सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर चला बुलडोजर, कोर्ट के फैसले के बाद हुआ एक्शन; इकरा हसन का हाउस अरेस्ट का दावा

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की प्राचीन मस्जिद को तड़के 4 बजे बुलडोजर से ध्वस्त किया गया
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित प्राचीन मस्जिद को शनिवार तड़के 4 बजे छह बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई, हालांकि 22 दिन की अवधि उपलब्ध थी।

जिस जगह पर महीनों से चल रहा था विवाद, शनिवार सुबह वहां प्रशासन ने की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला जज की अदालत द्वारा 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को बरकरार रखने के एक दिन बाद हुई। अदालत ने मस्जिद से जुड़े भूमि विवाद में जमीन को सरकारी जमीन माना था और ढांचे को हटाने का आदेश कायम रखा था।

सुबह से ही कलेक्ट्रेट के बाहर कड़ी सुरक्षा

मस्जिद गिराने की कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। कई गेट बंद कर दिए गए और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर से ढांचे को हटाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई कोर्ट के निर्देश के तहत की गई।

विवाद की शुरुआत आखिर हुई कैसे?

यह मामला जुलाई 2026 में सामने आया था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को मस्जिद को कथित अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कब्जे और सरकारी जमीन के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी दिया गया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में अपील की, लेकिन 4 सितंबर को यह अपील खारिज हो गई।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए थे?

मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर हुआ और परिसर का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के अलावा व्यावसायिक कामों के लिए भी किया जा रहा था। प्रशासन ने भी जमीन के इस्तेमाल और सरकारी कामकाज की सुरक्षा को लेकर आपत्तियां रखी थीं। ये शिकायत में लगाए गए आरोप थे, जिन्हें अदालत की प्रक्रिया में जांचा गया।

इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप

इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि उन्हें उनके घर पर नजरबंद किया गया, ताकि वह सहारनपुर न जा सकें। उन्होंने कहा कि वह कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मिलने और अपने क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को उठाने के लिए सहारनपुर जाना चाहती थीं।