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दिल्ली बिल पर मोदी सरकार को मिला वाईएसआर का साथ, राज्यसभा में पास होना तय!

दिल्ली अध्यादेश बिल के मामले पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने मोदी सरकार को समर्थन दे दिया है। रेड्डी का कहना है कि दिल्ली से जुड़े अध्यादेश के बिल पर केंद्र सरकार के पक्ष में है वहीं मोदी सरकार के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव का वो विरोध करेगी।

राज्यसभा में सरकार का आंकड़ा 112 था जो बहुमत से 8 दूर था। किंतु रेड्डी की पार्टी के समर्थन के बाद ये आंकड़ा 113 हो गया है। वहीं सरकार को बीएसपी, जेडीएस और टीडीपी से समर्थन की उम्मीद है क्योंकि इन तीनों दलों के एक-एक सांसद हैं ऐसे में बिल के पक्ष में 124 वोट मिल सकते हैं और समर्थन 121 वोट चाहिए।

यदि बीजू जनता दल (बीजेडी) सदन से वॉक आउट करे तो बहुमत का आंकड़ा 115 ही रह जाएगा। और सरकार को बिल पास कराने में कोई परेशानी नहीं होगी।

टाइटलर को राउज एवेन्यू कोर्ट में 1984 सिख विरोधी दंगों में पेश होने का आदेश

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ही उनके ही सुरक्षा कर्मियों के हाथों हत्या के बाद भड़के 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान राजधानी के पुल बंगश इलाके में हुई हत्याओं के मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को 5 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई ने एफएसएल रिपोर्ट पेश की है।

अदालत ने सीबीआई की तरफ से दायर की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए टाइटलर को यह समन जारी किया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई ने एफएसएल रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने एफएसएल रिपोर्ट के साथ सील कवर लिफाफे में वीडियो और वॉइस सैंपल भी पेश किया।

सीबीआई ने 1984 के सिख दंगा मामले में इसी 20 मई को टाइटलर के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विधि गुप्ता आनंद ने इस मामले में चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आदेश पारित किया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के एक दिन बाद पहली नवंबर, 1984 को पुल बंगश इलाके में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी। एक गुरुद्वारे को आग के हवाले कर दिया गया था। विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि टाइटलर ने पहली नवंबर 1984 को पुल बंगश गुरुद्वारा आजाद बाजार में इकट्ठी भीड़ को उकसाया और भड़काया, जिसके परिणामस्वरूप गुरुद्वारे में आग लगाई गयी। साथ ही तीन सिखों- ठाकुर सिंह, बादल सिंह और गुरु चरण सिंह की हत्या कर दी गई।

सीबीआई ने बताया कि टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147 (दंगा) और 109 (भड़काना/उकसाना) के साथ 302 (हत्या) के तहत आरोप लगाए हैं। याद रहे सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए साल 2000 में जो नानावटी आयोग बना था उसने 2005 की अपनी रिपोर्ट में दंगों में राजनीति से जुड़े लोगों और कांग्रेस नेताओं के  शामिल होने के संकेत दिए थे।

लोकसभा में कांग्रेस ने मणिपुर हिंसा को लेकर अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, स्पीकर ने किया मंजूर

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मणिपुर हिंसा पर चर्चा को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।  स्पीकर ओम बिरला ने कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा कि सभी सदस्यों से बात करने के बाद इसपर चर्चा का समय तय किया जाएगा।

अविश्वास प्रस्ताव को विपक्षी के इंडिया गठबंधन का समर्थन हासिल है। स्पीकर ने प्रस्ताव पेश होने के बाद कहा – ‘अविश्वास प्रस्ताव को मंजूर किया जाता है और सभी दलों से चर्चा के बाद प्रस्ताव के समय का ऐलान किया जाएगा’।

कांग्रेस के सदस्य सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बुधवार की सुबह नोटिस दिया था। वहीं तेलंगाना में सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने भी अलग से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया था।

बता दें, कांग्रेस ने कल (मंगलवार) को लोकसभा में अपने सांसदों के लिए तीन पंक्ति का उपस्थिति व्हिप जारी किया था। और आज (बुधवार) को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की संसद भवन में इंडिया के घटक दलों के साथ बैठक हुई थी।

इस बैठक के बाद कांग्रेस के उत्तर पूर्व सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दाखिल किया था।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट कर कहा कि, मैं अपने मुद्दे सदन के सामने रख रहा था, और जब 50 लोगों ने 267 पर नोटिस दिए, मुझे संसद में बोलने का मौका भी नहीं मिला। ठीक है। लेकिन कम से कम जब मैं बोल रहा हूं तो मेरा माइक बंद कर दिया गया, ये मेरे प्रिवलेज का धक्का है। ये मेरा अपमान हुआ है। मेरे सेल्फ-रिस्पेक्ट को उन्होंने चुनौती किया है। और सरकार के इशारे पर अगर सदन चला तो मैं समझूंगा लोकतंत्र नहीं है।

मणिपुर मे फिर भड़की हिंसा, चर्चा के लिए कांग्रेस ने राज्यपाल से विशेष सत्र बुलाने की मांग की

मणिपुर में बुधवार को फिर से राज्य के चुराचांदपुर में हिंसा भड़क गई। चुराचांदपुर के थोरबुंग इलाके में गोलीबारी की गई। कांग्रेस के एक दल ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात कर राज्य में मौजूदा संकट पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने का अनुरोध किया है।

कांग्रेस विधायक दल के नेता ओकराम इबोबी सिंह समेत पांच विधायकों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा कि मई की शुरुआत से राज्य जातीय हिंसा से प्रभावित है। मौजूदा स्थिति पर चर्चा और यहां शांति कैसे बहाल की जाए इस पर सुझाव के लिए विधानसभा सबसे उपयुक्त मंच हैं।

मणिपुर के मोरेह जिले में बुधवार को भीड़ ने कम से कम 30 मकानों और दुकानों को आग लगा दी साथ ही सुरक्षाबलों पर भी गोलियां चलाईं है। अधिकारियों ने बताया कि आगजनी के बाद भीड़ और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी भी हुई। मंगलवार को कांगपोकपी जिले में आगजनी में भीड़ ने सुरक्षाबलों की दो बसों को आग के हवाले कर दिया।

वहीं पूर्वोत्तर राज्यों के सांसदों के एक समूह ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर मणिपुर की स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा शुरू करने का आग्रह किया। 

इस्तीफा नहीं दे रहा; केंद्रीय नेतृत्व ने कहा तो ऐसा करने को तैयार: बीरेन

कांग्रेस और पूरे विपक्ष की मांग के बावजूद मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बुधवार को साफ़ कहा कि उनका अपने पद से इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। मणिपुर में जारी हिंसा के बीच मुख्यमंत्री पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बीरेन सिंह ने कहा कि यदि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें ऐसा करने को कहता है तो वह इस्तीफा देने को तैयार हैं।

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने एक इंटरव्यू में यह बात कही है। मणिपुर में लगातार जारी हिंसक घटनाओं और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बाद बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि, बीरीन सिंह ने साफ़ कहा है कि इस्तीफे का तो सवाल ही नहीं हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व बोले तो पर वह ऐसा करने को तैयार हैं।

याद रहे दो कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग कर रहा है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि मणिपुर में स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर है और पूरा सच बाहर नहीं आ पा रहा है।

बीरेन ने कहा कि मणिपुर की जनता ने उन्हें चुना है, लिहाजा इस्तीफे का सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा – ‘हां, अगर केंद्रीय नेतृत्व कहता है और मणिपुर की जनता चाहेगी तो मैं अपना पद छोड़ दूंगा।’ उन्होंने कहा कि वह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता हैं और राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व जो भी आदेश देगा मुझे उसका पालन करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता मणिपुर में कानून व्यवस्था कायम करना और जल्द से जल्द शांति बहाल करना है। ‘किसी ने अभी तक मुझसे इस्तीफे के लिए नहीं कहा है’। उन्होंने राज्य के हालातों के लिए गैरकानूनी तरीके से राज्य में आने वालों और ड्रग स्मगलर को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार ने इस पर लगाम लगाने के लिए पूरी कोशिश की।

आज संसद में सरकार के खिलाफ ला रहा है विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष का इंडिया गठबंधन बुधवार (आज) मणिपुर हिंसा मामले पर  सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है। असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे। कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है।

उधर मणिपुर हिंसा को लेकर संसद में आज भी हंगामे होने के असार हैं। मानसून सत्र की शुरुआत से ही मणिपुर हिंसा को लेकर संसद के दोनों सदनों में पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा जारी है। विपक्ष मणिपुर हिंसा पर जहां पीएम मोदी से बयान देने की मांग कर रहा है वहीं केंद्र सरकार इस मुद्दे पर खुले बहस को तैयार है लेकिन उसका कहना है कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी नहीं गृहमंत्री अमित शाह सदन में बयान देंगे।

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी विपक्षी दलों की तरफ से मंगलवार को ही कर ली गई थी। कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। सरकार के खिलाफ गौरव गोगोई अविश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे।

संसद में मंगलवार को भी मणिपुर मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने मणिपुर पर पीएम मोदी के बयान की मांग को लेकर नारेबाजी की थी। लोकसभा में सांसदों ने सदन में नारेबाजी की और अध्यक्ष की आसन के पास पहुंचकर इंडिया फॉर मणिपुर के पोस्टर दिखाए। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई थी। 

चीन के ‘लापता’ विदेश मंत्री क्विन गेंग हटाए गए, वांग यी को मिला जिम्मा

एक महीने से लापता चीन के विदेश मंत्री क्विन गेंग को सरकार ने उनके पद से हटाकर उनकी जगह वांग यी को नया विदेश मंत्री नियुक्त किया है। यी पहले भी विदेश मंत्री के  पद पर काम कर चुके हैं। उधर क्विन गेंग कहाँ हैं, इसे लेकर चीन में किसी को, यहाँ तक कि विदेश मंत्रालय को भी, जानकारी नहीं है। गेंग अमेरिका की एक एंकर के साथ कथित संबंध को लेकर भी चर्चा में रहे हैं।  

गेंग को आखिरी बार 25 जून को देखा गया था। अब उनकी जगह वांग यी विदेश मंत्री का जिम्मा देखेंगे जो पहले भी दस साल तक विदेश मंत्री रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चेन सरकार ने क्विन गेंग के अलावा सेंट्रल बैंक के गवर्नर यी गैंग को भी उनके पद से हटा दिया है और पैन गोंगशेंग को नया गवर्नर नियुक्त किया है।

याद रहे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी  प्रभावशाली माने जाने वाले क्विन गेंग को दिसंबर 2022 में विदेश मंत्री बनाया गया था। गेंग वांग यी की जगह ही विदेश मंत्री बने थे। गेंग 25 जून के बाद सार्वजनिक स्थानों पर नहीं देखे गए हैं।

चीनी मीडिया के मुताबिक तत्कालीन विदेश मंत्री क्विन गेंग को 4 जुलाई को यूरोपीय यूनियन के फॉरेन पॉलिसी चीफ जोसेफ बोरेल से मिलना था, लेकिन ये मीटिंग अचानक आगे खिसका दी गई। बोरेल को दो दिन पहले इसकी जानकारी दी गई। इसमें मीटिंग आगे बढ़ाने का कोई कारण नहीं बताया गया।

पत्रकारों के गेंग के बारे में पूछने पर हाल में चीनी विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया था कि  ‘हमें कोई जानकारी नहीं है। उन्हें 10 और 11 जुलाई को गेंग को इंडोनेशिया में एक समिट में हिस्सा लेना था’। उस समय कहा गया था कि ‘तबीयत खराब होने की वजह से गेंग नहीं जा पाएंगे’। चीनी विदेश मंत्रालय की ऑफिशियल वेबसाइट पर उन्हें लेकर बताया गया था, हालांकि, इसमें तबीयत वाली बात नहीं लिखी गयी थी।

गेंग को आखिरी बार 25 जून को रूसी, श्रीलंका और वियतनामी अधिकारियों के साथ एक बैठक में देखा गया था। इसके बाद से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं दिखे। यानी करीब एक महीने से क्विन गेंग कहां हैं, यह किसी को भी नहीं पता। यहां तक कि चीन के विदेश मंत्रालय को भी इसकी जानकारी नहीं है।

मणिपुर हिंसा पर संसद में पीएम मोदी के बयान पर अड़ा विपक्ष कल लोकसभा में लाएगा अविश्वास प्रस्ताव!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इनक्लूसिव अलायंस (इंडिया)’ गठबंधन बुधवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। सूत्रों के अनुसार मणिपुर हिंसा पर विपक्षी गठबंधन संसद में लगातार नियम 267 (विस्तृत) के तहत चर्चा की मांग कर रहा है। किंतु सरकार 176 (अल्पावधि) के तहत चर्चा करना चाहती है। मंगलवार को संसद में मणिपुर पर पीएम मोदी से चर्चा के लिए दबाव बनाने को लेकर कर्इ विकल्पों पर विचार किया गया किंतु अंत में यही फैसला लिया गया कि सरकार को मणिपुर पर चर्चा के लिए विवश करने के लिए यही कारगार रस्ता है।

इस संदर्भ में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि, “संसदीय प्रणाली में सभी विकल्प खुले रहते है और जिन विकल्पों का उल्लेख नियमावली में किया गया है। वो विपक्ष के लिए अवेलेबल रहते है।”

बता दें जहां एक और विपक्ष संसद में मणिपुर हिंसा पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार मानसून सत्र के पहले दिन से ही घेर रहा है वहीं दूसरी तरफ भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने मंगलवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इनक्लूसिव अलायंस (इंडिया)’ की तुलना आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन और अंग्रेजो की ईस्ट इंडिया कंपनी से की है। पीएम मोदी के इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया हैं और पार्टी के तमाम नेताओं के पीएम मोदी के बयान पर पलटवार कर नाराजगी जाहिर की है।

मणिपुर का जिक्र कर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि, “पीएम मोदी संसद में आकर मणिपुर हिंसा पर बात करने की बजाए ईस्ट इंडिया कंपनी पर बात करते हैं। इन्हे नॉर्थ ईस्ट पॉलिसी पर नहीं दिख रही, पर ईस्ट इंडिया कंपनी दिख रही है ! इस इंडिया ने ही अंग्रेज़ों की ईस्ट इंडिया कंपनी को हराया था। इस इंडिया ने ही इंडियन मुजाहिद्दीन को भी हराया था आप मणिपुर में हो रही बर्बरता व भयावह हिंसा पर संसद में कब बयान देंगे ? मणिपुर के लोगों के घावों में मरहम लगाकर, वहाँ शान्ति कब बहाल करेंगे ? विपक्ष देश को दिशा दे रहा है। प्रधानमंत्री खुद ही दिशाहीन हो गए हैं।”

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि, “आप हमें जो चाहें बुला लें मोदी जी। हम भारत हैं। हम मणिपुर को ठीक करने और हर महिला और बच्चे के आंसू पोंछने में मदद करेंगे। हम उसके सभी लोगों के लिए प्यार और शांति वापस लाएंगे। हम मणिपुर में भारत के विचार का पुनर्निर्माण करेंगे।”

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि, “दुर्भाग्यपूर्ण बात है। ये सरकार की बौखलाहट की निशानी है और राजनीतिक फ्रस्ट्रेशन का उत्कृष्ट मिश्रण है। विपक्ष इंडियन मुजाहिद्दीन नहीं लोकतंत्र के लिए जिंदा शहीद है। यदि इतने बड़े पद पर बैठ कर वे (पीएम मोदी) ऐसी बात कह रहे है तो इससे बड़ी बौखलाहट की निशानी कुछ और नहीं हो सकती।” 

आपको बता दें, मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, “मैंने ऐसा दिशाहीन विपक्ष आज तक नहीं देखा। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के गठबंधन का ‘इंडिया’ नाम रखने पर कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी में भी इंडिया है और इंडियन मुजाहिद्दीन में भी इंडियन है। सिर्फ नाम रख लेने से क्या होता है?”

विपक्षी गठबंधन की तुलना इंडियन मुजाहिद्दीन से करने पर कांग्रेस का पीएम मोदी पर जबरदस्त हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से विपक्ष के नए बने गठबंधन ‘इंडिया’ की तुलना आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन और अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी से करने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। पीएम ने विपक्षी गठबंधन की यह तुलना आज सुबह भाजपा संसदीय दल की बैठक में अपने संबोधन में की थी।

संसद में मणिपुर हिंसा को लेकर मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद 12 बजे जब दोबारा शुरू हुई तो सदन में विपक्ष और कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर हिंसा को लेकर केंद्र सरकार और खासकर पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा – ‘हम यहां मणिपुर हिंसा की बात कर रहे हैं और पीएम मोदी ईस्ट इंडिया कंपनी की’।  

इस बीच एक ट्वीट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को उनके बयान पर जवाब दिया। गांधी ने लिखा – ‘आप हमें जो चाहें बुला लें मोदी जी। हम भारत हैं। हम मणिपुर को ठीक करने और हर महिला और बच्चे के आंसू पोंछने में मदद करेंगे। हम मणिपुर में भारत के विचार का पुनर्निर्माण करेंगे।’

याद रहे पीएम मोदी ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा संसदीय दल की बैठक में विपक्षी दलों पर हमला बोला था। उन्होंने उस दौरान विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को लेकर कहा – ‘सिर्फ गठबंधन का नाम इंडिया लिख लेने से कुछ नहीं होता जाता है।  ऐसे तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी अपने नाम के साथ इंडिया जोड़ लिया था। इसी तरह इंडियन मुजाहिद्दीन के नाम में भी इंडिया है’।

कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष का विरोध करते-करते इंडिया से ही नफरत करने लगे हैं. राहुल गांधी ने कहा कि आप हमें जो चाहे बुला लें मोदी जी. हम भारत हैं. हम मणिपुर को ठीक करने और हर महिला और बच्चे के आंसू पोंछने में मदद करेंगे.  हम उसके सभी लोगों के लिए प्यार और शांति वापस लायेंगे. हम मणिपुर में भारत के विचार का पुनर्निर्माण करेंगे.

पीएम के बयान पर कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ट्वीट में कहा – ‘मोदी जी, आप कांग्रेस विरोध में इतने अंधे हो गये कि इंडिया से ही नफरत करने लग गये।  सुना है आज कुंठा में आ कर आपने इंडिया पर ही हमला बोल दिया।’

कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने ट्वीट में कहा – ‘विपक्ष को कोसते कोसते प्रधानमंत्री मोदी इंडिया को ही भला बुरा कहने लग गये ? एक बात साफ है–अपनी घटिया ट्रोल आर्मी को निर्देश आप ही देते हैं। विपक्ष दिशा भ्रमित नहीं है।  आप नैतिक दिवालियेपन का शिकार हैं। जुबानी जमा खर्च बंद कीजिए। हिम्मत जुटाइये और मणिपुर पर बोलिए’।

मणिपुर मामले पर गतिरोध जारी, हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित

मणिपुर को लेकर संसद में गतिरोध के चलते मंगलवार को स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी है। मणिपुर को लेकर संसद के भीतर सरकार और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। उधर संजय सिंह के निलंबन के विरोध में आप और विपक्षी सांसद समर्थकों के साथ रात को संसद के बाहर धरने पर बैठे। इस बीच अपनी-अपनी रणनीति बनाने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन इंडिया ने बैठकें की हैं।

इससे पहले संसद के मॉनसून सत्र के तीन दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। सरकार और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। कल राज्यसभा में सभापति के साथ बहस करने और आदेश का पालन नहीं करने पर आप सांसद संजय सिंह को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था जिसके बाद विपक्ष सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया।

विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के घटक दलों के नेता सोमवार को संसद परिसर में धरने पर बैठे और सारी रात यह धरना चला। विपक्ष लगातार मणिपुर विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग कर रहा है।

अब संसद में चौथे दिन मंगलवार को भी मणिपुर मामले पर हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मणिपुर पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया है। इस मामले पर भाजपा ने संसदीय दल की बैठक बुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें मौजूद रहे।

विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया ने भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चेम्बर में भी बैठक की है। लोकसभा में कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी और गौरव गोगोई ने मणिपुर के हालात पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। राज्यसभा में राजीव शुक्ल, राघव चड्ढा, रंजीत रंजन, इमरान प्रतापगढ़ी समेत कई सांसदों ने मणिपुर पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।

उधर निलंबन के बाद मंगलवार को संजय सिंह ने कहा – ‘प्रधानमंत्री मणिपुर मुद्दे पर चुप क्यों हैं? हम केवल संसद में आकर इस पर बोलने की मांग कर रहे हैं। निलंबन पर मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि जगदीप धनखड़ राजनीति से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं, उपराष्ट्रपति हैं। संसद में मणिपुर का मुद्दा उठाना हमारी जिम्मेदारी है।’

विपक्ष नियम 267 में लंबी चर्चा चाहता है जबकि सत्ता पक्ष रूल 176 में छोटी चर्चा चाहता है। पिछले 26 साल में 11 बार नियम 267 के तहत चर्चा हो चुकी है। इसमें नोटबंदी, कोयला घोटाला, और धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे शामिल हैं। मानसून सत्र 11 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान केंद्र सरकार मानसून सत्र में 31 बिल ला रही है। इनमें 21 नए बिल हैं वहीं 10 बिल पहले संसद में किसी एक सदन में पेश हो चुके हैं।