
एम. रियाज़ हाशमी | नई दिल्ली
तकनीकः सरकारी डॉक्टर ने 1,600 किमी दूर बैठकर की सर्जरी
पहली बार गुरुग्राम में बैठे सर्जन ने हैदराबाद में रोबोट के जरिए 32 वर्षीय महिला की जटिल यूरोलॉजी सर्जरी की; तकनीकी विलंब लगभग शून्य रहा
गुरुग्राम से हैदराबाद तक हुई रोबोटिक टेली-सर्जरी
मरीज हैदराबाद के अस्पताल में और ऑपरेशन करने वाला सर्जन 1,600 किलोमीटर से ज्यादा दूर गुरुग्राम में। ऑपरेशन थिएटर में लगे रोबोट को इतनी दूर से नियंत्रित कर डॉक्टर ने 32 वर्षीय महिला की जटिल यूरोलॉजी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की है। भारत में किसी सरकारी संस्थान के सर्जन द्वारा की गई यह पहली रोबोटिक यूरोलॉजिकल टेली-सर्जरी बताई गई है।
नई दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के यूरोलॉजी, रोबोटिक्स और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. अनूप कुमार ने गुरुग्राम से यह ऑपरेशन किया, जबकि मरीज हैदराबाद के प्रीति किडनी एंड यूरोलॉजी अस्पताल में थी। दोनों जगहों के बीच ज्यादा दूरी के बावजूद सर्जरी के दौरान तकनीकी विलंब यानी लेटेंसी बेहद कम रहा।
32 वर्षीय महिला की जटिल यूरोलॉजी सर्जरी
मरीज की रोबोटिक मॉडिफाइड लिच-ग्रेगॉयर यूरेटेरिक रीइम्प्लांटेशन सर्जरी की गई। आसान शब्दों में, यूरेटर यानी किडनी से पेशाब को मूत्राशय तक पहुंचाने वाली नली को समस्या दूर करने के लिए दोबारा मूत्राशय से जोड़ा गया।
टेली-सर्जरी में रोबोट कैसे काम करता है?
टेली-सर्जरी में डॉक्टर मरीज के पास मौजूद रहने के बजाय दूर स्थित विशेष कंसोल से रोबोटिक उपकरणों को नियंत्रित करता है। रोबोट मरीज के शरीर के भीतर सर्जन के हाथों की गतिविधियों को बेहद सटीक तरीके से दोहराता है। यही तकनीक भविष्य में ऐसे इलाकों तक विशेषज्ञ सर्जनों की पहुंच बनाने में मददगार हो सकती है, जहां अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं या विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
120 से ज्यादा टेली-सर्जरी हो चुकी हैं
एसएसआई मैन्ट्रा रोबोटिक प्रणाली से जुड़े नियामकीय दस्तावेजों के मुताबिक इसे भारत में टेली-सर्जरी और टेली-प्रॉक्टरिंग के लिए सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) की नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी के मुताबिक दिसंबर 2025 तक इस प्रणाली के जरिए 120 से ज्यादा टेली-सर्जरी की जा चुकी थी। इसलिए मौजूदा उपलब्धि को भारत की पहली टेली-सर्जरी कहना सही नहीं होगा। एसएसआई इनोवेशंस के नियामकीय दस्तावेज के मुताबिक 15 जून 2024 को दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट में करीब 35 किलोमीटर की दूरी से यूरोलॉजी-ऑन्कोलॉजी टेली-सर्जरी की गई थी। 20 अगस्त 2026 की उपलब्धि की खासियत यह है कि सरकारी संस्थान के सर्जन द्वारा की गई पहली सर्जरी है। डॉ. अनूप कुमार ने भी इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को भौगोलिक सीमाओं से बाहर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सरकार ने उपलब्धि को बताया स्वास्थ्य सेवा में नया अध्याय
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे भारतीय स्वास्थ्य सेवा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा, “भारत ने अपनी पहली रोबोटिक यूरोलॉजिकल टेली-सर्जरी के साथ चिकित्सा नवाचार में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विशेषज्ञ सर्जिकल सेवाओं को भौगोलिक सीमाओं से आगे पहुंचाने की क्षमता तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की नई संभावनाएं खोलती है।”
वैसे, इस तकनीक का असली महत्व भी यहीं है- क्या भविष्य में दूरदराज के किसी अस्पताल में भर्ती मरीज का जटिल ऑपरेशन सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर बैठा विशेषज्ञ कर सकेगा? यह सफल सर्जरी उस संभावना को एक कदम और करीब लाती है।

