VIPs को भी मिला SIR नोटिस: किसके रिकॉर्ड में क्या गड़बड़ी मिली?

VIPs को भी मिला SIR नोटिस: किसके रिकॉर्ड में क्या गड़बड़ी मिली
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई VVIP नाम सत्यापन के लिए चिन्हित किए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल परिवार, एस. जयशंकर, एलके आडवाणी परिवार, जगदीप धनखड़, मनीष सिसोदिया परिवार, कपिल सिब्बल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद, रंजना देसाई परिवार और विक्रम मिस्री शामिल हैं। यह एआई तस्वीर है।

नई दिल्ली । 22 सितंबर, 2026 । दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान कई बेहद चर्चित और संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों के नाम भी सत्यापन के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद, पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई और विदेश सचिव विक्रम मिस्री जैसे नाम शामिल हैं।

लेकिन इन सभी के मामले में कारण एक जैसा नहीं है। कहीं 2002 की पिछली SIR सूची से रिकॉर्ड नहीं जुड़ पाया, कहीं नाम या माता-पिता के नाम में अंतर मिला और कहीं उम्र से संबंधित विसंगति सामने आई।

दिल्ली में किस VVIP को क्यों मिला SIR नोटिस?

1. रेखा गुप्ता – उम्र से जुड़ी विसंगति

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम “Logical Discrepancy” के तहत चिन्हित हुआ। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक उनके रिकॉर्ड में उम्र से संबंधित विसंगति थी। रिपोर्टों में इसे उनके और उनके माता-पिता की उम्र के बीच असामान्य अंतर से जोड़ा गया है।

इसके बाद बूथ लेवल अधिकारी ने भौतिक सत्यापन किया और दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी प्रविष्टि को वैध कर दिया गया। उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाना है।

2. अरविंद केजरीवाल और परिवार – पिछली SIR से रिकॉर्ड मैप नहीं हुआ

पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पिता गोविंद राम केजरीवाल, मां गीता देवी और बेटे पुलकित केजरीवाल को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में नोटिस मिला।

अर्थात उनके मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR की मतदाता सूची से जोड़ा नहीं जा सका। नई दिल्ली के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के मुताबिक उनके गणना प्रपत्रों में पिछली SIR से संबंध स्थापित करने के लिए जरूरी विवरण पूरे नहीं थे।

3. एस. जयशंकर और पत्नी क्योको जयशंकर – 2002 की SIR से मैपिंग नहीं

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर के रिकॉर्ड को “Unmapped with Last SIR” बताया गया।

दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुनेहरी बाग इलाके के मतदाता हैं। उनके मौजूदा रिकॉर्ड को दिल्ली की पिछली 2002 की SIR मतदाता सूची से लिंक नहीं किया जा सका।

4. लालकृष्ण आडवाणी, बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका – 2002 की सूची से मैपिंग नहीं

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी को “No Mapping/Unmapped with Last SIR” श्रेणी में नोटिस मिला।

इनके नाम 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची से लिंक नहीं हो सके।

दिलचस्प तथ्य यह है कि आडवाणी के बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड उसी प्रक्रिया में मैप हो गया और उन्हें इस आधार पर नोटिस नहीं मिला।

5. जगदीप धनखड़ और पत्नी सुदेश – रिकॉर्ड मैपिंग से जुड़ी समस्या

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ को भी नोटिस मिला।

दोनों के मतदाता रिकॉर्ड में उपराष्ट्रपति आवास का पता दर्ज था और उनका रिकॉर्ड पिछली SIR से मैपिंग से संबंधित जांच में आया। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्हें प्रमुख रूप से mapping/discrepancy वाली श्रेणी में बताया गया है।

6. कपिल सिब्बल और पत्नी – पिछली SIR से मैपिंग नहीं

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा उनकी पत्नी प्रमिला सिब्बल को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में नोटिस मिला।
यानी मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR की सूची से जोड़ा नहीं जा सका।

7. मनीष सिसोदिया परिवार का मामला अलग-अलग

पूर्व दिल्ली उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा और बेटे मीर को भी नोटिस मिला, लेकिन तीनों के मामलों में कारण समान नहीं था।

  • मनीष सिसोदिया: उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में नोटिस का विशिष्ट कारण स्पष्ट नहीं किया गया।
  • सीमा सिसोदिया: Self-Name Mismatch, यानी अपने नाम से संबंधित विसंगति।
  • मीर सिसोदिया: Parent-Name Mismatch, यानी माता-पिता के नाम से संबंधित अंतर।

8. एस.एस. संधू – नाम में अंतर, बाद में सत्यापन

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को Self-Name Mismatch के कारण नोटिस दिया गया।

उनके बेटे दमनबीर के मामले में Parent-Name Mismatch बताया गया।

बाद में दिल्ली कैंट निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि संधू के दस्तावेज और विवरण सत्यापित हो चुके हैं और उनकी प्रविष्टि वैध कर दी गई है।

9. विक्रम मिस्री – पिछली SIR से मैपिंग नहीं

विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नाम भी “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में आया।
अर्थात उनके वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR की सूची से जोड़ा नहीं जा सका।

10. जनरल उपेंद्र द्विवेदी और पत्नी सुनीता – 2002 की SIR से मैपिंग नहीं

पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी को भी “Unmapped with Last SIR” के तहत नोटिस मिला।

दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता हैं।

11. सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद और परिवार – पिछली SIR से मैपिंग नहीं

सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद के साथ उनकी पत्नी वनिता सूद और मां कमलेश सूद के नाम भी SIR नोटिस सूची में सामने आए।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इनके रिकॉर्ड को पिछली SIR से मैप नहीं किया जा सका, इसलिए इन्हें “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में रखा गया।

12. पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई और परिवार – पिछली SIR से मैपिंग नहीं

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई, उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे अधिवक्ता माइक देसाई और बहू साक्षी देसाई—चारों को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में नोटिस मिला।

दिल्ली के दूसरे चर्चित नाम

SIR नोटिस सूची में पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे, पूर्व जेएनयू कुलपति एम. जगदीश कुमार, भाजपा विधायक कैलाश गहलोत, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और अन्य प्रमुख नाम भी सामने आए हैं। कई मामलों में कारण Unmapped with Last SIR, जबकि कुछ में नाम अथवा पारिवारिक विवरण से जुड़ी विसंगतियां बताई गई हैं।

दिल्ली के बाद अब दूसरे राज्यों की तस्वीर

यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। तेलंगाना और कर्नाटक में भी बड़े सार्वजनिक नाम SIR की जांच में सामने आए हैं।

तेलंगाना: महेश बाबू से साइना नेहवाल तक

हैदराबाद में जारी आधिकारिक नोटिस सूची के आधार पर कई फिल्मी सितारों और खिलाड़ियों के नाम सामने आए।

तेलंगाना में एक दिलचस्प बात
हैदराबाद के जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि व्यस्त कार्यक्रम वाले प्रमुख लोगों के लिए अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की सुविधा रखी गई है। यानी VVIP होने के कारण SIR से छूट नहीं है, लेकिन सत्यापन की व्यावहारिक प्रक्रिया में प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने की सुविधा दी जा सकती है।

कर्नाटक: नंदन नीलेकणी और कामथ बंधु भी जांच में

कर्नाटक में भी कई चर्चित नाम सामने आए।

  • नंदन नीलेकणी और परिवार: इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी और उनके परिवार के सदस्यों के रिकॉर्ड को “Unmapped with Last SIR — 2002 rolls” के रूप में चिन्हित किया गया।
  • निखिल कामथ, नितिन कामथ और मां रेवती: जेरोधा के संस्थापक निखिल कामथ और नितिन कामथ तथा उनकी मां रेवती कामथ को Parents’ Name Mismatch के आधार पर चिन्हित किया गया।
  • शिवराजकुमार: अभिनेता शिवराजकुमार का रिकॉर्ड भी 2002 की SIR से मैप नहीं होने के कारण फ्लैग हुआ था। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनका नोटिस व्यक्तिगत रूप से सर्व नहीं किया गया और अधिकारियों ने स्तर पर विसंगति को सुलझाने की प्रक्रिया अपनाई।

सी.एन.आर. राव का मामला-इसे सावधानी से लिखें

भारत रत्न वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव का नाम भी कुछ रिपोर्टों में SIR विसंगति के संदर्भ में आया, लेकिन कर्नाटक चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें वास्तव में नोटिस जारी नहीं किया गया था।

इन VVIP मामलों से तीन अलग-अलग तरह की समस्याएं सामने आती हैं

पूरे डेटा को देखें तो VVIP मामलों में मुख्यतः तीन प्रकार की विसंगतियां दिखाई देती हैं:

  1. Unmapped with Last SIR
    पुरानी मतदाता सूची से मौजूदा रिकॉर्ड का लिंक नहीं मिला।
    उदाहरण: जयशंकर, केजरीवाल परिवार, आडवाणी परिवार के कुछ सदस्य, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रंजना देसाई परिवार, नंदन नीलेकणी परिवार, महेश बाबू, एस.एस. राजामौली आदि।
  2. Self-Name Mismatch
    मतदाता के अपने नाम में पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड के बीच अंतर मिला।
    उदाहरण: एस.एस. संधू, वीवीएस लक्ष्मण, रवि तेजा, सुम कनकला।
  3. Parent-Name Mismatch
    माता या पिता के नाम से संबंधित अंतर मिला।
    उदाहरण: मीर सिसोदिया, निखिल कामथ, नितिन कामथ और प्रियदर्शी।

इसके अलावा उम्र से जुड़ी विसंगति भी सामने आई—रेखा गुप्ता का मामला इसका प्रमुख उदाहरण है।

एक दिन में समाधान? रेखा गुप्ता का मामला क्या बताता है?

रेखा गुप्ता को SIR के दौरान उम्र से संबंधित विसंगति के कारण नोटिस मिला। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारी ने भौतिक सत्यापन किया, दस्तावेजों की जांच हुई और उनकी प्रविष्टि को वैध कर दिया गया।

“अगर एक मुख्यमंत्री के रिकॉर्ड में विसंगति मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच कर रिकॉर्ड वैध किया जा सकता है, तो क्या यही सुविधा और यही गति उन लाखों आम मतदाताओं को भी मिलेगी, जिनके रिकॉर्ड में ऐसी ही तकनीकी या दस्तावेजी विसंगतियां मिली हैं?”

“जब ऐसे लोगों को अपने रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए दस्तावेज और सत्यापन की जरूरत पड़ रही है, तो उन आम मतदाताओं के सामने क्या स्थिति होगी जिनके पास 2002 या उससे पुराने दस्तावेज नहीं हैं, जो प्रवासी हैं, जिनके नाम की वर्तनी बदल गई है या जिनके माता-पिता के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं?”