
रिपोर्ट: एम. रियाज़ हाशमी
कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में एक साथ तलाशी; पाकिस्तान में बैठे लश्कर हैंडलरों के लिए काम कर रहे स्थानीय OGW नेटवर्क की जांच तेज, घुसपैठियों को पनाह और लॉजिस्टिक मदद देने के सबूत तलाश रही एजेंसी
नई दिल्ली । 12 सितंबर, 2026 — जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश और उसके स्थानीय नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान स्थित हैंडलरों और उनके स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के कथित नेटवर्क से जुड़े क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी केस में की गई।
NIA के मुताबिक तलाशी कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में की गई। जांच एजेंसी का मकसद साजिश से जुड़े और सबूत जुटाना तथा उन लोगों की भूमिका का पता लगाना है, जो पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक और दूसरी मदद मुहैया करा रहे थे।
31 मार्च की रात OGW की गिरफ्तारी से खुला नेटवर्क
यह जांच 31 मार्च 2026 की देर रात एक नाके पर लश्कर से जुड़े एक OGW की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई थी। NIA के अनुसार, उसके कब्जे से हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो साजिश से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई। पूछताछ और अन्य जांच के दौरान स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान और उनकी संदिग्ध भूमिकाएं भी सामने आईं।
पाकिस्तान में लश्कर हैंडलरों के संपर्क में स्थानीय सहयोगी
अब तक की जांच में पाकिस्तान स्थित लश्कर हैंडलरों और उनके स्थानीय सहयोगियों के बीच कथित संबंध सामने आए हैं। NIA के अनुसार, स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल घुसपैठ कर आए आतंकियों की आवाजाही, संपर्क और उन्हें छिपाने, साथ ही उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने में किया जा रहा था। इन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका केवल पनाह देने तक सीमित नहीं थी। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि उन्होंने रेकी और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किस तरह मदद की।
पैसे से लेकर हथियारों की सप्लाई चेन तक जांच
NIA अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए कई स्तरों पर जांच कर रही है। एजेंसी के निशाने पर फाइनेंशियल ट्रेल, कम्युनिकेशन चैनल, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों तथा विस्फोटकों के स्रोत एवं सप्लाई चेन हैं। जांच का उद्देश्य इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की पहचान करने के साथ यह पता लगाना है कि सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश का स्थानीय स्तर पर नेटवर्क कितना बड़ा है और उसकी गतिविधियों का वास्तविक दायरा क्या है।
आपत्तिजनक सामग्री जब्त, आगे और गिरफ्तारी के संकेत
NIA ने कहा कि शनिवार को की गई तलाशी के दौरान मामले से जुड़ी आगे की आपत्तिजनक सामग्री जब्त/सुरक्षित की गई है। एजेंसी अब बरामद सामग्री को जांच के दौरान जुटाए गए अन्य सबूतों के साथ मिलाकर देख रही है। NIA ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां और बरामदगी हो सकती हैं। एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि साजिश में कौन-कौन लोग शामिल हैं और नेटवर्क में उनकी क्या भूमिका थी।
यूएपीए समेत कई गंभीर धाराओं में दर्ज है केस
यह मामला शुरुआत में श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 0024/2026 के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में NIA ने इसे RC-02/2026/NIA/JMU के तौर पर दोबारा दर्ज किया। मामले में यूएपीए की धारा 23, आर्म्स एक्ट की धारा 7 और 25 तथा एक्सप्लोसिव सब्सटेंसेज एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत कार्रवाई की जा रही है। NIA के अनुसार, शनिवार की कार्रवाई बड़े क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी और उसे मदद देने वाले सपोर्ट मैकेनिज्म की चल रही जांच का हिस्सा है।



