सोनम वांगचुक फिर लद्दाख की सड़कों पर, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की पदयात्रा

सोनम वांगचुक फिर लद्दाख की सड़कों पर, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की पदयात्रा
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 23 सितंबर 2026 को लेह में 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। अगले दिन 24 सितंबर को शहीद दिवस मनाया जाएगा, जो 2025 की हिंसा में मारे गए चार लोगों की पहली बरसी है। यह एआई तस्वीर है।

रुखसार, तहलका

लेह । 21 सितंबर, 2026 । लद्दाख में राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। पर्यावरण कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (Leh Apex Body) से जुड़े सोनम वांगचुक 23 सितंबर को लेह में 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। इसके अगले दिन यानी 24 सितंबर को शहीद दिवस मनाया जाएगा। यह कार्यक्रम 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन की पहली बरसी के मौके पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी।

23 सितंबर को क्यों होगी 20 किलोमीटर की पदयात्रा?

सोनम वांगचुक ने पहले 19 से 23 सितंबर तक लंबी पदयात्रा की योजना बनाई थी। हालांकि, लद्दाख में ठंड और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अब 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा होगी और 24 सितंबर को शहीद दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वांगचुक ने लोगों से दोनों कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी जारी है। इस बातचीत में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय प्रतिनिधित्व और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। मई 2026 में केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का एक दौर भी हुआ, जिसमें वांगचुक लेह एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

क्या हैं लद्दाख की मुख्य मांगें?

लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) समेत लद्दाख के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूह लंबे समय से कई मांगें उठा रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना।
  • भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करना।
  • स्थानीय लोगों की भूमि और रोजगार के अधिकारों की सुरक्षा।
  • लद्दाख की संस्कृति, भाषा और पर्यावरण की रक्षा।
  • स्थानीय लोगों को अधिक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और अधिकार देना।
  • सितंबर 2025 की हिंसा में मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों के लिए उचित सहायता और मुआवज़ा।
  • आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग।

केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में इन मांगों के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती रही है। वहीं, लद्दाख के आंदोलनकारी संगठन राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं।

24 सितंबर 2025 को क्या हुआ था?

लद्दाख के मौजूदा आंदोलन की पृष्ठभूमि समझने के लिए 24 सितंबर 2025 की घटना महत्वपूर्ण है।
राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर लेह में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। लद्दाख प्रशासन के अनुसार इस घटना में चार लोगों की मौत हुई और 43 नागरिक घायल हुए।

इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया। गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी। सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाना तथा सभी पक्षों के साथ सार्थक संवाद को आगे बढ़ाना है।

2026 में भी जारी रहा आंदोलन

मार्च: वांगचुक की रिहाई के बाद लेह और कारगिल में प्रदर्शन
सोनम वांगचुक की हिरासत खत्म होने के दो दिन बाद 16 मार्च 2026 को लेह और कारगिल में बड़े प्रदर्शन और रैलियां हुईं। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने केंद्र से बातचीत दोबारा शुरू करने और राज्य का दर्जा तथा छठी अनुसूची की मांगों पर आगे बढ़ने की अपील की।

कारगिल और आसपास के इलाकों में बंद भी रखा गया। यह सितंबर 2025 की हिंसा के बाद लद्दाख में हुआ पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन था।

अप्रैल 2026 में सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से लद्दाख के सामाजिक-राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। उस समय केंद्र और लद्दाख के दो प्रमुख प्रतिनिधि समूहों के बीच बातचीत सितंबर 2025 की हिंसा के बाद से अटकी हुई थी।

इसके बाद केंद्र और लद्दाख के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। मई में प्रस्तावित बातचीत में सोनम वांगचुक भी लेह एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने।

जून-जुलाई: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिन का अनशन
2026 में सोनम वांगचुक का एक अलग और बड़ा आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर देखने को मिला।

28 जून 2026 को उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। यह आंदोलन लद्दाख के राज्य के दर्जे की मांग से अलग था। वह कथित परीक्षा अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़े छात्रों के आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे थे। आंदोलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी।

लगातार अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और जुलाई में उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया। इसके बावजूद उनका अनशन जारी रहा।

23 जुलाई की रात उन्होंने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया। वांगचुक ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद कुछ मुद्दों पर आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

इस आंदोलन का लद्दाख की राज्यhood की मांग से सीधा संबंध नहीं था, लेकिन इससे 2026 में वांगचुक के सार्वजनिक आंदोलनों का एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा।

सितंबर 2026: हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए मुआवज़ा

23 सितंबर की पदयात्रा से कुछ दिन पहले लद्दाख प्रशासन ने सितंबर 2025 की हिंसा में मारे गए चार लोगों के परिवारों और घायलों के लिए कुल 1.52 करोड़ रुपये के मुआवज़े को मंजूरी दी।

प्रशासन के अनुसार:

  • चार मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रुपये।
  • गंभीर रूप से घायल लोगों को 3-3 लाख रुपये।
  • मामूली रूप से घायल लोगों को 1-1 लाख रुपये।

प्रशासन ने कहा कि यह सहायता प्रभावित परिवारों और घायलों के प्रति समर्थन के तौर पर दी जा रही है।

हालांकि, सोनम वांगचुक ने इस मुआवज़े पर असंतोष जताया है और इसे पर्याप्त नहीं बताया है। आंदोलनकारी पक्ष की व्यापक मांगों में केवल मुआवज़ा ही नहीं, बल्कि राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा और सितंबर 2025 की घटनाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

अब फिर क्यों चर्चा में हैं सोनम वांगचुक?

23 सितंबर की पदयात्रा को सिर्फ एक नए प्रदर्शन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे तीन बड़े संदर्भ हैं—सितंबर 2025 की हिंसा की पहली बरसी, लद्दाख के संवैधानिक दर्जे को लेकर जारी आंदोलन और केंद्र के साथ चल रही बातचीत।

23 सितंबर को होने वाली 20 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस मनाया जाएगा। वांगचुक और लद्दाख के आंदोलनकारी संगठन इस मौके पर राज्य के दर्जे, छठी अनुसूची और स्थानीय अधिकारों की मांग को फिर सामने रखेंगे।

अब नजरें 23 सितंबर की 20 किलोमीटर की पदयात्रा, 24 सितंबर के शहीद दिवस कार्यक्रम और केंद्र तथा लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं।

लद्दाख का आंदोलन अब केवल राज्य के दर्जे की मांग तक सीमित नहीं है। इसमें भूमि, रोजगार, पर्यावरण, संस्कृति, स्थानीय प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। वहीं केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची जैसे प्रमुख मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।