विजय माल्या मुकदमे के दस्तावेज सोशल मीडिया पर न डालें, बॉम्बे हाईकोर्ट की दो टूक

विजय माल्या मुकदमे के दस्तावेज सोशल मीडिया पर न डालें, बॉम्बे हाईकोर्ट की दो टूक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को अदालत में लंबित कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने की चेतावनी दी है। ईडी ने आपत्ति जताई कि माल्या ने एजेंसी के हलफनामे को एक्स पर साझा कर दिया। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। यह एआई तस्वीर है।

ईडी के हलफनामे को एक्स पर पोस्ट करने पर आपत्ति; कोर्ट ने एसबीआई को ईडी के खुलासों को शामिल कर नया हलफनामा दाखिल करने को कहा, 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई

– एम. रियाज़ हाशमी, तहलका

नई दिल्ली/मुंबई । 22 सितंबर, 2026 । विजय माल्या से जुड़े करीब दशक पुराने संपत्ति और बैंक कर्ज विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर अदालत में लंबित कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज पोस्ट करने को लेकर मंगलवार को चेतावनी दी। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष रूप से आपत्ति जताई कि माल्या ने एजेंसी की ओर से दाखिल हलफनामे को अदालत द्वारा उसके विषयवस्तु पर विचार किए जाने से पहले ही एक्स पर पोस्ट कर दिया।

कोर्ट ने इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ईडी की ओर से सामने रखे गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।

कोर्ट से पहले सोशल मीडिया पर पहुंचा ईडी का हलफनामा

मामले में नया मोड़ उस समय आया जब माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ईडी द्वारा दाखिल हलफनामे के अंश सोशल मीडिया पर साझा किए। इससे पहले 11 सितंबर की रिपोर्टों में सामने आया था कि ईडी ने हाईकोर्ट को बताया था कि माल्या की संपत्तियों से करीब 14,131.60 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां बैंकों को दी गईं, लेकिन इससे उनके खिलाफ लंबित धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े आरोप समाप्त नहीं होते। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें मंगलवार की सुनवाई में अदालत के सामने दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने का मुद्दा उठा। माल्या इससे पहले भी इन आंकड़ों को अपने पक्ष में पेश करते हुए एक्स पर पोस्ट कर चुके हैं।

14,131 करोड़ की संपत्ति की वसूली से मामला खत्म नहीं

इस विवाद का अहम कानूनी बिंदु यह है कि बैंकों को संपत्तियों से रकम की वसूली हो जाना और माल्या के खिलाफ लंबित धनशोधन की कार्यवाही- दो अलग कानूनी प्रश्न हैं। ईडी ने सितंबर में हाईकोर्ट के समक्ष कहा था कि बैंकों को संपत्तियों से रकम मिलने के बावजूद माल्या के खिलाफ धनशोधन से जुड़ी कार्यवाही खत्म नहीं होती। एजेंसी के मुताबिक, संपत्ति की वसूली को लंबित आपराधिक कार्यवाही से अलग देखा जाना चाहिए। यही वजह है कि अब एसबीआई को ईडी के नए खुलासों को अपने ताजा हलफनामे में शामिल करने को कहा गया है।

विवाद की जड़ 2020 की याचिका में, अगस्त में पहली सुनवाई

माल्या ने 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने ईडी द्वारा संलग्न संपत्तियों को बैंक कर्ज की वसूली के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। इस याचिका पर लंबे समय तक सुनवाई नहीं हुई। 12 अगस्त 2026 को जस्टिस मिलिंद जाधव की अदालत ने पहली बार इस मामले को विस्तार से सुना और एसबीआई तथा ईडी से यह पता लगाने को कहा कि क्या माल्या की संलग्न चल संपत्तियों से हुई वसूली से उनका बैंक कर्ज और देनदारियां पूरी तरह चुकाई जा चुकी हैं। माल्या के वकील अमित देसाई ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों के कंसोर्टियम ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, जबकि मूल दावा ब्याज सहित करीब 6,203 करोड़ रुपये का था। अदालत ने हालांकि इस दावे पर सीधे निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित वैधानिक एजेंसियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

माल्या की दलीलः कर्ज चुका, फिर कानूनी कार्रवाई क्यों?

माल्या लंबे समय से यह सवाल उठाते रहे हैं कि जब उनकी संपत्तियों से बैंकों को बड़ी रकम मिल चुकी है तो उन्हें अब भी बैंक धोखाधड़ी और धनशोधन के मामलों में आरोपी के तौर पर क्यों देखा जा रहा है? सितंबर में उन्होंने ईडी के हलफनामे का हवाला देते हुए दावा किया था कि 14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली 2021 में ही हो चुकी थी। माल्या की कानूनी मुश्किलों की शुरुआत बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को बैंकों के कंसोर्टियम से मिले करीब 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़े विवाद से हुई। वह मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। जनवरी 2019 में विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था, जिसके बाद संबंधित कानून के तहत उनकी संपत्तियों को जब्त और निपटाने की प्रक्रिया का रास्ता खुला।

एक और पेचः भारत लौटने पर कोर्ट पहले ही दे चुका है निर्देश

माल्या की अलग याचिका में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। फरवरी 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि इस तरह की याचिका पर आगे बढ़ने के लिए माल्या को भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में स्वयं को प्रस्तुत करना होगा। अदालत ने यह भी दर्ज किया था कि केंद्र सरकार के अनुसार उनकी प्रत्यर्पण कार्यवाही ब्रिटेन में उन्नत चरण में है। इस तरह माल्या के मामले में अब दो समानांतर सवाल महत्वपूर्ण हैं- बैंकों की वास्तविक वसूली कितनी हुई और उसका कानूनी प्रभाव क्या है, तथा ईडी की धनशोधन कार्यवाही पर उस वसूली का क्या असर पड़ता है? 13 अक्टूबर की सुनवाई में एसबीआई के नए हलफनामे और ईडी के खुलासों के बाद इन दोनों पहलुओं पर अदालत की आगे की दिशा महत्वपूर्ण होगी।