DTC बसें रुकीं तो मेट्रो बनी दिल्ली की लाइफलाइन; 20 अतिरिक्त ट्रिप का इंतजाम, 18 नवंबर 2024 को 78.67 लाख यात्रियों की सबसे बड़ी भीड़

DTC बसें रुकीं तो मेट्रो बनी दिल्ली की लाइफलाइन — 20 अतिरिक्त ट्रिप का इंतजाम, 18 नवंबर 2024 को 78.67 लाख यात्रियों की सबसे बड़ी भीड़; DMRC ने 16-17 सितंबर को 8-8 अतिरिक्त ट्रेनें चलाईं
DTC हड़ताल के बीच दिल्ली मेट्रो ने 20 अतिरिक्त ट्रिप चलाए हैं। 18 नवंबर 2024 को 78.67 लाख यात्रियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। DMRC ने 16 और 17 सितंबर को 8-8 अतिरिक्त ट्रेनें चलाईं।

DTC हड़ताल के चलते मेट्रो पर बढ़ा दबाव; DMRC ने 20 अतिरिक्त ट्रिप और 16-17 सितंबर को 8-8 अतिरिक्त ट्रेनें चलाईं; 18 नवंबर 2024 को 78.67 लाख यात्रियों का रिकॉर्ड, FY 2025-26 में औसत दैनिक 66.79 लाख यात्री

नई दिल्ली | 17 सितंबर, 2026 दिल्ली में डीटीसी ड्राइवरों और कंडक्टरों की हड़ताल का असर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। बस सेवाएं प्रभावित होने के बीच यात्रियों का दबाव दिल्ली मेट्रो पर बढ़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी DMRC ने अपनी सेवाओं में अतिरिक्त इंतजाम किए हैं। 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप, 8 ट्रेनें भी बढ़ीं DMRC ने बताया है कि यात्रियों की बढ़ी हुई संख्या को संभालने के लिए नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप बढ़ाई गई हैं। 16 सितंबर को परिचालन जरूरत के अनुसार 8 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई गईं।

17 सितंबर को भी 8 अतिरिक्त ट्रेनें जरूरत के मुताबिक चलाई जाएंगी। ये अतिरिक्त सेवाएं सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच यात्री मांग और परिचालन स्थिति के अनुसार संचालित की जाएंगी। यानी DTC बसों की हड़ताल का सीधा असर सिर्फ बस यात्रियों पर नहीं, बल्कि दिल्ली के दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों पर भी पड़ रहा है।

ऐसा पहली बार नहीं है जब मेट्रो ने बढ़ाई सेवा

दिल्ली में जब भी किसी वजह से सड़क परिवहन पर दबाव बढ़ा है, DMRC ने अतिरिक्त सेवाओं का इस्तेमाल किया है। मई 2026 में DMRC ने हर सोमवार 6 अतिरिक्त ट्रेनें और 24 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप जोड़ने की व्यवस्था शुरू की थी। DMRC ने जरूरत पड़ने पर दूसरे दिनों में भी अतिरिक्त सेवाएं चलाने की बात कही थी।

वहीं 2024 में प्रदूषण और ट्रैफिक को देखते हुए GRAP के तहत भी अतिरिक्त सेवाओं की व्यवस्था की गई थी। GRAP-2 में 40 अतिरिक्त ट्रिप और GRAP-3 या उससे ऊपर 60 अतिरिक्त ट्रिप तक चलाने की व्यवस्था की गई थी।

दिवाली के दौरान भी डीएमआरसी ने दो दिनों के लिए 60 अतिरिक्त ट्रिप चलाने की घोषणा की थी।

मेट्रों में सबसे ज्यादा भीड़ कब हुई?

दिल्ली मेट्रो के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक 18 नवंबर 2024 को 78.67 लाख पैसेंजर जर्नी दर्ज हुई थीं। यह उस समय मेट्रो का सबसे बड़ा सिंगल डे पैसेंजर जर्नी रिकॉर्ड था। इससे पहले 20 अगस्त 2024 को 77.48 लाख और 13 फरवरी 2024 को 71.09 लाख पैसेंजर जर्नी का रिकॉर्ड बना था।

खास बात यह है कि 13 फरवरी 2024 का रिकॉर्ड किसानों के आंदोलन और दिल्ली की सीमाओं पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बना था। उस दौरान सड़क यातायात प्रभावित होने के कारण मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना DMRC अधिकारी ने जताई थी।

मेट्रों में रोज कितने यात्री आते हैं?

एक सर्वे के 2025-26 के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में 19 मार्च 2026 तक दिल्ली मेट्रो की औसत दैनिक पैसेंजर जर्नी करीब 66.79 लाख थी।

वहीं 2025 में पूरे साल मेट्रो पर करीब 235 करोड़ पैसेंजर जर्नी दर्ज हुईं और औसत दैनिक आंकड़ा करीब 64.6 लाख रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि डीटीसी की बड़ी संख्या में बस सेवाएं प्रभावित होने पर मेट्रो पर कितना अतिरिक्त दबाव आ सकता है।

एक मेट्रो ट्रेन कितने यात्रियों को ले जा सकती है?

डीएमआरसी के पुराने आधिकारिक क्षमता आंकड़ों के अनुसार एक 8-कोच मेट्रो ट्रेन में लगभग 2,400 यात्रियों की क्षमता होती है।

हालांकि वास्तविक यात्रियों की संख्या ट्रेन के प्रकार, रूट, समय और भीड़ के हिसाब से बदलती है। इसलिए 20 अतिरिक्त ट्रिप को सीधे 20 × 2,400 यात्रियों के बराबर मानना सही नहीं होगा। अगर केवल अधिकतम क्षमता के आधार पर गणित किया जाए तो 20 अतिरिक्त ट्रिप की थ्योरेटिकल कैपेसिटी करीब 48,000 पैसेंजर मूवमेंट बैठती है। लेकिन यह संभावित क्षमता है, वास्तविक अतिरिक्त यात्रियों की संख्या नहीं।

क्या इससे मेट्रो की कमाई भी बढ़ेगी?

दिल्ली के 2025-26 के आंकड़ों में मेट्रो की औसत दैनिक पैसेंजर जर्नी करीब 66.79 लाख थी, जबकि DTC की दैनिक औसत राइडरशिप करीब 24.28 लाख बताई गई है।

यानी बस और मेट्रो दिल्ली की परिवहन व्यवस्था के दो बड़े आधार हैं। जब बस सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो यात्रियों का एक हिस्सा मेट्रो, बस, ऑटो, कैब और दूसरे साधनों की ओर जा सकता है। यही वजह है कि DTC हड़ताल के बीच DMRC ने पहले से अतिरिक्त ट्रेनें और अतिरिक्त ट्रिप चलाने की व्यवस्था की है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगर DTC की हड़ताल लंबी चली तो मेट्रो पर बढ़ने वाला यात्री दबाव कितना होगा और क्या मौजूदा अतिरिक्त सेवाएं उस दबाव को संभाल पाएंगी?