अहमदाबाद, 1 अक्टूबर। अडानी ग्रीन एनर्जी की बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़कर 6.63 GWh, भारत की ऑपरेशनल BESS क्षमता में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी
अहमदाबाद, 1 अक्टूबर। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने गुजरात के खावड़ा में अपनी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता को बढ़ाकर 6.63 गीगावाट-घंटा (GWh) कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, जून 2026 में इसकी ऑपरेशनल BESS क्षमता 3.55 GWh थी, जिसे अब बढ़ाकर 6.63 GWh किया गया है। इसके साथ ही AGEL भारत की कुल ऑपरेशनल BESS क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संचालित कर रही है।
कंपनी के अनुसार, भारत में 31 अगस्त 2026 तक ऑपरेशनल BESS क्षमता करीब 12.6 GWh थी। खावड़ा में 6.63 GWh की क्षमता के साथ AGEL का यह इंस्टॉलेशन एक ही स्थान पर दुनिया का सबसे बड़ा ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम है।
AGEL ने बताया कि खावड़ा में ऑन-साइट BESS का निर्माण शुरू करने के 14 महीने के भीतर यह क्षमता हासिल की गई है। वहीं, हाल में जोड़ी गई क्षमता निर्माण शुरू होने के करीब 10 महीने में ऑपरेशनल हुई। यह BESS गुजरात के खावड़ा में कंपनी के बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेटेड है।
खावड़ा के 30 GW रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से BESS कैसे जुड़ा है?
अडानी ग्रीन एनर्जी गुजरात के खावड़ा में करीब 538 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 30 GW का रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट विकसित कर रही है। कंपनी के मुताबिक, इसी रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट के साथ BESS को जोड़ा गया है, जिससे सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय ग्रिड में उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कंपनी का कहना है कि 6.63 GWh का BESS प्रतिदिन करीब 20 लाख घरों की बिजली जरूरत के बराबर क्लीन एनर्जी स्टोर कर सकता है। इसकी क्षमता 1.5 लाख से अधिक मिड-साइज इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी स्टोरेज क्षमता के बराबर बताई गई है।
AGEL के मुताबिक, खावड़ा में स्थापित स्टोरेज सिस्टम एक दिन में इतनी ऊर्जा स्टोर कर सकता है, जो दिल्ली मेट्रो की अनुमानित दैनिक बिजली जरूरत के करीब दोगुने के बराबर है।
बैटरी स्टोरेज ग्रिड और बिजली की पीक डिमांड में कैसे मदद करेगा?
बैटरी स्टोरेज सिस्टम के बढ़ने से रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में एकीकृत करने में मदद मिल सकती है। BESS का इस्तेमाल बिजली की मांग बढ़ने के समय ऊर्जा उपलब्ध कराने, पीक डिमांड को मैनेज करने और रिन्यूएबल पावर की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए किया जा सकता है।
AGEL के अनुसार, खावड़ा BESS लिथियम-आयन बैटरी तकनीक पर आधारित है। इसे एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) और ऑटोमेटेड टेलीमेट्री से जोड़ा गया है, जो बैटरी की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग को मैनेज करने तथा सिस्टम के प्रदर्शन को ऑप्टिमाइज करने में मदद करता है।
6.63 GWh स्टोरेज क्षमता पर सागर अडानी का क्या बयान है?
अडानी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी ने कहा कि सिर्फ 14 महीनों में 6.63 GWh की ऑपरेशनल बैटरी स्टोरेज क्षमता हासिल करना कंपनी और भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज रिन्यूएबल पावर को अधिक भरोसेमंद और जरूरत के समय उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। कंपनी के मुताबिक, भारत में बिजली की मांग बढ़ने के साथ वह बैटरी और पंप्ड स्टोरेज दोनों तरह के एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशन को बढ़ाने पर काम करेगी।
FY27 और अगले पांच साल के लिए AGEL ने क्या स्टोरेज लक्ष्य रखे हैं?
अडानी ग्रीन एनर्जी ने कहा है कि वह वित्त वर्ष 2026-27 में 10 GWh से ज्यादा नई BESS क्षमता जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में 50 GWh की स्टोरेज क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
कंपनी बैटरी स्टोरेज के साथ-साथ पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। AGEL के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य बड़े पैमाने पर मजबूत और जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराई जा सकने वाली रिन्यूएबल पावर क्षमता तैयार करना है।
अडानी ग्रीन एनर्जी के पास वर्तमान में 20.76 GW का ऑपरेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो और 6.63 GWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज पोर्टफोलियो है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 50 GW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करना है।


