
मोहिनी सेंगर, तहलका
नई दिल्ली। 19 सितंबर, 2026 । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव 2026 का नतीजा चार केंद्रीय पदों के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के तीन पदों पर जीत दर्ज की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया। NSUI चारों केंद्रीय पदों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी।
President: सिर्फ 2,053 वोट ने बदली बाजी
अध्यक्ष पद पर मुकाबला सबसे ज्यादा नजदीकी रहा। ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीना को 22,523 वोट मिले। यानी दोनों के बीच सिर्फ 2,053 वोटों का अंतर रहा। तीसरे स्थान पर रहीं AISA-SFI की अनाया रतूड़ी को 5,377 वोट मिले। काउंटिंग के दौरान मुकाबला इतना करीबी था कि एक दौर में NSUI उम्मीदवार सिर्फ 1 वोट से आगे थे।
VP में ‘तीसरा खिलाड़ी’ सबसे आगे
उपाध्यक्ष पद का आंकड़ा पूरे चुनाव की तस्वीर को अलग बनाता है। निर्दलीय दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। ABVP के इशू मौर्य को 16,910, जबकि NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले। यानी शौकीन को ABVP उम्मीदवार से 13,705 वोट ज्यादा मिले। खास बात यह है कि शौकीन सबसे ज्यादा वोट पाने वाले चारों केंद्रीय पदों के विजेता भी रहे।
Secretary: 6,781 वोट की साफ बढ़त
सचिव पद पर ABVP की रिया छाबड़ी को 21,650 वोट मिले। NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। यानी दोनों के बीच 6,781 वोटों का अंतर रहा। तीसरे स्थान पर रहीं लेफ्ट उम्मीदवार स्टैंजिन डेस्क्यॉन्ग को 8,734 वोट मिले। यहां नतीजा अध्यक्ष पद की तुलना में काफी स्पष्ट अंतर से आया।
Joint Secretary: 1,000 से भी कम वोट का फासला
संयुक्त सचिव पद पर कहानी फिर बदल गई। ABVP के लक्ष्य राज सिंह को 16,615 वोट मिले, जबकि समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 वोट मिले। यानी जीत का अंतर सिर्फ 837 वोट रहा। NSUI के गोपाल चौधरी को भी 15,206 वोट मिले। मतलब दूसरे और तीसरे उम्मीदवार के बीच सिर्फ 572 वोट का अंतर था। तीनों प्रमुख उम्मीदवारों के वोट जोड़कर देखें तो मुकाबला काफी करीबी रहा।
करीब 61 हजार छात्रों ने डाला वोट
इस चुनाव में 1.51 लाख से ज्यादा छात्र वोट देने के लिए पात्र थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 40.46 प्रतिशत छात्रों ने मतदान किया। इसे आसान भाषा में समझें तो हर 100 eligible छात्रों में करीब 40 ने वोट दिया यानी लगभग 61 हजार छात्रों ने मतदान किया। 2025 में मतदान करीब 39.5 प्रतिशत था, यानी इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 1,000 से 1,500 के आसपास ज्यादा छात्रों ने वोट डाला, यदि समान voter base के आसपास मानें।
2025 से बदली सिर्फ एक कुर्सी, लेकिन कहानी बड़ी
2025 में भी ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते थे अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव। फर्क उपाध्यक्ष पद पर आया था, जो 2025 में NSUI के राहुल झांसला के पास गया था। उस साल झांसला को 29,339 वोट मिले थे, जबकि ABVP के गोविंद तंवर को 20,547 वोट मिले। 2026 में उपाध्यक्ष की सीट NSUI के बजाय निर्दलीय दीपांशु शौकीन के पास चली गई। यानी ABVP के खाते में सीटों की संख्या तीन ही रही, लेकिन NSUI के खाते में चारों केंद्रीय पदों में से कोई सीट नहीं आई।
आंकड़े क्या कहते हैं?
2026 के DUSU नतीजों को सिर्फ “ABVP 3, NSUI 0” कहकर खत्म करना पूरी तस्वीर नहीं बताता। अध्यक्ष पद पर 2,053 वोट, सचिव पद पर 6,781 वोट, संयुक्त सचिव पद पर 837 वोट और उपाध्यक्ष पद पर 13,705 वोट का अंतर रहा। यानी चारों सीटों पर वोटिंग का पैटर्न अलग था। खास तौर पर उपाध्यक्ष का नतीजा बताता है कि इस बार एक निर्दलीय उम्मीदवार ने ABVP और NSUI दोनों के उम्मीदवारों से अलग वोट आधार बनाया और 30 हजार से ज्यादा वोट लेकर सीट अपने नाम की।



