यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में 7 एनडीए की पक्की, 8वीं पर पेंच; दूसरे सदन से भी बसपा बाहर

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों में 7 एनडीए की पक्की, 8वीं पर पेंच; दूसरे सदन से भी बसपा बाहर
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। मौजूदा गणित में एनडीए 7 सीटें पक्की कर चुका है, 8वीं सीट के लिए 7 अतिरिक्त वोट चाहिए। सपा 2 सीटें जीत सकती है, बसपा के पास विधायक नहीं होने से राज्यसभा की एकमात्र सीट भी हाथ से जा सकती है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

— एम. रियाज़ हाशमी, तहलका

एक सीट जीतने को 37 वोट चाहिएः एनडीए का समर्थन बढ़ा तो 8वीं सीट के लिए सिर्फ 7 अतिरिक्त वोट की दरकार,• 103 विधायकों के बूते सपा की दो सीटों मजबूत, तीसरी के लिए 8 अतिरिक्त वोट चाहिए, बसपा के पास कोई विधायक नहीं तो राज्यसभा की एक सीट भी हाथ से जाएगी, लोकसभा में पहले से जीरो पर है बसपा, रामजी गौतम के रिटायर होते ही पूरे संसद में बसपा शून्य पर पहुंचेगी

नई दिल्ली । 22 सितंबर, 2026 । उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होगा। यह चुनाव महज 10 सांसदों के चयन तक सीमित नहीं है। 397 विधायकों के मौजूदा संख्या बल में भाजपा और उसके सहयोगी दल सात सीटों का गणित आसानी से पूरा करते दिख रहे हैं, लेकिन आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। समाजवादी पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है। वहीं सबसे बड़ा झटका बहुजन समाज पार्टी को लग सकता है। यूपी विधानसभा में उसका एक भी विधायक नहीं है और राज्यसभा में उसके एकमात्र प्रतिनिधि रामजी गौतम भी नवंबर में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में बसपा के संसद के दोनों सदनों से बाहर होने की स्थिति बन रही है।

397 विधायक और 37 वोट का कोटा ही तय करेगा 10 सीटों का खेल

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन छह सीटें रिक्त हैं। इसलिए राज्यसभा चुनाव के लिए प्रभावी संख्या 397 विधायक है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मौजूदा संख्या के आधार पर एक सीट का कोटा 37 वोट बैठता है। राज्यसभा चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से होता है, इसलिए अंतिम परिणाम उम्मीदवारों की संख्या और वोटों के हस्तांतरण से भी प्रभावित हो सकता है। मौजूदा दलगत स्थिति में भाजपा के 256, सपा के 101, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। कांग्रेस के 2 और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 विधायक हैं। तीन विधायक असंबद्ध/ निर्दलीय श्रेणी में हैं।

NDA के 289 विधायक; समर्थन बढ़ा तो आठवीं सीट जीतेगी

भाजपा और उसके प्रमुख सहयोगी दलों की घोषित संख्या जोड़ने पर आंकड़ा 289 बनता है। भाजपा 256 + अपना दल (एस) 13 + आरएलडी 9 + सुभासपा 6 + निषाद पार्टी 5 = 289। 37 वोट के हिसाब से सात सीटों के लिए 259 वोट चाहिए। यानी इस संख्या बल से भाजपा-नीत खेमे के पास सात सीटों के बाद भी करीब 30 वोट बचते हैं। लेकिन आठ सीटों के लिए 296 वोट चाहिए। यानी 289 के आधार पर आठवीं सीट के लिए 7 अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। यदि तीन असंबद्ध विधायक भाजपा के साथ आते हैं तो यह कमी चार वोट रह जाती है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों का समर्थन भी जोड़ दिया जाए तो संभावित समर्थन 294 तक पहुंच सकता है और आठवीं सीट के लिए सिर्फ दो वोट की कमी रह जाएगी।

सपा के 101 विधायक, दो राज्यसभा सीटों का गणित मजबूत

सपा के पास 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायक जोड़ने पर विपक्षी संख्या 103 होती है। दो राज्यसभा सीटों के लिए 74 वोट चाहिए।
इसलिए मौजूदा संख्या बल के आधार पर सपा दो सीटें निकालने की स्थिति में है। लेकिन तीसरी सीट के लिए 111 वोट चाहिए, यानी सपा-कांग्रेस के मौजूदा 103 विधायकों से आठ वोट कम। यहीं से 10वीं सीट का असली मुकाबला शुरू होता है।

10 सीटों में 7 भाजपा, 2 सपा और 1 सीट पर सबसे बड़ा पेंच

मौजूदा गणित को सरल रूप में देखें तो भाजपा-समर्थक खेमे के पास सात सीटों का कोटा है और सपा-कांग्रेस के पास दो सीटों का। कुल नौ सीटों का गणित यहीं पूरा हो जाता है। दसवीं सीट के लिए दोनों पक्षों को अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के लिए आठवीं सीट और विपक्ष के लिए तीसरी सीट का रास्ता अतिरिक्त समर्थन, उम्मीदवारों की रणनीति और मतदान के दौरान विधायकों की एकजुटता पर निर्भर करेगा। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग भी महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकती है। 2024 के यूपी राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस-वोटिंग ने चुनावी गणित को प्रभावित किया था।

इसलिए बसपा की एकमात्र राज्यसभा की एक सीट भी हाथ से जाएगी

इस चुनाव का सबसे बड़ा असर बसपा पर पड़ेगा। अगस्त 2026 में बसपा के इकलौते यूपी विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में पार्टी की संख्या शून्य हो गई। राज्यसभा में फिलहाल बसपा के पास रामजी गौतम हैं। उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। लेकिन 16 अक्टूबर के चुनाव में बसपा के पास अपनी सीट बचाने के लिए आवश्यक 37 विधायक ही नहीं हैं। बसपा के एकमात्र विधायक का हाल ही में देहांत हुआ है। इसलिए मौजूदा संख्या बल में बसपा के लिए राज्यसभा की सीट बचाना संभव नहीं दिखता।

लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी विदाई, संसद से आउट होगी बसपा

2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में राज्यसभा में रामजी गौतम पार्टी के एकमात्र सांसद हैं। यदि 16 अक्टूबर को बसपा राज्यसभा की सीट नहीं बचा पाती है तो 25 नवंबर को गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बसपा का कोई सांसद नहीं रहेगा। 1980 के दशक के उत्तरार्ध से चली आ रही बसपा की संसदीय मौजूदगी पहली बार पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में पहुंच रही है।

10 सांसदों के बहाने 2027 के शक्ति-संतुलन का संकेत भी मिलेगा

इस चुनाव की सबसे अहम तस्वीर तीन आंकड़ों में छिपी है- 397 विधायक, 37 वोट का कोटा और आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत। भाजपा-नीत खेमे के लिए सात सीटों का गणित मजबूत है, लेकिन आठवीं सीट अतिरिक्त वोट मांगती है। सपा के लिए दो सीटों का संख्या बल मौजूदा है, लेकिन तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन चाहिए। वहीं बसपा के पास न विधानसभा में विधायक है और न अपनी राज्यसभा सीट बचाने के लिए आवश्यक संख्या। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है और 16 अक्टूबर को मतदान व मतगणना होगी। इसलिए यूपी का यह राज्यसभा चुनाव 10 सीटों से कहीं बड़ा है- यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मौजूदा राजनीतिक शक्ति-संतुलन की परीक्षा भी होगा और बसपा के लिए संसद में शून्य होने का निर्णायक मोड़ भी।