
गया के रमनंदी होटल्स पर 132 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड की जांच, 85 करोड़ के लोन में 58 करोड़ डायवर्जन का आरोप; एआरएसएस ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर भी सर्च
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आईआरसीटीसी होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की विशेष अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के अगले ही दिन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिहार और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क में दो अलग-अलग बड़े सर्च ऑपरेशन किए हैं। एक कार्रवाई गया की रमनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर चल रही है, जबकि दूसरी कार्रवाई ओडिशा के एआरएसएस ग्रुप और उससे जुड़े कारोबारियों के परिसरों तक पहुंची है।
दोनों कार्रवाइयां पीएमएलए के तहत चल रही अलग-अलग जांच का हिस्सा हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड में इनका लालू परिवार के आईआरसीटीसी होटल मामले से कोई प्रत्यक्ष कानूनी या आरोपी-स्तरीय संबंध सामने नहीं आया है। हालांकि, बिहार में लालू परिवार पर कार्रवाई के ठीक अगले दिन ईडी के इन ऑपरेशनों की टाइमिंग इसे राजनीतिक और कारोबारी दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण बनाती है।
गया में होटल कारोबारी के कथित बैंक फ्रॉड की जांच
ईडी के मुताबिक रमनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड और उसके प्रमोटर अखौरी गोपाल तथा उनके परिवार से जुड़े लोगों के खिलाफ बैंक लोन में कथित धोखाधड़ी और रकम के डायवर्जन की जांच की जा रही है। कंपनी को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने करीब 85 करोड़ रुपये का लोन दिया था। आरोप है कि इसमें से करीब 58 करोड़ रुपये दूसरी जगह डायवर्ट किए गए। मामले में फर्जी या जाली प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट से संबंधित दस्तावेजों के इस्तेमाल होना बताया गया है। ईडी की जांच में पांच ऐसी संपत्तियों का मामला भी सामने आया है जिन्हें टाटा मोटर्स के पक्ष में गिरवी रखा गया था, लेकिन बाद में काफी कम कीमत पर बेच दिया गया। बिक्री दस्तावेजों में नकद भुगतान दिखाए जाने और कुछ खरीदारों की आर्थिक क्षमता संदिग्ध पाए जाने के कारण ईडी को इनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने का शक है।
कुल 9 ठिकानों पर चल रहा है ईडी का सर्च अभियान
ईडी ने गया में छह, गुरुग्राम में दो और नई दिल्ली में एक यानी कुल नौ ठिकानों पर सर्च किया है। इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर कथित प्रोसीड्स ऑफ क्राइम करीब 131.79 करोड़ रुपये बताया गया है। पटना हाईकोर्ट के एक आदेश में भी रमनंदी होटल से जुड़े 85 करोड़ रुपये के कंसोर्टियम लोन और फोरेंसिक ऑडिट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों तथा रकम के डायवर्जन का उल्लेख आया है।
एआरएसएस ग्रुप और एसआरईआई लोन की भी जांच
दूसरी कार्रवाई में ईडी ने कोलकाता के अलावा चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में एआरएसएस ग्रुप से जुड़े प्रमोटरों और सहयोगी कंपनियों के परिसरों पर सर्च किया। इनमें पूर्व प्रमोटर/ डायरेक्टर परिवार से जुड़े अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और सुभाष अग्रवाल तथा एएमआर/ एएमआरएल ग्रुप से जुड़े महेश कुमार रेड्डी अल्थुरु से संबंधित परिसरों को शामिल किया गया है। यह जांच एसआरईआई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड और एसआरईआई इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड से लिए गए कथित अनियमित या फर्जी लोन, उनके भुगतान न किए जाने और रकम के कथित डायवर्जन, राउंड-ट्रिपिंग तथा एवरग्रीनिंग के आरोपों से जुड़ी है। सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी एआरएसएस से जुड़े एसआरईआई के बड़े वित्तीय दावों और आईबीसी कार्यवाही के रिकॉर्ड मौजूद हैं।
लालू केस से कनेक्शन है या सिर्फ टाइमिंग?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों और सार्वजनिक रिकॉर्ड में रमनंदी होटल्स या एआरएसएस-एसआरईआई जांच को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लारा प्रोजेक्ट्स, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी या आईआरसीटीसी होटल मामले से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष लिंक नहीं मिला है। हां, रमनंदी मामले में होटल कारोबार, संपत्तियों के कथित अंडरवैल्यूएशन और पीएमएलए जांच जैसे तत्व हैं, जो लालू मामले की कुछ सतही समानताओं से मेल खाते हैं। लेकिन दोनों मामलों का मूल अपराध अलग है। लालू मामले में आरोप रेलवे होटल टेंडर के कथित बदले जमीन हासिल करने और उस जमीन को कंपनियों/ शेयरों के जरिए नियंत्रित करने का है, जबकि रमनंदी मामला बैंक लोन फ्रॉड, डायवर्जन और संपत्तियों को कथित तौर पर कम कीमत पर बेचकर बचाने की कोशिश से जुड़ा है।



