चंडीगढ़ का कैब बाजार एकतरफा हुआ, चार एग्रीगेटरों के लाइसेंस निलंबित

जब तक ये निलंबन लागू रहते हैं, ऐप-आधारित कैब सेवा के लिए यात्रियों के पास प्रभावी रूप से एक प्रमुख प्लेटफॉर्म ही बचता है।

चंडीगढ़ देश के ऐप-आधारित टैक्सी बाजार में एक असामान्य स्थिति में पहुंच गया है। नियामकीय कार्रवाई के तहत केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे चार प्रमुख निजी कैब एग्रीगेटरों—उबर, ओला, रैपिडो और इनड्राइव—के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। इसके चलते यात्रियों के लिए ऐप के जरिए कैब बुक करने के विकल्प काफी सीमित हो गए हैं।

इस कार्रवाई से नए लॉन्च हुए भारत टैक्सी के लिए भी बाजार खुल गया है, जो ऐसे समय में चंडीगढ़ में उतरा है जब उसके स्थापित प्रतिस्पर्धी नियामकीय पाबंदियों का सामना कर रहे हैं।

चंडीगढ़ प्रशासन ने अब केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए इन निलंबित एग्रीगेटरों के ऐप को चंडीगढ़ में ब्लॉक करने की दिशा में मदद मांगी है। इसका उद्देश्य उन ड्राइवरों को निलंबित प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग लेने से रोकना है, जो लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद ऐसा कर रहे हैं।

हालांकि, यात्रियों के लिए इस कार्रवाई ने एक नई समस्या पैदा कर दी है—ऐप आधारित कैब बाजार में विकल्प लगभग खत्म हो गए हैं।

कुछ समय पहले तक चंडीगढ़ के यात्री कैब बुक करने से पहले कई प्लेटफॉर्म पर किराये और उपलब्धता की तुलना कर सकते थे। अब यह विकल्प काफी हद तक खत्म हो गया है।

उबर, ओला, रैपिडो और इनड्राइव के लाइसेंस निलंबित होने के बाद भारत टैक्सी यात्रियों के लिए प्रमुख ऐप-आधारित विकल्प बनकर उभरी है। सहकारी मॉडल पर आधारित इस सेवा को 18 सितंबर को चंडीगढ़ में लॉन्च किया गया। यह ऐसे समय में बाजार में आई है जब चार प्रमुख नाम नियामकीय कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम ने भारत टैक्सी को लॉन्च के पहले दिन से ही एक असामान्य बाजार स्थिति दे दी है। उसे ऐसे बाजार में यात्रियों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जहां उसके स्थापित निजी प्रतिद्वंद्वी फिलहाल कानूनी रूप से संचालन नहीं कर पा रहे हैं।

इस बदलाव का असर यात्रियों पर भी पड़ा है।

यात्रियों की ओर से कैब उपलब्ध न होने और उपलब्ध सेवाओं के लिए अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं। प्लेटफॉर्म कम होने के कारण यात्रियों के पास किराये की तुलना करने या महंगा किराया मिलने पर दूसरे एग्रीगेटर पर जाने के विकल्प भी सीमित हो गए हैं।

कई यात्रियों के लिए समस्या केवल किसी एक यात्रा का किराया नहीं, बल्कि विकल्पों की कमी है।

सामान्य ऐप-आधारित बाजार में किसी एक प्लेटफॉर्म पर किराया अधिक होने पर यात्री दूसरे ऐप पर कीमत देख सकता है। चंडीगढ़ में फिलहाल यह प्रतिस्पर्धी विकल्प काफी हद तक समाप्त हो गया है।

इस बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने उन ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है जो निलंबित प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग स्वीकार कर रहे हैं।

परिवहन विभाग के अधिकारी औचक जांच कर रहे हैं और निलंबित एग्रीगेटरों के जरिए संचालन करते पाए जाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

यह कार्रवाई मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर्स रूल्स, 2025 के कथित उल्लंघनों से जुड़ी है। इनमें किराये से संबंधित प्रावधान, ड्राइवरों के बीमा, सुरक्षा मानकों और एग्रीगेटर संचालन की अन्य शर्तों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

प्रशासन का तर्क है कि अगर लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद वाहन संबंधित ऐप के जरिए यात्रियों को बुक करते रहें, तो लाइसेंस निलंबन का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

यही प्रशासन के सामने एक और चुनौती बन गई है।

किसी एग्रीगेटर का लाइसेंस निलंबित होने से उसके मोबाइल ऐप अपने आप फोन से हट नहीं जाते। ऐप को एक्सेस किया जा सकता है और यात्री तथा ड्राइवर उसके जरिए यात्रा की बुकिंग करने की कोशिश कर सकते हैं।

इस समस्या को दूर करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र से संपर्क कर निलंबित ऐप को केंद्र शासित प्रदेश में ब्लॉक करने में मदद मांगी है।

इस कदम का उद्देश्य लाइसेंस निलंबन को तकनीकी स्तर पर भी लागू करना है, ताकि ऐप फोन में मौजूद रहने के बावजूद उसके जरिए बुकिंग की सुविधा उपलब्ध न रहे।

चंडीगढ़ की स्थिति अब एक असामान्य बाजार संरचना में बदल गई है।

प्रशासन का कहना है कि एग्रीगेटर उद्योग को नियंत्रित करने और नियमों के अनुपालन के लिए नियामकीय कार्रवाई जरूरी है। दूसरी ओर, चार प्रमुख प्लेटफॉर्म के एक साथ निलंबन से यात्रियों के लिए प्रतिस्पर्धा और विकल्प दोनों कम हो गए हैं।

इससे एक बड़ा उपभोक्ता सवाल भी खड़ा होता है—जब यात्रियों के पास वैकल्पिक ऐप नहीं हों तो किराये और सेवा की गुणवत्ता पर प्रतिस्पर्धा का क्या असर पड़ेगा?

प्रशासन के लिए प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी एग्रीगेटर नियमों का पालन करें। वहीं यात्रियों की तत्काल चिंता एक उचित किराये पर कैब उपलब्ध होना है।

भारत टैक्सी के लिए यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ऐसे बाजार में दाखिल हुई है जहां उसके लगभग सभी स्थापित प्रतिस्पर्धी फिलहाल नियामकीय कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

अब आने वाले सप्ताह दो चीजों की परीक्षा लेंगेक्या चंडीगढ़ का नियामकीय अभियान एग्रीगेटरों को नियमों के अनुपालन के लिए मजबूर कर पाता है और क्या लगभग बिना ऐप-आधारित प्रतिस्पर्धा वाला बाजार यात्रियों को किराये और उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना सेवा दे पाता है।