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देश में कोरोना के 6,050 नए मामले, पिछले 24 घंटे में 13 लोगों की मौत  

स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को पिछले 24 घंटे के आंकड़े जारी करके दावा किया कि महामारी के मामलों में 13.4 फीसदी का उछाल आया है और इस दौरान 6,050 नए मामले आए हैं। इस दौरान 13 लोगों की मौत हुई है।  

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 44185858 लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 13 लोगों की मौत हुई है जो हाल के महीनों में 24 घंटे का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब तक कुल 530943 लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो चुकी है।

देश में रिकवरी रेट फिलहाल 98.75 फीसदी है। डेली पॉजिटिविटी रेट 3.39 प्रतिशत है। इधर राजधानी दिल्ली में गुरुवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 606 नए मामले सामने आए और संक्रमण की दर 16.98 प्रतिशत रही। यह पिछले साल अगस्त के बाद एक दिन में सामने आए संक्रमण के सर्वाधिक मामले हैं।

हिमाचल में कोरोना के 367, महाराष्ट्र में 803 मामले सामने आये हैं। हिमाचल में एक मरीज की मौत हुई जबकि महाराष्ट्र में तीन लोगों ने जान गंवाई है। दोनों राज्यों मे स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी।

रेत माफिया के ट्रक ने टेम्पो को मारी टक्कर, परिवार के 4 सदस्यों की मौत

राजस्थान के अलवर में रेत-बजरी खनन माफिया से जुड़े एक ट्रक की टक्कर से पिछली रात टैम्पो में बैठे एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गयी। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क में बाधा खड़ी करके ट्रैक्टर-ट्रॉली में आग लगा दी। साथ ही वहां मौजूद पुलिस वाहनों पर पथराव किया।

जानकारी के मुताबिक यह ट्रक कथित रूप से गैरकानूनी रेत खनन में इस्तेमाल किया जा। ट्रैक्टर ने पिछली रात एक टेम्पो को टक्कर मार दी, जिसमें एक ही परिवार के तीन बच्चों समेत चार लोगों की मौत हो गई।

घटना में एक महिला गंभीर घायल हो गयी जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रैक्टर में बजरी लदी हुई थी। घटना के बाद अलवर के काठूमार कस्बे में तनाव पैदा हो गया।

गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क रोककर ट्रैक्टर-ट्रॉली में आग लगा दी। यही नहीं उन्होंने वहां मौजूद पुलिस के वाहनों पर पथराव किया जिसे कुछ के शीशे टूट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और रेत माफिया के बीच कथित मिलीभगत है।

बीबीसी पर मोदी के वृत्तचित्र की आलोचना करने वाले एंटनी के पुत्र भाजपा में शामिल

कांग्रेस का थिंक टैंक माने जाने वाले और एक समय पार्टी में बहुत ताकतवर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी के पुत्र अनिल एंटनी गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए। केरल में कांग्रेस को इससे झटका लगा है। एके एंटनी काफी समय से सक्रिय नहीं हैं, हालांकि वे कांग्रेस में ही हैं। गुजरात दंगों पर बीबीसी के वृत्त चित्र मामले में भाजपा का समर्थन करने वाले अनिल से कांग्रेस नाराज हो गयी थी।

अनिल एंटनी के भाजपा में शामिल होने के समय वरिष्ठ भाजपा नेता पीयूष गोयल, वी मुरलीधरन और पार्टी की केरल इकाई के प्रमुख के सुरेंद्रन उपस्थित थे। अनिल को एक औपचारिक कार्यक्रम में भाजपा में शामिल किया गया और इन नेताओं ने पूर्व कांग्रेस नेता अनिल को पार्टी का पट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया।

पिछले दिनों बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री आने के बाद कांग्रेस के स्टैंड पर अनिल ने सवाल खड़े किए थे। अनिल ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर लिखा था, जिसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। इसके बाद अनिल एंटनी ने कांग्रेस के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था।  

अनिल एंटनी ने भाजपा का समर्थन करते हुए कहा था कि भारतीय संस्थानों पर ब्रिटिश ब्रॉडकास्ट के विचारों को रखना देश की संप्रभुता को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा था कि भाजपा के साथ बड़े मतभेदों के बावजूद इस मामले में उन्हें भाजपा की बात सही लगती है।

संसद में हंगामा, लोकसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित की स्पीकर ने

बजट सत्र का दूसरा चरण भी हंगामे से भरा दिख रहा है। गुरुवार को संसद में जबरदस्त हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल जबकि राज्यसभा की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी है। सत्र का आज आखिरी दिन है।

विपक्ष ने आज जेपीसी की अपनी मांग दोहराते हुए जमकर हंगामा किया। इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। याद रहे 13 मार्च से शुरू हुए संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्ष और सत्ता पक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों में बार-बार व्यवधान हुआ है।

विपक्षी दल जेपीसी गठित करने की मांग पर अड़े हुए हैं जबकि सत्तापक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लंदन में दिए गए एक बयान को लेकर उनसे माफी की मांग की है। आज सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे और जेपीसी की मांग करने लगे। उनके हाथों में जेपीसी की मांग वाली तख्तियां भी थीं।

स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के विरोध के बीच कहा कि विपक्षी सदस्यों के व्यवहार ने सदन की गरिमा को कम किया है और उन्होंने व्यवस्थित रूप से कार्यवाही बाधित की है।  उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार संसदीय प्रणाली के खिलाफ है और सदन या देश की गरिमा के लिए अच्छा नहीं है।

विपक्षी सदस्यों ने स्पीकर की दलीलों को नजरअंदाज करते हुए विरोध जारी रखा। इसके बाद अध्यक्ष बिड़ला ने अपने समापन भाषण को पूरा करने के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

दिल्ली में संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन विपक्षी सांसदों ने संसद से विजय चौक तक ‘तिरंगा मार्च’ निकाला। संभावना है कि लोकसभा अध्यक्ष के तरफ से आयोजित की जाने वाली शाम की चाय बैठक में कांग्रेस सहित 13 राजनीतिक दल शामिल नहीं होंगे। लोकसभा में जब हंगामा हो रहा है था विपक्ष पार्टी के नेता काले कपड़े पहनकर पहुंचे थे। भाजपा सांसद पार्टी की स्थापना दिवस पर भगवा कपड़े पहनकर संसद में पहुंचे।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बाद में कहा कि राहुल गांधी को संसद से अयोग्य घोषित कर दिया गया है फिर भी भाजपा वाले माफी की मांग कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष की अदाणी मामले में जेपीसी की मांग पर खरगे ने कहा – ‘लोकतंत्र में लोकतांत्रिक तरीके से लड़ना हमारा काम है। सरकार अगर नहीं मानती है तो ये हठधर्मी है। सरकार को हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए, प्रतिक्रिया देनी चाहिए। अगर आप लोकतंत्र को जिंदा रखना चाहते हैं तो विपक्ष की भी बात सुननी चाहिए।’

मनी लॉन्ड्रिंग मामला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी हाईकोर्ट में खारिज

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद है। वहीं उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कोर्ट में सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट में सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि, अगर जैन को जमानत दी जाती है तो मामले के गवाहों की जान को खतरा हो सकता है। साथ ही जांच भी प्रभावित हो सकती है।

इस मामले में ईडी ने सत्येंद्र जैन से वर्ष 2018 में भी पूछताछ की थी। जैन ने कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई की भी अर्जी लगाई थी किंतु उन्हें वहां से राहत नहीं मिली थी।

आपको बता दे, ईडी ने सत्येंद्र जैन को आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 30 मई को गिरफ्तार किया था। साथ ही उनकी पत्नी पूनम और अन्य पर केस दर्ज किया गया है। जैन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर दिल्ली में कर्इ शैल कंपनियां बनाई और खरीदी थी।

साथ ही जैन ने कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटरर्स से 54 शेल कंपनियों के जरिए 16.39 करोड़ रुपये का काला धन भी ट्रांसफर किया। ईडी ने जैन परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों की 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।

देश में एक दिन में 5,335 नए मामले, 20 फीसदी की बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता

कोविड के मामले पिछले 24 घंटे में अचानक बढ़ गए हैं। हाल के महीनों में पहली बार यह आंकड़ा 5000 के पार निकला है। बीते 24 घंटे में 20 फीसदी बढ़ोतरी के साथ देश भर में 5,335 नए मामले सामने आए हैं।

स्वास्थ्य मंत्रायल ने आज सुबह जो आंकड़े जारी किये उनके मुताबिक 5,335 नए मामले सामने आए हैं। इसके बाद देश में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 5334 हो गई है।

राजधानी दिल्ली में कोरोना पॉजिटिविटी रेट 26 फीसदी के पार चला गया है और 24 घंटे में 509 मामले सामने आए हैं। कोरोना संक्रमण के हालात से निपटने के लिए एमसीडी के अस्पतालों का मेयर ने जायजा लिया है।

कोरोना के नए मामलों की संख्या देखने के लिए पिछले 24 घंटे में 1,60,742 टेस्ट किए गए, जिससे अब तक किए गए टेस्टों की संख्या कुल 92.23 करोड़ हो गई है।  देश में फिलहाल दैनिक सकारात्मकता दर 3.32 फीसदी और साप्ताहिक सकारात्मकता दर 2.89 फीसदी है।

हाल के हफ़्तों में 27 मार्च को 1805 मामले सामने आये थे जो 31 मार्च को बढ़कर 3095 हो गए। इसके बाद  पहली अप्रैल को 2994 मामले सामने आये जबकि 6 अप्रैल को जारी आंकड़ों के 24 घंटे में 5335 मामले सामने आये।

आरबीआई ने नहीं किया रेपो रेट में कोई बदलाव, 6.5 फीसदी ही रहेगा

तमाम कयासों के विपरीत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने लगातार छह बार के बाद पहली बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने आज कहा कि सर्वसमत्ति से रेपो रेट को बरकरार रखा गया है जो 6.5 फीसदी पर बरकरार रहेगा।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की ख़त्म होने के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने मीडिया को बैठक के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने राहत देते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने कहा कि सर्वसमत्ति से रेपो रेट को बरकरार रखा गया है। यानी रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार है।  इस साल विधानसभाओं और अगले साल लोकसभा के चुनाव हैं लिहाजा उसे देखते हुए भी यह फैसला किया गया हो सकता है।

बता दें लगातार छह बार बढ़ने के बाद सातवीं बार रेपो रेट न बढ़ाकर आरबीआई ने राहत दी है। आरबीआई पिछले साल मई से लेकर अब तक 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर चुका है। लेकिन इस बार राहत दी है। यानी कर्ज महंगा नहीं होगा और न लोगों की ईएमआई बढ़ेगी।

आरबीआई के इस फैसले से महंगे होम लोन की मार झेल रहे लोगों को राहत मिली है। रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं किए जाने के बाद अब बैंक कर्ज की ब्याज दर को नहीं बढ़ेगी।

भाजपा दो से 303 सीटों पर पहुंची, स्थापना दिवस पर मोदी ने कहा

भाजपा आज देश भर में अपना 44वां स्थापना दिवस मना रही है। आयोजन के तहत पीएम मोदी देश के 10 लाख 72 हजार 945 स्थानों पर कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत समंदर जैसी चुनौतियों को पार करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि भाजपा 2 से 303 सांसदों का सफर पूरा कर दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनी है।

मोदी ने कहा – ‘आज हम देश के कोने-कोने में भगवान हनुमान जयंती मना रहे हैं।  हनुमान जी का जीवन आज भी हमें भारत की विकास यात्रा में प्रेरणा देते हैं। भाजपा  2 से 303 सांसदों का सफर पूरा कर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है।’

पीएम ने कहा कि आज बजरंग बली का नाम चारों ओर गूंज रहा है। उन्होंने कहा – ‘हनुमान जी के पास असीम शक्ति है लेकिन इन शक्तियों का इस्तेमाल वह तभी कर पाते हैं जब स्वयं पर से उनका संदेह समाप्त होता है। साल 2014 से पहले भारत की भी यही स्थिति थी। लेकिन आज भारत उस बजरंग बली की तरह महाशक्ति की तरह अपने अंदर सुप्त शक्तियों का आभास कर चुका है।’

पार्टी 6 अप्रैल को अपने स्थापना दिवस से 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की जयंती तक सामाजिक न्याय सप्ताह मनाएगी और इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ता सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के फायदों को उजागर करने के लिए बूथ, ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। याद रहे 6 अप्रैल, 1980 को भाजपा की स्थापना हुई थी और साल 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मात्र दो सीटें जीती थीं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उसने 303 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

सीजेआई ने केंद्र सरकार का सीलबंद लिफाफा लेने से किया इनकार कहा – पारदर्शी कार्यवाही की प्रक्रिया पर पड़ता है असर

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने मलयालम न्यूज़ चैनल मीडिया वन के लाइसेंस को नेशनल सिक्योरिटी का मसला बताते हुए रिन्यू करने से केंद्र सरकार के फैसले को पलट दिया है।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने मामले की सुनवाई कर सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया कि चैनल के कुछ प्रोग्राम के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा पर आंच आई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि चैनल ने अल्पसंख्यकों को फेवर करने वाली खबरें दिखाई। कुछ खबरों में यूएपीए, एनआरसी, सीएए व न्यायपालिका की आलोचना की थी। ऐसी रिपोर्ट पहले से ही पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है। इसमें किसी भी तरह का कोई आतंकी लिंक नहीं दिखता है।“

कोर्ट ने आगे कहा कि, “राष्ट्रीय सुरक्षा में खतरे का कोई आधार होना चाहिए। हवा में ऐसा दावा नहीं कर सकते हैं। हमने देखा की चैनल की कोई सामग्री ऐसी नहीं थी जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कोई खतरा हो।”

आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दलील दी कि वह सिर्फ सीलबंद लिफाफे में ही प्रतिबंध का कारण बता सकती है। किंतु सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इस रुख को मानने से मना कर दिया है। और कहा कि सीलबंद लिफाफे के कामकाज से साफ-सुथरी और पारदर्शी कार्यवाही की प्रक्रिया पर असर पड़ता है और याचिकाकर्ता भी अंधेरे में रहता है। प्रेस की ड्यूटी है कि वह सच कहे और किसी का आलोचना का मतलब यह नहीं है कि वह सरकार के खिलाफ है।

सीलबंद कवर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इसके ठोस कारण देने जरूरी

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक बड़े फैसले में सीलबंद कवर प्रक्रिया अपनाने वाली विस्तृत गाइडलाइन जारी की हैं। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देने और सील कवर को लेकर आया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इसके पीछे ठोस कारण दिए जाने चाहिएं।

राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला ‘थिन एयर’ में नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे ठोस कारण दिए जाने चाहिएं। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘सरकार को पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में अदालत को समझाना होगा। फिर यह भी बताना होगा कि इस तरह की चिंता कैसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर हावी हो जाती है’।

अपने फैसले में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सुरक्षा कारण का हवाला देकर मना करने के कारण को नहीं बताना और महज़ सीलबंद लिफाफे में अदालत को बताना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निष्पक्ष कार्यवाही के अधिकार का उल्लंघन है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में शामिल होने से राज्य निष्पक्षता से काम नहीं कर पाएगा। अदालत ने कहा कि अपनाई गई सीलबंद कवर प्रक्रिया ने याचिकाकर्ता को असमंजस में डाल दिया और ये तरीका प्राकृतिक न्याय और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार के खिलाफ है।