
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले ने राष्ट्रीय जनगणना 2027 के महाभियान में अपनी एक विशिष्ट पहचान दर्ज की है। जिले के वेंगुर्ला तालुका में स्थित मूठ (Muth) गांव ने तकनीक और समन्वय का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए राज्य का पहला ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) पूर्ण करने वाला गांव बनने का गौरव हासिल किया है।
यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक तत्परता का परिणाम नहीं है, बल्कि स्थानीय निवासियों और राजस्व विभाग के बीच मजबूत आपसी तालमेल की एक सफल कहानी भी है।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो मूठ Village एक छोटा लेकिन संगठित समुदाय है, जिसकी कुल आबादी 144 है और यहां कुल 36 परिवार निवास करते हैं। महाराष्ट्र की मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी, डॉ. निरुपमा जे. डांगे ने इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि मूठ गांव ने राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए एक मानक स्थापित किया है। उन्होंने प्रदेश के अन्य गांवों और शहरों से भी अपील की है कि वे इस मॉडल से प्रेरणा लेकर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी स्व-गणना की Process पूरी करें।
इस ऐतिहासिक पड़ाव के पीछे एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचा सक्रिय रहा। जिलाधिकारी तृप्ति धोडमिसे के कुशल मार्गदर्शन और तहसीलदार ओंकार ओटारी की सूक्ष्म नियोजन रणनीति ने इस अभियान को गति प्रदान की। इसके अतिरिक्त, नायब तहसीलदार, सर्कल अधिकारियों और ग्राम राजस्व तंत्र की जमीनी मेहनत ने यह सुनिश्चित किया कि सूचनाओं का संग्रहण त्रुटिहीन और समयबद्ध हो।
क्या है सेल्फ-एन्यूमरेशन?
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ एक ऐसी सुविधा है जिसके माध्यम से परिवार का कोई भी एक जिम्मेदार सदस्य आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर अपने घर और सदस्यों की जानकारी Online भर सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और Data की सटीकता सुनिश्चित करती है।
जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत महाराष्ट्र में स्व-गणना की प्रक्रिया एक मई से शुरू हुई है, जो 15 मई तक चलेगी। इसके बाद, 16 मई से 14 जून तक घरों की सूची तैयार करने और आवास गणना का कार्य किया जाएगा।
कुल मिलाकर, मूठ गांव की यह त्वरित प्रतिक्रिया दर्शाती है कि यदि ग्रामीण स्तर पर जागरूकता हो, तो डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को धरातल पर उतारना कितना सरल हो जाता है।



