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ममता बनर्जी के घुटने की हुई सर्जरी, व्हीलचेयर पर घर लौटीं

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) चीफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घुटने की बृहस्पतिवार को मामूली सर्जरी हुई है। पिछले हफ्ते हेलीकॉप्टर से उतरते समय उनके घुटने में चोट आई थी।

ममता बनर्जी की सर्जरी कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में हुई है। इस दौरान उनसे मिलने कई नेता पहुंचे। उनका इलाज डॉ राजेश प्रमाणिक की देखरेख किया गया है।

डॉक्टर ने बताया कि, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष का राज्य के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में ‘आर्थोपेडिक इंटरवेंशन’ किया गया है। सर्जरी के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है और वे व्हीलचेयर पर घर लौटीं हैं।

बता दें, 27 जून को खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर को सिलीगुड़ी के पास सेवोके एयरबेस में आपात लैंडिंग कराई गई थी। इस दौरान उनके बाएं घुटने के लिगामेंट में चोट आई थी और बांए कूल्हे के जोड़ में भी चोट आई थी।

शिंदे गुट में नाराजगी के बीच उनसे मिले फडणवीस, पवार भी आरपार के मूड में

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन का मामला दिलचस्प हो गया है। जहाँ शरद पवार ने भतीजे के खिलाफ पूरी तरह कमर कस ली है, वहीं अजित पवार गुट के 9 मंत्री बनाये जाने से शिंदे और उनकी शिवसेना नाराज हो गयी है। शिंदे पर उनके साथी विधायक मंत्री पद को लेकर दबाव बना रहे हैं। इसी के चलते उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शिंदे से मिले हैं।

शरद पवार ने गुरूवार को जिस तरह पार्टी संगठन कर 27 राज्य यूनिटों के समर्थन का दावा किया है उससे अजित गुट को झटका लगा है। यही नहीं एनसीपी के पांच में से चार सांसद शरद पवार के साथ हैं। अजित पवार ने पहले 40 विधायकों का दावा किया था, लेकिन अभी तक वे 36 के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसा लगता है कि शरद पवार ने ठान लिया है कि अजित पवार को जीतने नहीं देंगे।

उधर इस सारी कवायद के बीच शिव सेना के शिंदे गुट में ही झगड़ा बढ़ गया है। इसी के चलते उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने गुरूवार देर रात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की।

अजित पवार खेमे से नौ विधायकों को मंत्री बनाने से शिंदे गुट में बेचैनी है। शिंदे गुट के ज्यादातर विधायकों को दलबदल किए एक साल बाद भी कुर्सी नहीं मिली है जिससे उनमें गुस्सा है। अभी 14 पद मंत्री के लिए खाली हैं।

माना जा रहा है कि अगले हफ्ते वहां मंत्रिमंडल में फिर विस्तार हो सकता है। इसमें शिवसेना को तरजीह मिल सकती है। इसे विरोध और बढ़ सकता है। उधर शिंदे के नेतृत्व वाले समूह से संबंधित महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि शिंदे के इस्तीफे के बारे में खबरें झूठी हैं।

राजस्थान कांग्रेस बैठक: पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी मैं उसे निभाऊंगा- सचिन पायलेट 

दिल्ली में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में राजस्थान कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की। यह बैठक करीब चार घंटे चली। इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए गुरुवार को अहम फैसला किया कि कांग्रेस पार्टी राजस्थान में बीजेपी के भ्रष्ट्राचार के खिलाफ मिलकर चुनाव लडेगी।

सुखजिंदर सिंह रंधावा, केसी वेणुगोपाल (संगठन महासचिव) और गोविन्द सिंह डोटासरा (राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष)

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि, “कांग्रेस वर्ष 2018 से ज्यादा बहुमत से एक बार फिर राजस्थान में सरकार बनाएगी और जनता के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करती रहेगी। आज सभी नेताओं ने मिलकर एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उम्मीदवारों की सूची जल्द ही घोषित की जाएगी।”

आज की बैठक में सबकी नजरें सचिन पायलट पर थी क्योंकि वे कुछ समय से पार्टी से नाराज़ थे। सचिन पायलट ने जिन माँगों को लेकर अनशन और यात्रा की थी उन सभी माँगों को पार्टी ने मान लिया है। इनमें राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन (आरपीएससी) में रिफॉर्म होंगे, पेपल लीक को लेकर कानून बनाया जाएगा और वसुंधरा राजे के भ्रष्टाचार की जाँच भी होगी।

बैठक के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट ने कहा कि, “आज हमारी बैठक करीब 4 घंटे तक चली। हम विधनसभा चुनाव लड़ेंगे। एंटी इनकंबेंसी को तोड़ने पर चर्चा हुई। चुनाव में हम बीजेपी को हराएंगे और पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देरी मैं उसे निभाऊंगा।”

सूत्रों के अनुसार राजस्थान कांग्रेस बैठक में राहुल गांधी ने सरकार के कामों की तारीफ की साथ ही कहा कि हमारी सरकार को पार्टी के कार्यकर्ताओं का सम्मान करना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी के भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें लड़ाई लड़नी है। वहीं इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रदेश में SC/ST के अत्याचार के खिलाफ सरकार कारवाई करें।

बता दें, राजस्थान विधनसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस मुख्यालय में हुई इस बैठक में मलिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सचिन पायलट, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अशोक गहलोत और कई नेता मौजूद रहे।

आपको बता दें, राजस्थान कांग्रेस में काफी समय से अंदरूनी कलह चली आ रही थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच मतभेद देखने को मिले है। साथ ही पिछले महीने सचिन पायलट ने पदयात्रा निकाली थी जिससे पार्टी में कलह भी रही। किंतु काफी समय से कांग्रेस लगातार सचिन पायलट को मनाने में लगी थी।

ईरान के एससीओ से जुड़ने से चाबहार में निजी निवेश बढ़ेगा, विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में ईरान को सदस्यता मिलने के बाद चाबहार बंदरगाह में निजी निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। याद रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वर्चुअल शिखर सम्मेलन में चाबहार बंदरगाह और आईएनएसटीसी की पूर्ण क्षमता को साकार करने का आह्वान किया था।

याद रहे इस बैठक में तेहरान एससीओ समूह का नौवां सदस्य बन गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि ईरान की सदस्यता से चाबहार बंदरगाह में और अधिक प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि साथ ही इससे इसमें निजी निवेश बढ़ाने और इसे पूर्ण सक्रियता की ओर ले जाने की संभावना बढ़ेगी।

विशेषज्ञों ने यह राय ‘एससीओ शिखर सम्मेलन के परिणाम: मॉस्को और दिल्ली से एक दृश्य’ शीर्षक से स्पुतनिक न्यूज़ की तरफ से आयोजित एक वीडियो ब्रिज में व्यक्त की। इस कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. अश्वनी महाजन, जेएनयू में स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज में पूर्व डीन अनुराधा चेनॉय, मिलिटरी एक्सपर्ट और डिपार्टमेंट आफ यूरेशियन इंटेग्रेशन एंड डेवलपमेंट आफ द एससीओ ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ सीआईएस के हेड व्लादिमीर एवसेव और नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी हाईर स्कूल आफ इकोनॉमिक्स एंड एमजीआईएमओ ऑफ द मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ रशिया सर्गेई लुजियनिन ने हिस्सा लिया।

पूर्व डीन अनुराधा चेनॉय ने स्पुतनिक के एक सवाल के जवाब में कहा कि चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) दोनों को आर्थिक रूप से विकसित करने की बहुत ज्यादा संभावनाएं संभावनाएं हैं। चेनॉय ने कहा – ‘आईएनएसटीसी न केवल भारत और रूस को जोड़ता है, बल्कि मध्य एशिया के बाजारों को भी जोड़ता है। ईरान की सदस्यता के साथ चाबहार बंदरगाह में अधिक निजी निवेश आना चाहिए।’  

चेनॉय ने सुझाव दिया कि चाबहार में निजी निवेश की कमी का एक संभावित उपाय मॉस्को के अरबों भारतीय रुपये का उपयोग हो सकता है जो पिछले सालों से रूसी बैंक खातों में बिना इस्तेमाल के पड़े हैं। अनुभवी भारतीय शिक्षाविद ने चाबहार के साथ-साथ आईएनएसटीसी में निवेश में तेजी लाने के साधन के रूप में मुद्रा स्वैप लेनदेन के उपयोग का भी प्रस्ताव रखा।

उधर स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने भी भरोसा जताया कि ईरान की एससीओ सदस्यता चाबहार के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा – ‘हम एससीओ में व्यापार बस्तियों में घरेलू मुद्राओं के उपयोग का स्वागत करेंगे।’ कार्यक्रम में पूर्व भारतीय राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि ईरान जमीन से घिरे मध्य एशिया में कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण है और एक ऊर्जा-समृद्ध देश भी है। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘भारत ने पहले ही चाबहार बंदरगाह पर शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल की क्षमता 2.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 8.5 मिलियन टन कर दी है।’

बता दें रूस समर्थित आईएनएसटीसी के लिए चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया और ईरान के माध्यम से रूस को भारत से जोड़ने वाला 7,200 किलोमीटर का मल्टीमॉडल गलियारा है। इसे विकसित करने का प्रस्ताव पहली बार 2000 में रूस, भारत और ईरान ने लाया था। पिछले साल जुलाई में भारत के लिए माल ले जाने वाली पहली ट्रेन आईएनएसटीसी के माध्यम से ईरान पहुंची थी। भारत जाने वाले माल को बंदर अब्बास बंदरगाह के माध्यम से ईरान से भारत ले जाया गया था। एक और मालगाड़ी पिछले सितंबर में आईएनएसटीसी मार्ग के माध्यम से ईरान पहुंची थी।

मई में, मास्को ने अजरबैजान और इसे जोड़ने वाले राश्त-अस्तारा रेलमार्ग को विकसित करने के लिए 1.74 बिलियन डॉलर का निवेश किया था। ईरान रेलवे मार्ग को आईएनएसटीसी के भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। एससीओ विभाग के प्रमुख व्लादिमीर एवसेव ने कहा कि ‘कई दशक पहले पहली बार घोषित किए जाने के बाद से गलियारे का महत्व कई गुना बढ़ गया है’।

उन्होंने कहा – ‘गलियारे की उपयोगिता को ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि पिछले साल भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार के अधिकांश हिस्से में समुद्री मार्ग के माध्यम से भारत में रूसी कच्चे तेल का परिवहन शामिल था। हालांकि, व्यापार गलियारा और अधिक प्रासंगिक हो जाएगा यदि आईएनएसटीसी के मार्ग पर भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों के बीच संभावित व्यापार को भी इसमें शामिल किया जाए। क्षेत्रीय एकीकरण प्रक्रिया को गहरा करने के लिए चाबहार बंदरगाह को पूरी तरह से विकसित किया जाना चाहिए’। 

ओएमएसएस के तहत चार राज्यों ने केंद्र से अनाज देने की मांग की

केंद्र से खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत आरक्षित भंडार से खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कर्नाटक, झारखंड, राजस्थान और तमिलनाडु ने मांग की हैं।

कर्नाटक के खाद्य मंत्री के एच मुनियप्पा ने बुधवार को यह जानकारी दी है। ये सभी विपक्षी दलों के राज्य हैं। इन चारों राज्यों ने यह मांग राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित राज्यों के खाद्य मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में की है।

मुनियप्पा ने संवाददाताओं से कहा कि, “राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत पात्रता के अलावा पांच किलोग्राम अतिरिक्त चावल उपलब्ध कराने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए ओएमएसएस के तहत चावल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।“

उन्होंने आगे कहा कि, “यह मांग न केवल कर्नाटक सरकार बल्कि तमिलनाडु, राजस्थान और झारखंड की सरकारों ने भी उठाए हैं।“

आपको बता दें, केंद्र ने मुद्रास्फीति के दबाव और मानसून को लेकर पैदा हुर्इ चिंताओं के बीच 13 जून को ओएमएसएस के तहत राज्य सरकारों को सुरक्षित भंडार से चावल और गेहूं की बिक्री कर दी थी।

कैरेबियाई दौरे के लिए टी-20 टीम में युवा खिलाड़ी शामिल, पंड्या कप्तान

बीसीसीआई की सीनियर चयन समिति ने वेस्ट इंडीज दौरे के लिए 30 साल से कम आयु की टी-20 की टीम का चयन किया है। इसमें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को ‘आराम’ दिया गया है। ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को टीम की बागडोर सौंपी गयी है जबकि बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव उनके डिप्टी होंगे।

अजित अगरकर के चयन समिति का अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली टीम है जिसका चयन किया गया है। इसमें प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाजों यशस्वी जयसवाल और तिलक वर्मा भी पहली बार भारतीय टी20 टीम में जगह दी गयी है।

चयन समिति ने बुधवार शाम जिस टीम की घोषणा की वह वेस्टइंडीज के खिलाफ कैरेबियाई द्वीप और फ्लोरिडा, अमेरिका में खेली जाने वाली आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज में हिस्सा लेगी।

टीम : हार्दिक पंड्या (कप्तान), सूर्य कुमार यादव (उप कप्तान), ईशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शुभमन गिल, यशस्वी जयसवाल, तिलक वर्मा, अक्षर पटेल, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, उमरान मलिक, अवेश खान, मुकेश कुमार।

डेटा प्रोटेक्शन बिल को मिली कैबिनेट की मंजूरी, संसद के मॉनसून सत्र में किया जाएगा पेश

डिजीटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल को बुधवार (यानी आज) कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस बिल को संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर चिंता व्यक्त की थी। और इस दौरान अप्रैल 2023 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि एक नया डेटा संरक्षण विधेयक तैयार है और इसे जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा था कि सरकार डेटा प्रोटेक्शन बिल और दूरसंचार बिल संसद के मॉनसून सत्र में पारित कर सकती है।

बता दें, सख्त कानून न होने के कारण डेटा कलेक्ट करने वाली कंपनियां इसका भरपूर फायदा उठाती हैं। और बैंक, क्रेडिट कार्ड और इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारियां के आए दिनों लीक होने की खबरें भी सामने आती है। ऐसे में लोग अपने डेटा की प्राइवेसी को लेकर डरे हुए है।

डेटा प्रोटेक्शन बिल ?

कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्राप्त डेटा प्रोटेक्शन बिल के मुताबिक कानून पालन कराने के लिए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना की जाने की सिफारिश की गर्इ है। यहां यूजर्स की शिकायत सुनी व हल की जाएंगी।

साथ ही इस बिल में प्राइवेसी का हनन करने वाली कंपनियों के लिए कड़े प्रावधान किए गए है। और यदि बिल में उल्लेखित नियमों का उल्लंघन किया गया तो कंपनियों पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अजित खोटा सिक्का निकला, उसने गलती की, सजा भुगतने को तैयार रहें: शरद पवार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कहा कि अजित ने गलती की, सजा भुगतने को तैयार रहें। वाईबी चव्हाण सेंटर में समर्थकों के साथ बैठक में शरद पवार ने कहा कि  जो शिवसेना के साथ हुआ, वही एनसीपी के साथ हुआ है। अजित पवार के मन में कुछ था तो मुझसे बात करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा – ‘सहमति नहीं हो तो बातचीत से हल निकालना चाहिए। अजित की बात सुनकर अफसोस हुआ। गलती सुधारना हमारा काम है। आपने गलती की है तो सजा भुगतने तैयार रहें।’

उन्होंने कहा कि आज की बैठक ऐतिहासिक है। ‘देश का ध्यान इस पर है। अजित की भूमिका देश हित में नहीं है। मैं सत्ता पक्ष में नहीं हूं। मैं जनता के पक्ष में हूं। प्रधानमंत्री जब बारामती आए थे उन्होंने कहा था कि देश कैसे चलाना चाहिए यह मैंने पवार साहब की ऊंगली पकड़कर सीखा है’।

शरद पवार ने कहा – ‘जो मुझे छोड़कर गए हैं उन्हें विधानसभा में लाने के लिए बहुत मेहनत की है। कार्यकर्ताओं ने इनके लिए मेहनत की। उनके लिए अफसोस है। जो विचारधारा पार्टी की नहीं है उसके साथ जाना ठीक नहीं है। जिन विधायकों ने अलग होने का फैसला किया, उन्होंने हमें विश्वास में नहीं लिया। अजित पवार गुट ने किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।’

वरिष्ठ नेता ने कहा कि ‘पार्टी का चुनाव चिह्न हमारे पास है, वह कहीं नहीं जाएगा। हमें सत्ता में लाने वाले लोग और पार्टी कार्यकर्ता हमारे साथ हैं। हम पार्टी का सिंबल किसी को नहीं लेने देंगे। अजित पवार खोटा सिक्का निकला।’ कहा कि वे लोग मेरे फोटो का इस्तेमाल क्यों कह रहे हैं। वो मुझे देवता भी कहते हैं और मेरी बात भी नहीं मानते। जो लोग भाजपा के साथ गए हैं उनका इतिहास याद करो।

भतीजे अजित का शरद पवार पर उम्र और सेवानिवृत्ति को लेकर बड़ा हमला

राष्ट्रवादी पार्टी से अलग होकर भाजपा-शिंदे के साथ सरकार में शामिल हुए नेता और उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने आज मुंबई में अपने गुट के सम्मलेन में अपने भाषण में जैसी भाषा शरद पवार की उम्र और उनकी रिटायरमेंट को लेकर की है, उसे साफ़ हो गया है कि दोनों का ‘पुनर्मिलन’ अब संभव नहीं है। उधर सुप्रिया सुले ने इसे लेकर कहा कि हमारा अपमान करें, लेकिन हमारे पिता शरद पवार का नहीं।

किस के साथ कितने विधायक हैं, यह तस्वीर अभी साफ़ नहीं हुई है। अजित गुट ने 29 विधायकों की सम्मलेन में उपस्थिति का दावा किया और यह भी कहा कि बाकी विधायक बाहर हैं, लेकिन उनके साथ हैं। उधर शरद पवार के साथ 14 विधायक होने की बात कही गयी है। लिहाजा बाकी विधायक वास्तव में हैं कहाँ, यह भी एक रहस्य बन गया है।

खैर, आज अजित पवार की शरद पवार को लेकर भाषा से यह साफ़ हो गया है कि एनसीपी के इस बटबारे के पीछे शरद पवार का कोई रोल नहीं है। अजित अपनी राजनीतिक जरूरतों के कारण ही बाहर गए हैं। अजित ने अपने भाषण में कहा – ‘2024 के चुनाव में मोदी ही सत्ता में आएंगे।’

उधर एनसीपी की अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने इसके जवाब में पीएम मोदी को निशाने पर लिया और कहा – ‘उन्होंने (पीएम) हमारी पार्टी को भ्रष्टाचारी कहा। कहा कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा, लेकिन जब जरूरत पड़ी तो पार्टी को ही खा गए। आप (अजित पवार) हमारा अपमान करें, लेकिन हमारे पिता शरद पवार का नहीं। यह लड़ाई भाजपा सरकार के खिलाफ है। भाजपा देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी है। सुले ने कहा कि मूल राकांपा शरद पवार के साथ है और मूल प्रतीक हम हैं।’

उधर अजित पवार ने नाम न लेकर शरद पवार और उनकी उम्र पर हमला करते हुए कहा – ‘नौकरीपेशा लोग 58 साल में रिटायर हो जाते हैं। आईपीएस-आईएएस 60 साल में रिटायर होते हैं। नेता 75 की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। आडवाणी-मुरली मनोहर जोशी भी रिटायर हुए थे। आपकी (शरद पवार) उम्र ज्यादा हो गई है। आप रिटायर होंगे या नहीं? आप कभी रुकेंगे या नहीं?’

इसके बाद अजित पवार ने सुप्रिया सुले पर भी हमला किया। उन्होंने कहा – ‘साहेब (शरद पवार) बोले कि सुप्रिया को अध्यक्ष बनाओ। हम तैयार हो गए। फिर उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। आपको जब इस्तीफा वापस ही लेना था तो दिया ही क्यों? मैं झूठ नहीं बोलता। झूठ बोला तो पवार की औलाद नहीं कहलाऊंगा। मुझे लगता है कि हमारे वरिष्ठों को आराम करना चाहिए। जिद नहीं करनी चाहिए।’

अजित ने कहा – ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक मोदी का प्रभाव है। ऐसे में हम उनका साथ क्यों न दें। हम उनके पीछे क्यों न खड़े रहें।’ शरद पवार के करीबी रहे और अब अजित पवार के साथ प्रफुल्ल पटेल ने कहा – ‘जब हम शिवसेना की विचारधारा को स्वीकार कर सकते हैं तो फिर भाजपा के साथ जाने में क्या आपत्ति है? हम एक स्वतंत्र इकाई के रूप में इस गठबंधन में शामिल हुए हैं।’

अजित अगरकर सीनियर क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किये गए

यह दिलचस्प ही है कि देश में बीसीसीआई की टीम की बागडोर जहां पूर्व भारतीय ऑल राउंडर रोज़र बिन्नी के हाथ में है, वहीं अब सीनियर टीम के मुख्य चयनकर्ता भी एक ऑल राउंडर अजित अगरकर बन गए हैं। अजित अगरकर 2007 में पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा थे। उन्हें चेतन शर्मा की जगह यह पद मिला है जो इस साल के शुरू में एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आने किए बाद बाहर हो गए थे।

अगरकर को पिछली रात बीसीसीआई की कमेटी ने चयनकर्ताओं की टीम के नए चेयरमैन के रूप में चुना। उन्होंने हाल में दिल्ली कैपिटल्स की आईपीएल टीम के साथ असिस्टेंट कोच के रूप में अपना करार ख़त्म कर दिया था जिसके बाद उनके मुख्य चयनकर्ता बनने की चर्चा तेज हो गयी थी।

यह माना जाता है कि वे बीसीसीआई के सचिव जय शाह की पसंद हैं। इधर उनके चयन को लेकर बोर्ड ने बताया – ‘अगरकर को टेस्ट मैचों में सीनियरिटी के आधार पर चीफ सिलेक्टर बनाया गया है’। बीसीसीआई ने अगरकर के चयन का रास्ता साफ़ करने के लिए इस पद की आयु सीमा को भी 60 साल से काम करके 45 साल कर दिया था।

अगरकर भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेले हैं और अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने  विकेट लिए हैं। उन्होंने टेस्ट में 58, वनडे में 288 और टी-20 इंटरनेशनल में 3 विकेट लिए हैं। अजित अगरकर 2007 में पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा थे।

बता दें अगरकर वनडे में सबसे तेज अर्धशतक जमाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं। उन्होंने 2000 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 21 बॉल पर अर्धशतक जमाया था। यही नहीं वे सबसे तेज 50 विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज भी हैं। उन्होंने 23 मुकाबले में यह कारनामा किया था।