
Parimatch मामले में ईडी की 12 ठिकानों पर छापेमारी; पेमेंट कंपनियों, पेमेंट गेटवे और सीए-कंपनी सेक्रेट्री की भूमिका जांच के घेरे में
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म Parimatch से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर में 12 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की जा रही है। ईडी के मुताबिक, इस कार्रवाई में ऐसे लोगों और संस्थाओं के परिसरों को भी शामिल किया गया है, जिन पर कथित तौर पर सट्टेबाजी से हासिल रकम को नकदी में बदलने, विदेश भेजने और भुगतान व्यवस्था के जरिए आगे बढ़ाने में मदद करने का संदेह है।
जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम सिर्फ एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर नहीं की जा रही थी। एजेंसी अब उस पूरे वित्तीय रास्ते को खंगाल रही है, जिसके जरिए रकम को पहले सिस्टम में घुमाया गया और फिर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।
पहला रास्ता: सट्टेबाजी की रकम को नकदी में बदलना
ईडी के मुताबिक कुछ भुगतान कंपनियों ने कैश मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) एजेंटों के जरिए सट्टेबाजी से हासिल रकम को नकदी में बदलने में भूमिका निभाई हो सकती है। यह व्यवस्था सामान्य तौर पर कंपनियों के लिए नकदी जमा करने, एकत्र करने और बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचाने जैसी सेवाओं के लिए इस्तेमाल होती है। लेकिन जांच एजेंसी को संदेह है कि इसी तरह की भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल कथित तौर पर सट्टेबाजी की रकम को बैंकिंग ट्रेल से अलग कर नकदी में बदलने के लिए किया गया। अब ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस प्रक्रिया में कितनी रकम बदली गई और वास्तविक लाभार्थी कौन थे?
दूसरा रास्ता: रकम विदेशी रेमिटेंस से देश से बाहर भेजना
जांच का दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण पहलू विदेशों में रकम भेजे जाने से जुड़ा है। ईडी ने कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) और कंपनी सेक्रेट्रीज (CS) को भी तलाशी के दायरे में लिया है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ पेशेवरों ने कथित तौर पर सट्टेबाजी से हासिल रकम को देश से बाहर भेजने में मदद की। इसके लिए दो रास्तों का इस्तेमाल किया गया- अवैध रेमिटेंस और फर्जी/ दिखावटी ओडीआई यानी ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट। इसके जरिए भारतीय इकाई या व्यक्ति किसी विदेशी कंपनी या कारोबार में निवेश करता है। सामान्य परिस्थितियों में यह वैध कारोबारी व्यवस्था है और इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है।
ईडी को संदेह यह है कि कुछ ओडीआई वास्तविक कारोबारी निवेश के बजाय रकम को विदेश पहुंचाने का माध्यम बनाए गए हो सकते हैं। अगर यह आरोप जांच में साबित होता है तो यह सिर्फ सट्टेबाजी से जुड़े अपराध का मामला नहीं रहेगा, बल्कि रकम को विदेश भेजकर उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थी को छिपाने का भी मामला बन सकता है।
तीसरा रास्ता: पेमेंट गेटवे ने संभाली ‘पैसे की आवाजाही’
ईडी की कार्रवाई में पेमेंट गेटवे भी जांच के दायरे में हैं। ये ऑनलाइन भुगतान को स्वीकार करने और संबंधित पक्ष तक रकम पहुंचाने की तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं। सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के मामले में इनकी भूमिका दो स्तरों पर जांची जा रही है- पे-इन: उपयोगकर्ता से प्लेटफॉर्म तक रकम पहुंचाना। पे-आउट: प्लेटफॉर्म से उपयोगकर्ता या अन्य लाभार्थी तक रकम पहुंचाना। ईडी का कहना है कि कुछ पेमेंट गेटवे ने Parimatch की ओर से इस तरह के लेनदेन को संभाला। यही वजह है कि जांच एजेंसी अब सिर्फ प्लेटफॉर्म को नहीं, बल्कि उसके आसपास बनी पूरी भुगतान श्रृंखला को देख रही है।
असली जांच अब ‘पैसा कहां से आया’ से आगे है
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि पैसा किस खाते में आया। महत्वपूर्ण सवाल यह भी होता है कि पैसा कहां से आया? किस रास्ते से आगे गया? किसने उसे नकदी में बदला? किसने विदेश भेजने में मदद की? और अंततः उसका फायदा किसे मिला? Parimatch मामले में ईडी की मौजूदा कार्रवाई इन्हीं कड़ियों को जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखी जा सकती है।
सीए और सीएस की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले में सीए और सीएस के परिसरों पर कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी रकम को जटिल कारोबारी या निवेश लेनदेन का रूप देने के लिए दस्तावेजी और कॉरपोरेट संरचना की जरूरत पड़ सकती है। ईडी का आरोप है कि कुछ सीए और सीएस ने कथित तौर पर रकम को देश से बाहर ले जाने में मदद की। अब जांच में यह देखा जाना है कि संबंधित पेशेवरों ने सिर्फ सामान्य पेशेवर सेवाएं दी थीं या उन्हें कथित धन के स्रोत और वास्तविक उद्देश्य की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने लेनदेन को आगे बढ़ाने में मदद की।



