टीबी से जंग में भारत की रणनीति: समय पर जांच और पूरा इलाज जरूरी

भारत में टीबी जांच अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी
भारत में टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जांच और उपचार सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

26.18 लाख मरीज दर्ज, उपचार कवरेज 92% से ज्यादा; नीति आयोग ने स्क्रीनिंग, जांच, इलाज, रोकथाम, पोषण और तकनीक को एक साथ मजबूत करने पर जोर दियादुनिया के अनुमानित टीबी मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 26%; दवा-प्रतिरोधी टीबी में 32% हिस्सा, निजी क्षेत्र से 36% से अधिक मामले रिपोर्ट

एम. रियाज़ हाशमी | नई दिल्ली

भारत में क्षय रोग यानी टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ अगली चुनौती अब केवल ज्यादा से ज्यादा मरीज खोजने की नहीं, बल्कि समय पर जांच, पूरा इलाज, रोकथाम, पोषण और सामाजिक सुरक्षा को एक ही कड़ी में जोड़ने की है। नीति आयोग ने “टीबी मुक्त भारत: आगे की राह” पर हुई बैठक में इसी समग्र रणनीति पर मंथन किया।

बैठक में स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट, प्रिवेंशन, न्यूट्रिशन, सोशल प्रोटेक्शन और टेक्नोलॉजी पर चर्चा हुई। नीति आयोग, स्वास्थ्य मंत्रालय, आईसीएमआर और राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के अधिकारियों व विशेषज्ञों ने इसमें हिस्सा लिया।

2024 में टीबी मामलों और उपचार कवरेज की स्थिति

2024 में भारत में 26.18 लाख टीबी मरीजों का निदान हुआ। उपचार कवरेज 92% से अधिक और सफलता दर 90% तक पहुंची। 2015 से 2024 के बीच नए टीबी मामलों की दर 237 से घटकर 187 प्रति लाख हुई, यानी करीब 21% कमी। इसके बावजूद 2024 में दुनिया के अनुमानित 1.07 करोड़ टीबी मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 26% रही।

सक्रिय केस फाइंडिंग और निजी क्षेत्र की भूमिका

दिसंबर 2024 में शुरू 100-दिवसीय अभियान में सक्रिय केस फाइंडिंग के तहत एक्स-रे और आधुनिक जांच से बिना स्पष्ट लक्षण वाले मरीजों की पहचान पर जोर दिया गया। 2024 में दर्ज मामलों में 36% से अधिक निजी क्षेत्र से आए। निजी क्षेत्र से रिपोर्टिंग 2014 के 1.06 लाख से बढ़कर 2024 में करीब 9.50 लाख हो गई।

दवा-प्रतिरोधी टीबी की चुनौती

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 2024 के अनुमानित दवा-प्रतिरोधी टीबी यानी एमडीआर/ आरआर-टीबी (मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट/ रिफैम्पिसिन रेजिस्टेंट टीबी) के मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 32% थी। देश में 8,540 आणविक जांच प्रयोगशालाएं स्थापित हैं और रिफैम्पिसिन दवा-संवेदनशीलता जांच की कवरेज 92% तक पहुंची है।

टीबी उपचार में पोषण का महत्व

टीबी से लड़ाई में पोषण भी अहम है। निक्षय पोषण योजना के तहत अप्रैल 2018 से अब तक 1.37 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 4,406 करोड़ रुपये से ज्यादा वितरित किए जा चुके हैं।

डेटा के इस्तेमाल से रोकथाम पर जोर

अब अगला फोकस डेटा के इस्तेमाल पर है। निक्षय पोर्टल से यह पहचानना जरूरी होगा कि किस क्षेत्र में मामले बढ़ रहे हैं, कौन मरीज इलाज छोड़ सकता है और किसे अतिरिक्त पोषण या संपर्क जांच की जरूरत है। यानी रणनीति अब ‘मरीज खोजने’ से आगे बढ़कर ‘मरीज बनने से रोकने’ की होगी।