीएम मोदी संसद में अपने भाषण के दौरान चुटकुले सुना रहे थे और हंस रहे थे। देश के प्रधानमंत्री होने के नाते ये उन्हे शोभा नही देता। जबकि विषय कांग्रेस और मैं नहीं था, विषय मणिपुर था।”

वयनाड सांसद राहुल गांधी ने आगे कहा कि, “मैने अपने 19 साल के राजनितिक अनुभव में ऐसा कभी नहीं देखा जो मणिपुर में हो रहा है। पहली बार मणिपुर में जो हुआ वो देखा है इससे पहले ऐसा वहा कभी नही देखा था। मणिपुर में भारत को खत्म कर दिया गया है। जब मैं और मेरी टीम मणिपुर दौरे पर गई और मैतई राहत शिविरों में लोगों से मिलने के लिए जा रही थी तब हमे बोला गया कि यदि आपकी सुरक्षा में कोई कुकी हो तो उसे लेकर न आए नहीं तो हम उसे गोली मार देंगे। और बिलकुल यही हम कुकी लोगो ने भी कहा। इसलिए संसद में जब अपने भाषण के दौरान मैने बोला था की बीजेपी ने मणिपुर की हत्या कर दी है तो मेरा कहने का मतलब यही था।”

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल ने आगे कहा कि, “पीएम मणिपुर नही जा सकते तो कोई बात नही लेकिन उनके लिए कुछ बोले तो जिससे की हिंसा रुक सके। यदि पीएम मोदी चाहे तो वो केवल 2 दिन के भीतर मणिपुर की हिंसा को रोक सकते हैं हमारे देश की सेना मणिपुर में चल रही हिंसा रोकने में सक्षम है। लेकिन पीएम नही चाहते की वहा हिंसा रुके।” 

एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि, “शायद पीएम मोदी को मेरा चेहरा पसंद नही है हालांकि वो मेरा वीडियो देखते है तो ऐसे में विरोधाभास हो सकता है। लेकिन मैं जानता हूं मीडिया, लोकसभा, राज्यसभा सभी पर सरकार का नियंत्रण है। लेकिन मुझे इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ता। मैं अपना काम करता रहूंगा, और भारत माता की रक्षा करता रहूंगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर यौन हिंसा में पुलिस की मिलीभगत पर सख्त जांच के दिए आदेश

मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी जारी हुई है। मणिपुर में हालातों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, “कानून प्रवर्तन प्राधिकरण हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहा है।”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि, “सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में हिंसा के अपराधियों के साथ पुलिस की मिलीभगत के आरोपों की भी जांच करने का निर्देश दिया है। रैंक, स्थिति, पद की परवाह किए बिना अपराधियों से मिलीभगत करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई हो। ”

इसमें आगे कहा गया है कि, “महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी दत्तात्रेय पडसलगीकर को उन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है और कुछ पुलिस अधिकारियों ने मणिपुर में संघर्ष के दौरान हिंसा और यौन हिंसा सहित के अपराधियों के साथ मिलीभगत की थी।”

केंद्र और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को पूरा करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है। साथ ही महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी दत्तात्रेय पडसलगीकर को जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आदेश के अनुसार, “सुप्रीम कोर्ट ने जांच की धीमी गति की आलोचना की और जांच आयोग को 2 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद ट्रायल को राज्य से बाहर ट्रांसफर पर विचार करेंगे।

आपको बता दें, इससे पहले 7 अगस्त की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केवल मौखिक रूप से आदेश की रूपरेखा दी थी किंतु अब सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत आदेश जारी किया है।