
आतिफ नूर खान, तहलका
नई दिल्ली में यातायात व्यवस्था को अधिक सुचारु, सुरक्षित और वास्तविक समय की परिस्थितियों के अनुसार संचालित करने के लिए केंद्र सरकार ने स्मार्ट यातायात प्रबंधन प्रणाली को मंजूरी दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में लिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए परियोजना का विवरण साझा किया।
इस परियोजना की कुल लागत 1,789 करोड़ है। इसे दिल्ली के 42 चिन्हित यातायात गलियारों में लागू किया जाएगा। पूरी परियोजना को 24 महीनों में तीन चरणों में तैयार किया जाएगा और इसके बाद 5 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव किया जाएगा। तय समय से नहीं, यातायात के अनुसार चलेंगे सिग्नल
दिल्ली में स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल कैसे काम करेंगे?
अश्विनी वैष्णव के अनुसार दिल्ली में वर्तमान समय में 1,529 यातायात सिग्नल मुख्य रूप से निश्चित समय के आधार पर चलते हैं। वर्तमान व्यवस्था में किसी सड़क या चौराहे पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ने पर सिग्नल अपने आप यातायात के अनुसार अपना समय नहीं बदल पाते।
नई व्यवस्था में अनुकूली यातायात नियंत्रण प्रणाली लागू की जाएगी। इसका अर्थ है कि सड़क पर वाहनों की संख्या और यातायात के प्रवाह के अनुसार सिग्नल्स का समय अपने आप बदला जा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी चौराहे पर एक दिशा में वाहनों की संख्या अधिक है, तो उस दिशा में हरी बत्ती की अवधि यातायात के अनुसार बढ़ाई जा सकेगी। वहीं जिस दिशा में वाहनों की संख्या कम होगी, वहां हरी बत्ती की अवधि अपेक्षाकृत कम रखी जा सकेगी। इससे चौराहों पर अनावश्यक प्रतीक्षा और यातायात दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। गोल चक्करों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी यातायात के प्रवाह के अनुसार व्यवस्था संचालित करने का प्रावधान होगा।
दिल्ली के 42 ट्रैफिक गलियारों में परियोजना कब तक लागू होगी?
पहले चरण में 12 महीनों के दौरान 5 गलियारों, 250 स्मार्ट सिग्नल्स और मुख्य नियंत्रण केंद्र की स्थापना की जाएगी।
दूसरे चरण में 6 महीनों के भीतर 7 गलियारों और 222 स्मार्ट संकेतकों को जोड़ा जाएगा। इस चरण में आपदा की स्थिति में व्यवस्था को चालू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
तीसरे चरण में 6 महीनों में 30 गलियारों और 620 स्मार्ट संकेतकों को प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इस तरह कुल 42 गलियारों और 1,092 स्मार्ट संकेतकों वाली व्यवस्था विकसित होगी। एक ही व्यवस्था में यातायात नियंत्रण और निगरानी
ITMS से ट्रैफिक नियम उल्लंघन और वांछित वाहनों की पहचान कैसे होगी?
नई प्रणाली में यातायात संकेतकों का नियंत्रण, यातायात नियमों का प्रवर्तन और वास्तविक समय की यातायात जानकारी को एक ही तकनीकी व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य है। एआई आधारित तकनीक की मदद से नियमों के उल्लंघन की पहचान करने के साथ चोरी या वांछित वाहनों की पहचान में भी सहायता ली जाएगी।
लाल बत्ती पार करने और निर्धारित सीमा से अधिक गति जैसे उल्लंघनों की निगरानी को भी एकीकृत व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे यातायात पुलिस को घटनाओं और नियम उल्लंघनों पर तेजी से कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। जाम, मार्ग परिवर्तन और पार्किंग की मिलेगी जानकारी
दिल्ली के यात्रियों को जाम और पार्किंग की जानकारी कैसे मिलेगी?
प्रणाली के माध्यम से यातायात की स्थिति की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी। जाम या किसी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित जानकारी प्राप्त कर यातायात को दूसरे मार्ग पर भेजने की व्यवस्था की जा सकेगी। यात्रियों को जाम, मार्ग परिवर्तन और पार्किंग से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
आपात स्थिति में नियंत्रण केंद्र के माध्यम से यातायात व्यवस्था को तत्काल बदला जा सकेगा। पूरी प्रणाली को एकीकृत नियंत्रण केंद्र से संचालित किया जाएगा, जिससे अलग-अलग यातायात व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। साइबर सुरक्षा पर भी जोर
दिल्ली ITMS परियोजना को कौन लागू करेगा और निगरानी कैसे होगी?
परियोजना के लिए प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से मुख्य प्रणाली एकीकरणकर्ता का चयन किया जाएगा, जबकि उन्नत संगणन विकास केंद्र तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभाएगा।
परियोजना की निगरानी के लिए केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और विशेष पुलिस आयुक्त, यातायात के नेतृत्व में तीन समितियां बनाई जाएंगी।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के मौजूदा सड़क नेटवर्क का अधिक प्रभावी उपयोग करना और यातायात को केवल पहले से तय समय के आधार पर नहीं, बल्कि सड़क पर मौजूद वाहनों की वास्तविक स्थिति के अनुसार संचालित करना है।



