नई दिल्ली: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट को ‘वॉटर पॉजिटिव’ का दर्जा मिला है, जिसका मतलब है कि यहां पानी का उपयोग जितना होता है, उससे ज्यादा पानी को बचाकर या रिचार्ज करके वापस पर्यावरण को दिया जाता है। यह मान्यता अंतरराष्ट्रीय संस्था ब्यूरो वेरिटास ने जांच के बाद दी है।
एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच एयरपोर्ट ने करीब 1,03,000 किलोलीटर पानी का इस्तेमाल किया, जबकि 1,37,000 किलोलीटर से ज्यादा पानी को रिचार्ज और रीसायकल किया गया। यानी साफ तौर पर देखा जाए तो जितना पानी लिया गया, उससे ज्यादा वापस प्रकृति को लौटा दिया गया।
इस उपलब्धि के पीछे कई स्मार्ट कदम उठाए गए हैं। एयरपोर्ट पर 18 बड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जो बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने का काम करते हैं। इसके अलावा यहां इस्तेमाल होने वाले 100 प्रतिशत गंदे पानी को साफ करके दोबारा बागवानी और दूसरे कामों में उपयोग किया जा रहा है।
पानी बचाने के लिए टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया गया है। एयरपोर्ट पर सेंसर वाले नल लगाए गए हैं, जिससे पानी बेवजह नहीं बहता। वहीं, ऐसे आधुनिक यूरिनल भी लगाए गए हैं जिनमें पानी की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही डिजिटल मीटर से हर समय पानी की खपत पर नजर रखी जा रही है।
एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि यह उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए एक मॉडल है। अगर इसी तरह देश के बाकी बड़े संस्थान भी पानी बचाने के लिए काम करें, तो जल संकट से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
जयपुर एयरपोर्ट की यह पहल यह दिखाती है कि अगर सही प्लानिंग और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो विकास और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।




