ममता सिंह, देहरादून/नई दिल्ली।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-72A) पर फर्राटे से गाड़ियां दौड़ रही हैं। बीते दिनों 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने इस एक्सप्रेसवे का Inauguration किया है हालांकि चारधाम यात्रा के मद्देनजर आनन- फानन में एक्सप्रेसवे खोल दिया गया है, ताकि सामान्य यात्रियों के साथ-साथ चारधाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इसका लाभ मिल सके। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक्सप्रेसवे को खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है लेकिन बड़ी विडंबना यह है कि पूर्व निर्धारित टैक्स प्लाजा अभी शुरू ही नहीं हुए हैं।
देहरादून से लेकर दिल्ली तक का महत्वपूर्ण सफर का फासला 216 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में योजना के तहत कुल 5 Toll Plazas निर्धारित हैं। जिसमें एक पुराना टोल (चमारी खेड़ा) भी शामिल है। जबकि नए 4 टोल प्लाजा भी हैं, जो अभी शुरू नहीं हुए हैं। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि टैक्स कितना तय किया जाए, इसको लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। टैक्स निर्धारित करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया लेकिन उसने टैक्स अनाप-शनाप तय कर दिया है। यदि कमेटी द्वारा निर्धारित टैक्स लागू किया जाता है तो इसका असर लोगों की जेब पर सीधा पड़ेगा। लिहाजा, सरकार ने टैक्स को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अंततः एक्सप्रेसवे को जल्दीबाजी में खोल तो दिया गया है लेकिन अभी 4 टोल प्लाजा का टैक्स तय होना बाकी है। वर्तमान में एक्सप्रेसवे से गुजरने पर केवल पुराने टोल प्लाजा पर वाहनों को टैक्स देना पड़ रहा है। शेष 4 टैक्स प्लाजा, टैक्स विहीन हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि टैक्स ना वसूले जाने की वजह से लाखों रुपए का नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। लेकिन यात्रियों के लिए यह Tax-free सफर किसी तोहफे से कम नहीं है। शुरू में कहा गया था कि दिल्ली सरकार भी देहरादून के लिए बसें चलाएगी लेकिन इस मामले में अभी दिल्ली सरकार मौन है। यह सत्य है कि इस एक्सप्रेसवे उद्घाटन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। उत्तरप्रदेश सरकार की बसें तो इस रूट में पहले से ही चल रही हैं। लेकिन दिल्ली की सरकार ने इस दिशा में महज घोषणा के अलावा और कुछ भी किया है। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने इस नए रूट के लिए 2 सामान्य, 6 AC तथा 13 Volvo Buses चलाना शुरू कर दिया है। केवल इतना ही नहीं, उत्तराखंड सरकार ने अपनी बसों का किराया भी कम कर दिया है। वाॅल्वो का किराया पहले 945 रुपया था जबकि अब 709 रुपया हो गया है।
एसी 557 और सामान्य बसें 355 रुपए में देहरादून से दिल्ली तक का सफर तीन घंटे में पूरा कर रही हैं। हालांकि, सरकार ने बार-बार प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में इश्तहार देकर ऐलान किया था कि देहरादून से दिल्ली तक का 216 किलोमीटर का सफर 2.5 Hours में पूरा होगा। सरकार ने इस बाबत काफी खर्च किए लोगों को बताने में कि ढाई घंटे में यह सफर पूरा होगा। लेकिन स्थिति यह है कि इस सफर को पूरा करने में तीन घंटे का समय लगना तय है। हालांकि, समय साढ़े तीन घंटे भी लग सकता है। सरकार की ही बसें कम से कम तीन घंटे से साढ़े तीन घंटे का समय ले रही हैं। कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में आवाजाही शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिली है। पहले जहां ट्रैफिक जाम के चलते 6 से 7 घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी घटकर लगभग आधी रह गई है। साथ ही, इस एक्सप्रेसवे ने विकास का एक नया रास्ता भी खोल दिया है।
उत्तराखंड सरकार की 21 बसें चलाई जा रहीं: अजीत सिंह
आईएसबीटी देहरादून के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी अजीत सिंह का कहना है कि एक्सप्रेसवे के खुलने से न केवल देहरादून से दिल्ली की दूरी कम हुई है, बल्कि किराए भी कम हुए हैं। अभी कुल 21 बसें इस रूट पर चलाई जा रही हैं जिसमें 13 Volvo बसें हैं। देहरादून-दिल्ली के बीच 216 किलोमीटर की दूरी उत्तराखंड सरकार की बसें तीन घंटे में पूरा करती हैं। यात्रियों की उपलब्धता बढ़ते ही बसों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। यात्रा आरामदायक हो, इस पर सरकार का फोकस है।





