
2021 में हत्या, उसी साल 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र; 2023 में घोषित अपराधी, गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम, अब सीबीआई ने दक्षिण 24 परगना से पकड़ा
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े हत्या के एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच साल से फरार घोषित अपराधी झरना मिस्त्री को गिरफ्तार किया है। यह मामला केवल चुनाव बाद हुई हिंसा में एक महिला की हत्या का नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय संगठन से जुड़े परिवार पर हमले के आरोपों से भी जुड़ा है। मृतका सोवा रानी मंडल भाजपा के बूथ अध्यक्ष कमल मंडल की मां थीं। फरवरी 2022 में सीबीआई के इनामी विज्ञापन के हवाले से इस राजनीतिक संबंध का उल्लेख किया गया था।
सीबीआई ने 29 सितंबर 2026 को झरना मिस्त्री को दक्षिण 24 परगना जिले के घोषपाड़ा, संतोषपुर से गिरफ्तार किया। वह सह-आरोपी संजय मिस्त्री की पत्नी है। एजेंसी के मुताबिक, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से वह फरार थी और जांच या मुकदमे की प्रक्रिया में शामिल नहीं हुई। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था।
यह था भाजपा बूथ अध्यक्ष की मां की हत्या से जुड़ा मामला
इस मामले का राजनीतिक संदर्भ 2 मई 2021 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शुरू हुई हिंसा से जुड़ता है। उत्तर 24 परगना जिले के जगद्दल इलाके में सोवा रानी मंडल की हत्या हुई थी। उनकी हत्या को लेकर दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि चुनाव बाद की हिंसा के दौरान उनकी जान ली गई।
सोवा रानी मंडल भाजपा के बूथ अध्यक्ष कमल मंडल की मां थीं। इस तथ्य से मामले का राजनीतिक संदर्भ स्पष्ट होता है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि हत्या किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर हुई थी या गिरफ्तार आरोपी किसी दल की सदस्य थी।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने संभाली जांच, उसी साल दाखिल हुआ आरोपपत्र
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के मामलों की जांच को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2021 को आदेश दिया था। इसी के अनुपालन में सीबीआई ने 27 अगस्त 2021 को जगद्दल थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामला अपने हाथ में लिया।
जांच के बाद 29 दिसंबर 2021 को एजेंसी ने कुल 13 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। झरना मिस्त्री भी इसमें नामजद थी। इसके बावजूद वह गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया से बाहर रही।
मामले में उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3 अक्टूबर 2023 को बैरकपुर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दिया। इसके करीब तीन साल बाद अब उसकी गिरफ्तारी हुई है।
चुनाव बाद हिंसा के मामलों में राजनीतिक कनेक्शन की पड़ताल क्यों अहम?
2021 की चुनाव बाद हिंसा को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमलों के आरोप लगाए थे, जबकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने हिंसा के आरोपों और उनकी राजनीतिक व्याख्याओं का विरोध किया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने हत्या और दुष्कर्म के मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था।
इसी व्यापक संदर्भ में सोवा रानी मंडल हत्याकांड की जांच में राजनीतिक संबंधों का सवाल महत्वपूर्ण है। लेकिन इस मामले में सीबीआई केवल गिरफ्तारी, जांच और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी देती है। इसमें किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी, विधायक या स्थानीय नेता को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है।
सीबीआई ने बताया है कि गिरफ्तार झरना मिस्त्री को बैरकपुर की सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है। अब उसकी पूछताछ और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या में उसकी कथित भूमिका क्या थी और क्या मामले में कोई अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल, इस गिरफ्तारी से पांच साल पुराने हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। लेकिन राजनीतिक संरक्षण, फरारी में मदद या किसी दल के संगठित हस्तक्षेप के आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र दस्तावेजी साक्ष्य या जांच एजेंसी का स्पष्ट निष्कर्ष जरूरी होगा।



