
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के मंच पर भारत ने एक बार फिर प्रवासियों के हितों और व्यवस्थित आवाजाही को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हाल ही में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की महानिदेशक Ms. Amy Pope के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
इस संवाद का मुख्य केंद्र प्रवासन के पारंपरिक रास्तों से इतर नए और विविधतापूर्ण विकल्पों को तलाशना था, ताकि वैश्विक स्तर पर कार्यबल की आवाजाही को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।India का दृष्टिकोण केवल प्रवासन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक प्रवासन समझौते (GCM) के क्रियान्वयन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। IOM के साथ इस Partnership का उद्देश्य मानवीय आधार पर प्रवासियों की सहायता करना और विस्थापित समुदायों के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का समावेश करना है।

बदलती कूटनीति के नए आयाम…भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने Canada के साथ भी द्विपक्षीय चर्चा की… Pic Source : X/ Kirti Vardhan Singh
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह प्रवासन प्रशासन में डिजिटल नवाचारों, जैसे ‘ई-माइग्रेट’ पोर्टल के माध्यम से Transparency और Security को प्राथमिकता दे रहा है।इसी क्रम में, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने Canada के साथ भी द्विपक्षीय (Bilateral) चर्चा की। आव्रजन मंत्री लेना मेटलेज दिआब के साथ हुई इस बैठक में कुशल श्रमिकों और भारतीय छात्रों की आवाजाही को लेकर रणनीतिक चर्चा हुई।
यह वार्ता दर्शाती है कि भारत अपने युवाओं और पेशेवरों के लिए विदेशों में बेहतर और कानूनी अवसर सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है।महासभा के तत्वावधान में आयोजित इस चार दिवसीय समीक्षा मंच (IMRF) के दौरान भारत ने अपना राष्ट्रीय वक्तव्य भी प्रस्तुत किया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के साथ मंत्री की सार्थक भेंट और डिजिटल migration गवर्नेंस पर भारत का प्रस्तुतीकरण यह सिद्ध करता है कि नई दिल्ली अब केवल श्रम शक्ति भेजने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक प्रवासन नीतियों को आकार देने वाला एक प्रमुख रणनीतिकार बनकर उभरा है।



