80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में तिरंगा यात्राओं का उत्साह, महाराष्ट्र से अरुणाचल तक दिखा देशभक्ति का रंग

नई दिल्ली। देश 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में तिरंगा यात्राओं और जनभागीदारी वाले कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश समेत कई स्थानों पर बुधवार को बड़ी संख्या में लोगों, छात्रों और सुरक्षा बलों ने तिरंगा यात्राओं में हिस्सा लिया।

महाराष्ट्र में करीब 1,500 NCC कैडेट्स की तिरंगा यात्रा
मुंबई के फोर्ट क्षेत्र में स्कूलों और कॉलेजों के करीब 1,500 एनसीसी कैडेट्स ने तिरंगा यात्रा निकाली। सेना, नौसेना और वायुसेना विंग से जुड़े कैडेट्स ने तिरंगा लहराते हुए ‘वंदे मातरम्’ की धुन पर मार्च किया और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। NCC महाराष्ट्र की ओर से राज्य के सभी जिलों में रैलियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

इन गतिविधियों के साथ कैडेट्स नशामुक्ति जागरूकता, टीबी मुक्त भारत, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, फिटनेस और सामुदायिक विकास जैसे अभियानों में भी भाग ले रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में तिरंगा रैली
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जिला खेल स्टेडियम से पुलिस लाइंस तक तिरंगा रैली निकाली गई। इसमें उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अधिकारी, छात्र और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रतिभागियों ने तिरंगा लेकर देश की एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

कठुआ रैली में छात्रों ने तीन विशेष मानव आकृतियां भी बनाईं। इनमें एक ‘150’ की आकृति थी, जो ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का प्रतीक थी। दूसरी आकृति ‘INDIA’ और तीसरी ‘80’ के रूप में बनाई गई, जो स्वतंत्रता के 80 वर्ष का संदेश देती है।

अरुणाचल प्रदेश में 150 मीटर लंबे तिरंगे के साथ रैली
अरुणाचल प्रदेश के देओमाली में भी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत भव्य रैली आयोजित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और बाइक रैली भी निकाली गई। छात्रों ने 150 मीटर लंबे राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ जनरल ग्राउंड से NCI ब्रिज तक ले जाया। इसी तरह खोंसा में भी तिरंगा अभियान के तहत रैली आयोजित की गई।

देशभर में जारी इन आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज से जोड़ना, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करना और स्वतंत्रता दिवस को व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाना है। इस वर्ष समारोह का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं।