सहारनपुर पीएनबी नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ के नकली नोट मामले की जांच एनआईए को, दो नई गिरफ्तारियां

सहारनपुर पीएनबी नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ के नकली नोट मामले की जांच एनआईए को, दो नई गिरफ्तारियां
सहारनपुर के पीएनबी करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे।

असली करेंसी निकालकर उसकी जगह नकली नोट रखे जाने के एंगल पर जांच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की इन्वेस्टिगेशन में कैश मूवमेंट और बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर फोकस, 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप, 1,900 बंडल 500 रुपये और 800 बंडल 200 रुपये के नोटों की जांच; संविदा ड्राइवर से पूछताछ में नकदी की आवाजाही और कथित अदला-बदली का एंगल

एम. रियाज़ हाशमी, तहलका

नई दिल्ली 21 सितंबर, 2026 उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के करेंसी चेस्ट से बरामद 17.29 करोड़ रुपये के नकली भारतीय नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दो और प्रमुख आरोपियों मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, दोनों पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी हैं और करेंसी चेस्ट के जरिए नकली नोटों के प्रसार की साजिश से जुड़े प्रमुख आरोपी हैं।

मामले में एनआईए की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नकली नोटों की करेंसी चेस्ट में मौजूदगी और उनकी संभावित आवाजाही है। जांचकर्ता इस सवाल पर भी फोकस कर रहे हैं कि क्या असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए थे या नकली नोट बाहर से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे? जांच का एक प्रमुख हिस्सा 6 जुलाई को सहारनपुर से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के जयपुर कार्यालय भेजी गई 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप भी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस खेप में 500 रुपये के 1,900 बंडल और 200 रुपये के 800 बंडल शामिल थे। एजेंसी इस नकदी की पैकिंग, गिनती, सत्यापन और डिस्पैच के रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि नकली नोट करेंसी चेन में किस चरण पर शामिल हुए?

29 अगस्त को करेंसी चेस्ट से मिले थे नकली नोट

सहारनपुर के सदर बाजार थाने को 29 अगस्त 2026 को पंजाब नेशनल बैंक के सिविल लाइंस स्थित करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये अंकित मूल्य के नकली भारतीय नोट बरामद होने की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया। स्थानीय पुलिस ने इसी दिन एफआईआर दर्ज की थी। चार दिन बाद एनआईए ने 3 सितंबर 2026 को इस मामले को पुनः दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली। यह जांच अब बैंक की नकदी व्यवस्था, करेंसी चेस्ट तक पहुंच और नकदी के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है।

असली नोट निकालकर नकली नोट रखे जा रहे थे

एनआईए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोट करेंसी चेस्ट में बाहर से पहुंचे थे या नकदी की हैंडलिंग अथवा डिस्पैच के दौरान असली मुद्रा को कथित रूप से नकली नोटों से बदला गया? जांच में संविदा ड्राइवर आदेश चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी उसकी करेंसी चेस्ट के आसपास गतिविधियों, नकदी की लोडिंग और अनलोडिंग, बैंक कर्मचारियों से संपर्क तथा नकदी की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। उसके बयानों का मिलान सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड, करेंसी रजिस्टर, डिस्पैच दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों से किया जा रहा है। इस जांच का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि नकदी के किस चरण पर संदिग्ध नोट शामिल हुए और क्या असली मुद्रा की कमी तथा नकली मुद्रा की मौजूदगी के बीच कोई प्रमाणित संबंध स्थापित किया जा सकता है। शुरूआती जांच में इस तरह के संकेत उभरे हैं कि बैंक से करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने के दौरान ही नोटों की गड्डियों में असली नोट निकालकर नकली रखे जाते थे और बैंक कर्मचारियों की मदद से इन गड्डियों को सील कर दिया जाता था।

111 करोड़ की करेंसी खेप से जुड़े लोगों की पड़ताल

एनआईए की जांच में 6 जुलाई की 111 करोड़ रुपये की जयपुर भेजी गई करेंसी खेप का उल्लेख महत्वपूर्ण है। जांचकर्ता इस बात का मिलान कर रहे हैं कि करेंसी की पैकिंग, गिनती, सत्यापन और डिस्पैच के समय किन कर्मचारियों और अन्य लोगों की पहुंच थी। इस प्रक्रिया से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट करेंसी नेटवर्क में कब और कैसे शामिल हुए? यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या संदिग्ध नकली नोट सहारनपुर करेंसी चेस्ट से आगे बैंक शाखाओं, एटीएम या अन्य करेंसी चेस्ट तक पहुंचे थे? हालांकि, इस खेप की पूरी राशि नकली थी अथवा बरामद 17.29 करोड़ रुपये के सभी नोट इसी खेप से जुड़े थे? इसकी पुष्टि की जा रही है।

संविदा ड्राइवर से पूछताछ: पूरे सिस्टम का स्कैन शुरू

आदेश चौधरी पंजाब नेशनल बैंक के सहारनपुर करेंसी चेस्ट में संविदा ड्राइवर के रूप में काम करता था। एनआईए ने उसे 16 सितंबर को गिरफ्तार किया था। वह बैंक अधिकारी अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार किया गया दूसरा प्रमुख आरोपी था। एजेंसी उसकी गतिविधियों और बैंक मैनेजर अमित कुमार के साथ संबंधों की जांच कर रही है। इसके तहत नकदी की लोडिंग-अनलोडिंग, करेंसी चेस्ट तक पहुंच, बैंक कर्मचारियों से संपर्क और डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच का सवाल यह भी है कि नकदी की आवाजाही में शामिल लोगों ने किस स्थान पर नोटों की अदला-बदली की? इसके लिए नकदी रजिस्टर, पैकिंग और डिस्पैच रिकॉर्ड के मिलान का स्कैन किया जा रहा है।

पीएनबी के 3 कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

शुरुआती जांच में तीन बैंक कर्मचारियों अमित कुमार, रवि कुमार कांसे और सुशील कुमार की संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अमित कुमार को 7 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वह हरियाणा के जगाधरी (यमुनानगर) करेंसी चेस्ट के मैनेजर थे। रवि कुमार कांसे वरिष्ठ डिविजनल मैनेजर और सुशील कुमार सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के मैनेजर बताए गए हैं। एनआईए की कार्रवाई में सबसे पहले 7 सितंबर को अमित कुमार की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद 16 सितंबर को संविदा ड्राइवर आदेश चौधरी को गिरफ्तार किया गया। अब एनआईए ने मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार की गिरफ्तारी की घोषणा की। एनआईए के मुताबिक, दोनों आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी हैं। शेष सह-आरोपियों तथा संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।