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मनी लॉन्ड्रिंग केस: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली जमानत

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को आज बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिल गयी हैं। देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार व पद दुरुपयोग से संबंधित जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा हैं।

सीबीआई की विशेष अदालत के पिछले महीने देशमुख की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पिछले सप्ताह अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बता दें, सीबीआई ने इस वर्ष अप्रैल माह में देशमुख को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल देशमुख अभी न्यायिक हिरासत में हैं और मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।

देशमुख ने याचिका में चिकित्सकीय और याचिका के गुण-दोष के आधार पर जमानत का अनुरोध किया था। और बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले सप्ताह कहा था कि देशमुख की सेहत को देखते हुए प्रथम दृष्टया उसकी राय है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग मामले में दाखिल उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पाकिस्तान-तालिबान सीमा पर झड़प में 6 पाक सैनिकों और चार अफगानों की मौत

एक बड़ी घटना में अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर तालिबान लड़ाकों की गोलीबारी में 6 पाकिस्तानी सैनिकों और चार अफगानियों की मौत हो गयी है। यह घटना दोनों देशों के बीच विवादित स्थल चमन में हुई है। हाल के महीनों में यह सबसे बड़ी घटना है जिसमें तालिबान लड़ाके और पाकिस्तानी सैनिक आपस में भिड़े हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा के विवाद की जगह पर यह घटना हुई है। इस स्थान को ‘ड्यूरेंड लाइन’ कहा जाता है। अफगानिस्तान इस सीमा रेखा को स्वीकार नहीं करता जबकि पाकिस्तान ने वहां तारबंदी कर रखी है।

तालिबान चमन में पाकिस्तान की तारबंदी तो हटाएँ पर जोर देता रहा है। हालांकि, । पाकिस्तानई पक्ष इसे स्वीकार नहीं करता जिससे अब दोनों में गोलीबारी की यह बड़ी घटना हुई है। अभी तक की ख़बरों के मुताबिक इस घटना में 10 लोगों की जान गयी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से सटे शहर स्पिन बोल्डक में पाकिस्तान की तरफ से दागे गए मोर्टार आकर गिरा। इससे 4 अफगानों की मौत हो गयी जबकि 20 घायल हुए हैं। घटना से गुस्साए तालिबान लड़ाकों ने चमन के पास पाकिस्तानी सेना पर हमला कर दिया। इस गोलीबारी में 6 पाकिस्तानियों की मौत हो गयी। कई अन्य घायल हुए हैं।

ट्विटर से महिलाओं को निकालने को लेकर एलन मस्क के खिलाफ केस दर्ज

माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने के बाद से ही एलन मस्क उनके द्वारा लिए गए फैसलों के चलते चर्चाओं में हैं। उन्होंने दुनियाभर के कई देशों में मौजूद ट्विटर ऑफिस में कर्मचारियों की छंटनी की है।

एलन मस्क ने छंटनी करते समय यह भी संदेश दिया कि उनके साथ केवल वहीं कर्मचारी काम करे जो पूरी लग्न के साथ काम करना चाहता है। किंतु उनके द्वारा की गर्इ छंटनी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

इसी के चलते ट्विटर से हटाई जाने वाली दो महिलाओं ने अमेरिकी कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज कराया हैं। उन्होंने दावा किया है कि अचानक बड़े पैमाने पर छंटनी से महिला कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

पूर्व कर्मचारी कैरोलिना बर्नल स्ट्रिफ़लिंग और विलो व्रेन तुर्कल द्वारा समान महिला श्रमिकों की ओर से दायर याचिका में महिलाओं ने कोर्ट में आरोप लगाते हुए कहा है कि, एलन मस्क ने छंटनी में महिलाओं को टारगेट करते हुए नौकरी से निकाला हैं। सैन फ्रांसिस्को संघीय अदालत में दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि छंटनी से पहले कुल मिलाकर अधिक पुरूषों को नियुक्त करने के बावजूद, आधे से भी कम पुरुषों की तुलना में 57 फीसदी महिला कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।

लिस- रिओर्डन ने लिखा कि, “ट्विटर पर कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी ने महिला कर्मचारियों को पुरुष कर्मचारियों की तुलना में बहुत अधिक हद तक प्रभावित किया है और उनकी संख्या भी अधिक है। उन्होंने आगे कहा कि मस्क ने महिलाओं के बारे में कर्इ सार्वजनिक रूप से भेदभावपूर्ण टिप्पणियां की हैं, और छंटनी भेदभाव का परिणाम हैं। ”

भाजपा पार्षद ने लगाया आरोप, दिल्ली मेयर चुनाव में समर्थन के बदले आप नेता ने दिया ऑफर

दिल्ली नगर निगम चुनाव में आम आदमी (आप) ने 134 सीटें जीतकर भाजपा के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया हैं। वहीं एमसीडी के 250 वार्ड में हुए चुनाव में भाजपा ने 104 सीटों और कांग्रेस ने केवल नौ सीटों पर जीत हासिल की हैं।

वहीं भाजपा पार्षद डॉ. मोनिका पंत ने आरोप लगाया है कि शिखा गर्ग नाम की एक महिला ने उनसे संपर्क किया था, जिसने उन्हें दिल्ली मेयर चुनाव के दौरान आप को समर्थन के बदले आकर्षक ऑफर दिए थे। मोनिका पंत आनंद विहार के वॉर्ड नंबर 206 से भाजपा पार्षद व दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री भी हैं।

मोनिका पंत ने बताया कि, “केजरीवाल की एक एजेंट शिखा गर्ग का मेरे पास एक फोन आया कि मैं आपसे मिलकर कुछ बात करना चाहती हूं। जब मैंने उनसे फोन पर ही बात करने को कहा तो उन्होंने मिलकर ही बात करने का दबाव बनाया। और उन्होंने मेरे घर आकर मेयर चुनाव में सपोर्ट करने के बदले मुझे पद के साथ तरह तरह के प्रलोभन भी दिए।”

बता दें, महिला पार्षद के आरोपों के बाद भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि, आज आम आदमी पार्टी का एक नया मॉडल सामने आया हैं। जिसका नाम है प्रलोभन फॉर पार्षद मॉडल। वहीं दिल्ली भाजपा के एक वरिष्ठ नेता हरीश खुराना ने कहा कि केजरीवाल की एजेंट शिखा गर्ग भाजपा की पार्षद को प्रलोभन दे रही हैं। और इसका सबूत अब सबके सामने आ चुका है और हम इस संबंध में शाम 4 बजे एसीबी में शिकायत दर्ज कराने जा रहे है।

गुजरात भाजपा विधायक दल के नेता बने भूपेंद्र पटेल, सोमवार को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने राज्य में सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी बीच भूपेंद्र पटेल को गुजरात भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया हैं। साथ ही उन्हें फिर से सीएम बनाने की पूरी उम्मीद भी है।

सूत्रों के अनुसार भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री पद की शपथ सोमवार को लेंगे। उनके नाम पर सहमति रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक में ली गर्इ है। इसके बाद अब भूपेद्र पटेल राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

बता दें, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को पूरे मंत्रिमंडल के साथ राज्य में नयी सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इस्तीफा दे दिया हैं।

राज्य में सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह से पहले भाजपा विधायकों की बैठक में एक बार फिर से उन्हें इस पद के लिए नामांकित किया जाएगा। गुजरात में भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद भूपेंद्र पटेल प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ आज शाम 4 बजे दिल्ली आएंगे।

भूपेंद्र पटेल दिल्ली में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात कर शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण देने के साथ ही गुजरात मंत्रिमंडल के गठन पर भी चर्चा करेंगे।

आपको बता दें, भाजपा ने गुजरात में 182 सदस्यीय विधानसभा में रिकॉर्ड 156 सीटें हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की हैं। गुजरात भाजपा प्रमुख सीआर पाटिल और पार्टी के खास नेता पंकज देसाई के साथ पटेल ने गांधीनगर राजभवन में राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपना इस्तीफा सौंप दिया हैं। किंतु यह सिर्फ एक औपचारिकता हैं क्योंकि पार्टी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि चुनाव राज्य के अगले मुख्यमंत्री वहीं होंगे।

तमिलनाडु में चक्रवाती तूफान ‘मैंडूस’ से चेन्नई की सड़कें जलमग्न, कई पेड़ उखड़े; कई जिलों में स्कूल और कॉलेज भी बंद

चक्रवाती तूफान ‘मैंडूस’ शुक्रवार देर रात करीब 10.30 बजे लैंडफिल बनाया और तमिलनाडु में ममल्लापुरम (महाबलीपुरम) के पास पुडुचेरी और श्रीहरिकोटा के बीच तट को करीब 1.30 बजे करीब 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के साथ पार कर पहुंचा।

मैंडूस का चेन्नई सहित कई जिलों में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और करीब 200 पेड़ों उखड़ गए हैं। इसके चलते कई जिलों में स्कूल व कॉलेजों को बंद कर दिया गया हैं। मौसम विभाग ने 10 व 11 दिसंबर को उत्तरी तमिलनाडु, रायलसीमा और दक्षिण आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी कर दिया हैं।

इसके बाद यह कमजोर पड़ गया और चेन्नई में सुबह 5.30 बजे तक 115.1 मिमी की बारिश हुई और खराब मौसम के चलते चेन्नई हवाई अड्डे पर 13 घरेलू व तीन अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई। यह जानकारी चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ट्वीट कर दी।

चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ट्वीट कर कहा कि, “यात्रियों से अनुरोध है कि वे आगे की जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें।“ बता दें तीव्रता के पैमाने पर पहले इसे गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में वर्गीकृत किया गया था किंतु 62-88 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ चक्रवाती तूफान में आ गया।

पुलिस के मुताबिक सुरक्षा, राहत व बचाव कार्यों के लिए तमिलनाडु राज्य आपदा मोचन बल की 40 सदस्यीय टीम के अलावा 16 हजार पुलिसकर्मियों और 1500 होमगार्ड को तैनात किया गया हैं।

आपको बता दें, ‘मैंडूस’ एक अरबी शब्द है इसका अर्थ खजाने की पेटी (बॉक्स) है। और यह नाम संयुक्त अरब अमीरात द्वारा चुना गया था।

मौसम विभाग के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि चक्रवात के शुक्रवार की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान की तीव्रता को बनाए रखने और फिर धीरे-धीरे कमजोर होने की बहुत संभावना हैं।

बैंकिग की कठिन राह

वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के मुनाफ़े में उल्लेखनीय वृद्धि होने के बाद कहा जा रहा है कि बैंकिंग क्षेत्र की मुश्किलें कम हो गई हैं, लेकिन विश्लेषण से पता चलता है कि राह अभी भी आसान नहीं हुई है। महंगाई का मुकाबला करने के लिए बैंकों ने ऋण दर में इजाफा किया है और सस्ती दर पर पूँजी इकठ्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उद्योगों, कारोबारियों और आमजन को सस्ती दर पर ऋण मिल सके. साथ में बैंक, ब्याज व शुल्क आधारित आय, क्रॉस सेलिंग आदि से आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय स्टेट बैंक ने चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में एकल आधार पर 13,265 करोड़ रुपये की शुद्ध लाभ अर्जित की,जो पिछले साल की समान अवधि से 74 प्रतिशत अधिक है. वहीं, दूसरी तिमाही में बैंक की कुल आय बढ़कर 88,734 करोड़ रुपये हो गई, जो 1 साल पहले की समान अवधि में 77,689.09 करोड़ रुपये थी। पिछली तिमाही में स्टेट बैंक की शुद्ध ब्याज आय 13 प्रतिशत बढ़कर 35,183 करोड़ रुपये हो गई, जबकि 1 साल पहले यह 31,184 करोड़ रुपये थी. चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में स्टेट बैंक का एनपीए घटकर 3.52 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 4.90 प्रतिशत था. शुद्ध एनपीए का अनुपात भी घटकर कुल अग्रिम का 0.80 प्रतिशत रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.52 प्रतिशत था.

बैंक ऑफ बड़ौदा का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 59 प्रतिशत बढ़कर 3,313 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में बैंक को 2,088 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था. बैंक की कुल आय वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 23,080.03 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 20,270.74 करोड़ रुपये थी. इसकी शुद्ध ब्याज आय भी 34.5 प्रतिशत बढ़कर 10,714 करोड़ रुपये हो गई. बैंक का एनपीए सितंबर 2022 के अंत में घटकर सकल अग्रिम का 5.31 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 8.11 प्रतिशत था. बैंक का शुद्ध एनपीए भी 2.83 प्रतिशत घटकर 1.16 प्रतिशत रह गया. समीक्षाधीन तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन बढ़कर 3.33 प्रतिशत और पूंजी पर्याप्तता अनुपात 15.55 प्रतिशत से घटकर 15.25 प्रतिशत रह गया.

पंजाब एंड सिंध बैंक (पीएसबी) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 27 प्रतिशत बढ़कर 278 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका शुद्ध लाभ 218 करोड़ रुपये रहा था.

पीएसबी की दूसरी तिमाही में कुल आय बढ़कर 2,120.17 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले 1 साल की समान अवधि में यह 1,974.78 करोड़ रुपये रही थी. वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में पीएसबी का एनपीए घटकर सकल अग्रिम के 9.67 प्रतिशत पर आ गया. पिछले साल यह अनुपात 14.54 प्रतिशत रहा था. पीएसबी बैंक का शुद्ध एनपीए  घटकर 2.24 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल की सामान तिमाही में यह 3.81 प्रतिशत था.

सितंबर तिमाही में यूको बैंक के शुद्ध मुनाफा में पिछले साल की तुलना में 146 प्रतिशत अधिक की वृद्धि हुई, जबकि बैंक ऑफ महाराष्ट्र के मुनाफ़े में पिछले साल के मुकाबले 103 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस दौरान केनरा बैंक के शुद्ध लाभ में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुईहै. समग्र रूप में देखें तो सरकारी बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को छोड़कर अन्य सभी सरकारी बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 2022-23 की सितंबर तिमाही में पिछले साल की सामान अवधि की तुलना में अधिक रहा है। इस तरह,चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 12 सरकारी बैंकों ने 25,685 करोड़ रुपये और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 40,991 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया, जो पिछले साल के मुकाबले क्रमश: 50 प्रतिशत और 31.6 प्रतिशत अधिक है।

समीक्षाधीन अवधि में निजी बैंकों का प्रदर्शन भी शानदार रहा है. अठारह निजी सूचीबद्ध बैंकों में से केवल दो के शुद्ध लाभ में इस अवधि में कमी देखी गई है. इनका शुद्ध लाभ पिछले साल के मुकाबले वार्षिक आधार पर 64 प्रतिशत बढ़कर 32,150 करोड़ रुपये हो गया. चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में एचडीएफसी बैंक का शुद्ध लाभ 10,606 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध मुनाफा 7,558 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक का शुद्ध लाभ 2,581 करोड़ रुपये और ऐक्सिस बैंक का शुद्ध मुनाफा 5,330 करोड़ रुपये रहा.

भले ही सरकारी और निजी बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जबर्दस्त मुनाफा कमाया है, लेकिन बैंकों के सेहत को सिर्फ मुनाफ़े के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता है। बैंकों के मुनाफ़े में बढ़ोतरी का एक महत्वपूर्ण कारण एनपीए और आकस्मिकता के मद में किये जा रहे प्रावधानों की राशि में उल्लेखनीय कटौती करना है. समग्र रूप से बैंकों ने वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में प्रावधान की जा रही राशि में 13 प्रतिशत की कटौती की है। निजी बैंकों ने मामले में 45 प्रतिशत की कटौती की है, जबकि सरकारी बैंकों ने 18 प्रतिशत.इस अवधि में बैंकों के व्यय में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है,जबकि शुल्क आधारित आय में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

समग्र रूप से बैंकों के शुद्ध ब्याज आय में 22 प्रतिशत की तेजी आई है. सरकारी बैंकों के शुद्ध ब्याज आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है,जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों के शुद्ध ब्याज आय में 24.5 प्रतिशत की.

बैंकों के शुद्ध ब्याज आय में बढ़ोतरी का कारण उधारी के उठाव में तेजी आना है, लेकिन बैंक जमा में उधारी के अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही है. इसमें वृद्धि के लिए बैंकों को जमा दर में इजाफा करना होगा, जिससे बैंकों का मुनाफ़ा प्रभावित होगा। इससे बैंकों के पास तरलता की कमी भी हो सकती है।

विगत एक साल में 12 सरकारी बैंकों में से महज 4 बैंकों ने जमा में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की है, जबकि एक को छोड़कर अन्य बैंकों की उधारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की उधारी में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि जमा में 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. सेंट्रल बैंक की ऋण वृद्धि दर 12 प्रतिशत है, लेकिन जमा वृद्धि दर महज 2 प्रतिशत है. निजी बैंकों में भी ऐसे ही हालात हैं. सभी सूचीबद्ध निजी बैंकों में से केवल दो बैंकों ने ऋण के मुकाबले जमा में अधिक वृद्धि दर्ज की है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा वृद्धि दर 37 प्रतिशत रही है, जबकि ऋण वृद्धि दर 32 प्रतिशत. यस बैंक की जमा वृद्धि दर 13 प्रतिशत रही है, जबकि ऋण वृद्धि दर 11 प्रतिशत रही है.

वित्त वर्ष 2022-23 की सितंबर तिमाही में सूचीबद्ध बैंकों का एनपीए घटकर 6.62 लाख करोड़ रुपये रह गया,जिसमें सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 4.87 लाख करोड़ रुपये है. इनका शुद्ध एनपीए 1.68 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 1.29 लाख करोड़ रुपये है. मार्च 2018 में सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए 10.4 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि शुद्ध एनपीए 5.2 लाख करोड़ रुपये रहाथा. इस अवधि में सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 8.96 लाख करोड़ रुपये था, जबकि शुद्ध एनपीए 4.54 लाख करोड़ रुपये. निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 1.29 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध एनपीए 64,000 करोड़ रुपये था.

अभी निजी बैंकों में आईडीबीआई बैंक 16.5 प्रतिशत एनपीए के साथशीर्ष पर है. 12.89 प्रतिशत एनपीए के साथ यस बैंक दूसरे स्थान पर है, जबकि 7.19 प्रतिशत एनपीए के साथ बंधन बैंक तीसरे स्थान पर। सरकारी बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक 10.48 प्रतिशत सकल एनपीए के साथ शीर्ष पर है, जबकि 9.67 प्रतिशत सकल एनपीए के साथ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया दूसरे स्थान पर और 9.67 प्रतिशत सकल एनपीए के साथ पंजाब ऐंड सिंध बैंक तीसरे स्थान पर है। भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र का शुद्ध एनपीए 1 प्रतिशत से कम है। एनपीए में कमी आने का एक बड़ा कारण कोरोना महामारी के दौरान सरकार और केंद्रीय बैंक दारा एनपीए के नियमों को शिथिल करना और कारोबारियों को सहायता मुहैया कराना है।

तीन बैंकों को छोड़कर सभी सूचीबद्ध बैंकों के प्रावधान कवरेज अनुपात(पीसीआर) सितंबर तिमाही में बढ़ा है. यह इस बात का संकेत है कि बैंकों के बैलेंस शीट पहले से मजबूत हुए हैं. आईडीबीआई बैंक का प्रावधान कवरेज अनुपात 97.86 प्रतिशत है, जबकि 96.06 प्रतिशत पीसीआर के साथ बैंक ऑफ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है। दो निजी बैंकों को छोड़कर सभी सूचीबद्ध बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात 70 प्रतिशत से अधिक है, जिसे और भी बेहतर करने की जरुरत है.

निःसंदेह, वित्त वर्ष 2022-23 की पहली और दूसरी तिमाही में बैंकों के मुनाफ़े में बेहतरी आई है, लेकिन बैंकों का प्रदर्शन सभी मानकों पर अभी भी बेहतर नहीं हुआ है. मुनाफ़े में बेहतरी आने का कारण एनपीए और आकस्मिक मद में किये जा रहे प्रावधान में कटौती करना है, लेकिन एनपीए में कमी आने का एक बड़ा कारण सरकार द्वारा उद्योगों और कारोबारियों को दी जा रही सहायता है. ब्याज आय में बढ़ोतरी का कारण उधारी में तेजी आना है, लेकिन जमा में वृद्धि नहीं होने से आने वाली तिमाहियों में बैंकों के मुनाफ़े में कमी आने की संभावना है. बैंकों के व्यय में भी चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और शुल्क आधारित आय में कमी आई है. ऐसे में जरूरत है कि बैंकअपनी खामियों व कमियों को दूर करें,एनपीए को कम करने की तरफ ध्यान दें,सस्ती दर पर जमा बढ़ाने की कोशिश करें,व्यय में कटौती करें आदि।

 

हिंदी का वैश्विक फ़लक

आजादी से पहले से ही हिंदी भारत में जनसंचार, संवाद और संपर्क की भाषा थी और आज विश्व की संपर्क भाषा बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। अपने आगाज से ही हिंदी व्यावहारिक और लचीली भाषा रही है। इसे दूसरे भाषाओं या बोलियों से शब्द लेने से कभी गुरेज नहीं रहा है। वैश्विक भाषा बनने की पहली शर्त होती है कि अधिक से अधिक लोग उस भाषा में संवाद करें, उसमें दूसरी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की क्षमता हो, उसका साहित्य समृद्ध हो आदि। इन पैमानों पर हिंदी भाषा पूरी तरह से खरी उतरती है।

हिंदी दिवस

हिंदी भाषा के वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए हर साल 10 जनवरी को दुनिया भर में “विश्व हिंदी दिवस” मनाया जाता है और 14 सितंबर को भारत में “हिंदी दिवस” मनाया जाता है। भारत में हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत देश की आजादी के बाद हुई। 1946 को 14 सितंबर के दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। तदुपरांत, तत्कालीन सरकार ने 14 सितंबर को “हिंदी दिवस” के तौर पर मनाने का फैसला किया और आधिकारिक तौर पर पहला “हिंदी दिवस” 14 सितंबर 1953 को मनाया गया।

 

हिंदी दिवस की प्रासंगकिता

भारत में 22 भाषाएँ और 72,507 बोलियाँ हैं। इसलिये, कुछ लोग सवाल करते हैं कि “हिंदी दिवस” क्यों मनाया जाये। इसकी जगह पर भाषा दिवस मनाया जाये और सभी भाषाओं को तरजीह दी जाये, लेकिन 22 भाषाओं में हिंदी का संपर्क भाषा के रूप में देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है। हिंदी भारत को दुनिया से जोड़ने का काम कर रही है और कमोबेश यह भारत को भी एक सूत्र में पिरोती है। इसलिए, सरकार ने इसे राजभाषा का दर्जा दिया। यह राजभाषा के रूप में संविधान के भाग 5, भाग 6 और भाग 17 में समाविष्ट है।

1947 में देश तो आजाद हो गया, लेकिन अँग्रेजी मोह से हम आजाद नहीं हो सके। आजादी मिलने के बाद भी एक लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों और अदालतों में अँग्रेजी का बोलबाला रहा। देश के तथाकथित प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी वर्ग तो आज भी अँग्रेजी के हिमायती हैं। लिहाजा, देश में अँग्रेजी के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिये “हिंदी दिवस” को मनाना जरूरी समझा गया। सरकार की मंशा थी कि “हिंदी दिवस” के जरिये सरकारी कार्यालयों, अदालतों और जनमानस के बीच हिंदी के महत्व को रेखांकित किया जाये और उन्हें हिंदी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित किया जाये और आज सरकार की उक्त मंशा कमोबेश पूरी होती हुई दिख रही है।

राष्ट्रभाषा बनाने की जरूरत

एक स्वाभिमानी देश की पहचान उसकी राष्ट्रभाषा से होती है। दुनिया के सभी प्रमुख देशों की अपनी एक राष्ट्रभाषा है। भारत की भी एक राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। भारत में मौजूद 22 भाषाओं में सिर्फ हिंदी में ही राष्ट्रभाषा बनने की क्षमता है। इसलिए, महात्मा गाँधी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिये कहा था। मोदी सरकार हिंदी को आगे बढ़ाने में महती भूमिका निभा रही है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी खुद भी हिंदी में संवाद करते हैं और उनके मंत्रिमंडल के कई दूसरे मंत्री भी। लिहाज़ा,आगामी कुछ सालों में हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने की प्रबल संभावना है।

उत्पत्ति

आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक आर्यों की भाषा संस्कृत थी। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में संस्कृत भाषा की जगह पाली भाषा ने ले ली। कालांतर में पाली भाषा से प्राकृत भाषा का जन्म हुआ। हिंदी भाषा का स्रोत प्राकृत भाषा को माना जाता है। उस कालखंड में सिंधु नदी के आस-पास के इलाकों में “हिंदवी”नाम की भाषा बोली जाती थी। कालांतर में अमीर खुसरो ने इसी भाषा में साहित्य रचना की। बाद में “हिंदवी” भाषा हिंदी के नाम से जानी जाने लगी। आधुनिक भारत की लगभग सभी भाषाओं की जन्मदात्री प्राकृत भाषा मानी जाती है।

समृद्ध साहित्य

हिंदी भाषा का साहित्य बहुत ही समृद्ध है। यह वीर, भक्ति, शृंगार आदि रसों से परिपूर्ण है। इसकी तुलना विश्व के श्रेष्ठ साहित्यों से की जाती है। विगत 1500 सालों से हिंदी का साहित्य लगातार समृद्ध हो रहा है। हिंदी भाषा को विरासत में कई भाषाओं और बोलियों का समृद्ध शब्द भंडार मिला है। हिंदी ने अरबी-फारसी, उर्दू, अँग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला, गुजराती, मराठी, उड़िया और बोलियों में अवधी, मगही, भोजपुरी, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी आदि के शब्दों को खुलेमन से स्वीकार किया है। देश-विदेश के लोग हिंदी के लेखकों व कवियों को पढ़ने के लिए हिंदी सीख रहे हैं। देवकी नंदन खत्री द्वारा लिखित उपन्यास “चंद्रकांतासंतति”कोपढ़नेकेलिएबहुतसारेलोगोंनेहिंदीसीखीथी.आज किसी भी भाव की भावाव्यक्ति हिंदी भाषा में की जा सकती है। हिंदी भाषा ने विश्व को कई श्रेष्ठ रचनाएँ दी है। हिंदी कविताओं का विश्व साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान है। प्रवासी भारतीयों का भी हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महती योगदान है। हिंदी में उपन्यास, कवितायें, निबंध संग्रह,नाटक आदि प्रवासी भारतीय लिख रहे हैं। प्रवासी भारतीय हिंदी पर कार्यशाला, सम्मेलन, गोष्ठी, सेमिनार आदि का आयोजन भी नियमित तौर पर कर रहे हैं, जिससे हिंदी मुसलसल समृद्ध हो रही है। हिंदी के

 विकास में मीडिया की भूमिका

मीडिया हिंदी को विश्व में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हिंदी के पहले अखबार का नाम उदंत मार्तंड था, जिसका प्रकाशन अब के कोलकाता में 1826 में हुआ था। आज की मीडिया, जिनमें प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक प्रमुख हैं, मुख्य रूप से संप्रेषण की भाषा के तौर पर हिंदी का इस्तेमाल कर रही हैं।

भारत में रेडियो की शुरुआत बीसवीं सदी के तीसरे दशक में हुई, जबकि दूरदर्शन का आगाज बीसवीं सदी के छठे दशक में हुआ. निजी टीवी चैनल भी बीसवीं सदी के नब्बे के दशक में भारत आ गए थे. मीडिया के इन नये चेहरों के आने से देश एवं विदेशों में हिंदी के प्रसार में अभूतपूर्व तेजी आई. वैसे प्रदेश, जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती थी,वहां भी,अब हिंदी को सुना व सीखा जाने लगा है. मीडिया की वजह से हिंदी विश्व के कोने-कोने तक पहुँच गई है। तमिलनाडू का कोई अंजान शहर हो या नामीबिया का, हर जगह हम हिंदी के समाचार व कार्यक्रम को सुन व देख सकते हैं।

दैनिक भास्कर, जो एक हिंदी दैनिक है, देश का सबसे अधिक सर्कुलेशन वाला अखबार है। ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के अनुसार वर्ष 2019 में दैनिक भास्कर की कुल प्रसारित संख्या 45लाख से भी अधिक थी, जबकि दूसरे स्थान पर दैनिक जागरण था। उल्लेखनीय है कि यह संख्या तीसरे स्थान पर रहे टाइम्स ऑफ़ इंडिया से 15 लाख से भी ज्यादा है.

टीवी पर भी सबसे अधिक हिंदी के समाचार, विज्ञापन एवं कार्यक्रम प्रसारित किये जा रहे हैं। विदेशों से भी हिंदी के अखबार प्रकाशित हो रहे हैं। उदहारण के तौर पर “हमहिन्दुस्तानी”अख़बारकाप्रकाशनअमेरिकासेकिया जा रहा है. विदेशों से हिंदी की पत्रिकाएँ भी प्रकाशित हो रही हैं। कई हिंदी पोर्टलों का संचालन भी विदेशों से किया जा रहा है. जैसे, हिंदी साहित्यिक पोर्टल “सेतु”कासंचालनअमेरिका से किया जा रहा है।

अखबारों ने नई तकनीकों को अपना लिया है, जिससे भी हिंदी का का वितान विस्तृत हो रहा है। अखबारों के प्रिंट वर्जन के साथ-साथ उनके ई-पेपर अब निकाले जाने लगे हैं। ई-पेपर, इंटरनेट पर हमेशा उपलब्ध रहता है। अब लोग ऑनलाइन भी अखबार पढ़ सकते हैं। आजकल तो मोबाइल पर हिंदी अखबारों को लोग पढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं,संपादक के नाम पत्र, लेख आदि भी मोबाइल पर लिखे जा रहे हैं। हालाँकि, इसके बाद भी छपे अखबारों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। कभी एक अखबारका सर्कुलेशन 50 से 100 हुआ करता था, जो आज बढ़कर लगभग 50 लाख के आसपास पहुँच गया है। मीडियाका उदेश्य सिर्फ समाचार प्रसारित करना नहीं है, बल्कि मनोरंजन, विचार-विश्लेषण, साक्षात्कार, घटना-विश्लेषण, विज्ञापन प्रसारित करना आदि भी है, जिसके कारण इसके पाठक व दर्शकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।

 नर्इ मीडिया से हिंदी भाषा को बल

भारत में नई मीडिया का प्रवेश हो चुका है, जो वेब मीडिया के नाम से जाना जाता है। वेबदुनिया, डेली हंट, फर्स्ट पोस्ट, इंडिया वाच, द बेटर इंडिया आदि कुछ प्रमुख वेब मीडिया भारत में सक्रिय हैं। इसके तहत,इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। अधिकांश नई मीडिया के संप्रेषण का माध्यम हिंदी है।   

 तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा

वर्ल्ड लैंगवेज़ डेटाबेस के 22वें संस्करण इथोनोलॉज के अनुसार विश्व में सबसे अधिक अँग्रेजी भाषा बोली जाती है, दूसरे स्थान पर चीन की भाषा मंदारिन है और तीसरे स्थान पर हिंदी भाषा है। लगभग 113 करोड़ लोग अँग्रेजी बोलते हैं, जबकि 62 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं। आज 3 दर्जन से अधिक देशों में हिंदी प्रमुखता से बोली व समझी जाती है। अमेरिका में अँग्रेजी के बाद दूसरी सबसे लोकप्रिय भाषा हिंदी है।

 स्वीकार्यता में आगे है हिंदी

हिंदी का वैश्विक फ़लक तभी विस्तृत हो सकता है, जब यह अपने घर में लोकप्रिय हो, जन-जन की भाषा हो। इस नजरिये से देखें तो हिंदी भारत की सबसे लोकप्रिय भाषा है। भले ही यह अभी तक राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी है, लेकिन जनभाषा तो है ही। देश में यह सबसे अधिक बोली व समझी जाने वाली भाषा है। देश की लगभग 125 करोड़ की आबादी में से 53 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिंदी है, जबकि 13.9 करोड़ या 11 प्रतिशत लोगों की यह दूसरी भाषा है. इस तरह से देश में 55 प्रतिशत कीमातृभाषा या दूसरी भाषा हिंदी है।

तकनीक ने बनाया हिंदी को सशक्त

प्रौद्योगिकी और अंतरजाल यानी इंटरनेट की दुनिया ने भाषा के रूप में हिंदी को नई पहचान दिलाने में मदद की है। इंटरनेट पर मौजूद हजारों-लाखों हिंदी एप्स और वेबसाइटों ने हिंदी की पहुंच को विश्वव्यापी बना दिया है। हिंदी, इंटरनेट और कंप्यूटर के अनुकूल बन गई है। हिंदी, ईमेल, सोशल मीडिया और वेब मीडिया की भाषा बन गई है। इंटरनेट, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। आज उसी भाषा को लोग आत्मसात करते हैं,जो तकनीक के अनुकूल हो साथ ही साथ कारोबार व विज्ञान के विकास में सहायक हो। हिंदी,अब विज्ञान व प्रौद्योगिकी एवं कारोबार के विकास की वाहक बनती जा रही है।

 यूनिकोड ने बढ़ाया हिंदी का दायरा

यूनिकोडकी वजह से हिंदी और भी लचीली बन गई है। लगभग 31 साल पहले अस्तित्व में आई यूनिकोड ने हिंदी को विश्वव्यापी बनाने में महती भूमिका निभाई है। इसकी वजह से कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल पर आसानी से हिंदी लिखी और पढ़ी जा रही है। इसने भारतीय भाषाओं में कंप्यूटिंग को आसान बना दिया है। अब आप एक बार टाइपिंग सीखकर इंटरनेट,विंडोज,मोबाइल, टैबलेट पर एक समान रूप से काम कर सकते हैं।इसकी वजह से कंप्यूटर, इंटरनेट, सोशल एवं वेब मीडिया पर हिंदी का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

विज्ञान और कारोबार की भाषा

हिंदी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी एवं कारोबार के विकास की वाहक बन गई है। अब विज्ञान और कारोबार से जुड़ी किताबों का तेजी से हिंदी में अनुवाद किया जा रहा है।तकनीक और कारोबार से जुड़े विषयों पर हिंदी भाषा में किताबें, अखबार और पत्रिकाएँ बड़ी संख्या में प्रकाशित की जा रही हैं.  हिंदी में बिजनेस अखबार प्रकाशित हो रहे हैं, जिनमें बिजनेस स्टैंडर्ड, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और इकनॉमिकटाइम्स सबसे महत्वपूर्ण है। कई बेव पोर्टलों का संचालन हिंदी में किया जा रहा है। लचीलेपन के कारण हिंदी नियमित तौर पर नये शब्दों को गढ़ रही है। मध्यप्रदेश में हाल ही में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी भाषा में शुरू की गई है, जिसे हिंदी की स्वीकृति के संदर्भ में मील का पत्थर माना जा सकता है।

बाजार से हिंदी को मिली विस्तार

चीन के बाद भारत उपभोक्ता वस्तुओं का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इसलिए,कोई भी देश हिंदी की उपेक्षा नहीं कर पा रहा है, क्योंकि हिंदी नहीं सीखने पर उन्हें सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए, आज कोरिया, जापान,चीन आदि देश हिंदी भाषा पर काम कर रहे हैं। सभी हिंदी भाषा में ऐप और वेबसाइट के माध्यम से अपनी सेवाएं और उत्पादों को विस्तार देना चाहते हैं, ताकि हिंदी के बाजार में उनकी हिस्सेदारी बढ़ सके। अंग्रेजी का बाजार स्थिर हो चुका है। इसलिए, कंपनियां हिंदी में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। देश और विदेश की कंपनियां जनमानस की भाषा में सामग्री उपलब्ध कराकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है,क्योंकि हिंदी सीखकर ही भारत में या भारत से कारोबारी रिश्ते मजबूत बनाये जा सकते हैं।चूँकि,भारत की बहुसंख्यक आबादी हिंदी भाषी है। इसलिये,भारतीय बाजार पर कब्जा करने का रास्ता हिंदी भाषा के रास्ते से होकर गुजरता है। उत्पादों का विज्ञापन हो या प्रचार-प्रसार की भाषा हो, जब तक वह हिंदी में नहीं होगी, किसी उत्पाद को भारत में बेचने में मुश्किल होगी।

भारतीय बाजार का विस्तृत फ़लक होने के कारण देसी,अँग्रेजी व दूसरी विदेशी भाषाओं वाली फिल्मों को हिंदी में डब किया जा रहा है। दक्षिण भारत एवं पंजाबी फिल्मों को भी हिंदी में डब किया जा रहा है।

जब दक्षिण की फिल्मों का हिंदी में डब किया जाता है, तब दक्षिण वाले हिंदी का विरोध नहीं करते हैं, क्योंकि कोई भी आर्थिक नुकसान का सामना नहीं करना चाहता है। दक्षिण वालों की यह दोहरी मानसिकता साबित करती है कि तमिलनाडू के कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए हिंदी का विरोध कर रहे हैं।

 सोशल मीडिया से मिली मजबूती

सोशल मीडिया का आगाज इकीसवीं सदी के पहले दशक के उतरार्ध में हुआ, जिसका संचालन इंटरनेट के माध्यम से किया जाता है। वर्ष 2007 के दौरान ऑर्कुट जैसी सोशल मीडिया बहुत ही लोकप्रिय थी। बाद में फेसबुक आया। मौजूदा समय में इंस्टाग्राम, ट्वीटर, गूगल, व्हाट्सएप आदि लोकप्रिय सोशल मीडिया हैं। सोशल मीडिया के संवाद की सबसे प्रमुख भाषा हिंदी है। इसमें विचारों को प्रकाशित करने के लिये किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती है। आप खुद से अपने विचारों का प्रकाशन कर सकते हैं। यह जनसंचार का एक ऐसा माध्यम है, जिसका प्रसारण रियल टाइम बेसिस पर होता है। सोशल मीडिया की मदद से फोटो, वीडियो, सूचना, दस्तावेज़ आदि को आसानी से किसी के साथ साझा किया जा सकता है। यह मनोरंजन का भी साधन है। चुट्कुले, कविता, गजल, गीत, आदि की पस्तुति फेसबुक,इंस्टाग्रामआदि के माध्यम से की जा सकती है। यूजर ब्लॉग बनाकर भी अपनी भावनाओं का प्रकाशन नियमित तौर पर कर सकता है।

हिंगलिश से समृद्ध होती हिंदी

हिंगलिश की वजह से भी हिंदी की लोकप्रियता बढ़ रही है। हालाँकि, यह दोषपूर्ण भाषा है, लेकिन  इसे हिंदी के विकास में बाधक नहीं माना जा सकता है। इससे हिंदी के प्रचार-प्रसार को बल मिल रहा है। दरअसल,हिंदी के किसी भी रूप को आत्मसात करने का गुण ही हिंदी भाषा के विकास को मुमकिन बना रहा है।

फिल्मों का योगदान

फिल्मों का हिंदी भाषा को वैश्विक स्वीकृति दिलवाने और उसे लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हिंदी में आज सबसे अधिक फिल्में बनाई जा रही हैं, क्योंकि फिल्म मनोरंजन और आंशिक रूप से शिक्षा प्रदान करने का सबसे लोकप्रिय माध्यम है। देसी एवं विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हिंदी में डब करके हिंदी बोलने व समझने वाले दर्शकों को परोसा जा रहा है, जिससे इसकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म के आने से दुनिया के किसी भी कोने में रहकर हिंदी भाषा में बनी फिल्मों व नाटकों को देखा जा सकता है। इनकी वजह से दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों का हिंदी से जुड़ाव पहले से बढ़ा है।

हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय संवाद भी आमजन को हिंदी सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। उदाहरण के तौर पर शोले फिल्म का संवाद कितने आदमी थे संवाद को अहिंदी भाषी को भी बोलते हुए सुना जा सकता है। हिंदी सिनेमा सिर्फ मुंबई या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। इसमें पूरे देश की सभ्यता-संस्कृति की झलक दिखती है। इसकी मदद से लोग सिर्फ भाषा ही नहीं सीख रहे हैं, बल्कि सभ्यता-संस्कृति को भी समझ रहे हैं। हिंदी सिनेमा के 100 से भी अधिक वर्ष हो गए हैं और इन 100 वर्षों में हजारों विषयों पर हिंदी भाषा में फिल्में बनी हैं, जिससे हिंदी समृद्ध हुई है और इसके प्रसार में अकूत इजाफा हुआ है।

प्रवासी भारतीय बढ़ा रहे हैं हिंदी का मान

हिंदी के विकास में प्रवासी भारतीय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि वे जिस भी देश गये,वहाँ उन्होंने हिंदी की आवाज को बुलंद किया। वे विदेशों में भी अपनी सभ्यता-संस्कृति को नहीं भूले। आज वे विदेशों से हिंदी पत्रिका व अखबार प्रकाशित कर रहे हैं। वे नियमित रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। पर्व-त्योहारों में एक-दूसरे से मिलते हैं और उनकी संप्रेषण की भाषा अमूमन हिंदी होती है।

विश्व हिंदी सम्मेलन से मिल रही है हिंदी को पहचान

पहला विश्व हिंदी सम्मेलन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रयासों से नागपुर में वर्ष 1975 में आयोजित किया गया था। मॉरीशसके तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री शिवसागर गुलाम सहित 39 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने उक्त सम्मेलन में शिरकत की थी। दूसरा विश्वहिंदी सम्मेलन वर्ष 1976 में मॉरीशस में आयोजित किया गया। अब तक 11 विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किये जा चुके हैं। 12वां विश्व हिंदी सम्मेलन फरवरी 2023 में फिजी में होना प्रस्तावित है।पहले 4 सालों के अंतराल पर विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया जाता था, जिसे बाद में कम करके 3 साल कर दिया गया।हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने की मुहिम वर्ष 1975 में नागपुर में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में शुरू की गई थी, जिसके कारण जून 2022 में हिंदी, मंदारिन, अरबी, अँग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बन गई है। यह उपलब्धि निश्चित रूप से हिंदीभाषियों और हिंदी के लिए गर्व की बात है।

तीन दर्जन से अधिक देशों में हिंदी

आज मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, गुयाना, केन्या, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, इंडोनेशिया, चेकोस्लोवाकिया, सिंगापुर, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका, मलेशिया, चीन, मंगोलिया, कोरिया, जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया,इंग्लैंड, कनाडा, जर्मनी, सयुंक्त अरब अमीरात आदि देशों में हिंदी बोली व समझी जा रही है। अमेरिका में भी अँग्रेजी के बाद दूसरी सबसे लोकप्रिय भाषाहिंदी है।

हिंदी भाषा के विकास के वाहक हैं भारतीय सभ्यता-संस्कृति

एक लंबे समय से भारतीय सभ्यता-संस्कृति विदेशियों को आकर्षित करती रही है। अध्यात्म, संगीत,सभ्यता-संस्कृति, योग आदि समझने के लिए दूसरे देशों से बड़ी संख्या में लोग भारत हर साल आते हैं। कुछ लोग तो भारत में ही बस जाते हैं। आमतौर पर इनकी संपर्क भाषा हिंदी ही होती है, जिससे हिंदी भाषा का वितान व्यापक होता है।

सरल व सहज

दुनिया में लगभग 60,000 भाषाएँ हैं, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत भाषाओं का अस्तित्व खतरे में है। हर साल कई भाषाएँ विलुप्त हो जाती हैं। ऐसे में हिंदी न सिर्फ जिंदा है, बल्कि रोज विस्तृत  हो रही है। लगभग 1500 साल पुरानी इस भाषा में लगभग डेढ़ लाख शब्दावलियाँ हैं और रोज कई नये शब्द इससे जुड़ रहे हैं। सच कहा जाये तो अपनी सहजता व सरलता की वजह से ही यह जीवंत है और निरंतर आगे बढ़ रही है।

रोजगार की भाषा

वे दिन अब गये, जब कहा जाता था कि हिंदी की समझ रखने वालों को रोजगार से महरूम रहना पड़ेगा। आज हिंदी, बाजार,संप्रेषण,अनुवाद,तकनीक, लेखन आदि की भाषा बन चुकी है। इसमें अंतर्निहित लचीलापन इसे रोजगारपरक बना दिया है। यह कई देशों में बोली व समझी जाती है। विश्व की हजारों प्रसिद्ध कृतियों का हिंदी में अनुवाद किया जा चुका है। विश्व के 100 से अधिक देशों के शिक्षण संस्थानों में हिंदी को पढ़ा व पढ़ाया जा रहा है। इसतरह, गाइड, अनुवादक, मीडिया, शिक्षण, लेखन आदि क्षेत्रों में हिंदी जानने वालों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। हिंदी में कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कई टीवी एंकरों को आज करोड़ों रुपए का वेतन सालाना मिल रहा है। इसतरह,हिंदी के रोजगारपरक बनने से हिंदी के प्रचार-प्रसार में तेजी आ रही है।

लचीली होने से बढ़ रहा है हिंदी का वितान

मौजूदा समय में हिंदी का कंप्यूटरीकरण अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में सबसे तेज गति से  हो रहा है। हिंदी की बहुत सारी सामग्रियाँ ऑनलाइन एवं ऑफलाइन उपलब्ध हैं। हिंदी में सबसे अधिक फिल्में बनाई जा रही हैं, क्योंकि फिल्म मनोरंजन और आंशिक रूप से शिक्षा का अत्यंत लोकप्रिय माध्यम है। देसी एवं विदेशी भाषाओं की फिल्मों को हिंदी में डब करके हिंदी बोलने व समझने वाले दर्शकों को परोसा जा रहा है। नई−नई तकनीक, तरीके व विधा अपनाने की योग्यता होने की वजह से अंतर्राष्टीय स्तर पर हिंदी का तेजी से विकास हो रहा है।

नई प्रौद्योगिकी ने हिंदी भाषा के स्वरूप में सकारात्मक बदलाव किया है, जिससे इसकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है।

निष्कर्ष

वैश्विक भाषा बनने की पहली शर्त होती है कि अधिक से अधिक लोग उस भाषा में संवाद करें, उसमें दूसरी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की क्षमता हो, उसका साहित्य समृद्ध हो आदि। देखा जाये तो इन सभी कसौटियों पर हिंदी खरी उतरती है। गूगल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी में सामग्री पढ़ने वाले हर वर्ष 94 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि अंग्रेजी में सामग्री पढ़ने वालों की संख्या 17 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है।

 

अखिलेश यादव भाजपा सांसद सुब्रत पाठक पर साधा निशाना कहा- खैनी और पान खाकर संसद जाना बंद करें

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्नौज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सुब्रत पाठक पर हमला करते हुए कहा कि, खैनी और पान खाकर लोकतंत्र के मंदिर में प्रवेश करने वाले शख्स से क्षेत्रीय जनता विकास की उम्मीद नहीं कर सकती है।

डिंपल यादव की मैनपुरी संसदीय सीट के उपचुनाव में भारी जीत के बाद इटावा सफारी पार्क के भ्रमण पर पहुंचे यादव ने पत्रकारों से बातचीत कर कहा कि, “जो शख्स सदन में पान और खैनी खा करके भाग लेने जाता है उससे विकास की उम्मीद क्या की जा सकती हैं।“

उन्होंने आगे कहा कि, मैनपुरी की जनता ने अपना बहुमुल्य वोट देकर नेता जी (मुलायम सिंह) को सच्ची श्रद्धांजलि दी हैं। मैनपुरी में हर वर्ग के लोगों का सहयोग और समर्थन प्राप्त हुआ।

वहीं भाजपा प्रत्याशी रघुराज शाक्य के उपचुनाव में धनबल के आरोप पर अखिलेश ने कहा कि, आप लोग भी इटावा के हैं मुझसे बेहतर जानते होंगे कि यहां के कामकाज में पैसा कौन कमा रहा है। उदी मोड़ से जो ट्रक आ रहे होंगे उन पर वसूली कौन कर रहा होगा। कुछ दिन पहले बड़े पैमाने पर ट्रक पकड़े गए थे जिसके बाद भाजपा के लोग अब ऊंट से चंबल नहीं से बालू का खनन करा रहे हैं।“

सीएम पद उम्मीदवार के नाम की घोषणा से पहले प्रतिभा सिंह के समर्थकों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले को रोका

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी अब मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेगी किंतु यह पार्टी के लिए एक नयी चुनौती साबित हो रही हैं। राज्य का सीएम किसे बनाया जाए इसे लेकर शुक्रवार को पार्टी ने एक बैठक भी बुलार्इ।

बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ हिमाचल कांग्रेस के भी शीर्ष नेताओं ने शिरकत की और सूत्रों के हवाले से यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि सीएम पद की दौड़ में प्रतिभा सिंह को प्रमुख दावेदार माना जा रहा हैं।

बता दें प्रतिभा सिंह हिमाचल कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष भी हैं और इनके समर्थक व पार्टी के कार्यकर्ता भी यही चाहते है कि कांग्रेस हाईकमान प्रतिभा सिंह को ही राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाए।

प्रतिभा सिंह के समर्थकों ने शुक्रवार बैठक में जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के काफिले का भी घेराव किया और मांग की कि भूपेश बघेल कांग्रेस हार्इकमान को प्रतिभा सिंह के नाम पर राजी करें।

हिमाचल में कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह राज्य के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी है और यह चुनाव उन्होंने अपने पति के नाम पर लड़ा और जीता गया है। वहीं प्रतिभा सिंह का कहना है कि, मैं मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व कर सकती हूं, क्योंकि सोनिया जी और आलाकमान ने मुझे चुनाव से पहले का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि, जब चुनाव वीरभद्र सिंह के नाम पर लड़ा और जीता गया तो वीरभद्र सिंह के परिवार को दरकिनार करना सही नहीं होगा। हमने 40 सीटें केवल इसलिए जीती क्योंकि लोगों का वीरभद्र सिंह के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव हैं।

आपको बता दें, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40 सीटें, भाजपा को 25 सीटें, आप को 0 और अन्य को तीन सीटें मिली है।