रिपोर्टर प्रिया तिवारी
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और अपने भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र में अगर उनके हाथों में गांजा, चरस या नशे के दूसरे सामान पहुंच जाएं, तो यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता है।
आज युवाओं और नाबालिगों के बीच नशे का बढ़ता चलन बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चे अगर नशे की गिरफ्त में आने लगें और नशे के लिए इंजेक्शन जैसे खतरनाक तरीकों का इस्तेमाल होने लगे, तो समझना होगा कि हालात कितने गंभीर हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई बच्चे कम उम्र में ही नशे के जाल में फंस रहे हैं। उन्हें अंदाजा भी नहीं होता कि जिस चीज को वे शुरुआत में शौक, दोस्तों के दबाव या उत्सुकता में आजमा रहे हैं, वही आगे चलकर उनकी जिंदगी को बर्बाद कर सकती है। नशे की लत का असर सिर्फ उनकी सेहत पर नहीं पड़ता, बल्कि पढ़ाई, करियर, परिवार और पूरे भविष्य पर पड़ता है।
परिवार भी झेल रहा नशे की मार
नशे की समस्या का असर सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रहता। इसका सबसे बड़ा दर्द उनके परिवारों को झेलना पड़ता है। माता-पिता अपने बच्चों को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए परेशान रहते हैं। कई परिवार मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक परेशानियों का भी सामना करते हैं।
सरकार के नशा मुक्ति अभियानों पर सवाल
केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से नशे के खिलाफ लगातार जागरूकता और नशा मुक्ति अभियान चलाए जाते हैं। इन अभियानों पर हर साल बड़ी रकम खर्च होती है। लेकिन सवाल यह है कि इन अभियानों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
अगर नशे की मांग और सप्लाई लगातार बनी हुई है, तो सरकार को अपनी नशा मुक्ति नीति और अभियानों की समीक्षा करनी होगी। सिर्फ जागरूकता अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी। स्कूल, कॉलेज, परिवार, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।
दिल्ली सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती
राजधानी दिल्ली में युवाओं और नाबालिगों तक नशे की पहुंच रोकना दिल्ली सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती है। सरकार को यह देखना होगा कि नशे से बचाव के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम कितने प्रभावी हैं और जरूरत पड़ने पर उनमें क्या बदलाव किए जाने चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
वहीं इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी बेहद अहम है। पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करती है, गिरफ्तारियां भी होती हैं और नशीले पदार्थ बरामद किए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ राजधानी तक पहुंच कैसे रहे हैं?
अगर पुलिस और जांच एजेंसियां पूरी ईमानदारी और गंभीरता से कार्रवाई कर रही हैं, तो फिर नशे का यह नेटवर्क लगातार कैसे चल रहा है? नशा आखिर दिल्ली तक पहुंच कौन रहा है और इसके पीछे कौन लोग हैं?
जरूरत सिर्फ नशा करने वालों तक पहुंचने की नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क को तोड़ने की है। सरकार और पुलिस को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि नशे के सौदागर युवाओं और नाबालिगों तक आसानी से न पहुंच सकें।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज की पीढ़ी का नहीं है। सवाल देश के आने वाले कल का है। अगर हमारे युवा नशे की गिरफ्त में जाते रहे, तो इसका नुकसान सिर्फ उनके परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश को उठाना पड़ेगा।




