नीरव मोदी PNB घोटाला: यूएई से भारत लाया गया संदीप मिस्त्री, मुंबई की अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा

नीरव मोदी PNB धोखाधड़ी मामले में यूएई से भारत लाए गए संदीप मिस्त्री से जुड़ी खबर का प्रतीकात्मक दृश्य
सीबीआई के मुताबिक, संदीप मिस्त्री को यूएई से भारत लाने के बाद मुंबई की अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा। यह एआई तस्वीर है।

नीरव मोदी बैंक घोटाला: यूएई से रेड कॉर्नर नोटिस वाला संदीप मिस्त्री भारत डिपोर्ट, सीबीआई ने जेल भेजाफर्जी हीरा, सोना और मोती कारोबार के जरिए बैंक धोखाधड़ी का आरोप; इंटरपोल का नोटिस जारी होने के करीब दो महीने में पकड़कर भारत लाया गया

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी कामयाबी मिली है। सीबीआई ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से रेड कॉर्नर नोटिस वाले आरोपी संदीप मिस्त्री को भारत डिपोर्ट करा लिया है। उस पर फर्जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जरिए बैंक धोखाधड़ी करने, विदेशी कंपनियों के नाम पर धन की हेराफेरी और सबूत मिटाने के आरोप हैं। सीबीआई के मुताबिक, संदीप मिस्त्री को मुंबई पहुंचने पर गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

संदीप मिस्त्री पर फर्जी हीरा और सोना कारोबार में क्या आरोप हैं?

सीबीआई के मुताबिक, संदीप मिस्त्री पर फर्जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार लेनदेन के जरिए बैंक धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह विभिन्न संस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता था। इन संस्थाओं के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करने के साथ वह गुप्त संचार माध्यमों के जरिए निर्देश देता था, ताकि जांच एजेंसियों से सबूत छिपाए जा सकें।
संदीप मिस्त्री ने हीरा, सोना और मोती के आभूषणों के कारोबार को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी आयात-निर्यात दस्तावेज तैयार कराने में भूमिका निभाई। इन दस्तावेजों के जरिए ऐसे व्यापारिक लेनदेन को असली दिखाने की कोशिश की गई, जो वास्तव में फर्जी थे।
सीबीआई के अनुसार, उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के नाममात्र के निदेशकों पर दबाव बनाया। आरोप है कि उन्हें गिरफ्तारी की धमकी देकर दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया गया, उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए और ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया, जिनमें उन्हें कंपनियों का वास्तविक मालिक बताया गया था।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि संदीप मिस्त्री ने यूएई में नाममात्र की कंपनियों के बैंक खातों से धन निकालने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। मामले में आरोपपत्र सक्षम अदालत में दाखिल किया जा चुका है।

रेड नोटिस के बाद संदीप मिस्त्री को यूएई से कैसे लाया गया?

सीबीआई ने बताया कि उसके अनुरोध पर जुलाई 2026 में इंटरपोल के माध्यम से संदीप मिस्त्री के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद यूएई के अधिकारियों ने उसकी लोकेशन का पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर भारत प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की।
रेड कॉर्नर नोटिस का उद्देश्य किसी सदस्य देश में वांछित व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने के लिए दूसरे देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से सहयोग मांगना होता है। यह स्वयं अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है। संबंधित देश के कानून के तहत ही गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होती है।
सीबीआई ने इस मामले में विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर यूएई के अधिकारियों से सहयोग लिया। एजेंसी के मुताबिक, जुलाई में नोटिस जारी होने के करीब दो महीने के भीतर आरोपी का पता लगाकर उसे भारत लाया गया।

मुंबई की अदालत ने संदीप मिस्त्री को कब तक न्यायिक हिरासत में भेजा?

सीबीआई के अनुसार, संदीप मिस्त्री 28 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 55 मिनट पर मुंबई पहुंचा। वहां सीबीआई और बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच करने वाली एजेंसी के अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया।
इसके बाद उसे सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सीबीआई ने यह भी बताया कि वह भारत में इंटरपोल के लिए राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के रूप में काम करती है और भारत की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भारतपोल के माध्यम से समन्वय करती है। एजेंसी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल के सहयोग से 175 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।