जहां दशकों चला सरकार का काम… अब चलेगा बुलडोजर

जहां दशकों चला सरकार का काम… अब चलेगा बुलडोजर
कृषि भवन और शास्त्री भवन को खाली कराकर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत नए साझा केंद्रीय सचिवालय परिसर बनाए जाएंगे। यह एआई तस्वीर है।

स्नेहलता, तहलका

नई दिल्ली। 24 सितंबर, 2026 । नई दिल्ली के लुटियंस जोन में दशकों से केंद्र सरकार के प्रशासनिक कामकाज का अहम हिस्सा रहे कृषि भवन और शास्त्री भवन अब नए रूप में नजर आएंगे। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी ने दोनों परिसरों में काम कर रहे मंत्रालयों और विभागों को परिसर खाली कर सितंबर 2026 के अंत तक हस्तांतरित करने को कहा है। इसके बाद इन दोनों भवनों को हटाकर यहां सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नए साझा केंद्रीय सचिवालय परिसर विकसित किए जाएंगे।

1950-60 के दशक में बने थे ये सरकारी दफ्तर

कृषि भवन और शास्त्री भवन आजादी के बाद केंद्र सरकार के प्रशासनिक विस्तार के दौर में बनाए गए थे। प्रेस सूचना ब्यूरो के मुताबिक शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन और रेल भवन जैसे केंद्रीय सचिवालय परिसर 1956 से 1968 के बीच बनाए गए थे। इनका उद्देश्य बढ़ते केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के लिए अतिरिक्त कार्यालय उपलब्ध कराना था।

यानी करीब छह दशक से ज्यादा समय तक इन इमारतों में केंद्र सरकार का प्रशासनिक कामकाज चलता रहा।

शास्त्री भवन में कौन-कौन से मंत्रालय रहे?

शास्त्री भवन में अलग-अलग समय पर कई केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कार्यालय रहे हैं। हाल के वर्षों में यहां शिक्षा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय से जुड़े कार्यालय संचालित होते रहे हैं। इनमें से कई कार्यालयों को नए परिसरों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

शास्त्री भवन का नाम देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया था।

कृषि भवन में कौन-कौन से कार्यालय?

कृषि भवन लंबे समय से कृषि क्षेत्र से जुड़े केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों का प्रमुख कार्यालय परिसर रहा है। यहां कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पशुपालन सहित केंद्र सरकार के कई विभागों के कार्यालय रहे हैं।

इन भवनों में समय के साथ अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों की जरूरत के मुताबिक कार्यालयों का आवंटन और स्थानांतरण भी होता रहा है।

आखिर क्यों बदले जा रहे हैं पुराने भवन?

कृषि भवन और शास्त्री भवन में बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत साझा केंद्रीय सचिवालय तैयार किया जा रहा है।

सरकार के मुताबिक वर्तमान में केंद्र सरकार के मंत्रालय दिल्ली में अलग-अलग पुराने कार्यालय परिसरों में फैले हुए हैं। नए सचिवालय में मंत्रालयों को आधुनिक और एकीकृत कार्यालय परिसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे मंत्रालयों के बीच समन्वय और प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने की बात सरकार ने कही है।

सरकार के अनुसार पुराने कार्यालय भवनों में मरम्मत और रखरखाव की जरूरत भी ज्यादा है, जबकि नए परिसरों में आधुनिक तकनीक और ऊर्जा दक्षता वाली सुविधाएं शामिल की जा रही हैं।

सेंट्रल विस्टा में क्या बदलेगा?

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को आधुनिक साझा केंद्रीय सचिवालय परिसरों में स्थानांतरित करने की योजना है।

इसका उद्देश्य अलग-अलग स्थानों पर फैले सरकारी कार्यालयों को एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था में लाना है। परियोजना के तहत कई पुराने सरकारी कार्यालय परिसरों का पुनर्विकास और नए कार्यालय परिसरों का निर्माण किया जा रहा है।

केंद्रीय विस्टा में अकेले ये दो भवन नहीं बदल रहे

कृषि भवन और शास्त्री भवन केंद्रीय विस्टा के व्यापक पुनर्विकास का हिस्सा हैं। इससे पहले निर्माण भवन को हटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उद्योग भवन भी इसी पुनर्गठन का हिस्सा है।

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कई साझा केंद्रीय सचिवालय परिसरों के जरिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों को एकीकृत कार्यालय व्यवस्था देने की योजना है।

पहले से तैयार नए सचिवालय परिसरों में भी कई मंत्रालयों को स्थानांतरित किया जा चुका है। उदाहरण के तौर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अगस्त 2025 में शास्त्री भवन से नए केंद्रीय सचिवालय परिसर में अपना कार्यालय स्थानांतरित किया था।

अब क्या होगा?

फिलहाल सबसे पहले दोनों पुराने परिसरों को पूरी तरह खाली कराया जा रहा है। सीपीडब्ल्यूडी ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों से फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य सामग्री हटाकर परिसर सौंपने को कहा है।

इसके बाद निर्माण एजेंसी को स्थल सौंपा जाएगा और कृषि भवन-शास्त्री भवन की जगह सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए प्रशासनिक परिसरों के निर्माण का रास्ता साफ होगा।

पुरानी इन सरकारी इमारतों की कहानी अब अपने अंतिम पड़ाव पर है—पुराने दफ्तर हटेंगे और उनकी जगह सेंट्रल विस्टा का नया प्रशासनिक ढांचा आकार लेगा।