मिर्जापुर: ‘मैडम, कुछ दिन और रहतीं तो भाग्य बदल जाता…’ – दिव्या मित्तल की पोस्ट के बाद जागी प्रशासनिक नींद, लहुरियादह में शुरू हुआ स्कूल निर्माण

मीरजापुर के लहुरियादह गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए जमीन की पैमाइश
लहुरियादह में उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए निर्धारित स्थल की पैमाइश और चिन्हांकन किया गया।

संतोष देव गिरि ,मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस और मिर्ज़ापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा सोशल मीडिया पर प्रशासनिक सुस्ती को आईना दिखाने के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। उनके एक तीखे और झकझोर देने वाले पोस्ट के बाद मिर्ज़ापुर के सुदूर पहाड़ी क्षेत्र लहुरियादह गांव में बहुप्रतीक्षित उच्च प्राथमिक विद्यालय के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन ने जमीन की पैमाइश शुरू कर दी है, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

लहुरियादह में स्कूल न बनने पर दिव्या मित्तल ने क्या सवाल उठाया?

राजनीति में पदार्पण के क्रम में मिर्जापुर के अपने कार्यकाल को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने यूपी सरकार और व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“राजनीति का अगर इरादा होता, तो पहाड़ भी रास्ता दे देता… एक औरत मेरी तरफ आई। मुझे लगा उसे शायद पेंशन या पक्का मकान चाहिए होगा। लेकिन उसने आकर कहा— ‘मैडम, हमारे गांव में स्कूल केवल पांचवीं तक है, उसके बाद जंगल और पहाड़ के बीच बच्चों की पढ़ाई का अंत हो जाता है। मुझे अपने गांव में स्कूल चाहिए।’ उस समय उसके घर में पानी तक नहीं था, लेकिन उसने पानी से पहले स्कूल मांगा।”
दिव्या मित्तल ने आगे बताया कि उन्होंने नियम देखकर स्कूल स्वीकृत कर दिया था। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि पैसे, नियम और स्वीकृति सब थे, कमी थी तो बस ‘इरादा’ होने की।

लहुरियादह स्कूल के लिए प्रशासन ने अब तक क्या काम किया है?

इस खुलासे के बाद मिर्ज़ापुर प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए लहुरियादह गांव में डेरा डाल दिया।

  • स्थल निरीक्षण: बुधवार दोपहर करीब बारह बजे बीईओ हलिया प्रकाश चंद्र यादव और ग्राम प्रशासक कौशलेंद्र कुमार गुप्ता टीम के साथ चयनित स्थल पर पहुंचे।
  • मापी और चिन्हांकन: प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक गंगा शंकर ओझा की देखरेख में विद्यालय के लिए आवंटित भूमि की पैमाइश और चिन्हांकन का काम पूरा कराया गया।

स्कूल को कब मंजूरी मिली और कितनी राशि जारी हुई?

  • स्वीकृति और बजट: वर्ष 2023 में निरीक्षण के दौरान ग्रामीण देवकली द्वारा की गई मांग पर दिव्या मित्तल के प्रयासों से वर्ष 2024 में यह स्कूल स्वीकृत हुआ था। अगस्त 2025 में शासन से 25 लाख रुपये की धनराशि भी जारी हो चुकी थी, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण काम अटका हुआ था।
  • किसे मिलेगा लाभ: अब इस विद्यालय के बन जाने से गांव के बच्चों को आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा। गरीब और श्रमिक वर्ग के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा मिल सकेगी।
  • भविष्य की जरूरत: जिस जगह भूमि का आवंटन किया गया है, वहां एक नाला है जिसमें बारिश का पानी बहता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण के दौरान पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए। ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

स्कूल की जमीन चिन्हित होने पर ग्रामीणों ने क्या कहा?

लहुरियादह गांव में स्कूल का निर्माण शुरू होने पर देवकली, कृष्णा वर्मा, गीता देवी, हीरा यादव, और लालबहादुर यादव समेत सभी ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त किया है। गांव की महिलाओं ने नम आंखों और कृतज्ञता के साथ एक स्वर में कहा
“दिव्या जी अगर कुछ दिन और मिर्ज़ापुर में रह गईं होतीं, तो हमारे इस पूरे गांव का भाग्य ही बदल जाता।”