यूएई से डिपोर्ट बब्बर खालसा इंटरनेशनल का लॉजिस्टिक्स ऑपरेटिव गिरफ्तार, वीएचपी नेता विकास प्रभाकर हत्याकांड में बड़ा खुलासा

विकास प्रभाकर हत्याकांड में एनआईए की जांच और यूएई से आरोपी की वापसी का प्रतीकात्मक दृश्य
एनआईए ने विकास प्रभाकर हत्याकांड में यूएई से भारत लाए गए हरविंदर कुमार उर्फ सोनू को गिरफ्तार किया है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

एनआईए का दावा- हरविंदर कुमार उर्फ सोनू ने हथियार पहुंचाने, शूटरों की मदद और आतंकी फंड ट्रांसफर में निभाई अहम भूमिका; जर्मनी बैठे बीकेआई ऑपरेटिव्स ने रची थी हत्या की साजिश

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

पंजाब के मंगल (रूपनगर) में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता विकास प्रभाकर की लक्षित हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यूएई से डिपोर्ट कराए गए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। एनआईए के मुताबिक हरविंदर कुमार उर्फ सोनू, पुत्र चमन लाल, यूएई में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के ऑपरेटिव्स के लिए लॉजिस्टिक्स और वित्तीय मदद उपलब्ध करा रहा था।
एनआईए ने बताया कि हरविंदर कुमार को 1 अक्टूबर 2026 को यूएई से भारत डिपोर्ट किया गया। भारत पहुंचते ही एजेंसी ने उसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

जर्मनी में बैठे ऑपरेटिव्स पर साजिश रचने का आरोप

एनआईए के मुताबिक विकास प्रभाकर की हत्या से संबंधित यह मामला 9 मई 2024 को दर्ज किया गया था। जांच में अब तक इस मामले में तीन चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। एनआईए का दावा है कि विकास प्रभाकर की हत्या की साजिश जर्मनी में मौजूद बीकेआई ऑपरेटिव्स हरजीत सिंह उर्फ लड्डी और कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू ने कथित तौर पर रची थी। एजेंसी के अनुसार, हरविंदर कुमार उर्फ सोनू ने यूएई में रहते हुए इस कथित साजिश को जमीन पर अंजाम देने वाले नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हथियारों से लेकर शूटरों तक फंड पहुंचाने में भूमिका

एनआईए की जांच के अनुसार, हरविंदर कुमार ने भर्ती कराने और हैंडलर के तौर पर काम किया। उस पर आरोप है कि उसने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों की व्यवस्था की और उन्हें शूटरों तक पहुंचाने में मदद की। एजेंसी के मुताबिक उसका काम केवल हथियारों की व्यवस्था तक सीमित नहीं था। उस पर बीकेआई के विदेश में मौजूद ऑपरेटिव्स के लिए लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने और वित्तीय मदद पहुंचाने का भी आरोप है। एनआईए का दावा है कि हरविंदर ने इस साजिश से जुड़े आतंकी फंड प्राप्त किए और उन्हें आगे ट्रांसफर किया। एजेंसी के अनुसार यह गतिविधियां हरजीत सिंह और कुलबीर सिंह के निर्देश पर की गईं।

अगस्त में भी यूएई कनेक्शन वाला आरोपी गिरफ्तार हुआ

इस मामले में यह दूसरा महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। एनआईए के मुताबिक इससे पहले 13 अगस्त 2026 को यूएई आधारित एक अन्य आरोपी मनवीर राम को गिरफ्तार किया गया था। एनआईए के अनुसार मनवीर राम पर हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों की सप्लाई में कथित तौर पर शामिल होने का आरोप है। उसे अमृतसर एयरपोर्ट पर इंटरसेप्ट किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इससे जांच में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि विकास प्रभाकर की हत्या की साजिश में विदेश में बैठे ऑपरेटिव्स और भारत में मौजूद लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के बीच किस तरह संपर्क और वित्तीय लेनदेन हुआ।

एनआईए के रडार पर विदेश से संचालित आतंकी नेटवर्क

हरविंदर कुमार की गिरफ्तारी के साथ जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है- विदेश में बैठे कथित बीकेआई ऑपरेटिव्स और भारत में हत्या को अंजाम देने वाले नेटवर्क के बीच लॉजिस्टिक्स और फंडिंग की कड़ी। एनआईए के अनुसार, हरविंदर कुमार को ए-7 आरोपी के तौर पर जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी का दावा है कि यूएई में रहकर उसने बीकेआई के विदेश आधारित ऑपरेटिव्स के लिए लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने के साथ-साथ वित्तीय मदद भी पहुंचाई।

राजनयिक प्रयासों के बाद यूएई से भारत लाया गया

एनआईए ने हरविंदर कुमार की भारत वापसी को विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परिणाम बताया है। आरोपी को यूएई से भारत लाने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास किए गए, जिसके बाद 1 अक्टूबर को उसे डिपोर्ट किया गया। भारत पहुंचते ही एनआईए ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने कहा है कि विदेश में छिपे आतंकवाद से जुड़े आरोपियों को भारत वापस लाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।

अब फंडिंग और विदेशी नेटवर्क की कड़ियों की जांच

इस गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा कथित आतंकी फंडिंग और विदेश से संचालित नेटवर्क की कड़ियों को खंगालना होगा। एनआईए की अब तक की जांच के मुताबिक हत्या की साजिश में जर्मनी आधारित बीकेआई ऑपरेटिव्स की कथित भूमिका सामने आई है, जबकि यूएई में मौजूद आरोपियों पर लॉजिस्टिक्स, हथियारों और वित्तीय सहायता से जुड़े काम करने का आरोप है। एनआईए ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।