गेहूं सहित छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़े

गेहूं की फसल और दिल्ली की सड़क पर यातायात का प्रतीकात्मक दृश्य
कैबिनेट ने रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी के साथ दिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मंजूरी दी है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

दिल्ली को ट्रैफिक जाम से निजात के लिए मिलेगा 17 सौ करोड़

आतिफ नूर खान, नई दिल्ली।

अगले वर्ष खरीफ सत्र के लिए गेहूं सहित छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2610 कर दिया गया है। यह लागत के मुकाबले 106 फीसदी कीमत है।

रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का MSP कितना हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों (सीसीईए) की मंत्री परिषद की बैठक में इसका फैसला लिया गया। इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पीएम धारा (डेवलपिंग हार्मोनाइज्ड एंड एक्सीलरेटेड रिन्यूवल एनर्जी एक्ससे) के लिए 1 लाख 86 हजार रूपए के प्रावधान को मंजूरी दी गई। इसका मकसद ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम को मजबूत बनाना है। जिसमें ग्रिड और ट्रांसमिशन सिस्टम को उन्नत करना है। इसमें राज्य सरकारों की बड़ी भागीदारी होगी। तीसरा फैसला दिल्ली की यातायात व्यवस्था को लेकर है। इसके तहत कुल 1790 करोड़ की लागत से इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) दिल्ली में स्थापित किया जाएगा।

गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम का नया MSP क्या है?

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने इन तीनों फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि छह फसलों को वर्ष 2027-28 वित्तयी वर्ष के लिए कुल छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी किया गया है। गेहूं उत्पादन की लागत 1264 है और इसका एमएसपी 2610 रूपए, जौ की लागत 1447 है और एमएसपी 2286, चना की लागत 3751 है जबकि एमएसपी 5958,मसूर की लागत 3854 और एमएसपी 7390,सरसों की लागत 3367 और एमएसपी 6613 और कुसुम की लागत 4810 और एमएसपी 7215 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। अर्थात सरकार ने रबि मार्केटिंग सत्र 2027-28 के लिए सभी छह निर्धारित रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इनमें गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड एवं सरसों और कुसुम शामिल हैं।

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के एमएसपी में की गई है, जिसे 675 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। इसके बाद रेपसीड एवं सरसों में 413 और मसूर में 90 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। वैष्णव ने दावा किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के निर्धारण में उत्पादन लागत, बाजार की मांग-आपूर्ति, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कीमतों, कृषि की प्रतिस्पर्धात्मकता और व्यापक अर्थव्यवस्था जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि, सरकार के अनुमान के मुताबिक, रबी सत्र 2027-28 में 324 लाख मीट्रिक टन उत्पादन की खरीद पर किसानों को लगभग 90,962 करोड़ का भुगतान होने का आंकलन है।

PM-DHARA योजना में ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन पर कितना खर्च होगा?

कैबिनेट ने पीएम धारा योजना को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लिए जरूरी ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। मंत्री ने बताया कि भारत ने 2030 तक 500 गीगा वाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है और 2035-36 तक 786 गीगावाट की योजना है। इसके लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है, क्योंकि पर्याप्त ट्रांसमिशन क्षमता नहीं होने पर पैदा होने वाली रिन्यूएबल बिजली का एक हिस्सा इस्तेमाल या ग्रिड तक पहुंचाने में बाधित होता है। पीएम धारा के तहत परिव्यय 1,86,405 करोड़ रखा गया है। इसमें 54,082 करोड़ केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में दिया जाएगा। योजना के तहत 135 गीगा वाट रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी और 50 गीगा वाट बैटरी इनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसए) की तैनाती का लक्ष्य है। इस योजना को लागू करने में स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटिज की भूमिका होगी। नई ग्रीनफील्ड ट्रांसमिशन लाइनों को मूल्य आधारित प्रतिस्पर्धा के जरिए विकसित किया जाएगा, जबकि मौजूदा नेटवर्क के अपग्रेडेशन यानी ब्राउनफील्ड कार्य को कॉस्ट प्लस बेसिस पर किया जाएगा।