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हिमाचल प्रदेश: रोहतांग के समीप स्कार्पियो खाई में गिरी, 11 लोगों की मौत

मनाली- लेह मार्ग पर रोहतांग के समीप राहनीनाला में एक स्कार्पियो खाई में गिर गई, जिसमें सवार 11 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है यह वाहन रात को मनाली से पांगी की तरफ निकला था और देर रात को 40 किलोमीटर दूर राहनीनाला के पास खराब मौसम के चलते गहरी खाई में गिर गया। जिसका पता गुरुवार को चला।

वाहन में सवार लोग पांगी के रहने वाले थे। सूचना मिलते ही मनाली पुलिस और रेस्क्यू दल मौके के लिए रवाना हो गए और घटनास्थल पर पहुंचने के बाद शवों को खाई से निकालने का काम शुरू कर दिया है। मृतकों में 3 बच्चे, 5 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल है।

डीएसपी मनाली शेर सिंह ने बताया कि पुलिस दल मौके पर शवों को निकालने के काम में जुट गया है और पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में भी जुट गई है। उन्होंने बताया कि मृ्तक के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।

हांगकांग को 26-0 से रौंद कर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने रचा नया इतिहास

हांगकांग को 26-0 से रौंद कर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बुधवार को एशियाई खेल 2018 में अपने इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

इससे पहले भारत की टीम ने पहले मैच में इंडोनेशिया को 17-0 से हराया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ हॉंग कॉंग को इतने बड़े मार्जिन से हरा कर भारतीय  हॉकी खिलाड़ियों ने 86 साल पुराना रिकार्ड तोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय हाकी में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

पीटीआई भाषा के अनुसार दोनों टीमों के बीच की गहरी खाई साफ नजर आ रही थी। गत चैंपियन भारत ने 1932 के अपने रिकार्ड में सुधार किया जब महान खिलाड़ी ध्यानचंद, रूपचंद और गुरमीत सिंह की मौजूदगी में राष्ट्रीय टीम ने लास एंजिलिस ओलंपिक में अमेरिका को 24-1 से हराया था।

अंतरराष्ट्रीय हाकी में सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड न्यूजीलैंड के नाम दर्ज है जिसने 1994 में समोआ को 36-1 से हराया था।

भारत के दबदबे का अंदाजा इस बाद से लगाया जा सकता है कि जब मैच खत्म होने के सात मिनट बचे थे तब टीम ने गोलकीपर को मैदान से हटा लिया।

भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक़ मैच में भारत के 13 खिलाड़ियों ने गोल किए। भारत की ओर से रूपिंदरपाल सिंह (तीसरे, पांचवें, 30वें, 45वें और 59वें मिनट), हरमनप्रीत सिंह (29वें, 52वें, 53वें, 54वें मिनट) और आकाशदीप सिंह (दूसरे, 32वें, 35वें मिनट) ने हैट्रिक बनाई।

मनप्रीत सिंह (तीसरे, 17वें मिनट), ललित उपाध्याय (17वें, 19वें मिनट), वरूण कुमार (23वें और 30वें मिनट) ने दो-दो जबकि एसवी सुनील (सातवें मिनट), विवेक सागर प्रसाद (14वें मिनट), मनदीप सिंह (21वें मिनट), अमित रोहिदास (27वें मिनट), दिलप्रीत सिंह (48वें मिनट), चिंगलेनसाना सिंह (51वें मिनट), सिमरनजीत सिंह (53वें मिनट) और सुरेंदर कुमार (55वें मिनट) ने एक-एक गोल किए।

दुनिया की पांचवें नंबर की टीम भारत और 45वें नंबर की टीम हांगकांग के बीच इस मुकाबले के पहले से ही एकतरफा होने की उम्मीद की जा रही थी।

एशियाई खेल : भारत को अब तक 4 स्वर्ण पदक

भारत ने १८वें एशियाई खेलों में अब तक 4 स्वर्ण पदक सहित कुल 11 मैडल जीते हैं। आज भारतीय खिलाड़ी शूटिंग, कुश्ती, वुशू, टेनिस, स्वीमिंग, तीरंदाजी, रोइंग, जिम्नास्टिक के अलावा हॉकी और वॉलीबॉल में उतरेंगे। चौथे दिन भारत ने स्वर्ण पदक से खता खोला। रानी सरनोबत ने भारत को 25 मीटर एयर पिस्टल में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। इस समय टेनिस में बोपन्ना और सरन का मुकाबला तायपेई के यांग और सेइ से  चल रहा है और १-१ से बराबर चल रहे हैं। भारत ने पहले दिन दो, दूसरे दिन तीन और तीसरे दिन पांच मेडल  जीते हैं।

कुश्ती में हरप्रीत 87 किग्रां ग्रेको-रोमन के सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। भारत की स्टार जिमनास्ट दीपा करमाकर घुटने की चोट के कारण आर्टिस्टिक टीम स्पर्धा के फाइनल में भाग नहीं लेंगी। चोट के कारण उन्होंने आर्टिस्टिक टीम स्पर्धा के फाइनल में हिस्सा न लेने का निर्णय किया है जबकि बीम स्पर्धा के फाइनल में भाग ले सकती हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने नौकायन के रेपचेज राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन स्पर्धाओं के फाइनल में प्रवेश किया है।  पुरुष खिलाड़ियों ने लाइटवेट डबल स्कल्स और लाइटवेट ऐट स्पर्धा जबकि महिलाओं ने वुमेन फोर स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई है।

भारतीय महिला तीरंदाजी टीम ने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हुए तीरंदाजी में महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। तृशा देब, ज्योति सुरेखा, मुस्कान किरार और मुधमिता कुमारी की भारतीय टीम ने 2085 अंक हासिल करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है।  

भारतीय पुरुष टेनिस खिलाड़ी रामकुमार रामानाथन टेनिस प्रतियोगिता के पुरुष एकल वर्ग प्री-क्वार्टर फाइनल में निराशा हाथ लगी और वे एकल वर्ग के प्री-क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान के जुराबेक कारिमोव से हार गए। भारतीय रोवर्स रोहित कुमार और भगवान सिंह एशियाई खेलों में पुरूषों के लाइटवेट डबल स्कल्स के रेपेचेज राउंड में शीर्ष पर रहे। इस भारतीय जोड़ी ने सात मिनट 12.23 सेकेंड का समय निकाला. उन्होंने मुख्य ए फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। पदक के लिए अपना दावा पेश करेंगे।  

भारतीय महिला निशानेबाज अंजुम मोदगिल और गायत्री नित्यानंदम महिलाओं की 50 मीटर राइफल-3 पोजिशन निशानेबाजी स्पर्धा के फाइनल से बाहर हो गईं हैं। अंतिम सूची में अंजुम को नौवां और गायत्री को 17वां स्थान हासिल हुआ। उधर अंकिता रैना ने अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हुए महिला एकल वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। अंकिता ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में हांगकांग की यूडीस वोंग चोंग को मात दी। निशानेबाज मनु भाकर और राही जीवन सार्नोबत ने अपना अच्छा प्रदर्शन कर यहां जारी 18वें एशियाई खेलों में बुधवार को महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल निशानेबाजी स्पर्धा के फाइनल में क्वालीफाई कर लिया है। मनु ने प्रिसिशन में 297 अंकों के साथ पहला और रैपिड में 593 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने इस स्पर्धा का गेम रिकॉर्ड भी तोड़ा. राही ने प्रिसिशन में 288 अंकों के साथ सातवां स्थान हासिल किया। वहीं रैपिड में उन्हें 580 अंकों के साथ सातवां स्थान ही हासिल हुआ। 

भारतीय पुरुष टीम ने पुरुषों की 4 गुणा 100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। एरोन एंजेल डिसूजा, अंशुल कोठारी, सजन प्रकाश और विर्धावल खड़े की टीम ने अंतिम सूची में आठवां स्थान हासिल कर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। भारतीय पुरुष टीम ने हीट-1 में 3 मिनट और 25.17 सेकेंड का समय लेकर पहला स्थान हासिल किया था। फाइनल मुकाबला आज शाम साढ़े पांच बजे होगा। 

सजन प्रकाश और मणि अविनाश बुधवार को पुरुषों की 100 मीटर बटरफ्लाई तैराकी स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं बना पाए। 

उधर मंगलवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ने चार खिलाड़ियों की हैट्रिक की बदौलत कजाखस्तान को 21-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की। ग्रुप बी के इस मैच में भारत की 10 खिलाड़ियों ने गोल किए। वुशु में भी भारत ने कम से कम चार पदक पक्के किए। एक को छोड़कर भारत के सभी खिलाड़ी सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल रहे।  

पांच भारतीय सेंडा स्पर्धा के विभिन्न वर्ग में चुनौती पेश करने उतरे और उनमें से चार ने जीत के साथ पदक पक्का किया। नाओरेम रोशिबिनी देवी, संतोष कुमार, सूर्य भानु प्रताप सिंह और नरेंदर ग्रेवाल ने पदक पक्का किया है।  

भारत की महिला और पुरूष कबड्डी टीमों ने भी जीत दर्ज करके सेमीफाइनल में जगह सुरक्षित कर ली है जबकि पुरूष टीम ने दक्षिण कोरिया से 23-24 से मिली हार से उबरते हुए ग्रुप ए के अपने चौथे और अंतिम मैच में थाइलैंड को 49-30 से हराया है।

मुंबई अग्निकांड में ४ की मौत

मुंबई के परेल इलाके में बुधवार को एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में आग लगने से ४ लोगों की मौत हो गई है जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इमारत में लगी आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है।

यह आग परेल के हिंदमाता सिनेमा के पास सुबह करीब 8:30 बजे लगी है। क्रिस्टल टावर नाम की इमारत की 12वीं मंजिल में यह हादसा हुआ है। बताया गया है कि दमकल की 20 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग लगने के कारणों का पता अभी नहीं चल सका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग शायद शॉर्ट सर्किट के कारण लगी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक दो लोगों की जान दम घुटने के कारण चली गई। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, 16 घायलों का इलाज चल रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आग की घटना में जो लोग घायल हुए हैं उन्हें केईएम अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें कुछ की हालत गंभीर है। मिली जानकारी के मुताबिक जिन लोगों की इस घटना में जान गयी है उनमें एक महिला और तीन पुरुष हैं जबकि घायलों में 10 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है।

अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद १२वें फ्लोर पर लिफ्ट एरिया के पास स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। बिजली के तारों में चिंगारी के बाद धुआं उठा और पूरे फ्लोर पर फ़ैल गया। इस कारण इस फ्लोर पर काफी लोग फंसे रहे। उन्होंने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। ”अब आग पर काबू पा लिया गया है”।

पुलिस के मुताबिक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। फिलहाल ईमारत में बिजली और पानी की सप्लाई रोक दी गई है। आग लगने की सूचना फौरन दमकल विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया है। इमारत में फंसे लोगों को क्रेन के सहारे बाहर निकाला गया।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाने पर सिद्धू ने दी सफाई

पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद पर इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देश के सेना प्रमुख को गले लगाने के लिए आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं, भारत वापस आ गए हैं।

सिद्धू ने अपने बचाव में पत्रकारों से पूछा कि अगर कोई कहे कि हमारी संस्कृति एक है और ऐतिहासिक गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का रास्ता खोलने की बात करे तो उन्हें क्या करना चाहिए था?

सिद्धू जो वाघा-अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान से लौटे क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान के न्यौते पर शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने पडोसी मुल्क जाने वाले अकेले भारतीय थे।

शपथ ग्रहण समारोह में वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के प्रमुख मसूद खान के बगल वाली सीट पर बैठे और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को गले लगाते दिखाई दिये ।

इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पहली पंक्ति में पीओके प्रमुख के बगल में बैठने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया, “अगर आपको कहीं सम्मान स्वरूप अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया जाता है तो आप वहीं बैठते हो जहां आपको कहा जाता है. मैं कहीं और बैठ सकता था, लेकिन उन्होंने मुझे वहां बैठने के लिए कहा। ”

बाजवा को गले लगाने के सवाल पर सिद्धू ने कहा, “अगर कोई (पाक सेना प्रमुख) मेरे पास आता है और कहता है कि हमारी संस्कृति एक है और हम पहले सिख गुरु, गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर पाकिस्तान में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का मार्ग खोलेंगे तो मैं क्या कर सकता था?”

दाऊद का फाइनेंस मैनेजर लंदन में हुआ गिरफ्तार

वर्ष 1993 में हुए मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मुख्य आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के फाइनेंस मैनेजर जाबिर मोती को गिरफ्तार कर लिया गया
रविवार को मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, जबीर को ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों ने  लंदन के हिलटन होटल से हिरासत में लिया है।
सूत्रों के अनुसार भारत ने पाकिस्तानी नागरिक और वह डी-कंपनी के आर्थिक मामलों के इनचार्ज जबीर मोती को गिरफ्तार किये जाने की मांग की थी।जिसके बाद ये कार्रवाई हुई है।
पाकिस्तानी नागरिक और 10 साल के वीजा पर ब्रिटेन में रह रहे जबीर मोती और दाऊदी की पत्नी महजबीन, बेटी महरीन और दामाद जुनैद (पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद) के बीच वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद जबीर को हिरासत में लिया गया है। दाऊद की सबसे छोटी बेटी की अभी शादी नहीं हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जबीर पाकिस्तान, मिडल ईस्ट, यूके और यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में दाऊद के काम को देखता है।
एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार इन देशों में व्यवसायों से होने वाली कमाई और अन्य गैरनकानूनी गतिविधियों जैसे अवैध हथियार बेचना, नशीले पदार्थों का व्यापार, रियल एस्टेट व्यापार, उगाही से होने वाली कमाई का इस्तेमाल भारत विरोधी अभियानों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों के वित्तपोषण में किया जाता है।
कहा जाता है कि जबीर दाऊद के परिवार को यूके शिफ्ट करवाने के विकल्प खोजने में जबीर की बड़ी भूमिका है। कराची में जिस रेजिडेंशल कंपाउंड में दाऊद का परिवार रहता है, वहां जबीर के पास भी एक घर है।
हाल ही में जबीर खुद भी बारबेडोस और ऐंटीगा में दोहरी नागरिकता पाने की कोशिश कर रहा था। उसनें हंगरी में भी पर्मानेंट रेजिडेंट स्टेटस पाने की कोशिश की थी।

कवि, राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी को देश का सलाम

अटल बिहारी वाजपेयी कवि, पत्रकार और राजनेता थे। वे दोस्त बनाना जानते थे। उनकी विशेषता थी कि वे विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं को साथ लेकर चलते थे। वे एक जमाने में वामपंथी थे बाद में उन्हें लगा कि स्वयंसेवक बन कर वे ज्य़ादा काम कर सकते हैं तो वे उसमें सक्रिय हुए। बाद में वे जनसंघ में सक्रिय हुए। जब विभिन्न विचारधाराओं की पार्टियों को एक मंच पर वे ले आए तो उन्हें लगा कि एक नया राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी बनाई जाए जिसमें हिंदू संस्कृति पर ज्य़ादा ज़ोर बिना दिए पूरे देश को आंदोलन किया जाए। राजनेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विचारक दीनदयाल उपाध्याय से उनका बहुत अच्छा संपर्क था। उन्होंने इनके साथ अपने विचारों को सान दी। आज़ादी की लड़ाई में भागीदारी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से उनका सीधा संपर्क उन्हें समाज में सतत सक्रिय रख सका। उनके भाषण देने की कला की पंडित नेहरू ने काफी तारीफ भी की। देश में जब आपातकाल लगा तो देश में विपक्षी एकता भी परवान चढ़ी जिसे बनाने मेें अटल बिहारी वाजपेयी की खासी भूमिका रही।

भारत रत्न से अलंकृत अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसा नेता थे जो विरोधी दलों के साथ भी सही तालमेल रखते थे। वे देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे। उनके समय में भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया। ध्यान रहे पहला परमाणु परीक्षण भारत ने उस समय किया था जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं।

ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्में वाजपेयी सबसे पहले 1996 में प्रधानमंत्री बने पर उनकी सरकार केवल 13 दिन चली। इसके बाद वे 1998 से 1999 तक 11 महीने इस पद पर रहे। फिर वे 1999 से 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इसके अलावा वे 40 साल से ज़्यादा समय तक लोकसभा के सदस्य रहे इसके अलावा वे दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

उनके प्रधानमंत्री काल में भारत ने 1998 में पोखरण में पांच परमाणु विस्फोट किए। उन्होंने ये परीक्षण अपने प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर ही कर डाले। इन विस्फोटों के 15 दिन बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु धमाके किए थे। उस समय रूस और फ्रांस ने भारत के इन धमाकों का समर्थन किया था पर अमेरिका, कनाडा, जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन ने भारत पर पाबंदियां लगा दी थीं।

वाजपेयी ने 1998 के अंत में पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक रिश्तों की शुरूआत की थी। इसी प्रक्रिया में वे फरवरी 1999 में दिल्ली-लाहौर बस यात्रा पर भी गए। वाजपेयी की कोशिश थी कि पाकिस्तान के साथ कश्मीर समेत सभी मसले बातचीत के द्वारा हल कर लिए जाएं। इसी के तहत लाहौर घोषणा हुई इसमें आपसी बातचीत पर बल दिया गया। आपस में व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने की बात हुई और आपसी दोस्ती के सहारे दक्षिण एशिया को परमाणु शस्त्र विहीन बनाने की बात भी रखी गई। इससे 1998 में परमाणु धमाकों के बाद बना तनाव काफी कम हो गया। ऐसा न केवल इन दोनों देशों में हुआ बल्कि पूरे विश्व पर इसका असर पड़ा। 1999 के मध्य में उनकी सहयोगी पार्टी एआईएडीएमके ने समर्थन वापिस ले लिया और 11 महीने में यह सरकार चली गई

वाजपेयी के समय में ही कारगिल युद्ध हुआ। आतंकवादियों और बिना वर्दी के पाकिस्तानी सैनिकों ने कश्मीर घाटी में घुसपैठ करके उन पहाड़ी चोटियों और भारतीय सेना के बंकरों पर कब्जा कर लिया जो भारतीय सेना ने खाली छोड़ी हुई थीं। इस तरह वे लोग कारगिल, बटालिक और अखनूर सेक्टरों में कार्रवाइयां चलाने लग गए। सियाचिन पर भी तोपों से गोलाबारी होने लगी। जून 1999 में ऑपरेशन विजय शुरू हुआ। भारतीय सेना का मुकाबला हजारों आतंकवादियों के साथ होता रहा। तीन महीने तक चली इस लड़ाई में 500 से ज़्यादा भारतीय सैनिक शहीद हुए। दूसरी ओर दुश्मन के भी लगभग 4000 लोगों की जानें गई। इसके साथ ही भारतीय सेना ने दुश्मन को अपने सारे इलाके से खदेड़ दिया। इस तरह भारत ने 70 फीसद इलाका वापिस ले लिया।

इसके बाद 1999 में चुनाव में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उस समय एनडीए को लोकसभा में 543 में से 303 सीटें मिली। वाजपेयी ने 13 अक्तूबर को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। तीन महीने बाद ही एक बड़ी समस्या पैदा हो गई जब आतंकवादियों ने दिसंबर 1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे इंडियन एअरलाइंस के विमान आईसी 814 का अपहरण कर लिया और उसे अफगानिस्तान ले जाया गया। आतंकवादियों की मांगों में मसूद अज़हर समेत कई आतंकवादियों को रिहा करने की मांग थी। सरकार इस दवाब के आगे झुक गई और तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह आतंकवादियों को अपने साथ ले जाकर वहां छोड़ आए और यात्रियों को वापिस ले आए।

वाजपेयी राष्ट्रवादी होने के साथ संवेदनशील मानववादी व्यक्ति थे। सही बात के लिए वे अपनी पार्टी के भी खिलाफ खड़े हो जाते थे। जब बाबरी मस्जिद 1992 में गिराई गई तो उन्होंने उसका विरोध किया था। उन्होंने गोधरा कांड और गुजरात दंगों, दोनों की ही निंदा की थी। तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने राजधर्म अपनाने को कहा था। वे गुजरात के दंगों के भी खिलाफ थे। उनका दिल बड़ा था। परमाणु परीक्षण को लेकर उन्होंने कहा था कि खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी सुरक्षा के इंतजाम पूरे होने चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने आर्थिक सुधारों को और आगे बढ़ाया। उस समय देश की जीडीपी तेजी से बढ़ी और छह से सात फीसद के बीच पहुंच गई। विदेशी निवेश बढ़ा। सरकारी और निजी ढांचों का आधुनिकीकरण भी वाजपेयी ने किया। सरकार ने कर व्यवस्था में भी बदलाव किए। भाजपा की पूरी ताकत शहरों के मध्यवर्ग और युवाओं को अपने साथ जोडऩे में लगती गई। हालांकि इसके लिए उन्हें अपने ही संघ परिवार से जुड़े भारतीय मज़दूर संघ और भारतीय किसान संघ के विरोध का सामना करना पड़ा।

वाजपेयी 2003 में चीन की यात्रा पर गए और चीनी नेताओं से मिले। वहां उन्होंने तिब्बत को चीन का हिस्सा बताया। इसका चीनी नेताओं ने भरपूर स्वागत किया। इसके एक साल बाद उन्होंने सिक्किम को भारत का हिस्सा तस्लीम कर लिया। उसके बाद भारत-चीन संबंधों में काफी सुधार आया।

वाजपेयी ने कई विदेश यात्राएं भी की। 1965 में वह संसदीय सद्भाव यात्रा पर पूर्वी अफ्रीका गए। 1967 में सह राष्ट्रमंडल संसदीय एसोसिएशन की कनाडा में हुई बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। 1980 में वह जांबिया गए। 1974 में वह इंटर पार्लियामेंट यूनियन कांफ्रेस के लिए भारतीय प्रतिनिधि के तौर पर जापान गए। इसके अलावा उन्होंने और भी कई देशों की यात्राएं की।

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के शुरूआती सदस्यों में से एक थे। वह पहली बार 1957 में लोकसभा के लिए चुने गए। 1957 से 1977 तक वे संसद में भारतीय जनसंघ के नेता रहे। 1962में वे राज्यसभा के लिए चुने गए। 1967 में फिर लोकसभा के लिए चुनाव जीते। 1971 में वह तीसरी बार लोकसभा के सदस्य बने। 1977 में वह चैथी बार लोकसभा के सदस्य बने। 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। 1980 में वह सातवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। 1980 से 1986 तक वे भाजपा के अध्यक्ष रहे। 1996-97 में लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे।

एक परिचय

अटल बिहारी वाजपेेयी के पिता एक कवि और स्कूल अध्यापक थे। अटल ने शुरूआती स्कूली शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशुमंदिर स्कूल में ली। इसके पश्चात वे विक्टोरिया कालेज में पढ़े। इस कालेज का नाम अब लक्ष्मीबाई रख दिया गया हैै। उन्होंने एमए राजनीतिक विज्ञान में कानपुर के एंग्लो-वैदिक कालेज से की। वे 1939 में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए। वे 1947 में उनके प्रचारक बन गए। उन्होंने मासिक पत्रिका ‘राष्ट्रधर्मÓ में भी काम किया। इसके अलावा वे हिंदी पांचजन्य, डेली स्वदेश, और वीर अर्जुन से भी जुड़े। उन्होंने सारी उम्र विवाह न करने की ठानी।

वाजपेयी ने अपना राजनैतिक जीवन एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में शुरू किया। बाद में वे जनसंघ में शामिल हो गए। उस समय डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी उनके प्रमुख थे। बाद में वाजपेयी उत्तरप्रदेश के लिए उत्तरी क्षेत्र के इंचार्ज बना दिए गए। 1968 में वे जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। नानाजी देशमुख, बलराज मधोक व लालकृष्ण आडवाणी के सहयोग से वे पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले गए।

अटल बिहारी वाजपेयी ने जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया। जब 1955 में देश में ‘इमरजेंसीÓ लगी तो भी वे उसके विरोध में उतरे। 1977 में जनसंघ जनता पार्टी का एक हिस्सा बन गई। यह पार्टी इंदिरा गांधी के खिलाफ कई दलों ने मिल कर बनाई थी।

कांग्रेस की 1977 में हार के बाद मोरारजी देसाई के नेतंृत्व में जनता पार्टी ने सत्ता संभाली तो वाजपेयी केंद्रीय मंत्री बनाए गए। उन्हें विदेश मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। विदेश मंत्री के तौर पर वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेंबली में हिंदी में भाषण दिया। पर उनका यह मंत्रालय लंबा नहीं चला। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 1979 में इस्तीफा दे दिया। वाजपेयी ने तब तक खुद को एक राजनैतिक नेता के रूप में स्थापित कर चुके थे।

वाजपेयी ने 1980 में लालकृष्ण आडवाणी, भैरो सिंह शेखावत और दूसरों के साथ मिल कर भारतीय जनता पार्टी का गठन कर लिया। वाजपेयी ने आपरेशन ब्लू स्टार का समर्थन नहीं किया और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों का जो कत्लेआम हुआ उसका उन्होंने डट कर विरोध किया। भाजपा को 1984 के चुनाव में लोकसभा की मात्र दो सीटें ही मिली। इसके बाद भाजपा लगातार ऊपर ही जाती रही। यहां तक की 1996 में वे पहली बाद देश के प्रधानमंत्री बन गए। 2004 में चुनावों में हार के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति को भी अलविदा कह दिया।

लालकिले से मोदी ने बताया चुनावी एजेंडा

भारतीय जनता पार्टी पर अपना वर्चस्व कायम करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों ने शायद ही सोचा होगा कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी युग की ओर लौटना होगा। लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री का आखिरी भाषण तो कम से कम इसकी तस्दीक करता ही है। मोदी न केवल अटल बिहारी वाजपेयी के शाइनिंग इंडिया की ओर लौटे बल्कि उन्होंने कश्मीर के मामले में वाजपेयी का तरीका अपनाने की घोषणा भी कर डाली। यह निश्चित तौर पर राजनीति की उनकी शैली के विपरीत था। सवाल उठता है कि क्या मोदी उस शाइनिंग इंडिया के सहारे 2019 की चुनावी जंग जीत पांएंगे जो 2004 में भाजपा हार गई थी। शायद उन्हें अपने मीडिया प्रबंधन और कारपोरेट के पूर्ण समर्थन का भरोसा है।

वैसे मोदी ने अपने भाषण में शाइनिंग इंडिया का नारा नहीं दोहराया, लेकिन उन्होंने ऐसे भारत की तस्वीर खींची जो विकास के रास्ते पर तेजी से भाग रहा है। इसी तस्वीर को ही शाइनिंग इंडिया का नाम दिया गया था। उन्होंने कहा, ”आज देश एक आत्मविश्वास से भरा हुआ है। सपनों को संकल्प के साथ परिश्रम की पराकाष्ठा पार करके देश नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है। आज का सूर्योदय एक नई चेतना, नई उमंग, नया उत्साह, नई ऊर्जा ले कर आया है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा,” हम आज उस समय आजादी का पर्व मना रहे हैं, जब हमारे देश में उन खबरों से चेतना आई, जिनसे हर भारतीय जो दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न रहता हो, आज इस बात का गर्व कर रहा है,कि भारत ने विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था में अपना नाम दर्ज करा दिया है। ऐसे एक सकारात्मक माहौल में, सकारात्मक घटनाओं की श्रृंखला के बीच आज हम आजादी का पर्व मना रहे हैं।’’ ”लेकिन वही दुनिया, वही लोग, वही दुनिया को मार्ग दर्शन करने वाले लोग इन दिनों कह रहे हैं कि सोया हुआ हाथी अब जग चुका है, चल पड़ा है। सोए हुए हाथी ने अपनी दौड़ शुरू कर दी है। दुनिया के अर्थवेत्ता कह रहे हैं कि आने वाले तीन दशक तक, यानि 30 साल तक, विश्व की अर्थव्यवस्था की ताकत को भारत गति देने वाला है। भारत विश्व के विकास का एक नया स्रोत बनने वाला है। ऐसा विश्वास आज भारत के लिए पैदा हुआ है,’’ मोदी ने दावा किया।

उन्होंने उगते भारत की ऐसी तस्वीर खींची जिसमें धरती से लेकर अंतरिक्ष तक भारत अपने झंडे गाड़ रहा है। इस चमकते भारत को अपने पीछे ले जाने के आग्रह को कैसे मजबूत बनाया जाए, यह भी कोशिश प्रधानमंत्री के भाषण में दिखाई देती हैं।

उन्होंने चुनावी घोषणा-पत्र वाले मुद्दे गिना दिए और सपनों की नई सूची जनता के सामने रख दी। उन्होंने देश के हर नागरिक को घर, बिजली, स्वास्थ्य सुरक्षा, शौचालय और इंटरनेट कनेक्शन देने का वायदा किया। ”हर भारतीय के पास अपना घर हो, हर घर के पास बिजली कनेक्शन हो, हर भारतीय को धुंए से मुक्ति मिले रसोई में और इसलिए हर भारतीय को जरूरत के मुताबिक जल मिले और इसलिए हर भारतीय को शौचालय मिले और इसलिए हर भारतीय को कुशलता मिले और इसलिये हर भारतीय को अच्छी और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिले, इसलिये हर भारतीय को सुरक्षा मिले, सुरक्षा का बीमा सुरक्षा कवच मिले और इसलिए हर भारतीय को इंटरनेट की सेवा मिलें और इस मंत्र को लेकर हम देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं,’’ मोदी ने घोषणा की।

इसी क्रम में उन्होंने आयुष्मान भारत के लोक-लुभावन कार्यक्रम भी घोषित कर दिया।

” देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को, सामान्य जन को, आरोग्य की सुविधा मिले, इसलिए गंभीर बीमारियों के लिए और बड़े अस्पतालों में सामान्य मानव को भी आरोग्य की सुविधा मिले, मुफ्त में मिले और इसलिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री जनआरोग्य अभियान प्रारंभ करने का तय किया है।

प्रधानमंत्री जनआरोग्य अभियान के तहत आयुष्मान भारत योजना के तहत, इस देश के 10 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा। यह शुरूआत है, आने वाले दिनों में निम्न मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग को भी इसका लाभ मिलने वाला है। इसलिए 10 करोड़ परिवारों को, यानी करीब-करीब 50 करोड़ नागरिक, हर परिवार को पांच लाख रुपया सालाना देने की योजना है। यह हम इस देश को देने वाले हैं। किसी सामान्य व्यक्ति को यह अवसर पाने में दिक्कत न हो, रुकावट न हो यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए टूल बने हैं,’’ उन्होने कहा।

जाहिर है यह उनका चुनावी एजेंडा है और वह वाजपेयी की तरह नरम राजनीति नहीं करते हैं। उन्होंने कांग्रेस को इस हद तक निशाने पर लिया कि यही बता दिया कि 2013 में देश की तरक्की की जो रफ्तार थी उससे लोगों को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा पाने में भी सदियां लग जाती। ” लेकिन हम आगे जा रहे हैं वह पता तब तक नहीं चलता है जब तक हम कहां से चले थे, उस पर अगर नजर न डाले, कहां से हमने यात्रा का आरंभ किया था, अगर उसकी ओर नहीं देखेंगे तो कहां गए हैं, कितना गए हैं, इसका शायद अंदाज नहीं लग पाएगा। इसलिए 2013 में हमारा देश जिस रफ्तार से चल रहा था, जीवन के हर क्षेत्र में 2013 की रफ्तार थी, उस 2013 की रफ्तार को अगर हम आधार मान कर सोचें और पिछले चार साल में जो काम हुए हैं, उन कामों का अगर लेखा-जोखा लें, तो आपको अचरज होगा कि देश की रफ्तार क्या है, गति क्या है, प्रगति कैसे आगे बढ़ रही है। शौचालय ही ले लें, अगर शौचालय बनाने में 2013 की जो रफ्तार थी, उसी रफ्तार से चलते तो शायद कितने दशक बीत जाते, शौचालय शत-प्रतिशत पूरा करने में,’’ मोदी ने कहा।

उनके भाषाण से यह भी साफ हो गया कि वह भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाएंगे। इसमें 2014 के मुकाबले यह फर्क होगा कि वह अब यह दावा भी करेंगे कि उन्होंने एक भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके शासन में दलालों और कमीशनखोरों का सफाया हो गया है।

लेकिन सवाल उठता है कि क्या उनकी इस तस्वीर को लोग स्वीकार करेंगे? क्या विपक्ष उनकी इस तस्वीर के सामने उस भारत की तस्वीर नहीं रखेंगे जिसमें किसान आत्महत्या कर रहे हैं और एक छोटी नौकरी के लिए भी बेरोजगार युवाओं की एक बड़ी फौज आ खड़ी होती है। किसानों की आय दुगना कर देने का जो दावा प्रधानमंत्री कर रहे हैं वह काफी विवादों में है। लालकिले के भाषण के बाद स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने उनके दावे को ”असत्य’’ करार दिया। यही नहीं, उन्होंने स्वच्छता अभियान से बच्चों की मौत में कमी होने को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के बयान के बारे में भी दावा किया कि प्रधानमंत्री उसे गलत ढंग से पेश कर रहे हैं।

कांगे्रेस ने तो मोदी के दावों को ”जुमला’’ ही करार नहीं दिया बल्कि राहुल गांधी की चुनौती भी दोहरा दी कि प्रधानमंत्री खुले मंच पर बहस करें। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी को राफेल और व्यापम घोटाले की याद दिलाई। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को लेकर कांग्रेस पहले से आक्रामक है। सुरजेवाला ने डालर के मुकाबले रूपए की कीमत का सवाल भी उठाया।

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी व्यापार घाटे की बात उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि अर्थव्यवस्था बहुत बुरी हालत में है। विपक्ष उन्हें लिंचिंग और औरतों पर अत्याचार पर भी घेर रहा है।

सवाल उठता है कि क्या मोदी सिर्फ उगते भारत पर टिके रहेंगे? ऐसा लगता नहीं हैं। लालकिले से भी उन्होंने इसके हल्के ही सही लेकिन संकेत तो दे ही दिए हैं। उनका भगवा साफा इसकी गवाही दे रहा था और उन्होंने तीन तलाक कानून को रोकने की विपक्ष की कोशिश का हवाला दिया। इसे सभी जानते हैं कि भाजपा का यह मुद्दा हिंदुत्व एजेंडे का ही हिस्सा है। उनका लिंचिंग को लेकर सीधा बयान नहीं देना भी इसी ओर इशारा करता है। मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा हिंदुत्व के साथ ही चलेगा, यह तय है।

क्या कहते हैं पगड़ी के रंग!

भारतीय संस्कृति में पगड़ी या टोपी का अपना महत्व है। यहां सिर ढकने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस परंपरा को पूरी तरह निभाया है। हर स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने अलग-अलग तरह के साफों या पगडिय़ों को पहना।

2014 में उन्होंने गहरे लाल और हरे रंग के जोधपुरी साफे को पहना था। 2015 के 15 अगस्त को वह राजस्थानी साफा बांध कर आए थे, जिसकी पृष्ठभूमि पीली थी और उस पर पीले रंग के अलग ‘शेड्स’ की आड़ी तिरछी रेखाएं थी। इनमें से कुछ लाल और गहरे नीले रंग की भी थीं।

2016 में नरेंद्र मोदी ने पगड़ी को गुलाबी और पीले रंग मे रंगवाया था। जबकि 2017 में प्रधानमंत्री तीखे लाल और पीले रंग की पगड़ी में नज़र आए थे जिसमें सुनेहरी रंग की आड़ी-तिरछी रेखाएं भी थीं। इस साल (2018) प्रधानमंत्री ने केसरी रंग का साफा बांधा था। हमारे यहां केसरी रंग समर और बलिदान का प्रतीक है। इस साल के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री की शरीरिक भाषा यह दिखा रही थी कि वे किसी ‘जंग’ के लिए तैयार हैं। ध्यान रहे कि कुछ ही महीनों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आम चुनाव होने हैं और साथ ही 2019 में लोकसभा के लिए भी वोट डलने हैं। हो सकता है कि ‘केसरिया’ रंग इसी समर में उतरने का प्रतीक चिन्ह हो।

आश्रय स्थलों में मंडराते गिद्धों की नाज़ुक बच्चों पर नज़र

जब लखनऊ से मेरे सहयोगी मुदित माथुर ने फोन पर यह जानकारी दी कि मुजफ्फरपुर (बिहार) जैसी ही घटना उत्तरप्रदेश के देवरिया में भी हुई है तो मैं सन्न सा रह गया क्योंकि आज़ादी के 72वें वर्ष में भारत में ऐसा होना विचित्र है। दरअसल, मैं अभी हाल में टॉमस राइटर्स फाउंडेशन के सर्वे को देख रहा था जिसमें महिलाओं के लिहाज से खतरनाक देशों में भारत को अफगानिस्तान, सीरिया और सऊदी अरब से भी आगे का स्थान दिया गया था।

बिहार और देवरिया के आश्रय स्थलों (बालिका गृह) से बच्चियों के यौन शोषण के जो ब्यौरे अब तक मिले हैं उन्हेें पढ़ सुन कर पूरे शरीर में ठंडी सिहरन सी होती है। दोनों ही घटनाओं में यौन शोषण के भयावह रूप दिखते हैं। दोनों ही मामलों में यह साफ है कि बेसहारा लड़कियों के यौन शोषण का सिलसिला गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के संचालकों और रसूख वाले राजनीतिक लोगों के आपसी तालमेल से चल रहा था। बतौर उदाहरण: एक व्यक्ति जो एक स्थानीय अखबार का मालिक था, वह मुजफ्फरपुर का बाल सुधार आश्रय स्थल (बालिका गृह) भी चला रहा था। जब ये खबरें सुर्खियां बन रही थीं तभी हरियाणा के अपना घर, आश्रय स्थल से भी यौन उत्पीड़त की खबरें उभरीं।

इस घटना के पहले उन्नीस साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म की खबर आई। यह लड़की दिमागी तौर पर अस्थिर थी। उसने चंडीगढ़ के आश्रय स्थल (बालिका गृह) में शरण ली जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बाद में पता चला कि उसके साथ गाडर््स और चौकीदारों ने भी दुष्कर्म किया था।

देश में जो आश्रय स्थल (बालिका गृह) हैं वहां से ऐसी घटनाओं की खबरें आ रही हैं। जबकि इन आश्रय-स्थलों (बालिका गृह) के निर्माण के पीछे इरादा था बेसहारा बच्चों और महिलाओं को आश्रय देना, उनकी देखभाल करना। लेकिन वहां महिलाओं से, बच्चियों से दुष्कर्म होते हैं!

मीडिया जब भी ऐसी घटनाओं को उभारता है तो समाज का दबाव पडऩा शुरू होता है। इसी के चलते बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजूृ वर्मा को अपना इस्तीफा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंपना ही पड़ा। उनके पति का भी नाम बच्चियों के यौनशोषण करने वालों में था।

बिहार के हाईकोर्ट की निगरानी में इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है। जांच से संबंधित आदेश भी जारी हो चुके हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सभी आश्रय स्थलों (बालिका गृह) की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

ऐसा ही मामला रोहतक के ‘अपना घर’ मामले में भी हुआ। आश्रय स्थल (बालिका गृह) की संचालक जसवंती देवी को गिरफ्तार किया गया। ऐसी घटनाओं के होते रहने से यह साफ जाहिर है कि दाल में काला ज़रूर है। इस बात की कतई इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए कि इन आश्रय स्थलों (बालिका गृह) मेें असहाय और अनाथ बेसहारा बच्चियों का शोषण हो। उनकी समुचित देखरेख हो। यह व्यवस्था होनी चाहिए कि समाज के लोग उन्हें सहज उपलब्ध वस्तु मान कर शारीरिक शोषण न करें।

अब तो केंद्र सरकार ने भी पूरे देश के सभी तरह के आश्रय स्थलों (बालिका गृह) की जांच-पड़ताल करने और रपट देने का आदेश जारी कर दिया है। यह रपट अक्तूबर तक देने के आदेश भी दिए गए हैं। यानी नौ हज़ार से भी ज्य़ादा आश्रय स्थलों (बालिका गृह) का सामाजिक ऑडिट अब अनिवार्य है। आज वक्त है कि हम सभी एकजुट होकर ऐसी घटनाओं का विरोध करें और अधिकारियों पर दबाव डालें जिससे ऐसी घटनाएं फिर न हों।

राहुल ने दिखाई धमक

शनिवार 11अगस्त को जयपुर की सड़कों पर यह अद्भुत दृश्य था। एयरपोर्ट से लेकर एलबर्ट हाल के निकट रामलीला मैदान तक पहुंचने वाला तेरह किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग फूलों की बारिश से अट गया था। राजस्थानी सांस्कृतिक परिवेश में नाचती गाती लोकनर्तकों की टोलियां और छतों से लेकर सड़क के दोनों छोर पर नारों के साथ स्वागत करते हुए स्त्री-पुरुषों का विशाल हुजूम था। चुनावी रणभेरी बना यह दिलकश नजारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का ‘रोड शो’ था। इस सफर में राहुल गांधी कम से कम एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर बस से नीचे उतरे और हुलसतेे स्वागतकर्ताओं से संवाद किया। राजनीतिक रणनीतिकारों ने इस ‘रोड शो’ को पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के जयपुर दौरे के जवाबी कार्यक्रम के रूप में देखते हुए इस बात की तस्दीक की कि, ‘इस कार्यक्रम ने कांग्र्रेसजनों में जोश पैदा कर दिया है। राहुल गांधी की अगवानी में उमड़ती जबरदस्त भीड़ के रेले से भोंचक भाजपा नेता अपना विस्मय भाव हलक से उतार भी नहीं पाए थे कि केन्द्र की मोदी और राज्य की वसुंधरा सरकार पर किए गए पांच बड़े हमलों से तिलमिला कर रह गए। सरकारों को लाजवाब करने वाले हमलों में सबसे बड़ा वार राफेल सौदे को लेकर था कि ‘देश के चैकीदार ने 45 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में डूबे अपने मित्र उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल का ठेका दे दिया। उन्होंने यह कहते हुए आश्चर्य जताया कि, ‘क्यों इस मामले में पूर्व रक्षा मंत्री पर्रीकर से बात तक नहीं की गई? हर साल दो करोड़ को रोजगार दिलवाने और प्रत्येक के खाते में 15 लाख रुपए डलवाने की वादा खिलाफी का क्या हुआ? कांग्रेस के इस प्रतिनिधि सम्मेलन में जुटी भीड़ भाजपा पर राहुल गांधी के हमलावर तेवरों पर इस कदर तालियां पीट रही थी मानों उन्होंने कोई नए राहुल गांधी देख लिया जो भाषाई गेंदबाजी से प्रधानमंत्री मोदी की वादाखिलाफी को टुकड़े-टुकड़े करते हुए तराश रहे थे ताकि सरकार के लिए उन्हें पचाना मुश्किल हो जाए?

राहुल गांधी ने रोजगार पर मोदी की अप्रत्याशित चुप्पी को कचोटते हुए बड़ी बेबाकी से कहा, मध्यमवर्ग ने ही मोदी की राजनीति को सबसे बडा आयाम दिया और मोदी उन्हीं के सामने बेबस खड़े रह गए? महिला शिक्षा पर वसुंधरा सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा, ‘यह जुमलों, महलों और घोटालों की सरकार है जिसके दिन अब लदने वाले हैं। मोदी के नारे ‘बेटी पढ़ाओं, बेटी बचाओ’ की बखिया उधेड़ते हुए राहुल ने नई बहस छेड़ दी कि, ‘बेटी को किससे बचाओ, मैं कहता हूं भाजपा वालों से बचाओ …..’’ राहुल इस मुद्दे पर बुरी तरह हमलावर हेाते हुए बोले कि, ‘भाजपा विधायक ने दुष्कर्म किया, लेकिन मोदी एक शब्द नहीं बोले? दरिन्दगी पर हमलावर होते हुए राहुल ने यहां तक कहा, ‘मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में कितने बलात्कार हो रहे है , आपको पता है या नहीं? राहुल गांधी ने भाजपा सरकार का भविष्य बांचने और सबसे बड़े राजनैतिक हमले में कहा कि, ‘विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। अद्भुत इत्तफाक रहा कि, ‘राहुल के बयान के ठीक तीन दिन बाद खबरिया चैनल एबीपी द्वारा मतदाताओं का रुख भांपने के साथ किए गए एक सर्वेक्षण में इस पर मुहर भी लगा दी। इतना ही नहीं राजस्थान में भाजपा की करारी हार की संभावना व्यक्त करते हुए सर्वेक्षण ने मुख्यमंत्री के रूप में अशोक गहलोत को सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरा बताया। गहलोत 43 फीसदी लोगों की पसंद थे, जबकि वसुंधरा राजे की स्वीकार्यता 24 प्रतिशत पर ही ठिठक गई थी।

भाजपा ने राहुल गांधी के ‘रोड शो’ को फ्लॉप करार देते हुए कहा, ‘हिम्मत है तो अमरूदों के बाग में करते सभा? राहुल के हमलों को संसदीय मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बचकानी हरकत बताया। जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने पलटवार करते हुए कहा कि, ‘एक तरफ वसुंधरा सरकार ‘गौरव यात्रा’ निकाल रही है, दूसरी तरफ तीन दिन पहले ही हुई नागौर में किसान की आत्महत्या इस यात्रा का मुंह चिढ़ा रही है। विश्लेषकों का कहना हे कि, ‘वसुंधरा सरकार की सबसे बड़ी गफलत यही है कि, वो किसानों, गांवों और मध्यमवर्ग से कट गई? पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे पर हमलावर होते हुए उनके सियासी सिक्के के दूसरे पहलू को भी उलट दिया कि, ‘आज वो कांग्रेस में एकजुटता पर सवाल उठा रही है, तो आखिर उनका अपना रुख और अतीत क्या रहा है जब पिछले चुनावों में गुलाब चंद कटारिया को यात्रा निकालने और खुद को पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बनाने का दबाव डालते हुए तीसरा मोर्चा बनाने की धमकी दी थी?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, ‘पहले संसद, फिर राजस्थान में चुनावी शंखनाद के लिए किए गए रोड शो ने यह मिथक पूरी तरह तोड़ दिया है कि, ‘वे बच्चे हैं, राजनीति में कच्चे हैं और बोलना भी नहीं जानते।’’ वरिष्ठ पत्रकार माला जय का कहना है कि, ‘संसद के भीतर और बाहर अपने सार्वजनिक भाषणों में उन्होंने दिखा दिया कि उनमें जब चाहे तीखे-चुभने वाले प्रहार करने की क्षमता है। उनके नेतृत्व की एक और खासियत है कि उनकी युवाकोचित उर्जा और गतिशीलता जबरदस्त रूप से लोगों को

प्रभावित कर रही है और यही उर्जा कांग्रेस का वानप्रस्थ खतम करेगी और ठप्पे से सत्ता में वापसी करेगी।