
मंत्री मंडल में फेरबदल में देरी की वजह क्या? मिशन 2029 के लिए भाजपा अपना सकती है प्लान
सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।
भाजपा की नजर मिशन 2029 है। मतलब साफ है कि पार्टी अपने दम पर वह आंकड़ा हासिल करने का लक्ष्य बना चुकी है जिससे 2024 में चूक गई थी। अर्थात अपने दम पर 272 के आंकड़े को पार्टी एक बार फिर 2014 और 2019 की तरह हासिल करना चाहती है। साथ ही एनडीए साथियों को मिला कर ऐसी संख्या का लक्ष्य है जो किसी भी तरह के संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी संख्या से अधिक हो।
मिशन 2029 के लिए भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पार्टी को बड़ा निर्णय लेना होगा। शायद उसी तरह का फैसला जिसके तहत कांग्रेस ने 1963 में कामराज योजना लागू की थी। भाजपा कामराज प्लान के तर्ज पर ही या यूं कहें कि भगवा कामराज प्लान के तर्ज पर बड़ा बदलाव कर सकती है।
क्या था कामराज प्लान
1963 में जब कांग्रेस दो बार चुनाव जीत चुकी थी तो तीसरे कार्यकाल के शुरूआत में ही लोकप्रियता खोने लगी थी। इसकी वजह राज्यों में कांग्रेस की सरकार के प्रति असंतोष बढ़ने लगा था। भ्रष्टाचार के मामले भी सरकार के लिए चिंता की बात बनने लगी थी। केंद्रीय मंत्री भी तेजी से लोकप्रियता खोने लगे थे। इसी वक्त तत्कालीन मद्रास के सीएम के .कामराज ने एक योजना रखी। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों से इस्तीफा लेने का सुझाव नेहरू के सामने रखा। नेहरू मान गए। सुझाव देते वक्त उन्हे कहा गया कि आप चाहे तो जिसका इस्तीफा स्वीकार करना चाहते हैं उनका इस्तीफा स्वीकार कर ले और जिसका नहीं उनका इस्तीफा स्वीकार कर दे। नेहरू ने ऐसा ही किया। कांग्रेस के अधिवेशन में यह प्रस्ताव रखा गया और पास भी हो गया। इसके बाद छह केंद्रीय मंत्रियों जिसमें लाल बहादुर शास्त्री भी थे उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। छह सीएमों का भी इस्तीफा ले लिया गया। इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस तीसरी बार सत्ता के लिए चुनी गई।
सरकार और संगठन के सामने राजनीतिक चुनौती
कांक्रोच आंदोलन के बाद से बनी सियासी स्थिति से सरकार सकते में है। एक ऐसी चुनौती सरकार के सामने है जिससे सियासी रूप से निपटना मुश्किल है। कई राज्य सरकारों के खिलाफ भी लोगों में असंतोष है। ऐसी स्थिति में यदि मोदी,भाजपा में कामराज प्लान लागू करते हैं तो कई कद्दावर केंद्रीय मंत्री और सीएम भूतपूर्व की श्रेणी में आ सकते हैं। हालांकि संगठन के लिए इस कुर्बानी से भाजपा का चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।



