ईडी छापे पर पंजाब में सियासी घमासान

ईडी का सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर गमाडा अधिकारियों से कथित अनौपचारिक बैठकों का आरोप; AAP ने कार्रवाई को राजनीतिक प्रताड़ना बताया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) में लंबी तलाशी कार्रवाई ने पंजाब की AAP सरकार और केंद्र की BJP नीत सरकार के बीच नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। दोनों पक्ष एजेंसी की कार्रवाई से सामने आए तथ्यों को लेकर बिल्कुल अलग-अलग दावे कर रहे हैं।

ED ने जमीन की नीलामी, अधिग्रहण, मुआवजे और निजी डेवलपर्स को कथित तौर पर दी गई वित्तीय रियायतों में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। एजेंसी का यह भी दावा है कि AAP के वरिष्ठ नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन ने GMADA अधिकारियों के साथ “अनौपचारिक” बैठकें कीं, जिनमें जमीन की नीलामी, अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी ने केंद्र पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर पंजाब के अधिकारियों में डर पैदा करने और भगवंत मान सरकार के कामकाज में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

यह टकराव 22 सितंबर को ED की दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा में 26 ठिकानों पर तलाशी और सर्वे कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। यह कार्रवाई तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। मोहाली स्थित GMADA मुख्यालय और पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग से जुड़े कार्यालय भी तलाशी के दायरे में थे।

ED की कार्रवाई के बाद मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। वरिष्ठ AAP नेताओं को लेकर एजेंसी के आरोपों ने उस जांच को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है, जिसकी शुरुआत रियल एस्टेट लेनदेन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से हुई थी।

ईडी के आरोप

ईडी के मुताबिक उसकी जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि GMADA अधिकारियों ने प्राधिकरण के आधिकारिक परिसर से बाहर सत्येंद्र जैन और उनके सहयोगी अमरेंद्र झा के साथ अनौपचारिक बैठकें कीं।

एजेंसी का दावा है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर PUDA भवन से फाइलें बाहर ले जाकर चंडीगढ़ के सेक्टर 39 स्थित एक मकान में बैठकें कीं। यह मकान आधिकारिक रूप से AAP नेता और पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के चेयरमैन सनी सिंह अहलूवालिया को आवंटित है। ED का आरोप है कि इस परिसर का इस्तेमाल जैन और उनके OSD द्वारा GMADA अधिकारियों के साथ बैठकों के लिए किया जाता था। इन बैठकों में नई जमीन की नीलामी, अधिग्रहण और मुआवजा तय करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होती थी। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि सिसोदिया और जैन जमीन विकास तथा नीलामी से जुड़े अधिकारियों के साथ नियमित रूप से अनौपचारिक बैठकें करते थे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि नीलामी, जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को जैन के निर्देशों के तहत अनौपचारिक रूप से प्रभावित किया जाता था। एक अन्य आरोप GMADA के बिना बिकी जमीन के भंडार यानी लैंड बैंक की आरक्षित कीमतों से जुड़ा है। ED का दावा है कि नीलामी से पहले आरक्षित कीमतों को कथित रूप से कम किया गया, जिससे GMADA और पंजाब सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है और बिल्डरों तथा राजनेताओं को फायदा पहुंचा।

एजेंसी ने 2013 के कानून के तहत जमीन अधिग्रहण के मुआवजे और अवॉर्ड में कथित अनियमितताओं के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को दी गई कथित रियायतों को भी जांच के दायरे में लिया है। विशेष आरोपों में Remigate के पक्ष में कथित तौर पर वैधानिक बकाया माफ करना शामिल है। ED का कहना है कि इससे करीब 57 करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ हुआ। एजेंसी ने रद्द किए गए प्लॉटों के दोबारा आवंटन को भी जांच में शामिल किया है।

ED ने यह भी आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन के OSD बताए गए अमरेंद्र झा ने बिना किसी आधिकारिक पद के PUDA भवन के भीतर एक कमरे से अनौपचारिक रूप से काम किया। एजेंसी के अनुसार, वह कथित तौर पर GMADA से जुड़े फैसलों को प्रभावित करते और निर्देश जारी करते थे।

जांचकर्ताओं ने यह भी कहा है कि अधिकारियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन में ऐसी चैट मिली हैं, जिनमें पंजाब सरकार के राजनेताओं के रिश्तेदारों से जुड़े कथित हवाला भुगतान का उल्लेख है। हालांकि, ये सभी जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन्हें कानूनी प्रक्रिया में साबित किया जाना बाकी है।

कहां से शुरू हुई जांच

ED की जांच एक कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित CBI की FIR से शुरू हुई, जिसमें तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स और उसके प्रमोटरों का नाम है।

एजेंसी की तलाशी कई कंपनियों के प्रमोटरों, निदेशकों और सहयोगियों के परिसरों में हुई। इनमें तिरुपति इन्फ्राप्रोजेक्ट्स, Remigate Buildestates, MB Infrabuild, Mera Baba Reality Associates और Mera Baba Infrastructure शामिल हैं। जांच अब GMADA की जमीन और निजी डेवलपर्स से जुड़े कथित लेनदेन तक फैल गई है।

तलाशी के शुरुआती दौर में आई रिपोर्टों के मुताबिक ED की टीमें जमीन अधिग्रहण, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति, संपत्ति नीलामी और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को कथित लाभ पहुंचाने से जुड़े मामलों की जांच कर रही थीं। कार्रवाई के दौरान GMADA कार्यालय की तीन मंजिलों को कथित तौर पर सील किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ED की कार्रवाई 48 घंटे से अधिक समय तक चली और एजेंसी ने रिकॉर्ड भी जब्त किए।

AAP ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप

AAP ने पूरे घटनाक्रम की बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की है। पार्टी ने BJP नीत केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर पंजाब के अधिकारियों में भय का माहौल पैदा करने और राज्य सरकार के कल्याण तथा विकास कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

AAP ने विशेष रूप से GMADA में ED की तलाशी के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि ED जिस CBI मामले का हवाला दे रही है, वह तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड से संबंधित है और GMADA के खिलाफ कोई FIR नहीं है।

पार्टी का दावा है कि ED ने इस मामले को आधार बनाकर पंजाब सरकार के प्राधिकरण में प्रवेश किया, रिकॉर्ड जब्त किए और कई दिनों तक उसके कामकाज को बाधित किया। AAP ने छापे को “राजनीतिक प्रताड़ना” करार देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र जब्त सामग्री के आधार पर एक राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के GMADA के आधिकारिक कामकाज में शामिल होने की खबरों को भी सिरे से खारिज किया है।

AAP के मुताबिक, दोनों नेताओं की GMADA की परियोजनाओं, रोजमर्रा के कामकाज या आधिकारिक निर्णय प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं है। पार्टी ने GMADA अधिकारियों के साथ उनकी बैठकों के दावों को “झूठा, निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है। AAP ने यह भी आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है।

पंजाब सरकार पहुंची हाई कोर्ट

विवाद तब और बढ़ गया जब पंजाब सरकार ने ED की कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।

अदालत ने स्थिति का जायजा लेने और रिपोर्ट देने के लिए एक वारंट अधिकारी नियुक्त किया। बाद में अधिकारी ने रिपोर्ट दी कि अधिकारियों को न तो अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था और न ही उन पर दबाव डाला जा रहा था।

इसके बाद राज्य सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली, हालांकि उसे अन्य कानूनी विकल्प अपनाने की स्वतंत्रता दी गई। ED ने दूसरी ओर कहा कि GMADA के कार्यालयों में पहुंच बनी रही और सामान्य कामकाज जारी रहा। एजेंसी ने यह भी कहा कि अधिकारियों को भोजन, आराम, चिकित्सा सुविधाएं और परिवारों से संपर्क की सुविधा दी गई थी। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों ने पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस जांच को और पेचीदा बना दिया है।

AAP ने बढ़ाया सियासी दायरा

AAP ने GMADA मामले को पंजाब और केंद्र के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव के व्यापक संदर्भ में रखने की कोशिश की है। पार्टी ने कृषि कानूनों, चंडीगढ़, पंजाब विश्वविद्यालय और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब की भूमिका को लेकर हुए पिछले विवादों का उल्लेख करते हुए कहा है कि राज्य ने हमेशा केंद्र के उन प्रयासों का विरोध किया है, जिन्हें वह अपने अधिकारों में दखल मानता है।

AAP का आरोप है कि ED की ताजा कार्रवाई भी इसी सिलसिले का हिस्सा है और BJP नीत केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए पंजाब पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा है कि भगवंत मान सरकार पूरे मामले की जांच करेगी और तलाशी के दौरान किसी तरह का गैरकानूनी आचरण सामने आने पर कानूनी कार्रवाई करेगी।

AAP कार्यकर्ताओं ने GMADA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया है। इन प्रदर्शनों ने ऐसी जांच को राजनीतिक रंग दे दिया है, जिसका मूल केंद्र कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हैं।

आमने-सामने दो दावे

GMADA विवाद अब दो बिल्कुल अलग नैरेटिव के बीच खड़ा है। ED के लिए जांच जमीन के लेनदेन में कथित हेरफेर, वरिष्ठ अधिकारियों तक अनौपचारिक पहुंच, निजी डेवलपर्स को दी गई संदिग्ध रियायतों और सरकारी खजाने को संभावित नुकसान की ओर इशारा करती है। AAP के लिए यह कार्रवाई पंजाब सरकार को डराने और राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।

लेकिन विवाद के केंद्र में वे दस्तावेज और लेनदेन हैं जिनकी जांच एजेंसी कर रही है। आरक्षित कीमतों को कथित तौर पर कम किए जाने से करीब 10,000 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का ED का आरोप, वैधानिक बकाया में कथित 57 करोड़ रुपये का लाभ और जमीन अधिग्रहण मुआवजे तथा रद्द प्लॉटों के पुनः आवंटन में कथित अनियमितताएं जांच के अहम बिंदु हैं। हालांकि, आरोप दोषसिद्धि नहीं होते। ED के दावों को जांच, कानूनी परीक्षण और जहां आवश्यक हो, न्यायिक प्रक्रिया की कसौटी पर खरा उतरना होगा।

पंजाब सरकार के लिए भी राजनीतिक दांव कम नहीं हैं। GMADA खासकर तेजी से विकसित हो रहे मोहाली क्षेत्र में राज्य की प्रमुख विकास एजेंसियों में से एक है। जमीन की नीलामी या निजी डेवलपर्स को दी गई रियायतों में कोई अनियमितता साबित होती है तो इससे शासन और सरकारी वित्त पर सवाल उठेंगे। दूसरी ओर, यदि राजनीतिक नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं होते, तो AAP का यह दावा मजबूत हो सकता है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के औजार के रूप में किया जा रहा है।

फिलहाल GMADA का दफ्तर पंजाब की AAP सरकार और केंद्र के बीच बढ़ते टकराव का नया अखाड़ा बन गया है। अब जांच यह तय करेगी कि ED ने वास्तव में कोई ठोस वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी पकड़ी है या, जैसा कि AAP आरोप लगा रही है, यह कार्रवाई चंडीगढ़ और दिल्ली के बीच चल रहे राजनीतिक संघर्ष का एक और अध्याय बनकर रह जाएगी।

फिलहाल GMADA से जब्त दस्तावेज शायद उन राजनीतिक बयानों से ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हों, जो उसके बाहर दिए जा रहे हैं।