ईरान पर सख्त रुख: परमाणु हथियार रोकना ही अमेरिका की पहली प्राथमिकता

अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयान ने इस मुद्दे पर अमेरिकी रुख को और भी स्पष्ट कर दिया है।

परमाणु हथियार रोकना ही अमेरिका की पहली प्राथमिकता... - अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो | Image Source: Shutterstock
परमाणु हथियार रोकना ही अमेरिका की पहली प्राथमिकता... - अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो | Image Source: Shutterstock

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है ईरान का नया प्रस्ताव और उस पर अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अभी भी अमेरिका के लिए सबसे अहम मुद्दा है।

रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि अगर ईरान में मौजूदा शासन बना रहता है, तो वह भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की कोशिश जरूर करेगा। उन्होंने यह भी जताया कि अमेरिका इस खतरे को हल्के में नहीं ले सकता। उनके मुताबिक, कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जो ईरान को परमाणु हथियार के करीब भी न पहुंचने दे।

दरअसल, ईरान ने हाल ही में एक प्रस्ताव दिया है जिसमें उसने कहा है कि अगर अमेरिका उस पर लगी पाबंदियां हटा दे और मौजूदा टकराव खत्म हो जाए, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार है। हालांकि, इस प्रस्ताव में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा टालने की बात भी कही है, जो अमेरिका को मंजूर नहीं है।

रुबियो का कहना है कि ईरान बातचीत में माहिर है और अक्सर समय निकालने के लिए ऐसे प्रस्ताव देता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस रणनीति को समझता है और अब ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगा। उनके मुताबिक, सिर्फ बातचीत के नाम पर समय बर्बाद करना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है। जहां ईरान अपने हितों को सुरक्षित रखना चाहता है, वहीं अमेरिका उसे किसी भी हालत में परमाणु ताकत बनने से रोकना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर और तनाव बढ़ सकता है। अगर दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ दो देशों के बीच का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।