केजरीवाल पर बरसीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज बोलीं, न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश…

दिल्ली हाईकोर्ट के अहम फैसले के बाद सियासत गरमा गई है। आम आदमी पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal की याचिका खारिज होने के बाद भाजपा सांसद Bansuri Swaraj ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल और उनकी पार्टी पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

केजरीवाल पर बरसीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज... | Photo Credit: Naveen Bansal
केजरीवाल पर बरसीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज... | Photo Credit: Naveen Bansal

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें शराब नीति मामले की सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आम आदमी पार्टी और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अदालत ने साफ कर दिया है कि भारत की न्याय प्रणाली किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती।

बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि केजरीवाल और उनकी पार्टी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह पूरी रणनीति जांच एजेंसियों और अदालतों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूत करने वाला है और यह संदेश देता है कि अदालतें केवल संविधान और कानून के अनुसार ही निर्णय लेती हैं।

आम आदमी पार्टी “ड्रामा कंपनी” की तरह व्यवहार कर रही है… बोलीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज। | (Photo Credit: Naveen Bansal)

भाजपा सांसद ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी “ड्रामा कंपनी” की तरह व्यवहार कर रही है और केजरीवाल उसके निर्देशक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के जरिए एक सुनियोजित अभियान चलाकर न्यायपालिका के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई।

बांसुरी स्वराज ने जोर देकर कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था किसी भी व्यक्ति या दल की सुविधा से नहीं, बल्कि स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं और संविधान के तहत संचालित होती है, और इसे प्रभावित करने की कोई भी कोशिश असफल रहेगी।

गौरतलब है कि केजरीवाल व अन्य ने सीबीआई की उस याचिका की सुनवाई जस्टिस शर्मा द्वारा किए जाने पर कई आपत्तियां उठाई थीं, जिसमें आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा था कि न्यायमूर्ति शर्मा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से पहले इनकार कर चुकी हैं और उन्होंने मनीष सिसोदिया एवं के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी उन्हें राहत नहीं दी थी।