संजीव आचार्य |भोपाल 1 सितंबर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की जांबाज़ बेटी कर्नल सोफिया क़ुरैशी के प्रति मप्र के मंत्री श्री विजय शाह ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। उनको आतंकवादियों की बहन बताया था। जिसे न्याय पालिका ने स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करवाई। उनके ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की ग़ैर जमानती धाराओं (152 BNS, 196 (1)(B), 197 (1) (B) में केस दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित की थी
मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एस आई टी गठित करके दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।
एस आई टी ने जांच पूरी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति मांगी थी। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने मंत्री पर केस दर्ज करने की अनुमति नहीं दी। बाकायदा केबिनेट मीटिंग में यह फैसला लेकर राज्यपाल मंगूभाई पटेल को भेज दिया था।
राज्यपाल ने लगाई मुहर
राज्यपाल ने सोमवार रात को केबिनेट के निर्णय पर मुहर लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनुवाई के दौरान कहा था कि राज्यपाल के फैसले का इंतजार है। राज्यपाल के फैसले के बाद मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी के मामले में कोई केस नहीं चलेगा। साथ ही मंत्री की कुर्सी भी बरकरार रहेगी।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस इस मामले में हमलावर हो गई है। उसका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी राज्य सरकार अब मंत्री विजय शाह पर कोई कार्रवाई नहीं करने जा रही है। वह सरकार में शहंशाह बने रहेंगे। यह देश की सेना, महिला एवं सैन्य अधिकारी का अपमान है।
आदिवासी वोट बैंक की राजनीति
दरअसल, विजय शाह पर कार्रवाई न करने की सबसे बड़ी वजह आदिवासी वोट बैंक है। आदिवासियों का वोट लगातार बिखरता जा रहा है। सरकार में आज की तारीख में विजय शाह सबसे बड़े आदिवासी चेहरे हैं। प्रदेश की 43 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सिर्फ 16 सीटें जीत पाई थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में स्थिति सुधरी और यह आंकड़ा 24 सीटों तक पहुंची है।
विजय शाह को सरकार अगर मंत्री पद से हटाती है तो इसका माइलेज कांग्रेस को मिलेगा। कांग्रेस लगातार विजय शाह को हटाने की मांग करती रही है। साथ ही आदिवासियों में संदेश जाएगा कि हमारे सबसे बड़े नेता को पद से बेदखल कर दिया गया।
कांग्रेस के पास भी आदिवासी चेहरे
दूसरी ओर कांग्रेस के पास कई आदिवासी चेहरे हैं, जिनकी अच्छी पकड़ आदिवासियों के बीच में है। विधानसभा में नेता विपक्ष उमंग सिंघार आदिवासी हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया सहित कई आदिवासी नेता कांग्रेस के पास हैं।




