हरियाणा के 6 आईएएस अधिकारियों समेत सरकारी कर्मचारियों तक पहुंची कथित गबन की रकम; ज्वेलर्स के खातों में सरकारी धन घुमाकर कारोबारी लेन-देन दिखाने का आरोप, सीबीआई पहले ही दाखिल कर चुकी है तीसरी चार्जशीट
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और दूसरे सरकारी खातों से 645 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी- एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-2 ने 29 सितंबर को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
यह कार्रवाई आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) से जुड़े कथित बैंक घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी खातों से निकाली गई रकम को विभिन्न ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और उसे वास्तविक कारोबारी लेन-देन के रूप में पेश किया गया।
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अपराध से अर्जित रकम ज्वेलर्स के जरिए उन आईएएस अधिकारियों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों तक भी पहुंची, जो बैंक घोटाले में कथित तौर पर शामिल थे। सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) इस मामले में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विशेष अदालत में तीसरी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
645 करोड़ रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी, ज्वेलर्स के खातों से रकम घुमाने का आरोप
ईडी ने हरियाणा पुलिस की फरवरी 2026 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित खातों के बैलेंस में गड़बड़ी सामने आने के बाद दर्ज की गई थी।
जांच का दायरा हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से संबंधित कथित 645 करोड़ रुपये की हेराफेरी तक फैला हुआ है।
ईडी के मुताबिक, सरकारी खातों से कथित तौर पर निकाली गई रकम को विभिन्न ज्वेलर्स के बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा गया। इन लेन-देन को कारोबारी भुगतान के रूप में दिखाने का आरोप है, ताकि रकम के वास्तविक स्रोत और उसके लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों की कथित मिलीभगत से इन वित्तीय लेन-देन को इस तरह अंजाम दिया गया कि अपराध से अर्जित रकम वैध कारोबारी धन के रूप में दिखाई दे।
मलिक ज्वेलर्स से केएलजी ज्वेल्स तक, इन प्रतिष्ठानों पर छापे
ईडी की तलाशी में कई ज्वेलर्स और उनसे जुड़ी संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स और उससे जुड़ी संस्थाएं, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स शामिल हैं।
इसके अलावा गौरव कंसल के ठिकानों को भी तलाशी के दायरे में लिया गया। ईडी के अनुसार, गौरव कंसल ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग खातों के जरिए आगे भेजने और उसकी परतें बनाने में बिचौलिए की भूमिका निभाई।
वित्तीय अपराधों की जांच में रकम को कई खातों, कंपनियों या व्यक्तियों के जरिए घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने की प्रक्रिया को लेयरिंग (Layering) कहा जाता है।
ईडी का आरोप है कि ज्वेलर्स के बैंक खातों का इस्तेमाल सरकारी धन की कथित हेराफेरी से प्राप्त रकम को वैध कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाने के लिए किया गया।
हालांकि, एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट में प्रत्येक ज्वेलर के खाते से गुजरी रकम, किसी एक प्रतिष्ठान की कथित हिस्सेदारी या तलाशी में बरामद नकदी और आभूषणों का अलग-अलग मूल्य नहीं बताया गया है।
छह आईएएस अधिकारियों तक पहुंची रकम, सीबीआई की तीसरी चार्जशीट
इस घोटाले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम सरकारी अधिकारियों की कथित भूमिका से जुड़ा है।
ईडी के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के बैंक खातों से कथित तौर पर निकाली गई रकम को ज्वेलर्स के जरिए उन आईएएस अधिकारियों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों तक पहुंचाया गया, जो बैंक घोटाले में आरोपी हैं।
सीबीआई इस मामले में पंचकूला की विशेष अदालत में तीसरी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसमें हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों को नामजद किया गया है।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि ईडी की ताजा कार्रवाई में ज्वेलर्स की भूमिका की जांच उस कथित धन प्रवाह के संदर्भ में की जा रही है, जिसके जरिए सरकारी खातों से निकली रकम अधिकारियों और अन्य लाभार्थियों तक पहुंचने का आरोप है।
पहले चार गिरफ्तारियां, ₹211 करोड़ की संपत्तियां अटैच और फ्रीज
ईडी के मुताबिक, इसी मामले में पहले चार आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग के कथित अपराध में गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच के दौरान एजेंसी ने अब तक लगभग 211 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क, जब्त या फ्रीज किया है।
इसके अलावा ईडी ने 14 आरोपियों के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। यह पीएमएलए के तहत अदालत में दाखिल की जाने वाली शिकायत होती है, जिसके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ती है।
अब 14 नए ठिकानों पर हुई तलाशी में कथित रकम को विभिन्न संस्थाओं और बैंक खातों के जरिए घुमाने, छिपाने तथा वैध धन के रूप में पेश करने से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।
सरकारी खातों से ज्वेलर्स और फिर अधिकारियों तक रकम की जांच
इस मामले में जांच की अगली महत्वपूर्ण कड़ी सरकारी खातों से निकली रकम के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान और प्रत्येक स्तर पर हुए वित्तीय लेन-देन का मिलान करना है।
ईडी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कथित गबन की रकम को ज्वेलर्स के खातों से गुजारकर कारोबारी लेन-देन का रूप दिया गया और फिर कुछ रकम सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों तक पहुंचने का आरोप है।
अब तलाशी में मिले दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किस खाते से कितनी रकम निकली, किन संस्थाओं के जरिए आगे भेजी गई और उसका अंतिम लाभ किसे मिला।
फिलहाल ईडी की रिपोर्ट में 645 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन की हेराफेरी का विवरण दिया गया है, जबकि पहले की कार्रवाई में 211 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग प्रकृति के हैं और इन्हें जोड़कर कुल घोटाले की रकम नहीं माना जा सकता।




