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अशोक गहलोत के खिलाफ आपराधिक मामले छिपाने की शिकायत दर्ज, रद्द होगा नामांकन?

राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत पर राजस्थान विधानसभा के लिए नामांकन फॉर्म में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ पवन पारीक नाम के शख्स ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है और कहा है कि सरदारपुरा से प्रत्याशी अशोक गहलोत ने अपने खिलाफ 2 लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है। साथ ही हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया है।

बता दें, पवन पारीक ने अपनी शिकायत में दो मामलों का जिक्र किया है इसमें पहला मामला 8 सितंबर 2015 का है जिसमें जयपुर के गांधीनगर थाने में धारा 166, 409, 467, 471 और 120 बी के तहत मामला दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरा मामला 31 मार्च 2022 का था। और इन दोनों ही मामलों में सुनवाई हो रही है।

शिकायतकर्ता पवन पारीक ने चुनाव आयोग को भेजी गई शिकायत में अशोक गहलोत की ओर से नामांकन में गलत जानकारी देने को लेकर उनका नामांकन रद्द करने की मांग की है। साथ ही उनके खिलाफ धारा 177, 419, 467, और 471 के तहत मामले दर्ज करने की भी मांग की है।

आपको बता दें, राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 25 नवंबर को होना है और इसके नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए जाने है। और नामांकन वापस लेने की तारीख 8 नवंबर है।

बिहार विधानसभा:  हंगामे के बाद नीतीश कुमार ने अपने आपत्तिजनक बयान पर मांगी माफी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को बिहार विधानसभा में जनसंख्या को नियंत्रित और महिलाओं की शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कुछ समझाने के लिए ऐसी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था जिसकी कल से ही जमकर आलोचना हो रही है।

नीतीश कुमार ने बुधवार को सदन में कहा कि, “मैं अपनी निंदा करता हूं, शर्म महसूस करता हूं। मैं अपना बयान वापस लेता हूं। मैं खुद शर्म महसूस कर रहा हूं। मैं निंदा करने वालों का भी अभिनंदन करता हूं।”

अपनी इस विवादित टिप्पणी पर माफी मांगी हुए नीतीश कुमार ने आगे कहा कि, “भाजपा को हंगामे का आदेश आया होगा।”

भारतीय जनता पार्टी लगातार नीतीश कुमार की टिप्पणी को लेकर हमलावर है। साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं की शिक्षा के महत्व को लेकर की गयी टिप्पणी की कड़ी निंदा की और उनसे माफी मांगने की भी मांग की थी।

नीतीश कुमार ने अपनी उस आपत्तिजनक बयान पर माफी मांग ली है। लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरमैन रेखा शर्मा ने उनके बयान की तुलना सी ग्रेड की हिंदी फिल्मों से की है। रेखा शर्मा ने कहा कि, “नीतीश कुमार ने विधानसभा में जिस तहर का बयान दिया है वह सी ग्रेड फिल्म का डायलॉग लग रहा था। यह बयान उन्होंने विधानसभा में सभी महिलाओं और पुरूषों के सामने कही है। सबसे बुरा यह था कि वहां पर बैठे पुरूष इस पर हंस रहे थे। मुझे लगता है अगर उन्हें ज्ञान देना था तो बहुत से तरीके थे। उन्होंने आज इस पर माफी मांगी है लेकिन केवल माफी मांगना इसका उपाय नहीं है बिहार स्पीकर को उनके खिलाफ एक कदम उठाना चाहिए।”

मुंबई: 17 साल की लड़की चला रही थी सेक्स रैकेट, पुलिस की रेड में बची कई औरतें

मुंबई के नवी मुंबई के एक होटल में छापेमारी के बाद सेक्स रैकेट की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि यह रैकेट महज 17 साल की एक लड़की चला रही थी।

पुलिस ने छापेमारी के दौरान पकड़े गए लोग और चार महिलाओं को भी बचाया उन्हें जबरदस्ती जिस्मफरोशी के धंधे में धकेला जा रहा था।

पुलिस ने बताया कि, “यह रैकेट 17 साल की लड़की चला रही थी। यह लड़की मुंबई के पास के ही इलाके मलाड की रहने वाली है। एफआईआर के मुताबिक यह लड़की जिस्मफरोशी के धंधे से मोटी कमाई कर रही थी और जिन औरतों को इसमें धकेला गया था उन्हें बदले में मामूली रकम ही मिलती थी। रेड के बाद जिन लड़कियों को बचाया गया है उनकी उम्र 20 साल ही पाई गई है। इनमें से एक नेपाल की है और दो बिहार की रहने वाली है।”

बता दें, इन सभी लड़कियों को पुनर्वास केंद्र भेजा गया है जहां उनकी काउंसलिंग की जाएगी। मौके से पुलिस को एक मोबाइल फोन, महंगी घड़ी, कैश रकम, डेढ़ लाख रुपये के नकली नोट बरामद हुए है। 

सीएम नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी करने का प्रस्ताव किया पेश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में मंगलवार को आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी करने का प्रस्ताव पेश किया है।

नीतीश कुमार के अनुसार बिहार में 75 फीसदी आरक्षण करने का प्रस्ताव पेश किया है इसके अंतर्गत 43 फीसदी ओबीसी और ईबीसी के लिए जबकि 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण व एससी को 20 फीसदी और एसटी को 2 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।

बता दें, भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों पर बोलते हुए नीतीश कुमार ने बिहार में हुर्इ जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट को भी आज बिहार विधानसभा में रखा और कहा कि जाति की संख्या घटाने या बढ़ाने पर जो भी सवाल खड़ा किया जा रहा है, वह बोगस है।

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि, जाति जनगणना सब की सहमति से संभव हो पाया है। 1990 में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने सबसे पहले मुझे जाति आधारित जनगणना के बारे में सलाह दी थी। उसके बाद हम इसको लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह से मिले थे। जब से मैं बिहार का मुख्यमंत्री बना हूं तभी से जाति आधारित गणना के लिए प्रयास कर रहा हूं, लेकिन अब यह जाकर संभव हो पाया है।

आपको बता दें, बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से 215 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति पिछड़ा वर्ग और अत्यंत वर्ग की आर्थिक स्थिति का मुआयना किया गया था जिसके बाद एक रिपोर्ट जारी की गई और अब आरक्षण का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया गया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में अनुसूचित बिहार में अनुसूचित जनजाति में 42.70 फीसदी, अनुसूचित जाति के 42,93 फीसदी परिवार गरीब है। सामान्य वर्ग में गरीब परिवारों की संख्या 25.09 फीसदी, पिछड़ा वर्ग 33.16 फीसदी, अत्यंत पिछड़ा 33.58 फीसदी, अनुसूचित जाति में 42.93 फीसदी गरीब परिवार है।

छत्तीसगढ़: सुकमा-कांकेर में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में 3 जवान घायल

छत्तीसगढ़ में आज विधानसभा चुनाव के लिए 20 सीटो पर आज मतदान जारी है। इसी बीच सुकमा और कांकेर में नक्सलियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ जारी है। 

सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए है। वही 3 जवान भी घायल हुए है। बता दें सुकमा में कोबरा 206 के जवानों के साथ मुठभेड़ हो रही है। घटनास्थल से एके 47 बरामद हुई है और सर्च ऑपरेशन जारी है। 

जवान मीनपा में पोलिंग पार्टी को सुरक्षा देने के लिए जंगलों में तैनात थे इसी बीच यहां नक्सलियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई।

कांकेर जिले में बंदे क्षेत्र में बीएसएफ एवं डीआरजी की टीम मतदान के लिए एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली थी इस बीच डीआरजी के साथ पानावर के पास करीब 1 बजे नक्सलियो के साथ यह मुठभेड़ शुरू हुई। 

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि, “कांकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र में नक्सलियों और बीएसएफ और डीआरजी की टीम के बीच मुठभेड़ हो गई। घटना स्थल से AK47 बरामद की गई है। इलाके में सर्चिंग जारी है। कुछ नक्सलियों के घायल होने या मारे जाने की संभावना भी है।”

एल्विश यादव को रेव पार्टी और सांपों के जहर के मामले में नोएडा पुलिस ने भेजा नोटिस

यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी-2 के विनर एल्विश यादव को रेव पार्टियों और सांप के जहर मामले में नोएडा पुलिस ने नोटिस भेजा है। इस मामले में मंगलवार शाम तक नोएडा पुलिस को गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड मिल सकती है।

नोएडा पुलिस ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ रेव पार्टी में कथित तौर पर सांप के जहर का इस्तेमाल करने के लिए 3 नवंबर को वन्यजीव कानून और आईपीसी के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

पुलिस के अनुसार, 3 नवंबर को 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 5 कोबरा समेत 9 सांप बरामद हुए। सांप का 20 मिलीलीटर संदिग्ध जहर भी बरामद किया गया था। जिन जगहों पर ये पार्टियां हुई उनकी सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि, “कानून के मुताबिक काम होगा, कोई चाहे जितनी बड़ी शख्सियत हो, हम सारे पहलुओं की जांच कर रहे हैं।”

हालांकि एल्विश यादव ने सारे आरोपों को नकारा है और अपनी सफाई में कह चुके हैं कि उनपर लगाए गए रेव पार्टियों में सांपों या उसके जहर का इस्तेमाल करने के आरोप बेबुनियाद है।

दिल्ली प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को लगायी फटकार कहा- आप पराली जलाने को रोक क्यों नहीं पाते, ये लोगों की हेल्थ की हत्या के समान है

राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिन प्रतिदिन खराब होता जा रहा है। मंगलवार सुबह 7 बजे यह 395 दर्ज किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर पंजाब सरकार को फटकार लगायी है और कहा कि, “ये राजनीतिक लड़ाई का मैदान नहीं है। राजनीति ब्लेम गेम को रोकें। ये लोगों की हेल्थ की हत्या के समान है। आप इस मामले को दूसरों पर नहीं थोप सकते। आप पराली जलाने को क्यों नहीं रोक पाते?”

उच्च न्यायालय ने पंजाब को चेतावनी देते हुए कहा कि, “कुछ भी करें, पराली जलाने की घटनाएं रोकें। राजनीतिक दोषारोपण का खेल बंद हो। नीतियां इस पर निर्भर नहीं हो सकतीं कि कौन-सी पार्टी किस राज्य में शासन कर रही है। दिल्ली और पंजाब में एक ही पार्टी की सरकार है। पराली जलाने की घटना बंद हों, यहां हर कोर्इ एक्सपर्ट है लेकिन समाधान किसी के पास नहीं है। समस्या धन की फसल के समय को लेकर है साथ ही इसका असर भूजल स्तर पर भी पड़ता है। कुछ तो किया जाना चाहिए। धान से ज्यादा लोगों की जिंदगी जरूरी है। जो समस्या आती है, तो हम कदम उठाते हैं फिर अगले साल वहीं हालात हो जाते है।”

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और अन्य राज्यों को त्योहारी सीजन के दौरान पटाखों से संबंधित मुद्दे पर अपने पहले के आदेश का पालन करने का आदेश दिया है। साथ ही राजस्थान को वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया और कहा कि त्योहार के दौरान प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाना हर किसी का कर्तव्य है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार दिल्ली में 1 नवंबर से 15 नवंबर के बीच प्रदूषण चरम पर था और यह वह अवधि है जब पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं काफी बढ़ जाती है।

हालांकि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 13 नवंबर से 20 नवंबर तक ऑड ईवन लागू कर दिया है। साथ ही स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है।

मिजोरम की सभी सीटों पर अब तक 17 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 20 सीटों पर मतदान जारी

मिजोरम की सभी 40 सीटों और छत्तीसगढ़ में 20 सीटों पर मंगलवार (यानी आज) को विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान सुबह 7 बजे से ही जारी है और यह शाम 5 बजे तक चलेगा।

बता दें, छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 90 में से राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग और राजनांदगांव समेत चार अन्य जिलों की 20 सीटों पर मतदान का समय अलग-अलग है। यहां 10 सीटों पर सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा वहीं बाकी की 10 सीटों पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा।

सुबह सात बजे से जिन 10 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान होना है उनमें- मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, और कोंटा शामिल है। वहीं अन्य 10 क्षेत्रों में- पंडरिया, कवर्धा, खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट शामिल है।

छत्तीसगढ़ के पहले चरण के मतदान में राज्य के 40,78,681 मतदाता 223 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और बस्तर के सांसद दीपक बैज, कांग्रेस सरकार के तीन मंत्री, बीजेपी के चार पूर्व मंत्री और एक पूर्व आईएएस अधिकारी शामिल हैं।

मिजोरम

बता दें, मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। आज मिजोरम के 8 लाख से अधिक मतदाता 174 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

मिजोरम के सभी 1276 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे मतदान शुरू होगा और शाम 4 बजे तक जारी रहेगा।

सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), मुख्य विपक्षी दल ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) और कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार मैदान में उतारे है। वहीं भाजपा ने 23 और आप ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। साथ ही 27 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में है। 

बिलो को लटकाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कहा- गवर्नरों को जनता नहीं चुनती, समय पर फैसले क्यों नहीं हो रहे

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तल्ख टिप्पणी करते हुए पंजाब गवर्नर से जवाब मांगा है। यह जवाब पंजाब सरकार के 7 बिलों को लटका कर रखने के आरोपों मे मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि, शुक्रवार तक आप बताएं कि सरकार की ओर से दिए गए 7 विधेयकों पर अब तक आपने क्या एक्शन लिया है। गवर्नरों को सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद ही काम शुरू नहीं करना चाहिए। सरकार और राज्यपालों को अपने विवाद आपसी चर्चा से ही निपटा लेने चाहिए।

बेंच ने आगे कहा कि, गवर्नरों को भले ही विधेयकों को वापस करने का अधिकार है लेकिन वे उसे लटका कर नहीं बैठ सकते। चुनी हुई सरकार जैसे नहीं है और उन्हें समय पर बिलों को मंजूरी देने या फिर वापस लौटने पर फैसला लेना चाहिए।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जेबी पार्दीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि, सभी गवर्नरों को इस पर विचार करना चाहिए। वे चुने हुए लोग नहीं होते। यहां तक कि मनी बिलों को रोकने के लिए तो एक समय सीमा है। आखिर सरकारों का सत्र आहूत करने की मंजूरी के लिए भी अदालत क्यों आना पड़ रहा है। ये ऐसे मामले हैं जिन्हें सीएम और राज्यपाल को ही बैठकर निपटा लेना चाहिए।

बता दें, पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है जिसमें उसने गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित पर आरोप लगाया है कि वह 7 विधेयकों पर फैसला नहीं ले रहे है। जो उन्हें मंजूरी के लिए भेजे गए थे। इन 7 में से 4 विधेयक जून में भेजे गए थे और बाकी तीन मनी बिलों को सदन में लाने से पहले ही भेजा गया था।

पीएफआई को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सुनवाई से किया इनकार; पहले जाना होगा हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक गैरकानूनी संगठन के रूप में अपने पदनाम को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने सुनवाई से इंकार कर दिया है।  

जस्टिस अनिरुद्ध बोस और बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, “संगठन को पहले संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर पीएफआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी इसपर अपनी सहमति जताई।

सुप्रीम कोर्ट इस साल मार्च में पारित यूएपीए ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ प्रतिबंधित संगठन की अपील पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने 28 सितंबर 2022 को यूएपीए की धारा 3 के तहत पीएफआई को गैरकानूनी संगठन घोषित किया था।

बता दें, पीएफआई पर आरोप है कि यह एक कट्टरपंथी संगठन है जो कि 2017 में एनआईए ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। एनआईए के डोजियर के अनुसार, यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। यह संगठन मुस्लिमों पर धार्मिक कट्टरता थोपने और जबरन धर्मांतरण कराने का काम करता है।

आपको बता दें, पिछले साल फरवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएफआई और इसकी स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पांच सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट भी दायर की थी।

कैसे बना था पीएफआई

वर्ष 2007 में तीन मुस्लिम संगठनों के विलय से पीएफआई बना था। यह खुद को एनजीओ बताता है। इन तीन संगठनों में- नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (केरल) कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और निथा नीति पासराई (तमिलनाडु) शामिल है। इसकी औपचारिक घोषणा 16 फरवरी, 2007 को बेंगलुरु में एम्पॉवर इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रैली में की गई थी।