
रुखसार | 6 सितंबर, 2026
नई दिल्ली : Zee के संस्थापक और Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित तौर पर धोखाधड़ी और गलत वित्तीय जानकारी देने के आरोपों में FIR दर्ज की है। मामला LIC Housing Finance Limited (LICHFL) से जुड़े दो डिफॉल्टेड लोन का है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता को करीब ₹1,322 करोड़ का नुकसान होने का आरोप लगाया गया है।
₹59,113 करोड़ की नेटवर्थ का दिया था प्रमाणपत्र
मामला वर्ष 2018 का बताया जा रहा है। उस समय सुभाष चंद्रा ने अपने ग्रुप की कंपनियों की ओर से लिए गए करोड़ों रुपये के ऋण के लिए पर्सनल गारंटर की भूमिका निभाई थी। आरोप है कि ऋण लेते समय उन्होंने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति की कीमत करीब ₹59,113 करोड़ बताने वाला नेटवर्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया।
इसी वित्तीय क्षमता को आधार मानते हुए ऋणदाता की ओर से संबंधित कंपनियों को ऋण स्वीकृत किया गया। हालांकि, बाद में कर्ज लेने वाली कंपनियां भुगतान में डिफॉल्ट कर गईं और उनके ऋण खाते Non-Performing Assets (NPA) में बदल गए।
LICHFL की शिकायत पर मामला दर्ज
CBI की कार्रवाई LICHFL की जनरल मैनेजर नीता मेंघानी की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुभाष चंद्रा की घोषित नेटवर्थ और उनकी वास्तविक वित्तीय स्थिति के बीच बड़ा अंतर था।
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2024 में चंद्रा की नेटवर्थ करीब ₹32 करोड़ बताई गई थी। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि 2018 में प्रस्तुत की गई ₹59,113 करोड़ की नेटवर्थ किस आधार पर निर्धारित की गई थी और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में इसका क्या प्रभाव पड़ा।
अब CBI जांच में क्या सामने आएगा?
FIR दर्ज होने के बाद CBI कथित नेटवर्थ प्रमाणपत्र, गारंटी दस्तावेजों, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की जांच कर सकती है। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि क्या ऋणदाता को जानबूझकर गलत या भ्रामक वित्तीय जानकारी दी गई थी।
फिलहाल, FIR में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और आरोप साबित होना बाकी है। CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि कथित गलत नेटवर्थ प्रमाणपत्र और ₹1,322 करोड़ के नुकसान के बीच कानूनी तौर पर क्या संबंध स्थापित होता है।



