2 अक्टूबर विशेष: आखिर भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर ही क्यों? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

भारतीय नोट पर महात्मा गांधी का चित्र और रोशनी में दिखाई देने वाला गांधी वॉटरमार्क
महात्मा गांधी सीरीज के भारतीय नोटों पर गांधी जी का चित्र और वॉटरमार्क, दोनों मौजूद हैं। यह एआई तस्वीर है।

नई दिल्ली | तहलका न्यूज | स्नेहलता

सोचिए… आपकी जेब में रखा कोई नोट हो और उस पर एक चेहरा नजर आए। चश्मा, हल्की मुस्कान और वही जाना-पहचाना चेहरा… महात्मा गांधी।

हर दिन करोड़ों भारतीय इस तस्वीर को देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर भारतीय नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर ही क्यों छापी जाती है?

क्या आजादी के बाद से ही भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर छपती थी?

नहीं।

यही बात इस कहानी को और दिलचस्प बनाती है।

आजादी के बाद नोटों पर गांधी जी की तस्वीर नहीं थी

आजादी के बाद भारतीय नोटों पर गांधी जी की जगह किस प्रतीक को चुना गया?

भारत के आजाद होने के बाद भारतीय मुद्रा को भी नई पहचान देने की जरूरत थी। ब्रिटिश शासन से जुड़े प्रतीकों को हटाकर भारतीय प्रतीकों को जगह दी गई।

लेकिन उस समय गांधी जी की तस्वीर को भारतीय नोटों की स्थायी पहचान नहीं बनाया गया। उनकी जगह सारनाथ के अशोक स्तंभ के सिंह शीर्ष को भारतीय मुद्रा पर प्रमुख स्थान मिला।

यानी आजादी के शुरुआती दौर में भारतीय नोटों पर गांधी जी का चेहरा नहीं था।

फिर नोट पर गांधी जी की तस्वीर पहली बार कब दिखाई दी?

गांधी जी की तस्वीर 1969 और 1987 में किन नोटों पर आई?

महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय मुद्रा पर बाद में आई।

साल था 1969।

महात्मा गांधी की जन्मशती के अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक ने विशेष स्मारक नोट जारी किया। इस नोट पर गांधी जी बैठे हुए नजर आते थे और पीछे सेवाग्राम आश्रम का चित्र था।

लेकिन यह वह तस्वीर नहीं थी जिसे आज हम रोजमर्रा के नोटों पर देखते हैं।

इसके बाद 1987 में ₹500 के नोट पर गांधी जी का चित्र दिखाई दिया।

इसके बाद धीरे-धीरे गांधी जी का चेहरा भारतीय मुद्रा की पहचान बनने लगा।

1996 में बदला नोटों का चेहरा

महात्मा गांधी सीरीज शुरू होने से नोटों में क्या बदला?

साल 1996 भारतीय मुद्रा के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने महात्मा गांधी सीरीज के नोट जारी करने शुरू किए। इस सीरीज में नोटों के सामने महात्मा गांधी का चित्र प्रमुखता से दिखाई देने लगा।

गांधी जी की तस्वीर को सिर्फ सामने छापा ही नहीं गया, बल्कि वॉटरमार्क के रूप में भी इस्तेमाल किया गया।

यानी गांधी जी की तस्वीर भारतीय मुद्रा की पहचान के साथ-साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा भी बन गई।

लेकिन सवाल अभी भी बाकी है—गांधी जी ही क्यों?

नोटों पर गांधी जी की तस्वीर के साथ कौन-से सुरक्षा फीचर हैं?

इसका जवाब केवल यह नहीं है कि गांधी जी राष्ट्रपिता माने जाते हैं या स्वतंत्रता आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

नोट पर किसी व्यक्ति का चित्र इस्तेमाल करने का एक महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा भी है।

आरबीआई की जानकारी के मुताबिक बैंक नोटों में कई सुरक्षा विशेषताएं इस्तेमाल की जाती हैं। गांधी जी के चित्र में चेहरे की बारीक रेखाएं और अलग-अलग विवरण होते हैं, जिन्हें हूबहू दोहराना आसान नहीं होता।

इसके अलावा नोट में वॉटरमार्क, सुरक्षा धागा, सूक्ष्म अक्षर और उभरी हुई छपाई जैसी कई सुरक्षा विशेषताएं भी होती हैं।

यानी नोट पर गांधी जी का चेहरा केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है। वह भारतीय मुद्रा की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था का भी हिस्सा है।

नोट को रोशनी के सामने रखिए…

असली नोट में महात्मा गांधी का वॉटरमार्क कैसे देखें?

अगली बार जब आपके हाथ में कोई भारतीय नोट आए तो उसे रोशनी के सामने रखकर देखिए।

आपको गांधी जी की तस्वीर वॉटरमार्क के रूप में दिखाई देगी।

यह तस्वीर नोट के भीतर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। यही वजह है कि भारतीय मुद्रा में गांधी जी की तस्वीर को केवल एक सामान्य फोटो समझना सही नहीं होगा।rbi

गांधी जी की तस्वीर से जुड़ी एक और दिलचस्प बात

भारतीय नोटों पर गांधी जी का चित्र किस तस्वीर पर आधारित है?

जिस गांधी जी की तस्वीर आज भारतीय नोटों पर दिखाई देती है, वह कोई चित्रकार की बनाई हुई काल्पनिक तस्वीर नहीं है।

नोटों पर इस्तेमाल होने वाला गांधी जी का चित्र एक वास्तविक तस्वीर पर आधारित है।

यह तस्वीर 1946 में खींची गई थी, जब गांधी जी तत्कालीन वायसराय हाउस में ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड फ्रेडरिक लॉरेंस से मिलने पहुंचे थे। इसी तस्वीर को बाद में मुद्रा पर इस्तेमाल होने वाले चित्र के आधार के रूप में अपनाया गया।

इस तस्वीर की खास बात यह है कि इसमें गांधी जी कैमरे की ओर सीधे देखते हुए नहीं, बल्कि मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं।

तो अगली बार नोट हाथ में आए तो…

गांधी जी की तस्वीर भारतीय मुद्रा की पहचान कब बनी?

2 अक्टूबर को देश महात्मा गांधी की जयंती मनाता है।

इस दिन गांधी जी को आमतौर पर उनके सत्य, अहिंसा और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान के लिए याद किया जाता है।

लेकिन आपकी जेब में रखा एक छोटा-सा नोट भी गांधी जी की एक अलग कहानी सुनाता है।

आजादी के बाद नोटों पर गांधी जी की तस्वीर नहीं थी। 1969 में उनकी तस्वीर विशेष स्मारक नोट पर आई, 1987 में ₹500 के नोट पर उनका चित्र दिखाई दिया और 1996 से महात्मा गांधी सीरीज के साथ उनका चेहरा भारतीय नोटों की स्थायी पहचान का हिस्सा बन गया।

तो अगली बार नोट हाथ में आए तो सिर्फ यह मत देखिएगा कि उसमें कितने रुपये हैं।

एक बार गांधी जी के उस चेहरे को भी गौर से देखिएगा… क्योंकि उस एक तस्वीर के पीछे आजाद भारत की मुद्रा, इतिहास और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कहानी छिपी है।