नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट इन दिनों सुर्खियों में है। यहां तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान और चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। खान ने साफ तौर पर कहा कि अगर अधिकारी खुद को ‘सिंघम’ समझते हैं, तो वह ‘पुष्पा’ हैं और किसी भी दबाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दरअसल, चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि इलाके में मतदाताओं को डराने-धमकाने और उनके वोटर आईडी जमा कराने की कोशिश हो रही है। इसी के बाद पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा फाल्टा पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी हालत में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हालांकि, इस दौरे के बाद सियासत गरमा गई। तृणमूल समर्थकों ने आरोप लगाया कि पुलिस और बाहरी अधिकारी उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं। फाल्टा में प्रदर्शन भी हुआ और ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाए गए। जहांगीर खान ने कहा कि यह लोकतंत्र है और यहां किसी तरह की धमकी नहीं चलेगी।
वहीं तृणमूल के कई बड़े नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पर्यवेक्षक अपनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहे हैं और इससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और अरूप बिस्वास ने भी इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
इस बीच तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने अधिकारी पर व्यंग्य किया। इससे साफ है कि यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है।
चुनाव आयोग की ओर से तैनात 95 पर्यवेक्षकों में शामिल अजय पाल शर्मा का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ निष्पक्ष चुनाव कराना है। अब देखना होगा कि इस टकराव के बीच फाल्टा सीट पर मतदान किस माहौल में होता है।




